पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • लौट रहा है निवेशकों का भरोसा


    ग्रेटर नोएडा
    नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त में आई गिरावट अब फिर से रफ्तार पकड़ने लगा है। नोएडा सिटी सेंटर की कमर्शल डील के बाद निवेशकों का विश्वास लौटने लगा है। एआईजी स्टांप एस. पी. सिंह ने बताया कि जेवर एरिया में 40 फीसदी और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एरिया में भी इतनी ही गिरावट पिछले 2 महीने से चल रही थी। लेकिन नोएडा सिटी सेंटर की डील होने के बाद अब स्थिति बदलने लगी है।

    पिछले एक हफ्ते में मिले रुझान के मुताबिक, स्टांप की बिक्री में तेजी आई है। इसका सीधा मतलब है कि सिटी सेंटर की डील के बाद निवेशकों का विश्वास लौटा है। एआईजी स्टांप ने बताया कि डिपार्टमेंट को 1650 करोड़ रुपये का वार्षिक लक्ष्य दिया गया है। अगस्त तक 570.83 करोड़ रुपये का लक्ष्य प्राप्त करना था लेकिन सिटी सेंटर की डील में 357.50 करोड़ रुपये स्टांप ड्यूटी मिलने के कारण विभाग को अगस्त तक 950.8 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।

    दूसरी ओर, हाई कोर्ट के रुख से भी निवेशकों का विश्वास बढ़ा है। नोएडा एक्सटेंशन मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को काउंटर दाखिल करने का पर्याप्त वक्त दिया है। निवेशकों और बिल्डरों से भी कहा गया है कि कोर्ट उनका पक्ष भी सुनेगा।

    -Navbharat times
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  • 'अथॉरिटी से नहीं करेंगे समझौता'


    इटेहरा और हैबतुपर के किसानों से समझौते का प्रयास कर रहे ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी अफसरों को किसानों ने बड़ा झटका दिया है। शनिवार को पंचायत कर किसानों ने अथॉरिटी से किसी प्रकार का समझौता न करने का ऐलान किया है।

    ग्रमाीण पंचायत मोर्चा के संयोजक रणवीर प्रधान ने बताया कि अथॉरिटी दोनो गांव के किसानों को समझौता करने पर तीन प्रतिशत अतिरिक्त प्लॉट दे रही है। इसे किसान 18 हजार रुपये / वर्गमीटर की दर से बिल्डरों को बेच सकते हैं। इससे साफ है कि किसानों की जमीन बहुत कम कीमत देकर ली गई है। किसानों को 850 रुपये / वर्गमीटर की दर से मुआवजा दिया गया है। किसानों ने अथॉरिटी से बची हुई 97 पर्सेंट जमीन का विकास शुल्क 3000 रुपये / वर्गमीटर की दर से काटकर बचे हुए 15 हजार रुपये / वर्गमीटर की दर से मुआवजा देने की मांग की है। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम यादव ने आरोप लगाया कि अथॉरिटी सभी गांवों के किसानों से एकसमान समझौता नहीं कर रही है। पतवाड़ी के किसानों को जहां 550 रुपये / वर्गमीटर का मुआवजा दिया गया है। वहीं हैबतपर और इटेहरा के किसानों को तीन पर्सेंट जमीन लीज - डीड के जरिए वापस मिलेगी। लीज - डीड वाली जमीन में अथॉरिटी बिजली लाइन , गैस पाइपलाइन , सीवर लाइन आदि डाल सकती है। किसानों के मना करने पर लीज - डीड कैंसल कर दी जाएगी। लीज - डीड के प्रावधान किसानों के ऊपर लटकी तलवार के समान हंै। उन्होंने लीज - डीड के प्रावधान रद्द करने की मांग की।

    -Navbharat times
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  • हाई कोर्ट में 44 गांवों की सुनवाई कल


    ग्रेटर नोएडा

    जमीन अधिग्रहण के मामले में किसानों , बिल्डरों और अथॉरिटी अफसरों की निगाहें इलाहाबाद हाई कोर्ट में सोमवार को होने वाली सुनवाई पर टिक गई हैं। पतवाड़ी समेत 44 गांवों की जमीन अधिग्रहण पर सुनवाई होगी। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अफसरों को उम्मीद है कि पतवाड़ी के किसानों से समझौता होने के बाद फैसला उनके हक में आएगा। अथॉरिटी के पक्ष में फैसला आने को लेकर निवेशक और बिल्डर भी आशान्वित हैं।

    जमीन अधिग्रहण मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को 9 सितंबर तक काउंटर दाखिल करने का वक्त दिया था। अथॉरिटी अफसरों ने बताया कि 44 गांवों के किसानों की ओर से कुल 391 याचिकाएं डाली गई हैं। सभी याचिकाओं पर अलग - अलग काउंटर तैयार कर कोर्ट में दाखिल किया गया है। अफसरों के मुताबिक पतवाड़ी के 1600 किसानों में से 1225 किसानांे से समझौता हो चुका है। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि फैसला उनके पक्ष में आएगा। पतवाड़ी के अलावा इटेहरा और हैबतपुर के किसानों से भी समझौते की कोशिश जारी है। वहीं इस फैसले पर नोएडा एक्सटेंशन समेत क्षेत्र में तमाम जगहांे पर अपने प्रोजेक्ट पर काम कर रहे बिल्डरों और प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले निवेशकों की भी निगाहें टिकी हुई हैं। हालांकि यह भी आशंका जताई जा रही है कि किसानों के वकीलांे को भी रिज्वाइंडर ( काउंटर का जवाब ) दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय मिल सकता है। अगर ऐसा होता है तो फैसला कुछ और दिनों के लिए टल जाएगा।

    उधर , याचिका दायर करने वाले तमाम किसानों को उम्मीद है कि फैसला उनके पक्ष में आएगा। किसान नेता रूपेश वर्मा का कहना है कि सिर्फ एक गांव से समझौता करने भर से फैसला अथॉरिटी के पक्ष में नहीं आना चाहिए। पतवाड़ी के अलावा ग्रेटर नोएडा के 43 अन्य गांव के किसान भी अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। वे कोई समझौता करना नहीं चाहते हैं।


    -Navbharat times
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  • Now... fight for bank interest charges
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  • :bab (45):Poor villegers got only 18 crores.. 42 lakh approx each
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  • प्राधिकरण पर किसानों को गुमराह करने का आरोप

    ग्रेटर नोएडा: ग्रामीण पंचायत मोर्चा ने रविवार को सादुल्लापुर गांव में बैठक की। बैठक में प्राधिकरण पर आरोप लगाया गया कि वह किसानों को गुमराह कर एकजुटता को तोड़ने का काम कर रहा है। मोर्चा का कहना है कि किसान हाईकोर्ट से अपनी याचिका वापस नहीं लेंगे। कोर्ट के निर्णय के बाद ही आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। किसान अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।

    नोएडा एक्सटेंशन में 11 गांवों की करीब ढाई हजार हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की गई है। प्राधिकरण ने पतवाड़ी, हैबतपुर व इटेड़ा गांव के किसानों के साथ समझौता कर लिया है। ऐमनाबाद गांव के साथ भी सहमति बन चुकी है। ग्रामीण पंचायत मोर्चा का आरोप है कि प्राधिकरण अलग-अलग गांवों के किसानों से समझौता कर उन्हें गुमराह कर रहा है।

    एक्सटेंशन के साथ अन्य गांवों के लिए भी एक समान नीति बननी चाहिए। मोर्चा के संयोजक रणवीर प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए नए जमीन अधिग्रहण कानून में बाजार भाव का चार गुणा मुआवजा देने की बात कही गई है। प्राधिकरण को नए कानून के लागू होने तक न केवल जमीन अधिग्रहण बंद कर देना चाहिए, बल्कि हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई को भी नए कानून के पास होने तक रोक लगवाने की मांग की जाए। किसान नेता दुष्यंत नागर ने कहा कि प्राधिकरण द्वारा किए जा रहे समझौते से लोग खुश नहीं है। किसानों पर दबाव बनाकर समझौते कराए जा रहे हैं। प्राधिकरण उन्हीं किसानों को मुआवजा वृद्धि का लाभ देने की फिराक में है, जिन्होंने कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है।

    -Dainik jagran
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  • महापंचायत में किसानों ने भरी हुंकार (for Ansal Megapolis)


    एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ कैमराला गांव में किसानों का चल रहा आमरण अनशन रविवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। किसानों ने रविवार को महापंचायत कर अधिग्रहण के खिलाफ आरपार की लड़ाई लड़ने की हुंकार भरी। पंचायत में बसपा को छोड़कर सभी राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं। राजनैतिक ने किसानों के आंदोलन का समर्थन करते हुए पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया।

    महापंचायत में पूर्व सिंचाई राज्य मंत्री नवाब सिंह नागर ने कहा कि किसानों की जमीन छीनकर बिल्डरों को देने के बाद सरकार को तसल्ली नहीं हो रही है। उसके बाद पीड़ित किसानों पर गोलियां लाठियां चलवा कर जेलों में भेजा रहा है। देहात मोर्चा के वरिष्ठ नेता केसरी सिंह गुर्जर ने सभी किसानों को एकजुट होने का आह्वान किया। सपा के वरिष्ठ नेता राजकुमार भाटी ने कहा कि अगर अनशन करने वाले किसी भी व्यक्ति को पुलिस द्वारा उठाया जाता है तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। कांग्रेस नेता वीरेंद्र सिंह गुड्डू ने कहा कि तीन किसान पिछले पांच दिन से आमरण अनशन पर बैठे हुए लेकिन प्रशासन अभी तक इनकी कोई भी सुध नहीं ली है। मामले में प्रशासन का रवैया बेहद उदासीन है। रूपेश वर्मा ने कहा कि जब तक बिल्डर का लाइसेंस निरस्त नहीं किया जाता तब तक आमरण अनशन जारी रहेगा। कांग्रेस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अजय चौधरी ने कहा कि किसानों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाजपा जिलाध्यक्ष सतेंद्र शिशौदिया ने कहा कि किसानों की जमीन कौड़ियों के भाव लेकर बिल्डरों को दिया जा रहा है। मालूम हो कि गांव कैमराला, बील अकबरपुर, बोड़ोकी समेत आसपास गांव की जमीन टाउनशिप के लिए एक बिल्डर को दिया जा रहा है। किसान बिल्डर को जमीन देने के खिलाफ पांच दिन से आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं।


    -Dainik jagran
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  • पतवाड़ी के 1264 किसानों के शपथ पत्र किए दाखिल


    ग्रेटर नोएडा: नोएडा एक्सटेंशन के पतवाड़ी गांव के 1264 किसानों के साथ प्राधिकरण ने समझौता किया है। इन किसानों के शपथ पत्र हाईकोर्ट में दाखिल कर दिए गए हैं। कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। प्राधिकरण ने हैबतपुर व इटेड़ा के शेष किसानों के साथ भी रविवार को बैठक की। सोमवार को किसानों को फिर से प्राधिकरण बुलाया गया है।

    अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, पतवाड़ी गांव में 1617 किसानों में से 1264 के साथ समझौता हो गया है। प्राधिकरण शेष किसानों को सुलह के लिए सोमवार को कोर्ट से और समय मांग सकता है। कोर्ट ने पहले 12 अगस्त तक समझौते के लिए समय दिया था। बताया जाता है कि शेष 353 किसानों में अधिकतर दूसरे गांवों के रहने वाले हैं। इनसे समझौते के लिए संपर्क किया जा रहा है। कुछ किसानों की मृत्यु के बाद उनके परिजनों के नाम अभी जमीन अभिलेखों में दर्ज नहीं हुए हैं। एडीएम एलए हरनाम सिंह ने बताया कि ऐसे किसानों को नाम दर्ज होने तक मुआवजे का चेक नहीं दिया जा सकता। हैबतपुर व इटेड़ा के किसानों के साथ रविवार को सांसद सुरेंद्र नागर ने बैठक की। टेलीफोन से किसानों की बात ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह से कराई गई। बैठक के बाद किसान प्राधिकरण के साथ सुलह करने को तैयार हो गए हैं। सोमवार को प्राधिकरण में बाकी किसानों के साथ समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है प्राधिकरण को उम्मीद है की कोर्ट सुनवाई को आगे स्थगित कर देगा



    -Dainik Jagran
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  • नोएडा एक्सटेंशन के मामलों की सुनवाई शुरू


    ग्रेटर नोएडा: नोएडा एक्सटेंशन में जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी बेंच सोमवार से किसानों की याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। कोर्ट में अपना-अपना पक्ष रखने के लिए किसान, बिल्डर, निवेशक व प्राधिकरण अधिकारी शनिवार को ही इलाहाबाद के लिए रवाना हो गए। कोर्ट में 27 गांवों के 365 किसानों ने याचिका दायर की गई है। कोर्ट सोमवार से याचिकाओं पर प्रतिदिन सुनवाई करेगा। कोर्ट का फैसला सिंतबर के अंतिम या अक्टूबर के प्रथम सप्ताह तक आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    कोर्ट में हो रही सुनवाई पर किसान, प्राधिकरण, बिल्डर व निवेशक सभी की निगाहें लगी हुई हैं। नोएडा एक्सटेंशन में करीब एक लाख निवेशकों के करोड़ों रुपये फंसे हैं। प्राधिकरण ने पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ समझौता कर निवेशक व बिल्डरों को राहत पहुंचाने का प्रयास किया है। पतवाड़ी गांव के 16 सौ में से करीब 12 सौ किसानों के समझौते के शपथ पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिए गए हैं। पतवाड़ी के किसानों को 550 रुपये प्रति वर्गमीटर का अतिरिक्त मुआवजा दिया गया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों के समझौते को मान लिया तो अन्य गांवों में भी सुलह का रास्ता खुल सकता है। सूत्रों का कहना है कि प्राधिकरण सुनवाई से पहले हैबतपुर व इटेड़ा गांव के किसानों द्वारा कोर्ट में दाखिल की गई याचिकाओं को वापस कराने की फिराक में लगा है। दोनों गांवों के 80 किसानों ने कोर्ट में जमीन अधिग्रहण को चुनौती दे रखी है। प्राधिकरण इनमें से अधिकांश किसानों के साथ समझौता कर चुके है। कोर्ट ने पतवाड़ी के समझौते को मान लिया आम्रपाली, सुपरटेक, निराला स्टेट, पटेल नियो, अजय इंटरप्राइजिज व अरिहंत समेत 11 बिल्डरों की परियोजना एवं दो इंजीनियरिंग कॉलेज, एक अस्पताल, सेक्टर दो के तीन भूखंड व मकानों के आवंटियों पर छाए संकट के बदल हट जाएंगे। इन परियोजनाओं में करीब 26 हजार निवेशक व आवंटी है। ये सब कोर्ट का फैसले का इंतजार कर रहे हैं। प्राधिकरण अगले कुछ दिन मे ८०% किसानो से समझोता कर सकता है

    Dainik jagran
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  • यमुना अथॉरिटी भी डूबी कर्ज में


    ग्रेटर नोएडा
    जमीन अधिग्रहण को लेकर मचे बवाल का असर ग्रेटर नोएडा की तरह यमुना अथॉरिटी पर भी पड़ रहा है। यमुना अथॉरिटी भी पांच हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूब गई है, जिसकी वजह से विकास कार्य ठप होने लगे हैं। अथॉरिटी को हर महीने करीब 41 करोड़ रुपये बैंकों से लिए गए कर्ज के ब्याज के रूप में देने पड़ रहे हैं।

    बैंकों ने भी अथॉरिटी को आगे कर्ज देने से साफ मना कर दिया है। यमुना अथॉरिटी पर नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के करोड़ों रुपये पहले से उधार हैं, जिन्हें वापस करने में उसके पसीने छूट रहे है। कर्ज में डूबी अथॉरिटी को अब कोई सहारा नहीं मिल रहा है। यहां तक कि अथॉरिटी के अफसर आशंका जाहिर करने लगे हैं कि यदि अथॉरिटी की वित्तीय स्थिति ऐसी ही रही, तो कहीं इसे बंद न करना पड़ जाए।

    वहीं किसानों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर करके अथॉरिटी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। यदि हाई कोर्ट में नोएडा एक्सटेंशन की तर्ज पर यमुना अथॉरिटी के खिलाफ फैसला आ जाता है, तो इसे करारा झटका लगेगा। यमुना एक्सप्रेस वे अथॉरिटी एरिया के जिला किसान संघ के संयोजक सगुन नागर और अट्टा गुजरान गांव के प्रधान रविन्द्र ने बताया कि अथॉरिटी ने इंडस्ट्री लगाने के लिए किसानों की जमीन अर्जेंसी क्लॉज लगाकर ली थी, लेकिन इंडस्ट्री के नाम पर अधिग्रहण की गई जमीन को बिल्डरों और इंस्टिट्यूट के लिए अलॉट कर दिया गया। किसानों ने अथॉरिटी से मिलकर कई बार अपनी समस्याओं का समाधान करने की मांग की। लेकिन अथॉरिटी ने किसानों की समस्या हल नहीं की। किसानों को मजबूर होकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अब फैसला हाई कोर्ट को करना है।

    कर्ज में डूबी यमुना अथॉरिटी के पास गांवों और आवासीय सेक्टरों का विकास करने के लिए भी फंड नहीं है। अथॉरिटी पर करीब पांच हजार करोड़ का कर्ज है। अथॉरिटी अफसर दबी जुबान से कह रहे हैं कि यदि अथॉरिटी की यही वित्तीय स्थिति रही, तो अथॉरिटी बंदी के कगार पर पहुंच जाएगी। यमुना अथॉरिटी के सीईओ पंधारी यादव का कहना है कि अथॉरिटी को वित्तीय संकट से उबारने के लिए प्लान तैयार कर रहे हैं। लोन लेने के लिए कई बैंकों के साथ बातचीत चल रही है। जल्द ही स्थिति मे सुधार की उम्मीद है

    -navbharat times
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  • हाई कोर्ट में अहम सुनवाई आज


    जमीन अधिग्रहण मसले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में आज अहम सुनवाई होगी। कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए याचिकाकर्ता किसान दर्जनों वकीलों के साथ इलाहाबाद पहंुच गए हैं। नोएडा एक्सटंेशन ग्रामीण पंचायत मोर्चा के संयोजक प्रधान रणवीर नागर ने बताया कि अथॉरिटी पतवाड़ी, हैबतपुर, इटैडा के किसानों के साथ समझौते की बात कह रही है लेकिन अथॉरिटी के साथ वे किसान समझौता कर रहे हंै जो पहले मुआवजा उठा चुके हैं। उन्होंने बताया कि पतवाड़ी के किसानों ने 96 याचिका दायर की हुई है जबकि हैबतपुर से 120 और इटैडा से 80 याचिका दायर की गई हैं। रणवीर नागर ने बताया कि हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई में किसानों का पक्ष रखने के लिए वकील तेजराम यादव, डालचंद त्यागी, भूपेंद्र, विनोद खारी, विनोद, प्रमेंद्र भाटी के साथ मुकेश, राहुल, नत्थी समेत दर्जनांे किसान पहंुच गए हैं।

    नोएडा एक्सटेंशन किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता इंद्र नागर का कहना है कि किसानों को हाई कोर्ट पर पूरा भरोसा है। सोमवार को होने वाली सुनवाई में किसानों के पक्ष में फैसला आने की पूरी उम्मीद है। उन्होंने बताया कि इसी डर से अथॉरिटी पतवाड़ी के साथ अन्य गांवों के किसानों के साथ समझौता करने पर जोर दे रही है।

    ग्रामीण पंचायत मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष व किसानों के वकील तेजराम यादव ने बताया कि हैबतपुर और इटैडा मंे अब तक किसी याचिकाकर्ता ने समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि जब किसानांे के पक्ष मंे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में फैसले आने लगे तो अथॉरिटी ने अपने बनाए गए नियमों को ताक पर रख दिया। अथॉरिटी का नियम है कि अधिसूचित एरिया में बिल्डर सीधे किसानांे से जमीन नहीं खरीद सकते। अब अथॉरिटी जिन किसानों को 3 प्रतिशत जमीन मुआवजे के बदले दे रही है, उसी जमीन को बिल्डर किसानांे से सीधे 18 हजार रुपये/ वर्गमीटर के रेट पर खरीद रहे हैं। उस जमीन का मुआवजा अथॉरिटी 850 रुपये/ वर्गमीटर के हिसाब से दे रही है। कोर्ट का फेसला अगर विपक्ष मे आता है तो किसान आंदोलन कर देगे

    -navbharar times
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  • Allahabad HC to start hearing on Noida Extn land cases from today


    After several postponements, the Allahabad high court is likely to begin the hearing of Noida Extension land acquisition cases from Monday. However, homebuyers are less panicky this time around.



    The Greater Noida authority has struck deals with farmers in three villages Patwari, Itaidha and Haibatpur — and is in talks with other villages in the area, where 2.25 lakh houses have been planned. But these houses are facing a threat as farmers are moving court to get their land back.

    The farmers contend the authority has grabbed their land and they want it back, thus creating panic among real estate players and homebuyers. Courts have quashed forcible land acquisition carried out by the authority in Shahberi and Patwari villages, affecting 26,500 houses.

    A total of 1 lakh buyers have booked houses in Noida Extension. “We’re paying relief and offering high value plots to those agreeing to allow resumption of stuck real estate projects,” said an authority official. “The authority will seek the court’s approval to the agreements being worked out and time to resolve the issues in all villages of the area,” he said.

    After announcing an out-of-court settlement with farmers in Patwari a month ago, the authority is now working out similar pacts in Haibatpur and Itaidha. While 20,000 houses booked in Patwari “look safe”, a deal in Haibatpur and Itaidha will save 12,000 units.

    Unlike the increased compensation-based pact in Patwari, the authority is mainly offering developed land to farmers in the two villages. Farmers were already entitled to plots measuring 6% of the total land acquired. As per the Patwari pact, the area was hiked to 8% and farmers were paid an increased compensation of Rs 550 per sqm — taking the earlier cash package from Rs 850 per sqm to Rs 1,400 per sqm.

    The authority is spending more than Rs 300 crore in Patwari. It will give farmers in Itaidha and Haibatpur 11% plots, 3% area increase in developed plots will roughly amount to the cash benefit given in Patwari. In Itaidha, builders are buying these plots at Rs 18,000 per sqm. These seems to be saved.

    -HT
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  • New deal may end Gr Noida land impasse


    GREATER NOIDA: With Greater Noida Authority chasing another court date of September 12, officials are going out of their way to settle the ongoing land acquisition row. Roping in builders whose projects have been stalled in Noida Extension, the Authority has worked out yet another formula to woo the disgruntled farmers. Builders are willing to buy 3 per cent of the 11 per cent land offered by GNIDA to the farmers, at Rs18,000 per sqm.

    Despite facing an unprecedented liquidity crunch and in an effort to persuade,

    the Authority had offered 11 per cent developed land to farmers of Haibatpur and Itehda villages, instead of the hiked compensation of Rs 550 per sqm. "We have been trying to convince the farmers to accept the offer as the Authority itself has a debt of over Rs 4000 crore to deal with. But, farmers of the two villages, namely Haibatpur and Itehda, had rejected the offer," said an Authority official.

    On September 9, marathon meetings were held to find a solution to the impasse between the farmers, builders and GNIDA. To address the farmers' reluctance and demand- of 'settling only for a hiked compensation'-a new method was devised by the Authority and the developers. which "could possibly be the solution to the farmers' demands."

    Several developers seem to be interested in buying three per cent of the developed land- worth almost Rs 45 crore- from the farmers. at a rate of Rs 18,000 per sq m.

    Even as Authority officials remained tight-lipped, sources claim that almost 43 farmers from Haibatpur and Itehda have accepted the new deal.

    "Farmers have taken the 11 per cent land offered by GNIDA, 3 per cent of which they have further sold off to the developers. Till Saturday, the paperwork was being completed by officials. "The process will continue till Allahabad High Court begins hearing all Noida Extension cases from September 12," revealed an official.

    Currently, with GNIDA's efforts, while 20,000 houses booked in Patwari would be out-of-the-woods,a successful arrangement with the farmers of Haibatpur and Itaidha will save 12,000 units. About 1 lakh buyers have booked houses in Noida Extension, where 12-odd villages have moved court. Courts have quashed forcible land acquisition by the Authority in two villages-Shahberi and Patwari. Allahabad High Court will start hearing the Noida Extension cases from September 12.

    Meanwhile, the 11 builders developing 14 projects in the Patwari village have been issued notices by the GNIDA to pay the extra cost of Rs 2250 per sq m for land allotted to them within a period of seven days. "We received a letter on 9th September asking us to deposit the money within a week," said RK Arora, Managing Director of Supertech. On being quizzed about the 'arrangement' being worked out between the GNIDA, farmers and them, he said, "The farmers are free to sell the 3 percent land to the developers which is 18-19K/sqm.

    -TOI
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  • To end litigation, Uttar Pradesh plans uniform abadi land policy

    In the wake of demands by farmers that inhabited areas of villages, commonly known as ‘abadi land’, should be exempted from acquisition, the UP government is planning to bring a uniform policy for Noida, Greater Noida and the Yamuna Expressway Industrial Development Authority.


    All three authorities have been asked to prepare draft regulations for identification, control and regularisation of such land in their jurisdiction.

    At present, only Noida has a policy to deal with “rural abadi land” under which seven per cent of the land acquired from a farmer is given on lease for residential purpose. This land could be at the same place, or in a neighbouring area, if construction is planned on that particular land.

    Farmers in Greater Noida and YEIDA areas are demanding similar regulations, while farmers in Noida are demanding certain changes in the existing norms. In view of these demands, the government is now planning a policy for all three areas. The Revenue Department has been asked to analyse the drafts of the three authorities.



    The benefits will come with a pre-condition: farmers should withdraw all pending cases in different courts against the authority and also remove encroachments from the notified land, other than the one regularised under the proposed ‘abadi’ regulations.

    A Noida official said farmers have realised that “even small land given to them in developed area earns huge profits, running into crores.” He said the government is also planning to do away with the restriction that those seeking ‘abadi’ benefits could not avail of plots reserved for villagers in the developed area.

    In Noida, the farmers are against the policy of identifying ‘abadi’ land at the time acquisition notification is issued under section 4 and section 17 of the Land Acquisition Act. They say identification should be done only when the land is actually acquired, which is often years after the initial notification.

    Considering this demand, the government is planning to fix June 30, 2011 as the date for identifying inhabited land. This means the benefit of the policy governing allotment of land in lieu of the ‘abadi’ would be given only if construction exists on June 30, 2011, as shown in satellite imagery.

    In another move, the government is planning to change a clause whereby a farmer was required to be the original resident of a revenue village, where the land is being acquired, in order to get the benefit of the ‘abadi’ regulations.

    Farmers will now get the benefits if they are original residents of any village in the area of jurisdiction of that particular authority, but inhabit in the acquired village.

    “With property rates rising in the area of the three authorities, these changes will be lucrative for the farmers. It has been decided to extend the benefit to other two authorities as well,’’ said a senior officer.

    The provision to lease back the ‘abadi’ land in Noida has been in existence since 1997 and the latest regulations called Noida Rural Abadi Site Regulations were framed in 2006. In the last six months, some amendments have been made. However, these regulations were properly implemented recently after the appointment of new Noida chairman Balwinder Kumar.


    -Indian Express
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  • Any update on today's hearing ???
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