पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • निवेशकों की मेहनत व संघर्ष रंग लाई

    ग्रेटर नोएडा : ग्यारह महीने से आशियाना को लेकर संघर्ष कर रहे एक लाख निवेशकों के लिए शुक्रवार का दिन राहत भरा रहा। मास्टर प्लान 2021 को मंजूर कराने की मांग को लेकर निवेशकों ने शनिवार एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के अध्यक्ष व केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमल नाथ के घर का घेराव करने की चेतावनी दे रखी थी। निवेशकों के चेतावनी का असर है कि एक दिन पहले केंद्रीय मंत्री ने मास्टर प्लान को मंजूर कर दिया।

    नोएडा एक्सटेंशन में करीब एक लाख निवेशकों ने फ्लैट बुक करा रखा है। 21 अक्टूबर 2011 को हाईकोर्ट के आदेश में एक्सटेंशन में निर्माण कार्य बंद हो गया था। निर्माण कार्य बंद होते ही निवेशकों को गहरा धक्का लगा था। जीवन भर की गढ़ी कमाई दांव पर लग गई थी। आशियाना का सपना लिए निवेशक अक्टूबर 2011 से लगातार संघर्ष करते आ रहे थे। एक्सटेंशन का धुंध दूर करने के लिए निवेशकों ने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक आवाज उठाई। कैंडल मार्च, पैदल मार्च, एनसीआर प्लानिंग बोर्ड कार्यालय, प्राधिकरण कार्यालय का घेराव तक किया। हर तरफ से निवेशकों को सिर्फ आश्वासन मिला। कहीं से उन्हें ठोस आश्वासन नहीं मिला। इसके बाद भी निवेशकों ने आस की उम्मीद नहीं छोड़ी। पहले निवेशकों ने नोएडा एक्सटेंशन में धरना प्रदर्शन किया। वहां से जब रास्ता नहीं दिखा तो दिल्ली कूच किया। मास्टर प्लान मंजूर कराने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति तक अपनी आवाज पहुंचने का प्रयास किया। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड कार्यालय पर पांच बार प्रदर्शन किया। एक दर्जन बार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी से मिलकर मास्टर प्लान मंजूर करने की मांग रखी। एक्सटेंशन में फ्लैट खरीदने वाले ज्यादातर नौकरी पेशा के लोग शामिल है। नौकरी के साथ निवेशकों के सामने आशियाना का सपना था। अवकाश के दिन परिवार के साथ समय बीतने के बजाय निवेशक सड़क पर संघर्ष करते नजर आए। शुक्रवार को मास्टर प्लान मंजूर होने के बाद उनका संघर्ष सफल हो गया।

    dainik jagran
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  • एजुकेशन हब का भी होगा एक्सटेंशन

    ग्रेटर नोएडा : एनसीआर प्लानिंग बोर्ड को मंजूरी शिक्षा जगत के लिए भी बड़ी खबर है। इस योजना के तहत ग्रेटर नोएडा के एजुकेशन हब का एक्सटेंशन होना लगभग तय है। जिन शैक्षिक संस्थान समूहों को एक्सटेंशन की टेंशन दूर होने का इंतजार था अब उनकी योजनाओं को पंख लगेंगे। आवासीय योजनाओं के विकास के साथ ही शैक्षिक संस्थान भी अस्तित्व में आएंगे।

    नोएडा एक्सटेंशन योजना के अस्तित्व में आने के साथ ही कुछ शैक्षिक समूहों ने एक्सटेंशन में एजुकेशन हब का सपना देखा था। उनकी सोच थी कि एक्सटेंशन में रहने वालों की आने वाली पीढ़ी के लिए शैक्षिक संस्थानों की आवश्यकता होगी। शिक्षा का भविष्य देखते हुए करीब आधे दर्जन एजुकेशनल ग्रुप में एक्सटेंशन में स्कूल से लेकर तकनीकी संस्थान तक के लिए भूमि आवंटित कराई। इसमें कुछ ने नींव तक रख दी थी, लेकिन एक्सटेंशन पर सामने आए बवाल में उनकी योजना गुम सी हो गई। लगा कि योजना खटाई में पड़ जाएगी। अब एनसीआर प्लानिंग बोर्ड को मंजूरी मिलने के बाद उनके उम्मीदें भी कुलाचें मारने लगी हैं। उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है। उम्मीद की जा रही है कि जैसे-जैसे एक्सटेंशन में रहने वाले परिवारों की संख्या बढ़ेगी वैसे-वैसे शैक्षिक संस्थानों की आवश्यता भी होगी। जानकारों की माने तो नोएडा एक्सटेंशन के आवासीय योजनाएं नोएडा और ग्रेटर नोएडा में तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों के लिए निवास का एक नया ठिकाना होगा। यदि सबकुछ ठीक रहा तो नोएडा एक्सटेंशन में भी एक एजुकेशन एक्सटेंशन नजर आएगा।



    dainik jagran
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  • बिल्डरों की प्रतिक्रियाएं

    निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा। दो साल में हमारे दोनों प्रोजेक्ट बनकर तैयार हो जाएंगे। हम दो साल में बायर्स को उनके मकान बनाकर दे देंगे। हमें उम्मीद है कि इस फैसले से सभी को राहत मिलेगी। - राकेश यादव, प्रबंध निदेशक-अंतरिक्ष ग्रुप

    अथॉरिटी से अनुमति पत्र मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू करेंगे। मास्टर प्लान को जो मंजूरी मिली है, उसके हिसाब से नया प्लान बनेगा। नए नक्शे के हिसाब से निर्माण कार्य शुरू करेंगे। - विनीत गुप्ता, प्रबंध निदेशक- अजनारा बिल्डर्स

    मास्टर प्लान को मंजूरी मिलना सुखद है।अगले दस दिनों में हम अपने प्रोजेक्ट पर निर्माण कार्य शुरू कर देंगे। ढाई से तीन साल के अंदर बायर्स को उनके आशियाने बनाकर दे दिये जाएंगे। - आरके अरोड़ा, सीएमडी-सुपरटेक।

    http://www.livehindustan.com/news/location/rajwarkhabre/article1-story-1-0-255362.html&locatiopnvalue=1
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  • पूरा होगा लाखों लोगों के आशियाने का सपना


    ग्रेटर नोएडा। एनसीआर के शहरों में आशियाने के जितने विकल्प नोएडा एक्सटेंशन में हैं, उतने कहीं नहीं। भले ही यह ग्रेनो का हिस्सा रहा हो, लेकिन नोएडा के नजदीक होने का फायदा बिल्डरों ने खूब उठाया। प्राधिकरण की बोर्ड बैठक ने जब नोएडा से एक्सटेंशन तक मेट्रो को मंजूरी दे दी तो और महत्व बढ़ गया है। अब लाखों लोगाें के आशियाने का सपना सच होगा।

    दो साल पहले जब बिल्डरों ने अपने प्रोजेक्ट लांच किए थे तो उस दौरान पूरा देश आर्थिक मंदी से गुजर रहा था। लेकिन बिल्डरों ने सस्ते दर पर फ्लैट बाजार में उतारकर सामान्य वर्ग के लोगों के आशियाने के सपनों को पूरा करने का मौका दिया था। मंद पड़े प्रॉपर्टी बाजार में गरमी आ गई थी।

    यहां तक कि एक बिल्डर ने जब सस्ते फ्लैट निकाले तो छह हजार प्लैट बिकते देर नहीं लगी। पूरी बुकिंग के बाद बिल्डर ने फ्लैट बुक करने वाले परिवारों को बुलाया था। हजारों की संख्या में लोगों का नोएडा एक्सटेंशन में पहली बार आना हुआ था। अगर सब कुछ ठीक चलता रहता तो अब तक एक्सटेंशन में लोग रहना शुरू कर देते।

    हालांकि दो साल पहले और अब की बात में अंतर हो गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट से भी बिल्डरों को राहत मिल गई थी और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने भी अब मास्टर प्लान को हरी झंडी दे दी है। लेकिन बिल्डरों ने फ्लैटों के दाम बढ़ा दिए हैं। यह बात जरूर है कि निवेशकों के लिए कई विकल्प हैं और संभावना है कि शनिवार से ही एक्सटेंशन में फिर मेला लगना शुरू हो जाएगा। निवेशकों ने समझदारी यह भी दिखाई थी कि उन्होंने बुक करने के बाद संगठित होकर अपनी आवाज उठाई और नोएडा में हजारों लोगों की रैली निकालकर जता दिया था कि वह अकेले नहीं हैं।

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  • नोएडा एक्सटेंशन : हजारों करोड़ रुपये लगे थे दांव पर


    ग्रेटर नोएडा। एनसीआर में सबसे चर्चित नोएडा एक्सटेंशन विवाद में हजारों करोड़ रुपये दांव पर लगे थे। समाधान के बाद वैसे तो सबके चेहरे पर खुशी है, लेकिन सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान ग्रेनो प्राधिकरण को ही हुआ। बिल्डरों ने नुकसान की भरपाई फ्लैटों के दाम बढ़ाकर की।

    नोएडा एक्सटेंशन में दो हजार हेक्टेयर में सिर्फ बिल्डरों को प्राधिकरण ने प्लाट दिए थे। जिसमें छोटे-बड़े मिलाकर करीब 100 बिल्डर हो गए। वैसे तो 70 बिल्डरों को जमीन मिली थी, लेकिन उन्होंने छोटे-छोटे टुकड़ों में बिल्डरों को जमीन दे दी थी। नोएडा एक्सटेंशन में बिल्डरों ने करीब 10 हजार करोड़ रुपये लगा दिए। जमीन का आवंटन और निर्माण में पैसा खर्च हुआ। हालांकि करीब एक लाख फ्लैट बुक भी हो गए, लेकिन उनसे ज्यादा धन नहीं मिला। कोर्ट में विवाद फंसने के बाद बिल्डरों ने प्राधिकरण को किस्त देनी बंद कर दी। निवेशक भी चुप बैठ गए। बैंकों ने भी निवेशक, बिल्डरों के पैसों को रोक दिया था। ग्रेनो प्राधिकरण ने नोएडा एक्सटेंशन में विकास कराने के लिए करीब तीन हजार करोड़ रुपये खर्च कर दिए। काम रुकने के बाद विकास कार्य भी बेकार हो गए। सड़कें टूट गईं और निर्माण सामग्री खराब हो गई। अब प्राधिकरण को इतने ही पैसे और खर्च करने होंगे, तब जाकर विकास कार्य चालू हो सकेंगे।

    विवाद का खामियाजा ठेकेदारों को भी उठाना पड़ा। बिल्डरों और प्राधिकरण ने इसलिए भुगतान नहीं किया क्योंकि कार्य पूरा नहीं हो सका था। लिहाजा करीब दो हजार करोड़ रुपये की चपत ठेकेदारों को भी लगी है। हजारों की संख्या में काम कर रहे मजदूरों को बिना तनख्वाह ही जाना पड़ा। किसानों ने भी कई बार तोड़फोड़ की, जिसका नुकसान सीधे बिल्डरों को पहुंचा। चूंकि अब नए सिरे से सबकुछ करना होगा। जो काफी महंगा पड़ेगा।

    प्राधिकरण को झटका पर झटका लगा
    बिल्डरों ने किस्त नहीं दी। जितने समय तक कोर्ट में विवाद रहा, उस दौरान तक कोई पेनाल्टी नहीं लगेगी। ग्रेनो के करीब 30 हजार आवंटियों ने प्राधिकरण को किस्त देनी बंद कर दी थी। हालात यह हो गए कि प्राधिकरण पर धीरे- धीरे करीब छह हजार करोड़ रुपये का कर्ज हो गया। हर माह 200 करोड़ रुपये का कर्ज देना पड़ रहा है। बैंकों ने प्राधिकरण को कर्ज देना इसलिए बंद कर दिया था, क्योंकि प्राधिकरण के पास गिरवी रखने के लिए जमीन नहीं थी। सच्चाई यह है कि विवाद और खिंचता तो प्राधिकरण दिवालिया ही हो जाता।

    Amar Ujala
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  • नोएडा एक्सटेंशन अतीत के आइने से :


    -2007 में नोएडा एक्सटेंशन के गांवों का अधिग्रहण किया गया।
    -2009-10 में इसकी आवंटन प्रक्रिया शुरू की गई।
    -1.50 के करीब बनने हैं नोएडा एक्सटेंशन में फ्लैट।
    -6 लाख की आबादी आने वाले पांच साल में होगी।
    -2031 मास्टर प्लान में 25 लाख आबादी का अनुमान।
    -2010 से एक्सटेंशन में ग्रुप हाउसिंग कंपनियों ने लांचिंग की।
    -2010 जुलाई से दिसंबर के बीच किसान कोर्ट पहुंचे।
    -15 अप्रैल 2011 को हाईकोर्ट ने शाहबेरी गांव का अधिग्रहण रद किया।
    -156.093 हेक्टेयर शाहबेरी की जमीन वापस करने के आदेश जारी हुए।
    -6 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को सही करार दिया।
    -ग्रेटर नोएडा पर दस लाख का जुर्माना लगाया।
    -चार बिल्डर के प्रोजेक्ट पूरे और तीन आंशिक रूप से हुए प्रभावित।
    -6000 से अधिक निवेशक शाहबेरी में हुए प्रभावित।
    -19 जुलाई को हाईकोर्ट ने पतवाड़ी गांव में 589 हेक्टेयर जमीन का आवंटन रद कर दिया।
    -धारा-चार व 17 के गलत इस्तेमाल का लगाया आरोप।
    -10 बिल्डर के 13 प्रोजेक्ट सीधे-सीधे हुए प्रभावित।
    -20,000 से ज्यादा खरीदार और निवेशक प्रभावित हुए।
    -इस दो माह की अवधि के दौरान ही नोएडा एक्सटेंशन सहित ग्रेटर नोएडा व नोएडा के करीब 64 गांवों के लोगाें ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
    -7 अगस्त 2011 को हाईकोर्ट ने समझौते के लिए निर्देश दिए।
    -12 सितंबर तक 1280 किसानों को नई दर से मुआवजा दिया गया और इसके शपथ पत्र कोर्ट में जमा हुए।
    -अगले दिन से कोर्ट में लगातार सुनवाई शुरू हुई।
    -2011 सितंबर महीने के अंत में सुनवाई पूरी हुई और फैसला सुरक्षित किया गया।
    -21 अक्तूबर 2011 को नोएडा और ग्रेटर नोएडा के तीन गांवों का अधिग्रहण रद कर दिया, जबकि 60 गांव के किसानों को 64 प्रतिशत बढ़ी हुई दर से मुआवजा और दस फीसदी विकसित जमीन देने का आदेश जारी किया गया।
    -21 अक्तूबर-2011 को होईकोर्ट ने निर्देश जारी किया कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान-2021 का अध्ययन करके मंजूरी दें, तब तक निर्माण कार्य पर रोक रहेगी।
    -24 दिसंबर-2011 को उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव आचार संहिता लागू होने की वजह से प्लानिंग बोर्ड से मामले को मार्च तक टाल दिया।
    -2012 के मार्च, अप्रैल और मई में तमाम तारीखों को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म रखा। इसके बाद 28 मई को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने स्थिति साफ की।
    -मई पहले सप्ताह में केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने उच्च स्तरीय बैठक करके एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की रूटीन कमेटी को ग्रेटर नोएडा मास्टर प्लान-2021 पर निर्णय लेने का अधिकार दिया।
    -किसानों और नोएडा एक्सटेंशन बायर्सं एसोसिएशन ने कई बार धरना-प्रदर्शन किया।
    -28 जून 2012 को एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की गठित कमेटी ने सभी बिंदुओं पर मंत्रणा करते हुए कुछ शर्तोें के साथ उसकी स्वीकृति के लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड को भेज दिया है। अब आगामी कुछ दिनों में ही एक्सटेंशन के भविष्य का निर्णय बोर्ड लेगा।
    -24 अगस्त 2012 को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमलनाथ ने मास्टर प्लान पर हस्ताक्षर करके इसे हरी झंडी दिखा दी है। एनसीआर बोर्ड की सिफारिशों पर पहले से ही कार्रवाई शुरू हो चुकी है, जिसमें नोएडा एक्सटेंशन तक मेट्रो पहुंचाने की प्रक्रिया जारी है।

    Amar Ujala
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  • नोएडा एक्सटेंशन---गांवों के ठप पडे़ विकास कार्य भी होंगे शुरू

    ग्रेटर नोएडा। नोएडा एक्सटेंशन का मामला सुलझ जाने से अब प्राधिकरण का ध्यान गांवों में ठप पड़े विकास कार्यों की तरफ भी जाएगा। पिछले एक साल सब कुछ बंद था। कोर्ट के स्टे और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की मंजूरी को लेकर प्राधिकरण ने विकास कार्यों को बंद करा दिया था। गांवों में जैसा था वैसा ही छोड़ दिया गया। ग्रामीणों को रास्तों से निकलने, पानी रुकने समेत अन्य परेशानियां पैदा होने लगी। गांवों के लोगों ने कई बार प्राधिकरण और प्रशासनिक अफसरों से गांवों में विकास कार्य कराने के लिए गुहार लगाई, लेकिन यह शुरू नहीं कराए जा सके। हालांकि मास्टर प्लान को एनसीआर बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद गांवों के विकास कार्य शुरू होने के लिए भी रास्ता खुल गया है। जिससे अब सभी गांवों के अधूरे कार्य पूरे कराए जा सकेंगेे।

    Amar Ujala
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  • नोएडा एक्सटेंशन--सभी को अपना हक मिलेगा : रमा रमण

    ग्रेटर नोएडा। प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने बिल्डर, किसान, निवेशक समेत सभी से अपील की है कि बिना सबके सहयोग से नोएडा एक्सटेंशन में हो चुके नुकसान की भरपाई नहीं हो पाएगी। जिसको जितना हक मिलना चाहिए, उसे मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि शहर के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए सभी ने मिलकर प्रयास किए। विशेषकर किसानों के लिए उन्होंने कहा कि प्राधिकरण ने उनके लिए हमेशा दरवाजे खुले रखे। उनकी जो भी समस्याएं थीं, सुनी गईं। जितना संभव था, उसे पूरा भी किया गया है। मास्टर प्लान पास न होने के कारण पिछले एक साल से सभी पक्ष परेशान थे। अब मौका आया है कि सभी लोग प्राधिकरण पर विश्वास करें। सबसे पहली प्राथमिकता किसानों की ही है। जो भी वादे किए गए हैं, उनको प्राधिकरण पूरा करेगा, इसके लिए थोड़ा इंतजार भले ही करना पड़े। उन्होंने कहा कि किसानों से बात करके जमीन अधिग्रहण का काम फिर से शुरू किया जाएगा। जब किसान संतुष्ट हो जाएंगे, तभी प्राधिकरण उनकी जमीन लेगा। प्राधिकरण की यह भी प्राथमिकता है कि अब उद्योग स्थापित किए जाएं ताकि सभी को रोजगार मिल सके।

    Amar Ujala
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  • Crisis over, investors happy


    NOIDA: Thousands of middle-income families who have booked housing units in Noida Extension got a monsoon cheer as the NCR Planning Board cleared the Greater Noida Master Plan so that construction can resume on their dream homes. For the past year-and-a-half, the investment made by them by saving every paisa they could seemed to be going nowhere ever since the land acquisition row broke out in Greater Noida putting residential projects in disarray.

    The buyers fought court battles, staged rallies, resorted to dharnas and strived hard to ensure their homes see the light of the day. And finally, on Friday evening their untiring efforts bore fruit.

    Even though they came from diverse backgrounds, living miles apart from each other, buyers stood shoulder to shoulder with each other during the crisis. They formed groups and took their battle to the Allahabad high court in July last year, impleading upon the judiciary that they would be doomed to a life of financial crisis, given that they had exhausted their savings and were under the burden of housing loans, if their dream homes came crumbling down.

    With construction on stalled housing projects finally going to take off, for homebuyers, the concept of affordable housing in the NCR region would no longer be a mirage. "A big roadblock has been removed. It's a red-letter day in the life of each individual who has booked a housing unit in Noida Extension," said secretary of Noida Extension Flat Buyers' Welfare Association, GL Sagar.

    On Friday, restive over the fact that the final approval to the Master Plan had not been forthcoming from the planning board despite its technical committee having cleared it two months back, a group of homebuyers met Union urban development minister, Kamal Nath, the ex-officio chairman of the board, at his residence in New Delhi.

    "We were told by the minister that his approval had already been accorded and it was now upon the NCRPB to send the approved plan to the state government," said Chetan Tyagi, spokesperson of Noida Extension Flat Owners Association. "The NCRPB was immediately directed by the minister to send the plan to the UP government," added Tyagi.

    On Friday evening, social networking sites began to flood with messages of the master plan being cleared as buyers began sending congratulatory posts to each other. The Noida Extension Flat Owners and Members Association (NEFOMA) had not only kept the pressure up on the authorities for the clearance of the master plan, but had also kept its members informed of every minor development on the issue through its page on Facebook.

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  • Finally, Noida Extension projects get all-clear

    NOIDA: The NCR Planning Board finally approved Greater Noida's Master Plan-2021 on Friday, clearing the way for resumption of construction in hundreds of housing projects in the city, including the Noida 'Extension' area.

    The approval comes as a huge relief to lakhs of home buyers, particularly in projects floated in Noida Extension, and for real estate developers whose investments were locked up in these ventures. Construction had been halted in the area around a year ago, first due to litigation over compensation to farmers and then over approval of the master plan by NCRPB.

    Late on Friday, NCRPB communicated its order to UP housing secretary S N Shukla. The letter (a copy of which is with TOI) says that the draft Master Plan for Greater Noida-2021, in compliance with the Allahabad High Court order, had been "approved". NCRPB secretary general Naini Jayaseelan wrote that the plan had been passed "through circulation of members" of the planning board.

    Market watchers said the nod will lead to a major boost in economic activity in the region. "The resumption of construction work will increase employment opportunities and will have a direct impact on the construction business in NCR," said a government official.

    In its letter, the board has said the approval is subject to incorporation of certain conditions in the final master plan.
    These include provision for regional rapid rail transport line, expressways and a mass transit system, besides maintaining a mandatory green cover and providing housing for economically weaker sections.
    Minister had assured Greater Noida buyers

    The board had earlier suggested provisions for 20-25% housing for weaker sections in sector layout plans and a minimum of 16% area (3,580 hectare) of urbanizable area for green cover.
    Transport projects included in the plan are a regional rapid transport system linking Greater Noida with Khurja along the Aligarh railway line, a green-field expressway from Ghaziabad to Dadri and a mass rapid transport system link to Jewar. There is a provision of extension of the Metro line to Greater Noida, which has already been cleared by the Noida Authority.

    The Greater Noida Authority has to abide by the 'action plan' incorporated in the revised master plan mentioning the milestones of works to be undertaken in the city in a time-bound manner.
    The final clearance of the plan came from the planning board only hours after a group of home buyers had met Union urban development minister Kamal Nath. They had raised concern about the delay in the final clearance of the plan, two months after the board's technical committee had recommended it to NCRPB.


    Kamal Nath, who heads NCRPB, had assured the delegation that the plan had been cleared and would be shortly sent to the state government.

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  • Noida Extension no more affordable home option


    GREATER NOIDA: After waiting since May 2011, developers in Noida Extension have heaved a sigh of relief as now they would be able to resume work on housing projects and deliver them to the buyers. However, at the same time the builders have signalled that Noida Extension will no more be the affordable home option as it had been planned initially.

    "Our investments have been tied up in the projects without any earnings. This win would not have been possible without the patience of homebuyers who supported us throughout the land row," said Amrapali group CMD, Anil Sharma.

    "Homebuyers will not only enjoy a higher return on their properties booked last year, but will also avail the facilities of a well-planned city. The planning board has given stringent conditions for development of the region and stressed on environmental issues," said Supertech CMD and CREDAI (NCR) vice-president, RK Arora.

    "The master plan has incorporated things that exist in most Western countries. The revised plan has also made a provision of keeping 16% of the urbanizable area as a green belt. Development in Greater Noida is better planned than other NCR cities like Gurgaon and Faridabad. The green belt will be conserved by the Authority and it cannot be converted or shifted," said Mohit Arora, Supertech director.

    Ashok Gupta, Ajnara India MD, said, "With the infrastructure planned in Noida Extension, it will be the most sought after property destination in the times to come." Agreeing to this, Tapan Sangal, group CEO of Orris Infrastructure, said, "Approval of the Greater Noida master plan will establish new landmarks in the real estate sector."

    "This decision will improve the image of Greater Noida and Noida Extension," said director of Gaursons, Manoj Gaur. "The Gautam Budh Nagar administration has already revised the land rates, hence this is the best time to invest as in the long run prices could shoot further," said Sumit Khanna, MD, Unimexx Infrastructure.


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  • Originally Posted by fritolay_ps
    Noida Extension no more affordable home option


    GREATER NOIDA: After waiting since May 2011, developers in Noida Extension have heaved a sigh of relief as now they would be able to resume work on housing projects and deliver them to the buyers. However, at the same time the builders have signalled that Noida Extension will no more be the affordable home option as it had been planned initially.

    "Our investments have been tied up in the projects without any earnings. This win would not have been possible without the patience of homebuyers who supported us throughout the land row," said Amrapali group CMD, Anil Sharma.

    "Homebuyers will not only enjoy a higher return on their properties booked last year, but will also avail the facilities of a well-planned city. The planning board has given stringent conditions for development of the region and stressed on environmental issues," said Supertech CMD and CREDAI (NCR) vice-president, RK Arora.

    "The master plan has incorporated things that exist in most Western countries. The revised plan has also made a provision of keeping 16% of the urbanizable area as a green belt. Development in Greater Noida is better planned than other NCR cities like Gurgaon and Faridabad. The green belt will be conserved by the Authority and it cannot be converted or shifted," said Mohit Arora, Supertech director.

    Ashok Gupta, Ajnara India MD, said, "With the infrastructure planned in Noida Extension, it will be the most sought after property destination in the times to come." Agreeing to this, Tapan Sangal, group CEO of Orris Infrastructure, said, "Approval of the Greater Noida master plan will establish new landmarks in the real estate sector."

    "This decision will improve the image of Greater Noida and Noida Extension," said director of Gaursons, Manoj Gaur. "The Gautam Budh Nagar administration has already revised the land rates, hence this is the best time to invest as in the long run prices could shoot further," said Sumit Khanna, MD, Unimexx Infrastructure.


    Noida Extension no more affordable home option - The Times of India


    Ab so bhi jao
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  • hahahaha property sach main neend uda deti hain...LOL
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  • haa bhai fritolay so jaao, thanks for your support and such wide coverage of information
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  • नोएडा एक्सटेंशन को प्लानिंग बोर्ड की मंजूरी मिली


    एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की फाइनल मंजूरी से नोएडा एक्सटेंशन की टेंशन शुक्रवार को दूर हो गई। हालांकि बोर्ड ने उन शर्तों को बरकरार रखा है, जो जून में बोर्ड की तकनीकी समिति ने लगाई थीं लेकिन इन शर्तों के बावजूद अब माना जा रहा है कि जल्द ही अधर में लटके फ्लैटों का निर्माण फिर से शुरू हो जाएगा। इस फैसले का फायदा उन लाखों लोगों को होगा, जिनका नोएडा एक्सटेंशन के फ्लैटों में पैसा फंसा हुआ है।

    एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की तकनीकी समिति ने 28 जून को ही नोएडा एक्सटेंशन के मास्टर प्लान को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दे दी थी। समिति ने आधा दर्जन शर्तें लगाई थीं, जिन्हें एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने भी कायम रखा है। बोर्ड की सदस्य सचिव नैनी जयशीलन ने भी बोर्ड के इस फैसले की पुष्टि की है लेकिन उन्होंने कहा कि शर्तें जस की तस हैं।

    गौरतलब है कि नोएडा एक्सटेंशन का मामला उस वक्त उलझ गया था, जब अक्टूबर 2011 में हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के लिए मास्टर प्लान की मंजूरी लेने का आदेश दिया था। उस वक्त इस एरिया में 67 बिल्डरों के साढ़े तीन लाख फ्लैटों का निर्माण कार्य चल रहा था और इसमें से लगभग डेढ़ लाख फ्लैट बिक चुके थे। ऐसे में फ्लैट लेने वालों का पैसा भी फंस गया। इस आदेश के बाद निर्माण कार्य ठप हो गया। तब से ही यह मामला एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के विचाराधीन था। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की तकनीकी कमिटी ने मंजूरी मिलने के बाद बोर्ड की मंजूरी के लिए वैसे तो बैठक बुलानी होती है लेकिन बैठक बुलाने में लंबा वक्त लगता इसलिए वाया सर्कुलेशन इसके लिए बोर्ड के सभी सदस्यों को फाइल भेजकर मंजूरी ली गई। इन सदस्यों में दिल्ली, यूपी, राजस्थान और हरियाणा के मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। इस बोर्ड के चेयरमैन शहरी विकास मंत्री होते हैं। शुक्रवार को उन्होंने भी इस फाइल पर अपनी मंजूरी दे दी।

    इस मंजूरी के साथ ही जो छह शर्तें लगाई गई हैं, वे इस प्रकार हैं :
    1. वॉटर सप्लाई, सीवरेज, ड्रेनेज, पावर और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट भी नियमों के मुताबिक रखना होगा।
    2. अर्बन एरिया का 16 फीसदी ग्रीन बेल्ट के लिए रखना होगा और उसे मेंटेन करना होगा।
    3. अथॉरिटी की रेजिडेंशल स्कीमों में गरीबों और मिडिल क्लास फैमिली के लिए 20 से 25 फीसदी छोटे प्लॉट या फ्लैट रिजर्व रखने होंगे।
    4.नॉन पल्यूटिंग क्लीन टेक्नॉलजी इंडस्ट्री के लिए प्लॉट रिजर्व रखना होगा।
    5. अथॉरिटी का एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट पार्ट मास्टर प्लान का हिस्सा होगा।
    6. मेट्रो, एमआरटीएस और नया एक्सप्रेस वे बनाना होगा।

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