पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • Noida Authority to return land to irrigation department

    NOIDA: Noida Authority will return over 454 acres of land, which was transferred to it for development purposes during Mayawati's regime, back to the state.

    The Authority's board has given approval to hand over the 454.63 acre land of UP irrigation lying in NCR area back to the department.

    The Authority had planned a township and paid Rs 95.03 crore for the land

    TOI
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  • नोएडा एक्सटेंशन प्लानिंग कमेटी को भेजा जवाब

    ग्रेटर नोएडा (ब्यूरो)।
    प्राधिकरण ने बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी एनसीआर प्लानिंग कमेटी को भेज दी है। जो शर्तें कमेटी ने लगाई थीं, उनको पूरा करने के साथ-साथ अन्य शहरों से कनेक्टिविटी की जानकारी भी भेजी गई। उसकी समीक्षा को लेकर कमेटी के सदस्यों की बैठक भी हुई।

    नौ जुलाई को प्राधिकरण की बोर्ड बैठक थी। बोर्ड ने नोएडा एक्सटेंशन के लिए मेट्रो प्रोजेक्ट मंजूर कर दिया था। उसकी जानकारी प्राधिकरण ने प्लानिंग कमेटी को भेज दी।

    उसमें यह भी बताया गया है कि कनेक्टिविटी के लिए गाजियाबाद से खुर्जा तक एनएच-91 भी छह लेन का किया जा रहा है जिसका लिंक नोएडा एक्सटेंशन से भी होगा। नोएडा एक्सेटेंशन से सीधे जेवर तक परिवहन निगम की बसें भी चलाई जा रही हैं। इसके अलावा 16 फीसदी हरियाली की जगह 23 फीसदी क्षेत्र छोड़ा गया है।

    Amar Ujala
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  • मास्टर प्‍लान पर आसमान से पहरा
    नोएडा के लिए लिया गया है अहम फैसला

    नई दिल्ली। बिल्डरों और प्राधिकरण की साठगांठ के मद्देनजर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड अब नोएडा मास्टर प्लान के क्रियान्वयन पर नजर रखने के लिए आसमान में पहरा बैठाने का इंतजाम करने जा रहा है।
    सैटेलाइट सिस्टम के जरिए बोर्ड को बैठे-बैठे ही यह पता चल जाएगा कि स्वीकृत मास्टर प्लान के तहत ही काम हो रहा है या नहीं।

    बोर्ड का मानना है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सरकारी तंत्र और बिल्डर लगभग सभी मास्टर प्लान की धज्जियां उड़ाकर मनमानी करते रहे हैं।

    इसलिए पहली बार हैदराबाद स्थित सरकारी कंपनी नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) को सैटेलाइट के जरिये मास्टर प्लान के क्रियान्वयन पर नजर रखने का काम सौंपा जा रहा है। इसके लिए बोर्ड और कंपनी के बीच करार हो चुका है। बोर्ड की कोशिश है कि जिस तरह मास्टर प्लान को स्वीकृति दी गई है उसी के आधार पर निर्माण कार्य हाें। शहरीकरण के लिए प्रस्तावित क्षेत्र का 16 प्रतिशत हिस्सा पब्लिक पार्क के लिए अनिवार्य है।

    औद्योगिक क्षेत्र, जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज, बिजली और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट तथा 20-25 प्रतिशत क्षेत्र गरीबों के मकान के लिए जगह छोड़ने का प्रावधान है। मास्टर प्लान के मुताबिक पूरे क्षेत्र का एक नक्शा तैयार किया गया है। नक्शे के अनुसार क्षेत्र की निगरानी के लिए सैटेलाइट सिस्टम लगाया जाएगा। सैटेलाइट से नजर रखने के लिए किया गया अनुबंध जारी होने की तिथि से 16 माह के लिए वैध है। सूत्रों का कहना है कि 15 दिन में बोर्ड मास्टर प्लान को स्वीकृति दे देगा। स्वीकृति के बाद सैटेलाइट सिस्टम कार्य शुरू कर देगा और इसके जरिए पूरे क्षेत्र का ब्योरा प्राप्त हो जाएगा।

    Amar Ujala
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  • Originally Posted by purple
    builders now would ask for installments after installments , and take money of new investors and then they will stall projects as they will run out of money in case if they will not able to dispose of such huge inventory , which at these rates looks possible that they wont be able to sell there inventories and would run out of money .. this is reason they are using old tactics like proposing metro routes to fool buyers !!


    O purple bhai...tu kya rohit_warren ka bhai hai...sir ek bahut hai ...for the forum...
    And pls stop saving ppl....samjhe parmatma jee


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  • नोएडा लगातार विकास की राह पर आगे बढ़
    लगातार विकास की राह पर आगे बढ़ रहे नोएडा में आने वाले दिनों में और तेजी से डिवेलपमेंट होगा। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे और नोएडा एक्सटेंशन रूट सबसे ज्यादा आकर्षण के केंद्र होंगे। इन दोनों रूटों पर बड़े-बड़े बिजनेस हब बनाने की तैयारी है। कुछ सालों के बाद ये दोनों रूट नोएडा की शान में चार चांद लगाएंगे।
    नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे पर तेजी से विकास होना शुरू हो गया है। यहां इस समय कई बड़े पब्लिक स्कूल चल रहे हैं। कई हाई प्रोफाइल रेजिडेंशल सेक्टर भी यहां बने हुए हैं। बड़े-बड़े कॉरपोरेट हाउस की बिल्डिंग्स तैयार हो रही हैं। इस वजह से ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले कुछ सालों में यह रूट बिजनेस हब के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाएगा। यहां रियल एस्टेट और कॉरपोरेट हाउसेज की भरमार होने का अंदाजा लगाया जा रहा है।

    इसके अलावा नोएडा का दूसरा आकर्षक रूट सेक्टर-37 चौराहे से नोएडा एक्सटेंशन तक का होगा। नोएडा सिटी तक यह एरिया वेल डिवेलप्ड है। सेक्टर-71 चौराहे तक इस रूट पर रेजिडेंशल एरिया की भरमार है। करीब 5 किलोमीटर के इस रूट पर रेजिडेंशल एरिया के अलावा बिजनेस हब बनाने के लिए कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। हाल ही में नोएडा एक्सटेंशन तक मेट्रो रेल बनने के मामले को भी सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है, तो जाहिर है कि मेट्रो बनने के बाद इस रूट पर बहुत तेजी से डिवेलपमेंट होना शुरू हो जाएगा।


    -nbt
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  • Originally Posted by Amadeus
    O purple bhai...tu kya rohit_warren ka bhai hai...sir ek bahut hai ...for the forum...
    And pls stop saving ppl....samjhe parmatma jee


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    Amadeus

    I guess you should mind you language - read my posts and everything happened as I said be it whatever asset class

    Gold
    Equity
    Real estate

    I think mods would like to teach you a lesson for dragging my name from no where and abusing me.

    rohit

    bytheway your post is reported ;)
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  • Originally Posted by purple
    give me 5 reasons how these 5 lakh homes supply would get absorbed ? Plus supply of expressway , CR , Gn extra !


    5 lakh? I though it was 2.5 lakh and that too should be reduced as some farmer land would be returned back.

    Anyone can put some light on total units expected to come up in NE.
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  • Land Acquisition Bill Encourages Squatters

    Bill envisages rehabilitation & resettlement of squatters if land they occupy is acquired; Infra ministries irked at this inclusion


    If the Cabinet approves the Land Acquisition and Rehabilitation and Resettlement Bill, 2012, then squatters too will have to be given rehabilitation and resettlement packages if the land they occupy is acquired. Squatters will need to show that they have been working/living in the affected area for three years to be eligible for compensation.


    Infrastructure ministries are irked at this inclusion, especially the short eligibility period of three years. They claim that such a move would encourage encroachers and drive up project costs. The draft bill is currently being circulated for inter-ministerial consultation,


    ‘Affected persons’ include families that do not own land but may be working in the affected area for three years prior to the acquisition, which would affect their primary source of livelihood. This sub-clause would extend the benefit of compensation to squatters or people who have been living on the land, which is to be acquired, and that removal from that area would affect their livelihood. With this the proposed legislation seeks to treat squatters on par with agricultural labourers, tenants, sharecroppers or artisans.


    The definition of the ‘affected persons’ has been kept broadbased to be able to ensure compensation to marginal sections, especially in urban and semi-urban areas. “Land is acquired and people who have been living there and working as rickshaw pullers or domestic help in the nearby areas find themselves doubly dispossessed — of their homes and their incomes,” said a source.


    Infrastructure ministries are not too happy with this. These ministries are already dealing with requests from state governments for a resettlement and rehabilitation component in compensation package. While the idea is to compensate for loss of livelihood, those dealing with infrastructure projects argue that a mere three-year requirement will only serve to drive up costs. Explaining the rationale behind the objection, a senior minister said, “this could hit our infrastructure projects adversely. The cut-off date is too low. The logic of loss of livelihood comes in if the person has been on that land for decades. Three years does not seem very plausible. This way we are almost giving the people an incentive to encroach.”


    Those favouring the idea argue that increasing the eligibility period will undermine aim of bringing squatters within the compensation umbrella.


    They argue in urban areas it is migrant labour that would be found living in these squatter tenements, and increasing the eligibility beyond three years would keep a majority of them outside the pale of any compensation, while the loss of home and income would hit them hardest. But the irony of ‘migrant settlers’ earning compensation seems to be lost on them. National Advisory Council member NC Saxena, who had been involved with the consultation and drafting of the legislation, says: “There is a need to understand the human angle. There is deep inequality and inequity in our system. In our urban centres, it is the rich that own most of the land, driving up prices of land. So where is a rickshaw puller or domestic help supposed to live till they have enough for proper living arrangements? Once the land is acquired, they will lose their homes and their livelihood and that needs to be addressed.”


    The move to include squatters comes as an additional problem for infrastructure ministries, even for those projects that would come under the land bill’s exemption list. States are already demanding a resettlement and rehabilitation component in compensation package, as they expect that those affected would demand the benefits promised in the proposed LARR legislation.


    KERALA GOVT LIKELY TO FUND SQUATTERS


    As per an official, the road transport and highways ministry had received such a rehabilitation request from the Kerala government. The previous LDF government, which had first put curbs on public-private-partnership projects in the road sector and then forced NHAI to reduce the standard highway width for four-lane roads in the state, had barred land acquisition a year before the state went for polls. The ministry had expected things to move after the Congress-led UDF government took over the reins of power. Though land acquisition is looking slightly better, the state government wants the Centre to compensate even those squatting. The official said the ministry has refused to comply with the suggestion, saying land for highways is acquired under the National Highways Act, which does not allow any rehabilitation measures. NHAI goes by the award decision taken by the state government’s land revenue officers. This would mean the Kerala government may fund the resettlement of squatters.


    Squat, Squat!


    • SQUATTERS MUST show that they have been working/ living in the area for 3 yrs to be eligible for compensation


    • SUCH A move would encourage encroachers & drive up project costs: Infra ministries


    • DEFINITION OF ‘affected persons’ kept broad-based to be able to ensure compensation to marginal sections


    • “IN OUR urban centres, it is the rich that own most of the land. So, where is a rickshaw puller or domestic help supposed to live...? Once the land is acquired, they will lose their homes...that needs to be addressed,” says Saxena.

    ET
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  • NEFOMA Attack on NEFOWA

    Dear Buyers,

    अब तक नेफ़ोमा और हमारी टीम पर जिस तरह से छोड़ कर गये लोग लगातार अपने ग्रुप पर पोस्ट कर रहे है और हमारी चुप्पी को हमारी कमजोरी समझा जा रहा है । लेकिन अभी तक सिर्फ़ हम बायर्स की वजह से चुप थे लेकिन उन लोगो कि लगातार हमारे खिलाफ़ बयानवाजी के चलते अब हम चुप नही बैठ सकते । हमारे कुछ सबाल है उन लोगो के लिये उम्मीद है बायर्स भी इस और ध्यान देंगे और अपने विवेक का इस्तेमाल कर फ़ैसला लेगें कि आखिर... क्या सही है और क्या गलत : -

    1. अभिषेक और इन्द्रिश गुप्ता को क्यो लगातार बिल्डर्स के प्री-लांच प्रोजेक्ट्स की पार्टी में बुलाया जाता है ? आखिर उनके बिल्डर्स से क्या रिस्ते है ?

    2. एक commercial project जो कि नोएडा सिटी सेंटर मैट्रो स्टेशन के पास है उसके लांच होने की पार्टी पर इन दोनो को आखिर क्यो रेडिशन होटल में एक रशियन prostitute प्रोवाईड की गई ?
    उसका सबूत है हमारे पास अभिषेक की चाट डिटेल्स जिसमें उसने खुल कर सब बाते बताई ।


    3. सेक्टर 18 में एक ब्रोकर के इन्द्रिश गुप्ता के क्या रिस्ते है ?

    4. अभिषेक कुमार द्वारा क्यो नेफ़ोमा के विरोध के बावजूद एक पोलिटिकल लीडर से मिला गया ?

    5. जब लास्ट मीटींग में अभिषेक को समझाया गया कि आप पोलिटिशियन से दूर रहो तो उन्होने कहाँ कि उनको MP/MLA बनना है । क्या नेफ़ोमा के कंधे पर बन्दूक रख कर यह करने दिया जाता ?

    6. हम पर उनके आरोप है कि हम मिडिया के लिये काम करते है । तो हम पूँछते है कि आखिर अभी तक मिडिया में किसका नाम ज्यादा आ रहा था ?

    आखिर अभिषेक अपने नाम को इतना प्रमोट क्यो कर रहे थे ?

    7. अभी तक सबसे ज्यादा परेशानी सुपरटेक के बायर्स को झेलनी पड़ रही है , कुछ बायर्स को तो केंशलेशन लेटर तक मिल गये है । लेकिन जब इसी को लेकर एक मीटिंग बुलाई गई तो अभिषेक का कहना था कि वो सुपरटेक के अगेंस्ट नही जा सकता क्योकि उनके साथ उसके रिस्ते है । क्या नेफ़ोमा इन बातो को स्वीकार कर सकता था ?

    8. जिन बायर्स को केंशलेशन लेटर मिले उन बायर्स को अभिषेक द्वारा बहकाया जाता रहा कि अगर वो बिल्डर्स को ब्याज के साथ साथ पेनलटी दे तो उनका केंशलेशन रद्द कराया जा सकता है । उस के लिये सुपरटेक बायर्स को 6-7 महिने से लटकाया जाता रहा । क्या पेनल्टी के नाम पर अभिषेक खुद कमिशन कमाना चहा रहे थे ? आखिर किस बात की पेनल्टी ? क्या बिल्डर्स डिफ़ाल्टर नही है ?

    इसका सबूत है हमारे पास बायर्स के ई-मेल्स ।

    हम बायर्स से पूछना चाहते है कि क्या इन सब बातो के लिये इन लोगो को रोकना हिटलरशिप है ? नेफ़ोमा ने अब तक सिर्फ़ इस लिये कोई एक्शन नही लिया था कि हम नेफ़ोमा टीम को तोड़ना नही चाहते थे । लेकिन जब पानी सर से ऊपर बहने लगा तो हमारे पास कोई चारा नही था । बाकि फ़ैसला आपके ऊपर है ।
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  • NEFOMA wale ab pagal ho gye hai..

    They are crossing their limit (इन दोनो को आखिर क्यो रेडिशन होटल में एक रशियन prostitute प्रोवाईड की गई).

    What the hell is going on?

    Frito bhai kuch karo. Noida Extension ke buyers ko bachao in logo se.


    Originally Posted by fritolay_ps
    NEFOMA Attack on NEFOWA

    Dear Buyers,

    अब तक नेफ़ोमा और हमारी टीम पर जिस तरह से छोड़ कर गये लोग लगातार अपने ग्रुप पर पोस्ट कर रहे है और हमारी चुप्पी को हमारी कमजोरी समझा जा रहा है । लेकिन अभी तक सिर्फ़ हम बायर्स की वजह से चुप थे लेकिन उन लोगो कि लगातार हमारे खिलाफ़ बयानवाजी के चलते अब हम चुप नही बैठ सकते । हमारे कुछ सबाल है उन लोगो के लिये उम्मीद है बायर्स भी इस और ध्यान देंगे और अपने विवेक का इस्तेमाल कर फ़ैसला लेगें कि आखिर... क्या सही है और क्या गलत : -

    1. अभिषेक और इन्द्रिश गुप्ता को क्यो लगातार बिल्डर्स के प्री-लांच प्रोजेक्ट्स की पार्टी में बुलाया जाता है ? आखिर उनके बिल्डर्स से क्या रिस्ते है ?

    2. एक commercial project जो कि नोएडा सिटी सेंटर मैट्रो स्टेशन के पास है उसके लांच होने की पार्टी पर इन दोनो को आखिर क्यो रेडिशन होटल में एक रशियन prostitute प्रोवाईड की गई ?
    उसका सबूत है हमारे पास अभिषेक की चाट डिटेल्स जिसमें उसने खुल कर सब बाते बताई ।


    3. सेक्टर 18 में एक ब्रोकर के इन्द्रिश गुप्ता के क्या रिस्ते है ?

    4. अभिषेक कुमार द्वारा क्यो नेफ़ोमा के विरोध के बावजूद एक पोलिटिकल लीडर से मिला गया ?

    5. जब लास्ट मीटींग में अभिषेक को समझाया गया कि आप पोलिटिशियन से दूर रहो तो उन्होने कहाँ कि उनको MP/MLA बनना है । क्या नेफ़ोमा के कंधे पर बन्दूक रख कर यह करने दिया जाता ?

    6. हम पर उनके आरोप है कि हम मिडिया के लिये काम करते है । तो हम पूँछते है कि आखिर अभी तक मिडिया में किसका नाम ज्यादा आ रहा था ?

    आखिर अभिषेक अपने नाम को इतना प्रमोट क्यो कर रहे थे ?

    7. अभी तक सबसे ज्यादा परेशानी सुपरटेक के बायर्स को झेलनी पड़ रही है , कुछ बायर्स को तो केंशलेशन लेटर तक मिल गये है । लेकिन जब इसी को लेकर एक मीटिंग बुलाई गई तो अभिषेक का कहना था कि वो सुपरटेक के अगेंस्ट नही जा सकता क्योकि उनके साथ उसके रिस्ते है । क्या नेफ़ोमा इन बातो को स्वीकार कर सकता था ?

    8. जिन बायर्स को केंशलेशन लेटर मिले उन बायर्स को अभिषेक द्वारा बहकाया जाता रहा कि अगर वो बिल्डर्स को ब्याज के साथ साथ पेनलटी दे तो उनका केंशलेशन रद्द कराया जा सकता है । उस के लिये सुपरटेक बायर्स को 6-7 महिने से लटकाया जाता रहा । क्या पेनल्टी के नाम पर अभिषेक खुद कमिशन कमाना चहा रहे थे ? आखिर किस बात की पेनल्टी ? क्या बिल्डर्स डिफ़ाल्टर नही है ?

    इसका सबूत है हमारे पास बायर्स के ई-मेल्स ।

    हम बायर्स से पूछना चाहते है कि क्या इन सब बातो के लिये इन लोगो को रोकना हिटलरशिप है ? नेफ़ोमा ने अब तक सिर्फ़ इस लिये कोई एक्शन नही लिया था कि हम नेफ़ोमा टीम को तोड़ना नही चाहते थे । लेकिन जब पानी सर से ऊपर बहने लगा तो हमारे पास कोई चारा नही था । बाकि फ़ैसला आपके ऊपर है ।
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  • एक commercial project जो कि नोएडा सिटी सेंटर मैट्रो स्टेशन के पास है उसके लांच होने की पार्टी पर इन दोनो को आखिर क्यो रेडिशन होटल में एक रशियन prostitute प्रोवाईड की गई ? \




    wow wow wow wow !!!!!!!
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  • filmy style main allegations lagaa rahe hai.. .

    Originally Posted by rohit_warren
    एक commercial project जो कि नोएडा सिटी सेंटर मैट्रो स्टेशन के पास है उसके लांच होने की पार्टी पर इन दोनो को आखिर क्यो रेडिशन होटल में एक रशियन prostitute प्रोवाईड की गई ? \




    wow wow wow wow !!!!!!!
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  • :bab (45):
    Originally Posted by fritolay_ps
    NEFOMA Attack on NEFOWA

    Dear Buyers,

    अब तक नेफ़ोमा और हमारी टीम पर जिस तरह से छोड़ कर गये लोग लगातार अपने ग्रुप पर पोस्ट कर रहे है और हमारी चुप्पी को हमारी कमजोरी समझा जा रहा है । लेकिन अभी तक सिर्फ़ हम बायर्स की वजह से चुप थे लेकिन उन लोगो कि लगातार हमारे खिलाफ़ बयानवाजी के चलते अब हम चुप नही बैठ सकते । हमारे कुछ सबाल है उन लोगो के लिये उम्मीद है बायर्स भी इस और ध्यान देंगे और अपने विवेक का इस्तेमाल कर फ़ैसला लेगें कि आखिर... क्या सही है और क्या गलत : -

    1. अभिषेक और इन्द्रिश गुप्ता को क्यो लगातार बिल्डर्स के प्री-लांच प्रोजेक्ट्स की पार्टी में बुलाया जाता है ? आखिर उनके बिल्डर्स से क्या रिस्ते है ?

    2. एक commercial project जो कि नोएडा सिटी सेंटर मैट्रो स्टेशन के पास है उसके लांच होने की पार्टी पर इन दोनो को आखिर क्यो रेडिशन होटल में एक रशियन prostitute प्रोवाईड की गई ?
    उसका सबूत है हमारे पास अभिषेक की चाट डिटेल्स जिसमें उसने खुल कर सब बाते बताई ।


    3. सेक्टर 18 में एक ब्रोकर के इन्द्रिश गुप्ता के क्या रिस्ते है ?

    4. अभिषेक कुमार द्वारा क्यो नेफ़ोमा के विरोध के बावजूद एक पोलिटिकल लीडर से मिला गया ?

    5. जब लास्ट मीटींग में अभिषेक को समझाया गया कि आप पोलिटिशियन से दूर रहो तो उन्होने कहाँ कि उनको MP/MLA बनना है । क्या नेफ़ोमा के कंधे पर बन्दूक रख कर यह करने दिया जाता ?

    6. हम पर उनके आरोप है कि हम मिडिया के लिये काम करते है । तो हम पूँछते है कि आखिर अभी तक मिडिया में किसका नाम ज्यादा आ रहा था ?

    आखिर अभिषेक अपने नाम को इतना प्रमोट क्यो कर रहे थे ?

    7. अभी तक सबसे ज्यादा परेशानी सुपरटेक के बायर्स को झेलनी पड़ रही है , कुछ बायर्स को तो केंशलेशन लेटर तक मिल गये है । लेकिन जब इसी को लेकर एक मीटिंग बुलाई गई तो अभिषेक का कहना था कि वो सुपरटेक के अगेंस्ट नही जा सकता क्योकि उनके साथ उसके रिस्ते है । क्या नेफ़ोमा इन बातो को स्वीकार कर सकता था ?

    8. जिन बायर्स को केंशलेशन लेटर मिले उन बायर्स को अभिषेक द्वारा बहकाया जाता रहा कि अगर वो बिल्डर्स को ब्याज के साथ साथ पेनलटी दे तो उनका केंशलेशन रद्द कराया जा सकता है । उस के लिये सुपरटेक बायर्स को 6-7 महिने से लटकाया जाता रहा । क्या पेनल्टी के नाम पर अभिषेक खुद कमिशन कमाना चहा रहे थे ? आखिर किस बात की पेनल्टी ? क्या बिल्डर्स डिफ़ाल्टर नही है ?

    इसका सबूत है हमारे पास बायर्स के ई-मेल्स ।

    हम बायर्स से पूछना चाहते है कि क्या इन सब बातो के लिये इन लोगो को रोकना हिटलरशिप है ? नेफ़ोमा ने अब तक सिर्फ़ इस लिये कोई एक्शन नही लिया था कि हम नेफ़ोमा टीम को तोड़ना नही चाहते थे । लेकिन जब पानी सर से ऊपर बहने लगा तो हमारे पास कोई चारा नही था । बाकि फ़ैसला आपके ऊपर है ।



    DRAMA BEGAN.. BOTH ARE NOT WORKING ON BUYERS INTEREST
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  • Now they have EXTRA party to fight... each other..this is bad for buyers interest... farmers may be enjoing this time...including builders... both parties should invest time in NE/Buyers/Builders/Authority...but now -ve energy will further go on.... you never know in future.. one org in protesting against other org in Jantar Mantar :(
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  • NEFOMA V/s NEFOMA

    Purpule V/S Other

    Ab yahi reh gaya hai-- Latest update Noida ext me
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