पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • thanks for maintaining such a great flow. There was not a single day when i havent visited this thread. Reason i have invested here 2 yrs back in nirala and suferred a lot. Now there seems some hope (if SC doesnt play a 'amrish puri'). Frustration had went to such a scale that i brought another property in noida and written NX off but i hope now NX (and Nirala) has a chance.
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  • it depends on the location, how much construction has been done and current 'paper' price of project. in case of nirala they have conveyed that resale can be at 2500 but havent heard anything back once i shared details. but i think resale should be possible at 2300-2350
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  • Originally Posted by prateekplaza
    I have a Flat in Golf Homes Amrapali..in 12th floor..
    just wanted to ask you , if i would be able to sell it for rs. Rs.2550 including floor charges and PLC.. It has 2.04 lac extra charges for Covered car parking, club memebership,IFMS, IDFC, and Lease Rent..


    You can not sell Amrapali before 90% payment just check ur BBA. Well can i ask y u want to sell there?? Are you looking 2 buy in another project??
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  • नोएडा एक्सटेंशन में लौटने लगे मजदूर


    ग्रेटर नोएडा : एनसीआर प्लानिंग बोर्ड द्वारा ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान 2021 को मंजूरी दिए जाने के बाद नोएडा एक्सटेंशन में बिल्डर परियोजनाओं के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। बोर्ड का पत्र मिलते ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बिल्डरों को इसके लिए हरी झंडी दे चुका है। यह जानकारी मिलते ही मजदूर भी काम की तलाश में एक्सटेंशन लौटने लगे हैं। मंगलवार को एक्सटेंशन में निवेशक के साथ मजदूर भी यह जानकारी लेने के लिए बिल्डरों के ऑफिस पहुंचे कि कब तक निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। एक्सटेंशन की बाधा दूर होने की खुशी सभी के चेहरों पर साफ झलक रही है।

    नोएडा एक्सटेंशन में दस माह पहले हाईकोर्ट के निर्देश पर निर्माण कार्य बंद होने से पहले सौ से अधिक बिल्डर परियोजना व शैक्षिक संस्थान में कार्य चल रहा था। प्राधिकरण ने भी सेक्टर दो व तीन में आंतरिक विकास शुरू करा रखे थे। इनमें दस हजार से अधिक मजदूर काम पर लगे हुए थे। निर्माण कार्य बंद होते ही सभी मजदूर दूसरे स्थानों पर रोजगार की तलाश में चले गए। इससे एक्सटेंशन वीरान हो गया। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से जैसे ही मास्टर प्लान के पास होने की जानकारी मजदूरों को मिली, तो वह भी रोजगार की तलाश में टेंपो में भरकर एक्सटेंशन पहुंचने शुरू हो गए हैं। रामकिशोर, राजपाल, गोकुल, नंदकिशोर, घनश्याम आदि राजमिस्त्री का कार्य करने वालों ने बताया कि एक्सटेंशन में निर्माण कार्य बंद होने से उनका रोजगार भी छिन गया था। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि यहां जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू हो।

    सजने लगी हैं एक्सटेंशन में दुकानें
    सं, ग्रेटर नोएडा : नोएडा एक्सटेंशन में बिसरख, पतवाड़ी, रोजा याकूबपुर, ऐमनाबाद, इटेड़ा व साबेरी आदि 11 गांव आते हैं। इस माह पहले बिल्डर परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूर इन्हीं गांवों में किराए पर कमरा लेकर रहते थे। इससे इन गांवों में जगह-जगह सब्जी, दाल, आटा, चावल, दूध, दही, मिठाई, चाय, ढाबा आदि खानपान की दुकान बड़ी संख्या में लगने लगी थी। इसे गांव के भूमिहीन किसानों का भी दुकानदारी से व्यवसाय शुरू हो गया था। दस माह पहले निर्माण कार्य बंद होने से दुकान बंद हो गई थी। अब मजदूर फिर से लौटने लगे हैं, तो लोगों ने भी अपनी दुकाने फिर से सजा दी है। बिसरख गांव के जसपाल का कहना है कि यह खुशी का बात है।

    dainik jagran
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  • Housing work starts on war footing


    GREATER NOIDA: Noida Extension following instructions from the Greater Noida Authority, developers have hinted at putting some burden even on the existing buyers due to hike in input costs.

    Developers on Monday met the Greater Noida Authority CEO and were issued letters in the evening to resume construction. "We are back to work. Labourers have been called in after getting clearance from the Authority. We expect to deliver our first housing project in the next six months," said CREDAI (NCR) vice-president and Amrapali group CMD, Anil Sharma.

    Even bookings have begun on a full-fledged scale. "Around 50-60 units are being booked each passing day even though we have revised our rates to Rs 3,200 per sq feet," said RK Arora, CMD Supertech, which is constructing 25,000 residential units in the region.

    When asked about putting financial burden on old buyers, Arora said, "Material costs have gone up by 20% while manpower cost has also been increased by 15%. At the same time, the Authority has passed the compensation burden on developers, which is around Rs 200 per sq feet. Under such circumstances, we have demanded that the Authority allow increase in floor area ratio from 2.75 to 3.5%. If the Authority allows additional FAR for free, then only would we be able to put no burden on existing homebuyers," said Arora.

    CREDAI (western UP) president and Gaursons MD, Manoj Gaur, said some developers are already reeling under losses and without passing the burden on existing buyers, their project would not get completed. "Each developer has a different sale agreement with the buyers. Only those developers can demand additional financial support from existing buyers who have mentioned a clause citing additional financial burden to be shared by the allottees. If developers have not mentioned this clause, buyers are not bound to pay additional charges," said Gaur.

    "The Authority has already offered developers waiving off interest and payment of instalments during the zero period. I think giving free FAR to developers would not be possible by the Authority as the state government has issued an order that it can only be purchased," Gaur added.

    Housing work starts on war footing - The Times of India
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  • Developers asked to start projects 'immediately'



    GREATER NOIDA: The Greater Noida Industrial Development Authority (GNIDA) has decided to not lose any more time and ordered developers to resume construction work in Noida Extension immediately. This direction comes as all pre-conditions to resume construction work in the area have been finally met.

    In a meeting on Monday with 25 major developers, Greater Noida Authority CEO Rama Raman directed them to resume all stalled construction work with "immediate effect." Raman also asked them to start paying their due instalments for the period between October 21, 2011 and August 2012 so that the Authority can resume halted development work.

    The developers owe the Authority a total of about Rs 20,000 crore as instalment for the land allotted to them in Noida Extension almost three years ago. However, as per the initial agreement, the entire amount is to be paid to the Authority in instalments spread over eight years.

    GNIDA has already collected nearly Rs 300 crore from the developers. However, following the Allahabad high court order on October 21, 2011, directing developers and GNIDA to stop work in Noida Extension, most developers stopped paying the due instalments. Developers owe the Authority around Rs 1,000 crore for the period between October 21, 2011 and now.

    However, the Authority has not given any deadline to the developers to pay up and has also assured them that no interest will be charged from them on the due instalments. This respite of the 'zero period' will also be applicable to buyers regarding their instalments due to the developers.

    In a meeting with homebuyers in the evening, Raman assured them that developers will not hike the rates for existing investors. The Authority has also decided to call a meeting with leading banks to assure them of the marketability of Noida Extension projects.

    "After a lot of effort, we have managed to remove all barriers in the way for the Noida-Extension projects. Hence, we want to request all stakeholders to cooperate and ensure that all projects are completed at the earliest," said Raman. "We have asked all developers to resume work at the earliest, pay up their dues and be considerate towards the existing home buyers," Raman said.

    Developers asked to start projects 'immediately' - The Times of India
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  • Noida Extension Metro work put on fast track


    GREATER NOIDA: Noida Authority has decided to fast track the Metro rail project to the area. While the project, which will connect Noida to Greater Noida via Noida Extension till Bodaki, has been in the pipeline for over a year, Authority CEO Rama Raman has decided to discard the old Detailed Project Report (DPR) and prepare a fresh one for the proposed 35km line.

    This Metro service will be developed on a Public Private Partnership (PPP) model independent of DMRC projects proposed in the area. Once the new DPR is prepared, the Authority will initiate tender proceedings within a month. The previous DPR had slated the project's cost around Rs 5,000 crore, but the current cost is estimated to be around Rs 7,500 crore, officials said. The Authority is yet to set a new timeframe for completion of the project.

    "A Metro service between Noida and Greater Noida is essential because close to 1.5 lakh homes are expected to come up in the area. Now that housing projects have resumed, the Metro too needs to be taken up so that once people begin residing in Noida Extension they can avail its services," Raman said.

    The Authority has decided to go for a PPP model for the Metro project considering "high cost." The model has already been approved by the state government.

    There is a simultaneous plan to connect Noida and Greater Noida that is to be taken up by the Delhi Metro rail Corporation and the Noida Authority whereby the existing blue line will be extended from the sector 32 city centre to Greater Noida via sectors 51, 78, 101 in Noida and Dadri Road, Knowledge Park 2 and Pari Chowk in Greater Noida. However, the Greater Noida Authority claims that since this plan does "not connect all areas in the city, the new 35 km long route has been planned."

    Noida Extension Metro work put on fast track - The Times of India
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  • ye to jyada ho gaya :).... I told you before

    नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना शहर को जोड़ने की योजना
    जेवर तक मेट्रो लाने की तैयारी
    अमर उजाला ब्यूरो
    ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा ही नहीं, मेट्रो का लुत्फ तो जेवर के लोगों को भी मिलेगा। यमुना प्राधिकरण ने चौथे चरण में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना शहर को मेट्रो सेवा से जोड़ने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके लिए लाइफ लाइन 130 मीटर चौड़ी सड़क को चुना गया है। इसी के सहारे मेट्रो लाइन खींचने की योजना है।

    यमुना प्राधिकरण की योजना कासना से लाइफ लाइन 130 मीटर चौड़ी सड़क को जेवर तक ले जाने की है। बोड़ाकी रेलवे जंक्शन से ही मेट्रो का ट्रैक जेवर तक बनेगा। प्राधिकरण ने जो 21 हजार प्लाटों की योजना निकाली है, उसके बीच से होकर मेट्रो लाने की योजना बन रही है। चूंकि यमुना एक्सप्रेसवे से कई जगह जाने के विकल्प मौजूद हैं, इसलिए मेट्रो का सबसे बेहतर रूट यही रहेगा। इससे दिल्ली से नोएडा-ग्रेटर नोएडा और यमुना शहर तक पहुंचने में आसानी होगी। प्राधिकरण सीईओ रमा रमन का कहना है कि शहरों को आपस में जोड़ने के लिए सड़क मार्ग के साथ-साथ मेट्रो की भी जरूरत है। जैसे-जैसे शहरों में जनसंख्या बढे़गी, ये मेट्रो से जुड़ते चले जाएंगे।
    इससे पहले पहले चरण में नोएडा के ज्यादातर सेक्टरों को मेट्रो से जोड़ने का अभियान चल रहा है। दिल्ली से नोएडा को जोड़ा जा चुका है। अब शेष सेक्टरों के लिए योजना बनी है और काम भी शीघ्र शुरू होने वाला है। दूसरे चरण में नोएडा से ग्रेटर नोएडा को जोड़ने के लिए प्रक्रिया चल रही है। सबसे पहले मेट्रो नोएडा एक्सटेंशन पहुंचेगी। पृथला खंजरपुर के हिंडन पुल तक ग्रेनो की लाइफ लाइन 130 मीटर चौड़ी सड़क शुरू होती है। यह कासना तक 28 किलोमीटर लंबी है। इसी के सहारे मेट्रो एक्सटेंशन तक पहुंचनी है।

    तीसरे चरण में नोएडा से ग्रेटर नोएडा के परी चौक और बोड़की तक मेट्रो प्रोजेक्ट पूरा होना है। बोड़ाकी को जंक्शन बनाया जाएगा। इसके लिए प्राधिकरण पीपीपी मॉडल पर काम कर रहा है और शीघ्र ही प्रोजेक्ट शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। दरअसल, प्राधिकरण ने बोड़ाकी रेलवे हब के लिए 10 हजार हेक्टेयर जमीन छोड़ रखी है।
    बोड़ाकी रेलवे हब बनाया जाएगा मेट्रो जंक्शन
    130 मीटर चौड़ी सड़क पर मेट्रो दौड़ाने की योजना
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  • मजदूर लाने के लिए हो रही मशक्कत
    नोएडा एक्सटेंशन में निर्माण चालू करने की इजाजत मिलते ही बढ़ी रौनक
    अमर उजाला ब्यूरो
    ग्रेटर नोएडा। नोएडा एक्सटेंशन में काम शुरू करने की इजाजत मिलने के बाद बिल्डरों के समक्ष मजदूरों की कमी की समस्या खड़ी हो गई है। इस बीच, प्राधिकरण ने साफ किया है कि जिन बिल्डरों ने कंप्लीशन और नक्शा अब तक पास नहीं कराया, वे निर्माण कार्य शुरू करने से पहले इस प्रक्रिया को पूरा करा लें।
    नोएडा एक्सटेंशन में फिलहाल मजदूर ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। आसपास के गांवों में कोई मजदूरी नहीं करना चाहता, इसलिए बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पूर्वी उत्तर प्रदेश से ही उम्मीद है। हजारों की संख्या में मजदूरों की जरूरत है, जिस कारण निर्माण कार्य शुरू करने में देरी हो रही है। एक बड़ी दिक्कत यह भी है कि ठेकेदार आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। इसकी वजह यह है कि उन्हें काम पूरा होने के बाद ही भुगतान होना था, लेकिन जब 21 अक्तूबर 2011 को कोर्ट से स्टे हुआ, तो बिल्डरों और प्राधिकरण ने ठेकेदारों का पेमेंट भी रोक दिया। ठेकेदारों के पास जो जमा पूंजी थी, उसे वे लगा चुके थे। एक ठेकेदार का कहना है कि जो मजदूर एक्सटेंशन में काम कर रहे थे, वे अचानक स्टे और किसानों की मारपीट-हो हल्ले की वजह से बिना पैसे के ही भाग गए। भले ही उनका नुकसान हुआ हो, लेकिन अभी वे आने की हिम्मत नहीं कर रहे हैं। पुराना भुगतान मिलने के बाद ही वे वापस लौट सकते हैं।

    इस बीच, एक्सटेंशन के कई बिल्डर ऐसे हैं जिन्होंने कंप्लीशन और नक्शा पास कराए बिना ही काम शुरू किया था। अब प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि काम शुरू करने से पहले सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएं। शुरू में फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) 1.75 था, जिसे बाद में बढ़ाकर 2.75 कर दिया गया। एफएआर बढ़ने से फ्लैटों की संख्या बढ़ गई है। इसलिए, बदले नियम के मुताबिक कंपलीशन और नक्शा पास होना जरूरी है।

    आवंटियों को भेजे जा रहे नोटिस
    प्राधिकरण ने सभी आवंटियों को नोटिस भेजना शुरू कर दिया है। अतिरिक्त भार के अलावा रुकी हुई किस्तों को जमा करने के लिए कहा जा रहा है। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि 25 अगस्त से पेनाल्टी भी शुरू कर दी गई है। इसलिए, जितनी जल्दी हो सके, पैसा जमा कराएं।

    किसानों को मनाना चुनौती
    प्राधिकरण का कहना है कि बिल्डर किसानों से बात करें और गांवों में विकास के लिए मदद करें। इसलिए, बिल्डरों ने सबसे पहले किसानों से संपर्क शुरू किया है। इसे वे चुनौती मान रहे हैं।
    सड़कों के डिवाइडरों पर काम शुरू करा दिया गया है।
    स्टे और हंगामे के बाद भाग गए थे मजदूर
    कंप्लीशन लेने, नक्शा पास कराने को कहा
    नोएडा एक्सटेंशन में प्राधिकरण, किसान, बिल्डर और निवेशकों समेत सभी को झटका लगा था। मास्टर प्लान पास कराने के लिए सभी का सहयोग मिला है। एक्सटेंशन को दोबारा खड़ा करने के लिए सभी का सामूहिक प्रयास और तालमेल जरूरी है, क्योंकि यह शहर सभी का है।
    रमा रमन, प्राधिकरण सीईओ

    क्षेत्र में ताजा हालात की जानकारी लेने के िलए लोग पहुंच रहे हैं।
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  • good.
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  • जेवर तक मेट्रो का रूट बदला

    ग्रेटर नोएडा : जेवर तक प्रस्तावित मेट्रो परियोजना के रूट में फेरबदल किया गया है। अब मेट्रो यमुना एक्सप्रेस-वे के बराबर से होकर नहीं जाएगी, बल्कि 130 मीटर रोड से होकर जेवर तक मेट्रो पहुंचेगी। जेवर तक 130 मीटर रोड से मेट्रो जाने पर ग्रेटर नोएडा के कई क्षेत्रों को इसका फायदा मिलेगा। हालांकि, जेवर तक मेट्रो परियोजना साकार होने में अभी कई वर्ष लग सकते हैं। प्राधिकरण ने मास्टर प्लान में अभी से मेट्रो का प्रावधान किया है। यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण ने वर्ष 2008 में एक्सप्रेस-वे होकर जेवर तक मेट्रो ले जाने की योजना तैयार की थी। ग्रेटर नोएडा से जेवर तक प्रस्तावित फेज-एक मास्टर प्लान में प्राधिकरण ने मेट्रो का रूट प्रस्तावित कर दिया था। प्राधिकरण ने अब मेट्रो का रूट परिवर्तित कर दिया है। रूट की सुविधा व भविष्य में आबादी को देखते हुए प्राधिकरण ने ऐसा किया है। नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक मेट्रो लाने के लिए कई साल से कवायद चल रही है। ग्रेटर नोएडा मेट्रो का रूट नोएडा सिटी सेंटर से एक्सप्रेस-वे, परी चौक और 105 मीटर रोड होकर बोड़ाकी रेलवे स्टेशन तक प्रस्तावित है। पहले यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण की तैयारी थी कि परी चौक से मेट्रो को यमुना एक्सप्रेस-वे होकर जेवर तक मोड़ दिया जाएगा। ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण ने 130 मीटर रोड का प्रस्तावित किया है। ग्रेटर नोएडा का 130 मीटर रोड सिरसा गांव से होकर डाढ़ा, ओमीक्रॉन, गुलिस्तानपुर होते हुए नोएडा एक्सटेंशन में पर्थला खंचरपुर के पास नोएडा से जोड़ा गया है। यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण ने सिरसा गांव से होकर सेक्टर-18, 20 होते हुए 130 मीटर रोड बनाने का प्रस्ताव किया है। इसी 130 मीटर चौड़ी सड़क से जेवर तक मेट्रो का रूट निर्धारित किया है।

    dainik jagran
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  • Housing work starts on war footing

    GREATER NOIDA: Noida Extension following instructions from the Greater Noida Authority, developers have hinted at putting some burden even on the existing buyers due to hike in input costs.

    Developers on Monday met the Greater Noida Authority CEO and were issued letters in the evening to resume construction. "We are back to work. Labourers have been called in after getting clearance from the Authority. We expect to deliver our first housing project in the next six months," said CREDAI (NCR) vice-president and Amrapali group CMD, Anil Sharma.

    Even bookings have begun on a full-fledged scale. "Around 50-60 units are being booked each passing day even though we have revised our rates to Rs 3,200 per sq feet," said RK Arora, CMD Supertech, which is constructing 25,000 residential units in the region.

    When asked about putting financial burden on old buyers, Arora said, "Material costs have gone up by 20% while manpower cost has also been increased by 15%. At the same time, the Authority has passed the compensation burden on developers, which is around Rs 200 per sq feet. Under such circumstances, we have demanded that the Authority allow increase in floor area ratio from 2.75 to 3.5%. If the Authority allows additional FAR for free, then only would we be able to put no burden on existing homebuyers," said Arora.

    CREDAI (western UP) president and Gaursons MD, Manoj Gaur, said some developers are already reeling under losses and without passing the burden on existing buyers, their project would not get completed. "Each developer has a different sale agreement with the buyers. Only those developers can demand additional financial support from existing buyers who have mentioned a clause citing additional financial burden to be shared by the allottees. If developers have not mentioned this clause, buyers are not bound to pay additional charges," said Gaur.

    "The Authority has already offered developers waiving off interest and payment of instalments during the zero period. I think giving free FAR to developers would not be possible by the Authority as the state government has issued an order that it can only be purchased," Gaur added.








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