पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
Read more
Reply
16355 Replies
Sort by :Filter by :
  • Originally Posted by cookie
    Thanks for the info
    Now change your ID to "iamontv" :D

    Its another paid news by Supertech :(
    CommentQuote
  • aaj, baki ke project ko kuch nahi kaha, bas apna supertech aur amarapali bech rahe the. Diwali tak 3500 ka rate pahuncha denge. Bank loan de ya na de :)
    CommentQuote
  • Everything is so sugar coated on this show...and anchor claiming they know which projects to stay away from with logic and proof...Just that he is not revealing his logic...feel like slapping him hard...
    CommentQuote
  • Zee business NE show was more like Homeshop18 where they sell products. Arora ji and anil ji sitting on :couch2::couch2: and there so called expert who even claimed 3500 psf till Diwali.
    CommentQuote
  • I also believe that rates are going to increase in future. And I am saying it on basis of my experience of past.
    Even after so many issues in NE for past around 1.5 years rates are increasing and they going to increase because there is no reason why not unless SC deliver some unfavorable verdict. The rate of 3000sq.ft. is still not very expensvie if you see all the factors. Only because there are some issues rates are 3000sq.ft. else they would have been much more.

    Also all the locations and projects are not same. So you may still be able to buy 3k sq. ft. after few month but surely that will not be in projects like Gaur City or any other of that kind.
    CommentQuote
  • what is 2) Lease Rent - 85/- Per Sqft

    Originally Posted by Nicky78
    Booked flat in GC11, flat size is 1500, 8th floor. Price was 39.475 L plus
    1) Covered Car Parking - 1.5 Lacs
    2) Lease Rent - 85/- Per Sqft
    3) Electricity Meter Charges - 5000/- Per KVA
    4) Power Back Up- 20000/-Per KVA
    5) Service Tax - 2.575% on basic Cost & @10.3% on Extra Cost

    If you want you can include car parking in BSP for loan purpose and in that case builder will show car parking is free of cost but in that case BSP will increase
    CommentQuote
  • नोएडा एक्सटेंशन में मकान ध्वस्त हुए तो लगा लिया टेंट
    संवाददाता, ग्रेटर नोएडा : नोएडा एक्सटेंशन के हैबतपुर गांव में हरित पट्टी पर बस रही अवैध कॉलोनी को ध्वस्त किए जाने के बाद भी कुछ खरीदार भूखंड से कब्जा हटाने को तैयार नहीं हैं। मंगलवार को कुछ लोगों ने ध्वस्त मकानों के पास टेंट लगा लिया। प्राधिकरण ने लोगों को मलबा हटाने के लिए एक दिन की मोहलत दी है। बुधवार तक मलबा नहीं हटाने पर उसे भी जब्त करने की चेतावनी दी गई है। प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी हरीश वर्मा ने बताया कि मंगलवार एक और चेतावनी जारी की गई है कि दोबारा किसी ने कब्जा करने का प्रयास किया तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेगी। इधर, पुलिस ने अज्ञात कॉलोनाइजरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उनकी पहचान कर गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है। नोएडा एक्सटेंशन के हैबतपुर गांव में प्राधिकरण ने सोमवार को हरित पट्टी में बनी अवैध कॉलोनी को ध्वस्त किया था। इस दौरान पथराव व लाठीचार्ज भी हुआ था। जिन लोगों के मकान ध्वस्त हुए, उनमें से कुछ लोगों ने मंगलवार को अपना सामान समेटना शुरू कर दिया। वहीं कुछ लोग अब भी प्राधिकरण की जमीन को छोड़ने को तैयार नहीं है।



    Dainik jagran
    CommentQuote
  • पिछले दस माह में 25 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा
    अमर उजाला ब्यूरो
    नोएडा। हैबतपुर की घटना प्रशासन के लिए नई नहीं है। नोएडा में किसानों की आड़ में भूमाफिया जमकर मलाई काटने में जुटे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगता है कि प्राधिकरण के पास 17 लाख वर्गमीटर जमीन पर कब्जे की गोपनीय रिपोर्ट मौजूद है। पिछले दस महीने में ही करीब 25 एकड़ यानी एक लाख वर्गमीटर जमीन अवैध कब्जों का शिकार हो चुकी है।
    सोना उगलने वाली नोएडा की जमीन पर घात लगाने वालों की कमी नहीं है। इनमें गांव से सटी हुई जमीन के साथ डूब क्षेत्र में भी कॉलोनी काटी जा रही हैं। हैबतपुर में सरकारी जमीन से कब्जा हटाकर अरबों रुपये की भूमि वापस प्राधिकरण के खाते में पहुंची। खास बात है कि इसका विरोध सिर्फ उन लोगों ने किया, जिन्होंने सस्ती दर पर जमीन खरीदी। ग्रामीणों के लिए आंदोलन की आए दिन चेतावनी देने वाले किसान नेता दूर से ही हाथ सेकते नजर आए। पिछले दिनों नोएडा चेयरमैन राकेश बहादुर और सीईओ संजीव सरन ने अभियंताओं और भूलेख विभाग के अफसरों को अतिक्रमण और अवैध कब्जों पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई का निर्देश जारी किया था।
    भूलेख विभाग के अधिकारियों ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि आपसी समन्वय न होने से जमीनों पर जमकर अवैध कब्जे हो रहे हैं। स्थानीय किसान नेताओं के साथ मिलकर दूसरे राज्यों के भूमाफिया यहां पैसा लगा रहे हैं। सितंबर 2011 से अक्तूबर 2011 के बीच हुए गोपनीय सर्वे में 17 लाख वर्गमीटर जमीन पर कब्जा मिला। इसमें शहर के कई सेक्टर भी शामिल हैं। इसके बाद दिसंबर 2011 से अगस्त 2012 तक अलग-अलग गांवों में करीब 25 एकड़ पर कब्जा हो चुका है। खास बात है कि अधिकतर क्षेत्र प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित हो चुका है। कई क्षेत्रों में कब्जा भी प्राप्त किया जा चुका है। नोएडा में 54 गांव अधिसूचित हैं, जिनमें से करीब चार दर्जन ऐसे हैं, जहां सरकारी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। पिछले दिनों यमुना खादर में प्राधिकरण ने गुपचुप कार्रवाई कर 6000 वर्गमीटर जमीन मुक्त कराई। इस पर फरीदाबाद के व्यक्ति ने चारदीवारी खींचकर प्लॉट काटने की तैयारी कर रखी थी।
    17 लाख वर्गमीटर का है प्राधिकरण के पास रिकाॅर्ड
    ग्रामीण सेक्टर में जमकर काटी जा रहीं कॉलोनियां
    CommentQuote
  • ..
    Attachments:
    CommentQuote
  • क्या चाहते हैं किसान

    नोएडा एक्सटेंशन की टेंशन कम होती दिख रही थी कि किसानाें में फिर दिखे आक्रोश ने निवेशकों को बेचैन कर दिया है। असल में किसान समझ नहीं पा रहा कि बिल्डर व खरीदारों के हक में फैसला आने के साथ ही काम कैसे शुरू हो जाता है, जबकि उन्हें लेकर आए फैसले पर अमल में देरी क्यों हो जाती है? वह कभी बिल्डर साइट्स पर जाकर तो कभी सड़कों पर उतरकर अपनी बात कहने की कोशिश कर रहा है। बार-बार की मंत्रणा व फैसले से सुलझा हुआ दिख रहा यह विवाद वहीं खड़ा दिख रहा हैं....


    नोएडा एक्सटेंशन की राह अभी आसान नहीं है। आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिससे बिल्डरों से लेकर प्राधिकरण और निवेशकों तक को झटका लग रहा है। किसान सबसे पहले अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। प्राधिकरण उन्हें संतुष्ट नहीं कर पा रहा है, लेकिन यह जरूर आगाह कर रहा है कि बिल्डरों को भयभीत किया गया, तो समस्या का समाधान मुश्किल होगा। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मास्टर प्लान को मंजूरी मिलने के 15 दिन बाद भी हालात में बदलाव नहीं आ रहा है। रविवार को किसानों ने कई बिल्डरों की साइटों पर ताला जड़ा था। सोमवार विभिन्न प्रोजेक्टों में इक्का दुक्का मजदूर ही काम करते नजर आए।


    तीन गुटों में बंट गए हैं किसान
    नोएडा एक्सटेंशन क्षेत्र में किसानों के तीन गुट बन गए हैं। एक गुट जब आंदोलन करता है, तो दूसरे की कोशिश उससे बड़ा करने की होती है। तीसरा गुट अपने हिसाब से चल रहा है। वास्तविकता यह है कि जिन किसानों को लाभ मिलना है, वे सच्चे मन से किसी गुट के साथ नहीं हैं। वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि किसी तरह उनकी मांगें पूरी हों।


    प्राधिकरण ने जो दिया...
    एक चौथाई किसानों को मिला है 64 फीसदी मुआवजा
    बैक लीज की शर्तें कम
    आबादी मिली, लेकिन अभी किसान वंचित


    हम एकजुट हैं
    ‘किसानों के मुद्दे पर किसान संघर्ष समिति एकजुट है। कार्यों की व्यस्तता होने के कारण रोज मिलना और बैठना मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद समय-समय पर प्राधिकरण अफसरों से अपनी मांगों पर जानकारी प्राप्त की जा रही है। कुछ लोगों को अलग होना था, वह पहले ही दूसरे संगठन में जा चुके हैं।’
    -महेश अवाना,
    प्रवक्ता किसान संघर्ष समिति

    पतबाड़ी के प्रधान रेशपाल का कहन है कि एक साल पहले हमने किसानों को मनाकर प्राधिकरण से समझौता कराया था, लेकिन अब प्राधिकरण की भाषा बदल गई है। किसान हितों की अनदेखी की जा रही है।
    वीर सिंह नागर का आरोप है कि प्राधिकरण ने सीधे बिल्डरों को लाभ दिया और किसानों को बिल्कुल भूल गया। प्राधिकरण के तेवर बिल्कुल बदल गए हैं। प्राधिकरण किसानों की समस्या जल्द हल करे।

    किसानों की मांगें
    कोर्ट के आदेश पर 64 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा
    वारिसान प्रमाण पत्र तहसील स्तर से मिले
    बैक लीज का झंझट खतम हो
    किसानों की आबादी छोड़ी जाए
    गांवों में सड़क, सीवर, पानी, बिजली मिले
    एक्सटेंशन में इंटर और डिग्री कॉलेज खोला जाए
    भूमिहीन किसानों को 120 वर्ग मीटर का प्लाट मिले
    बिल्डर को जमीन देने पर आरक्षण के लाभ से भरपाई
    किसान परिवार को शिक्षा और नौकरी में आरक्षण

    Amar Ujala
    CommentQuote
  • एक्सटेंशन क्षेत्र में कार्रवाई का हुआ असर
    कब्जे खुद हटाने में जुटे लोग
    अमर उजाला ब्यूरो
    ग्रेटर नोएडा। हैबतपुर में प्राधिकरण की कार्रवाई के बाद मंगलवार को इसका असर दिखाई दिया। हिंडन नदी के किनारे कुछ लोग ईंटें गिरवाकर निर्माण की तैयार कर रहे थे। मंगलवार को डर के चलते ये ईंटें हटाई जा रही थीं। नोएडा एक्सटेंशन मार्ग पर फ्री होल्ड प्लॉट उपलब्ध होने की सूचना लिखे कई तंबू लगे थे।
    मंगलवार को वे भी गायब मिले। क्षेत्र में जेसीबी मशीन से होर्डिंग हटाने का काम जारी रहा। प्राधिकरण की सोमवार को की गई कार्रवाई के बाद से कई प्रॉपर्टी डीलरों के दफ्तर बंद हो गए और होर्डिंग भी हटा लिए गए हैं। मंगलवार को प्राधिकरण दस्ते की पुलिस ने मौका मुआयना करके अफसरों को रिपोर्ट दी।
    इस बीच, प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने मंगलवार को अधीनस्थ अफसरों की बैठक लेकर चेतावनी दी कि किसी भी क्षेत्र में अगर कोई अवैध कब्जा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित डिवीजन के अफसर की होगी।

    एसपी अशोक कुमार का कहना है कि हैबतपुर में प्रॉपर्टी डीलरों ने प्राधिकरण की ग्रीन बेल्ट की जमीन लाल डोरे से बाहर बताकर लोगों को बेची। ऐसे प्रॉपर्टी डीलरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्राधिकरण अफसरों को पत्र लिखा गया है। प्राधिकरण से हैबतपुर में सक्रिय प्रॉपर्टी डीलरों को चिह्नित करने को कहा गया है। एसपी ने कहा कि पीड़ित लोग प्रॉपर्टी डीलरों के खिलाफ मामला दर्ज कराएं, पुलिस भी कार्रवाई करेगी।

    अफसरों पर कार्रवाई की मांग
    नोएडा। पूर्व मंत्री नवाब सिंह नागर ने हैबतपुर गांव मामले में प्राधिकरण के संबंधित अभियंताओं और लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अफसरों की शह पर भूमाफिया सरकारी जमीन पर कब्जा कर सस्ती दर पर बेच देते हैं। उनका कहना है कि हैबतपुर में तोड़े गए मकान मजदूरों और गरीबों के हैं। निर्माण करते समय इन्हें रोका नहीं गया। इसके बाद कार्रवाई तब हुई, जब ये अपना सब कुछ लगा चुके थे। तब वे अवर अभियंता, सहायक और परियोजना अभियंता कहां थे, जब यह कॉलोनी काटी जा रही थी। लेखपाल उस समय क्या कर रहे थे, जब इस जमीन की रजिस्ट्री हुई।
    प्रॉपर्टी डीलरों ने भी समेटे अपने तंबू
    सीईओ ने अफसरों को चेताया
    CommentQuote
  • एग्रीमेंट फॉर लीज लागू होने के आसार
    ग्रेटर नोएडा में भी
    सबलीज से पहले मिल सकेगा संपत्ति बेचने का हक
    नोएडा (ब्यूरो)। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से आवंटित संपत्तियां सब लीज से पहले बेचने का अधिकार आवंटियों को जल्द मिलने की उम्मीद है। निबंधन विभाग के प्रस्ताव को स्वीकारते हुए सीईओ ने इसे अगली बोर्ड बैठक में ले जाने की बात कही है। अगर बोर्ड ने मंजूर कर लिया तो लागू करने से पहले औपचारिकता पूरी करने के लिए इसे शासन केपास भेजा जाएगा।

    डीआईजी स्टांप वीडी शर्मा ने बताया कि सोमवार को मीटिंग के दौरान सीईओ रमा रमण को निबंधन विभाग का यह प्रस्ताव दिखाया गया। यमुना प्राधिकरण के स्वीकार किए जाने की भी जानकारी उनको दी गई। इस पर सीईओ ने भी सहमति देते हुए कहा कि अगली बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। उन्होंने इसे तर्कसंगत बताते हुए मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई। डीआईजी का कहना है कि अगर यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया तो ग्रेटर नोएडा के हजारों आवंटियों को जो किसी कारण अपनी प्रॉपर्टी बेचना चाहते हैं, बेचने का अधिकार मिल जाएगा। एग्रीमेंट फॉर लीज करवा सकेंगे। इस पर पांच प्रतिशत स्टांप शुल्क लगेगा, जो रजिस्ट्री के समय समायोजित हो जाएगा।

    दरअसल, प्राधिकरण से संपत्ति का आवंटन होने के बाद कब्जा मिलने में कई साल लग जाते हैं। इस बीच अगर कोई आवंटी अपनी संपत्ति बेचना चाहे, तो उसे पावर ऑफ अटॉर्नी का सहारा लेना पड़ता है। सबलीज न होने के कारण लीगल तरीके से संपत्ति का ट्रांसफर नहीं हो पाता।
    बोर्ड बैठक में प्रस्ताव ले जाने को तैयार प्राधिकरण
    डीआईजी स्टांप के साथ बैठक में बनी सहमति
    CommentQuote
  • Haibatpur to take legal route against demolition


    GREATER NOIDA: A day after residents of Haibatpur clashed with Gautam Budh Nagar police and resisted attempts of the administration to free nearly 40 acres of encroached green belt in the area, several villagers have decided to seek judicial reprieve. Villagers alleged that the demolition drive was totally unfair as most have valid land documents to prove ownership. Meanwhile, the police have registered a case against nearly 50 people for rioting and interrupting the administration's work.

    With their houses flattened to the ground, residents held a meeting in their village to decide on their next move. They claimed that they had "valid legal documents" to prove that the "unauthorized" land falling in the 80m-wide green belt belonged to them and they would not give up until their woes were addressed. "Our lands have been duly registered with the registrar and their details are also available on the district's official website," said Ravinder Kumar, a resident who bought his 100 sq yard plot in 2008. "I paid Rs 5 lakh for this plot and put in all my savings to make a home for my family. Today, I have nothing left," Kumar said.

    Around 20 residents have decided to approach the court for help. "While 20 people have approached me with their documents, there are nearly 250 plots carved out in the area. All these people to seek redressal from the judiciary," said another resident, Sanjay Prasad, who paid Rs 10 lakh for his plot.

    Angry at being rendered homeless, the villagers blamed the administration and the Authority for their predicament. "Before buying this property, we approached the tehsildar, patwari and other administration officials and were told that the land was clean and not disputed or acquired by the Greater Noida Authority," said Prasad. "Now, after so many years, our homes have been razed for no fault of ours," he added.

    Residents asked that if no construction was allowed on the said land, then why didn't it reflect in the land records or on the government's website. Alleging a huge nexus between officials, they asked why the government was not taking any action against the guilty.

    The officials, on their part, maintained that the land was earmarked for the 22km-long and 130m-wide link road between Holland Factory in Greater Noida and NH-24, Ghaziabad. "During the land acquisition process, land records continue to show online. Only when the process is complete that records shows that it has been acquired for a particular project. In the meantime, many innocent people get fooled by fly-by-night property dealers who know this and take advantage," said an official.

    Police and administration have now urged residents to complain against such property dealers. The SP (Rural), Ashok Kumar, said a case will be registered against all property dealers and others involved in allotting the Authority's green area to the innocent villagers.

    Meanwhile, an FIR under Sections 147, 148 and 427 of the IPC has been registered at Bisrakh police station against the agitating villagers for Monday's incident.



    TOI
    CommentQuote
  • Originally Posted by hindustan
    Zee business NE show was more like Homeshop18 where they sell products. Arora ji and anil ji sitting on :couch2::couch2: and there so called expert who even claimed 3500 psf till Diwali.


    Yes,its same like Homeshop18 and Star cj.

    in yesterday episode both builder's were doing marketing for their projects without confidence.

    Even Anchor was trying to match his voice with them and saying we are responsible channel and have enough data.

    and today 8pm again we have new episode for same.
    CommentQuote
  • Originally Posted by BlueCockroch
    Aaj ka kisaan Mother India ya Do Bigha Zameen wala kisaan nahi raha. Aaj ka kisaan bahoot bada dhan kuber ban gaya hai. Uska lalach khatm hee nahi ho raha.

    Mehanat jo kabhi kisaan ka gehna thi aaj Middle class ke pass girvee rakhhi hai. Kisaan ab mehnat ki nahi thaggi ki khaana chahta hai. Chaar chaar bar muawja le liya ab to muaf karo bhayi.

    Zameen ab kisaan ki maa nahi rahi ab wo property ya real estate ho gayi hai.


    that is very true. but its become truth in every walk of life. everybody is just running after money
    CommentQuote