पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • बिल्डरों पर पड़ेगा 2250 रुपये प्रति वर्ग मीटर का भार

    ग्रेटर नोएडा नोएडा एक्सटेंशन के पतवाड़ी गांव में प्राधिकरण द्वारा किसानों को दिए गए 550 रुपये के अतिरिक्त मुआवजे की मार आवंटी व बिल्डरों पर पड़ने जा रही है। प्राधिकरण ने बिल्डरों से 2250 रुपये प्रति वर्ग मीटर की धनराशि और वसूलने का फैसला किया है। प्राधिकरण के सेक्टर दो व तीन के आवंटियों पर भी 500 रुपये प्रति वर्ग मीटर के बढ़ाए जा सकते हैं। एक-दो दिन में प्राधिकरण आवंटियों को नोटिस देकर अतिरिक्त धनराशि वसूलने का निर्देश दे सकता है। हाईकोर्ट द्वारा पतवाड़ी गांव में जमीन अधिग्रहण रद किए जाने से एक दर्जन बिल्डर परियोजना व तीन हजार प्राधिकरण आवंटियों पर तलवार लटक गई थी।

    प्राधिकरण ने किसानों से समझौता कर उन्हें 550 रुपये प्रति वर्ग मीटर का अतिरिक्त मुआवजा देने का फैसला किया। इससे प्राधिकरण पर करीब 324 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा। पहले से ही 35 सौ करोड़ रुपये के कर्ज में डूबे प्राधिकरण ने मुआवजे के रूप में किसानों को दी गई धनराशि को बिल्डर व आवंटियों से वसूलने का निर्णय किया है। सूत्रों का कहना है कि बिल्डरों से 2250 रूपये, संस्थागत व आईटी के आवंटियों से 600 रुपये व सेक्टर दो व तीन के भूखंड आवंटियों से 500 रुपये प्रति वर्ग मीटर का अतिरिक्त पैसा वसूलने का निर्णय किया है। सेक्टर दो व तीन के आवंटियों को 10500 रुपये व बिल्डरों को 10200 रुपये से 11 हजार रुपये तक भूखंड आवंटित किए गए थे। बढ़ी दर सिर्फ पतवाड़ी गांव की जमीन पर आवंटित किए गए भूखंड मालिकों से वसूली जाएगी। उधर बिल्डर पहले ही कह चुके हैं कि वे प्राधिकरण को अतिरिक्त धनराशि देने के बाद सिर्फ नए निवेशकों को अधिक कीमत पर फ्लैट बेचेंगे। पुराने निवेशकों से अतिरिक्त पैसा नहीं लिया जाएगा। संसद में बिल पास होने तक रुकी समझौता प्रक्रिया केंद्र सरकार द्वारा लाए गए संशोधित जमीन अधिग्रहण कानून के संसद में पारित होने तक नोएडा एक्सटेंशन के किसानों ने समझौते रोक दिए हैं। किसानों का कहना है कि संसद में नया कानून पारित होने तक वे प्राधिकरण के साथ वार्ता नहीं करेंगे। संशोधित बिल बुधवार को संसद में पेश होने की संभावना है। कैबिनेट के पारित संशोधित कानून में बहुफसली भूमि के सिर्फ कुछ प्रतिशत हिस्से को ही अधिग्रहीत करने की बात है। किसानों को चार गुणा मुआवजा देने की बात पर ग्रामीण पंचायत मोर्चा के संयोजक प्रधान रणवीर सिंह का कहना है कि ग्रेटर नोएडा के गांवों में सर्किल रेट दस-दस लाख रुपये प्रति बीघा है। संसद ने बिल पारित कर दिया तो किसानों को चालीस लाख रुपये प्रति बीघा का मुआवजा मिलना तय हो जाएगा।

    -Dainik jagran
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  • ऐमनाबाद के किसानों के साथ समझौते के लिए बैठक


    नोएडा एक्सटेंशन में पतवाड़ी के बाद प्राधिकरण ने अन्य गांवों के साथ सुलह की कोशिश और तेज कर दी है। मंगलवार को ऐमनाबाद गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण अधिकारियों ने गांव में बैठक की। बताया जाता है कि बैठक में समझौते को लेकर सहमति बन गई, लेकिन किसान अतिरिक्त जमीन के बजाय पतवाड़ी की तरह मुआवजा राशि चाहते हैं। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो हाईकोर्ट में 12 सितंबर को सुनवाई होने से पहले ऐमनाबाद गांव के किसान भी प्राधिकरण के साथ सुलह कर सकते हैं।
    प्राधिकरण ने पतवाड़ी गांव के किसानों को 550 रुपये प्रति वर्ग मीटर का अतिरिक्त मुआवजा देकर समझौता किया है। हैबतपुर व इटेड़ा गांव के किसानों के साथ भी प्राधिकरण की वार्ता हो चुकी है। दोनों गांवों के सौ से अधिक किसान समझौता कर चुके हैं। मंगलवार को प्राधिकरण अधिकारियों ने ऐमनाबाद के किसानों से गांव में ही बैठक की। उप महाप्रबंधक परियोजना भगवान सिंह ने किसानों के सामने पतवाड़ी की तरह समझौते का प्रस्ताव रखा। प्राधिकरण के खराब आर्थिक स्थिति की जानकारी देते हुए किसानों से कहा कि वे 550 रुपये प्रति वर्ग मीटर मुआवजे के बजाय तीन प्रतिशत अतिरिक्त जमीन लेंगे तो उन्हें अधिक फायदा होगा। प्राधिकरण पर साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। बैंक और कर्ज देने के लिए तैयार नहीं हैं। प्राधिकरण के पास पैसा नहीं होगा तो मुआवजा कहां से दिया जाएगा। किसान जमीन के बजाय मुआवजा राशि पर अड़े रहे। उनका कहना है कि जिस तरह पतवाड़ी में अतिरिक्त मुआवजा दिया गया है, उन्हें भी उसी तरह धनराशि दी जाए

    -Dainik Jagran
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  • ग्रेनो एक्स. में अधिग्रहण के खिलाफ भड़के किसान


    ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन में अधिग्रहण के खिलाफ दो किसान आज से भूख हड़ताल करेंगे। इनके साथ 11 गांवों के किसान धरने पर बैठेंगे। किसानों की मांग है कि देश के दो बड़े बिल्डरों का लाइसेंस निरस्त किया जाए और अधिग्रहण पर तुरंत रोक लगे। साथ ही, हाईटेक सिटी के विरोध में नयाफल गांव में 18 गांवों के किसानों की महापंचायत होगी। इस महापंचायत में मेधा पाटकर भी शामिल होंगी। इस दौरान प्रशासन और किसानों के बीच टकराव के आसार भी बन रहे हैं।

    अंसल बिल्डर का लाइसेंस निरस्त करने की मांग को लेकर आज से भूख हड़ताल पर बैठने वाले अंसल जमीन अधिग्रहण प्रतिरोध आंदोलन समिति के संयोजक ओमपाल भाटी और अध्यक्ष बलराज हवलदार ने आरोप लगाया है कि डीएम किसानों को बार-बार झूठा आश्वासन देकर आंदोलन को दबा रहे है। प्रशासन के झूठे आश्वासनों से तंग आकर किसान भूख हड़ताल करने को मजबूर हो रहे है। ओमपाल भाटी ने बताया कि भूख हड़ताल अंसल बिल्डर दफ्तर के सामने कैमराला-भौगपुर गांव के पास शुरू होगी। फिलहाल भूख हड़ताल दो किसान शुरू करेंगे। उनके साथ 11 गांवों के सैकड़ों किसान धरने पर बैठेंगे। आमरण अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं होतीं और अंसल बिल्डर का लाइसेंस निरस्त नहीं हो जाता।

    ओमपाल भाटी ने आरोप लगाया कि अंसल बिल्डर किसानों से जमीन ले रहा है, पर गांवों का विकास नहीं करा रहा है। भूख हड़ताल शुरू करने के लिए किसानों ने कई गांवों में नुक्कड़ सभाएं कर जनसंपर्क किया।

    हाईटेक सिटी जमीन अधिग्रहण प्रतिरोध आंदोलन समिति के संयोजक नितिन नागर, टीकम महाशय और प्रवक्ता डॉ. जितेन्द्र नागर ने संयुक्त रूप से बताया कि हाईटेक सिटी के विरोध में नयाफल गांव में किसानों की महापंचायत होगी, जिसमें अधिग्रहण से प्रभावित 18 गांवों के किसानों के अलावा ग्रेटर नोएडा, नोएडा व यमुना अथॉरिटी एरिया के किसान भी भारी संख्या में शामिल होंगे। किसान महापंचायत में मुख्य अतिथि नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर होंगी। आज होने वाली महापंचायत में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। दोनों बिल्डरों का लाइसेंस निरस्त करने की मांग इनमें मुख्य है। इससे कम पर किसान समझौता नहीं करेगे।

    -Navbharat times
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  • पतवाड़ी के आवंटियों को नोटिस जल्द


    ग्रेटर नोएडा। पतवाड़ी में जिन लोगों प्लाट लिए हैं, वे अतिरिक्त भुगतान के लिए तैयार हो जाएं। बिल्डरों को २२५० रुपये प्रति वर्ग मीटर का अतिरिक्त भुगतान करना होगा और अन्य के लिए ६०० रुपये प्रति वर्ग मीटर का भार तय किया गया है। वहीं, प्लाट-फ्लैट के आवंटियों पर ५०० रुपये प्रति वर्ग मीटर का अतिरिक्त भुगतान करने के लिए अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

    प्राधिकरण के सूत्रों ने बताया कि पतवाड़ी गांव के किसान और प्राधिकरण के बीच समझौता के बाद ५५० रुपये प्रति वर्ग मीटर का अतिरिक्त मुआवजा देना पड़ा है। कुल ३२४ करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार प्राधिकरण पर आया है। प्राधिकरण ने भी उसी दौरान तय कर दिया था कि गांव की जमीन जिन बिल्डरों एवं अन्य लोगों को आवंटित की गई है, उनसे ही अतिरिक्त भुगतान लिया जाएगा।

    पिछले तीन दिन से प्राधिकरण अधिकारी हिसाब किताब लगाने में लगे हुए हैं। पतवाड़ी गांव की जमीन पर ११ बिल्डरों के प्रोजेक्ट हैं। साथ ही आईटी से लेकर शैक्षिक संस्थान एवं अन्य आवंटन भी हुए हैं। प्लाट और फ्लैट भी प्राधिकरण ने आवंटित किए हैं। प्राधिकरण अधिकारी मानते हैं कि यदि ऐसा न किया गया तो प्राधिकरण के पास इतना पैसा नहीं है जो मुआवजा का भार सहन कर सकें। अभी जो मुआवजा दिया गया है वह नोएडा प्राधिकरण से उधार लेकर दिया जा रहा है। सभी के नोटिस तैयार किए जा रहे हैं और शीघ्र ही भेजने की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि, इसी तरह जब प्राधिकरण ने इटैड़ा और हैबतपुर के किसानों के साथ समझौता करना चाहा, तो किसानों ने साफ कहा कि उन्हें भी पतवाड़ी जैसा ही नकद भुगतान चाहिए। कुछ किसान सहमत भी हैं और समझौता भी कर चुके हैं।

    -Amar Ujala
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  • Another shocker: Plot owners told to cough up more



    GREATER NOIDA: The aftershocks of the Noida Extension land row are going to affect even those who have already been allotted plots in Greater Noida. The Greater Noida Industrial Development Authority has decided to ask for additional payments from them. On Tuesday, the Authority began the process of issuing notices to the 3,000 allottees whose houses are coming up in areas around Patwari village.

    In the past 18 months, the Authority allotted nearly 80 lakh sqm of land to several developers at rates ranging between Rs 11,600 and Rs 12,000 per sqm through a tendering process. In sectors 2 and 3 of Noida Extension-Greater Noida, more than 3,000 people were allotted flats and plots through a lottery system at the rate of Rs 10,000 per sqm. Besides, land was also allotted for institutional and educational purposes.

    Sources in the Authority say the residential plots allotted by Greater Noida Authority to individual allottees will cost almost Rs 500 per sqm more. For educational and institutional plots, an extra Rs 600 will be charged. The developers, meanwhile, will have to shell out an extra Rs 2,250 per sqm.

    Three months back, the Greater Noida Authority had hiked land rates by 12.5 per cent to tide over its cash crunch. In its board meeting held on September 2, the Authority has planned for a price hike of almost 40 per cent for all categories of land. "This additional 20 per cent which existing land owners have to pay will definitely send the land prices shooting," said Ansari, a realtor from Noida.

    Justifying the sharp hike in rates, Authority officials claim the move has been necessary to meet the shortage of funds they have been experiencing after paying additional compensation to Patwari farmers. "We incurred an expenditure of almost Rs 300 crore for reaching a compromise with Patwari farmers. If we have to disburse enhanced compensation and rehabilitation packages to the farmers of rest of the villages in Noida Extension, we have to have the means to arrange the funds," said a senior Authority official.

    Meanwhile, there is no end to the uncertainty looming over the fate of projects in the Noida Extension area as the dispute between the Greater Noida Authority and farmers is weighing heavily on the developers. The developers, however, are optimistic and say they will do whatever required to tide over the crisis. "We cannot do much in this situation, but we plan to put a representation through our developers' forum requesting the Authority to allow us incentives like use of commercial space, a higher FAR, etc," said Anil Sharma, CMD Amrapali Group and vice president of CREDAI-NCR. "We will ensure that existing homebuyers are not burdened financially, but any future bookings made would cost more," Sharma added.

    In a bid to resolve the land dispute at the earliest, the Authority is now trying to convince villagers of Itehda and Haibatpur to reach an out-of-court settlement. Unlike the increased compensation-based pact in Patwari, the Authority is offering farmers in these two villages 11 per cent developed plots plots in lieu of withdrawing their petitions in the high court.

    -TOI
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  • The UP government on Tuesday decided to allow three villages, whose lands have been notified for acquisition, to file objections to the process. The move comes just a day after the Union cabinet decided to stay the process of land notification across the country till the new land acquisition Act comes into effect.
    More than 600-hectare land in these Greater Noida villages - Roza Jalalpur, Chipiyana and Vaidpura - has been notified under sections 4 and 17 (the contentious urgency clause) of the old land acquisition Act.
    "In Lucknow, at a meeting of revenue department officials chaired by the state chief secretary, it was decided that section 17, the urgency clause, of the land acquisition Act be kept in abeyance in these three villages," said CEO of Greater Noida Authority, Rama Raman. "Farmers from these three villages will now be given an opportunity to raise objections related to the acquisition of their land under section 5(A) of the land acquisition Act," he added.
    The CEO said his office is likely to receive the orders related to this development in the next couple of days.
    In March 2011, land in these villages was notified for acquisition under sections 4 and 17, in the same manner in which land from other villages of Greater Noida had been acquired. Land measuring 288, 252.8 and 109 hectares respectively was notified for acquisition in Roza Jalalpur, Chipiyana and Vaidpura. However, Allahabad High Court had imposed a stay order in April 2011 on all proceedings related to land acquisition in these villages.
    Farmers in these villages, however, are looking forward to the Centre's new acquisition law. "Irrespective of whether the Authority gives us an opportunity to file objections, we won't part with our land and intend to preserve it for future generations," said leader of Kisan Sansh Samiti, Dushyant Naagar, whose family owns around 250 bighas of farmland in Roza Jalalpur.
    "We have hopes from the new land acquisition Bill which gives landowners the choice to not part with their land if 80% of landowners do not agree to do so," added Naagar. Others feel discord would arise due to this clause. "There are many small landholders in our village who, if they come together, may form more than 80% of farmers but their aggregate landholding would not be more than 20% of all land in the village," said Mahipal Singh of Vaidpura, "instead, the owners of 80% of aggregate land in any particular village must be consulted."
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  • It is certain now that a serious mess has been created now for end users.
    And this new proposed LA bill has also added to the mess heavily. Before this it was being conceived that farmers will slowly adopt the agreement way as like Patwari farmers and courts may also support it as the mid way to get the crisis solved. Now since things were moving in +ive directions
    Congress has brought this so as to woo away the farmers from the idea of doing settlement with Authority....we buyers are hanging in the middle and by the time it gets solved (and if against us) land prices in other areas would have risen multifolds and we will not be able to afford it ... and also if it comes against us then new fight will start for refund from builders that may be a distant possibility to get seeing that they themselves do not have money for this .....at least a year will pass in this...and also in case it turns +ive for us and rates are in creased for existing buyers also
    then we will repent a lot as in that price we may have booked in other developed areas in Noia or GNoida.....
    In my opinion it can only be solved if all the stake holders wants to solve it but that will not happen due to upcoming UP electiions bcoz even if farmers would want to settle.... congress supported farmers wouln't let this happen....Senior members Please share your views

    Originally Posted by fritolay_ps
    Another shocker: Plot owners told to cough up more



    GREATER NOIDA: The aftershocks of the Noida Extension land row are going to affect even those who have already been allotted plots in Greater Noida. The Greater Noida Industrial Development Authority has decided to ask for additional payments from them. On Tuesday, the Authority began the process of issuing notices to the 3,000 allottees whose houses are coming up in areas around Patwari village.

    In the past 18 months, the Authority allotted nearly 80 lakh sqm of land to several developers at rates ranging between Rs 11,600 and Rs 12,000 per sqm through a tendering process. In sectors 2 and 3 of Noida Extension-Greater Noida, more than 3,000 people were allotted flats and plots through a lottery system at the rate of Rs 10,000 per sqm. Besides, land was also allotted for institutional and educational purposes.

    Sources in the Authority say the residential plots allotted by Greater Noida Authority to individual allottees will cost almost Rs 500 per sqm more. For educational and institutional plots, an extra Rs 600 will be charged. The developers, meanwhile, will have to shell out an extra Rs 2,250 per sqm.

    Three months back, the Greater Noida Authority had hiked land rates by 12.5 per cent to tide over its cash crunch. In its board meeting held on September 2, the Authority has planned for a price hike of almost 40 per cent for all categories of land. "This additional 20 per cent which existing land owners have to pay will definitely send the land prices shooting," said Ansari, a realtor from Noida.

    Justifying the sharp hike in rates, Authority officials claim the move has been necessary to meet the shortage of funds they have been experiencing after paying additional compensation to Patwari farmers. "We incurred an expenditure of almost Rs 300 crore for reaching a compromise with Patwari farmers. If we have to disburse enhanced compensation and rehabilitation packages to the farmers of rest of the villages in Noida Extension, we have to have the means to arrange the funds," said a senior Authority official.

    Meanwhile, there is no end to the uncertainty looming over the fate of projects in the Noida Extension area as the dispute between the Greater Noida Authority and farmers is weighing heavily on the developers. The developers, however, are optimistic and say they will do whatever required to tide over the crisis. "We cannot do much in this situation, but we plan to put a representation through our developers' forum requesting the Authority to allow us incentives like use of commercial space, a higher FAR, etc," said Anil Sharma, CMD Amrapali Group and vice president of CREDAI-NCR. "We will ensure that existing homebuyers are not burdened financially, but any future bookings made would cost more," Sharma added.

    In a bid to resolve the land dispute at the earliest, the Authority is now trying to convince villagers of Itehda and Haibatpur to reach an out-of-court settlement. Unlike the increased compensation-based pact in Patwari, the Authority is offering farmers in these two villages 11 per cent developed plots plots in lieu of withdrawing their petitions in the high court.

    -TOI
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  • Originally Posted by babhishek14
    It is certain now that a serious mess has been created now for end users.
    And this new proposed LA bill has also added to the mess heavily. Before this it was being conceived that farmers will slowly adopt the agreement way as like Patwari farmers and courts may also support it as the mid way to get the crisis solved. Now since things were moving in +ive directions
    Congress has brought this so as to woo away the farmers from the idea of doing settlement with Authority....we buyers are hanging in the middle and by the time it gets solved (and if against us) land prices in other areas would have risen multifolds and we will not be able to afford it ... and also if it comes against us then new fight will start for refund from builders that may be a distant possibility to get seeing that they themselves do not have money for this .....at least a year will pass in this...and also in case it turns +ive for us and rates are in creased for existing buyers also
    then we will repent a lot as in that price we may have booked in other developed areas in Noia or GNoida.....
    In my opinion it can only be solved if all the stake holders wants to solve it but that will not happen due to upcoming UP electiions bcoz even if farmers would want to settle.... congress supported farmers wouln't let this happen....Senior members Please share your views


    YE Congress pagal ho chuke hai ,, we must have to answer by our power of vote in next election in UP. Mayawati and Congress ko out karo... nahi to apne waat lag jaaygeee....
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  • TO LAO KISKO ???

    Originally Posted by anandindia1
    YE Congress pagal ho chuke hai ,, we must have to answer by our power of vote in next election in UP. Mayawati and Congress ko out karo... nahi to apne waat lag jaaygeee....
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  • bhaiya tax payer middle class kya bali ka bakra hai..vote for cast band karana hoga logo ko..koi tumhara sage wala nahi hota..
    .aapna mahal banyega..
    private jet me jhoote manwaga..
    forest land reserved green area pr useless park banvayega...
    :bab (4):
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  • अनशन पर बैठे 80 किसान गिरफ्तार


    जमीन अधिग्रहण के खिलाफ धरने देने पहुंचे किसानों व पुलिस के बीच बुधवार को टकराव की स्थिति पैदा हो गई। एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ दर्जनों गांव के किसान पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत धरना देने पहुंचे थे। पुलिस ने उन्हें धरना देने से रोकने का प्रयास किया। किसानों के टेंट को पुलिस ने उखाड़ दिया। बाद पुलिस ने करीब 80 किसानों को गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले किसानों की कलेक्ट्रेट पर जिलाधिकारी के साथ वार्ता हुई। वार्ता विफल होने पर किसानों ने लगातार गिरफ्तारी देने की चेतावनी दी है।

    गांव बील अकबरपुर, रामगढ़, दतावली, बोड़ाकी, कैमराला, चक्रसेनपुर की जमीन एक कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा अधिग्रहीत की जा रही है। किसानों का आरोप है कि कंपनी उनकी जमीन कोड़ियों के भाव ले रहा है और उन्हें बर्बाद करने पर तुला है। किसानों ने कई बार कंपनी के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर विकास कार्य भी बंद कराए। गांव कैमराला, चक्रसेनपुर, भोगपुर, दतावली, बोड़ाकी, मडैया समेत करीब दर्जन भर गांवों के किसान बुधवार को अंसल पार्क में अनशन करने के लिए एकत्र हुए। तभी उपजिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह व पुलिस क्षेत्राधिकारी उदयवीर सिंह खोखर वहां पहुंचे। उन्होंने किसानों के पंडाल उखड़वा दिए और अनशन करने से रोक दिया। इससे पुलिस-प्रशासन व किसानों के बीच टकराव की नौबत पैदा हो गई। किसानों का बढ़ता आक्रोश देख अधिकारी उन्हें समझा-बुझाया। इसके बाद किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी के पास वार्ता के लिए जिला मुख्यालय गया। लेकिन वार्ता विफल होने पर किसानों ने धरना जारी रखने का निर्णय लिया। पुलिस धरना दे रहे 80 किसानों को गिरफ्तार कर सूरजपुर स्थित पुलिस लाइन ले आई। पुलिस ने कहना है कि धरने के लिए किसानों को अनुमति नहीं दी गई है। किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, तब तक धरना चालू रहेगा। किसानों की मांग है कि जमीन का मुआवजा पचास लाख रुपये बीघा हो, पच्चीस फीसदी विकसित जमीन व दो सौ मीटर का भूखंड आदि मिले।

    -Dainik jagran
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  • किसानों को मिले जमीन की कीमत तय करने का हक : मेधा


    जमीन अधिग्रहण के विरोध में गांव दुजाना, कचेहड़ा, बादलपुर, दुरपाई, न्यायफल, इकला समेत कई गांवों के किसानों की महापंचायत बुधवार को गांव न्यायफल व दुरपाई के बीच स्थित खेतों में हुई। महापंचायत में नर्मदा बचाओ आंदोलन की संयोजिका मेधा पाटकर ने भी भाग लिया।

    महापंचायत में मेधा पाटकर ने कहा कि किसानों की जमीनों का अधिग्रहण कर बिल्डरों को देना किसानों को बर्बाद करना है। जमीन किसान की जीविका होती है, जिससे किसान अपनी जरूरतें पूरी करते हैं। जब किसानों के पास जमीन नहीं होगी तो उनकी जीविका कैसे चलेगी। किसानों की जमीन की कीमत तय करने का हक उन्हें ही मिलना चाहिए और अधिग्रहण प्रक्रिया ग्राम समाज की सहमति से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बसपा सरकार गरीबों व किसानों की मसीहा होने का ढोल पीट रही है, जबकि किसानों की बेशकीमती जमीन बिल्डरों को देकर उन्हें बर्बाद कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की एक इंच जमीन भी शासन जबरन नहीं ले सकती, इसके लिए किसान आरपार की लड़ाई के लिए तैयार हैं।

    -Dainik jagran
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  • Madam Medha ki vajah se sardar sarovar dam itna late hua.... Now see how it is beneficial for that area...

    And see how much money farmers are getting.. bachare job waale saari life mein itna bhi na kama paayen...
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  • Acquisition: UP invites objectionsfrom 3 Greater Noida villages

    GREATER NOIDA: The UP government on Tuesday decided to allow three villages, whose lands have been notified for acquisition, to file objections to the process. The move comes just a day after the Union cabinet decided to stay the process of land notification across the country till the new land acquisition Act comes into effect.

    More than 600-hectare land in these Greater Noida villages - Roza Jalalpur, Chipiyana and Vaidpura - has been notified under sections 4 and 17 (the contentious urgency clause) of the old land acquisition Act.

    "In Lucknow, at a meeting of revenue department officials chaired by the state chief secretary, it was decided that section 17, the urgency clause, of the land acquisition Act be kept in abeyance in these three villages," said CEO of Greater Noida Authority, Rama Raman. "Farmers from these three villages will now be given an opportunity to raise objections related to the acquisition of their land under section 5(A) of the land acquisition Act," he added.

    The CEO said his office is likely to receive the orders related to this development in the next couple of days.

    In March 2011, land in these villages was notified for acquisition under sections 4 and 17, in the same manner in which land from other villages of Greater Noida had been acquired. Land measuring 288, 252.8 and 109 hectares respectively was notified for acquisition in Roza Jalalpur, Chipiyana and Vaidpura. However, Allahabad High Court had imposed a stay order in April 2011 on all proceedings related to land acquisition in these villages.

    Farmers in these villages, however, are looking forward to the Centre's new acquisition law. "Irrespective of whether the Authority gives us an opportunity to file objections, we won't part with our land and intend to preserve it for future generations," said leader of Kisan Sansh Samiti, Dushyant Naagar, whose family owns around 250 bighas of farmland in Roza Jalalpur.

    "We have hopes from the new land acquisition Bill which gives landowners the choice to not part with their land if 80% of landowners do not agree to do so," added Naagar. Others feel discord would arise due to this clause. "There are many small landholders in our village who, if they come together, may form more than 80% of farmers but their aggregate landholding would not be more than 20% of all land in the village," said Mahipal Singh of Vaidpura, "instead, the owners of 80% of aggregate land in any particular village must be consulted."

    -TOI
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