पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • समझौते के लिए अथॉरिटी पहुंचे 3 गांव के किसान


    ग्रेटर नोएडा

    किसानों की याचिकाओं पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक ओर सुनवाई चल रही है तो दूसरी ओर अथॉरिटी अफसरों का किसानों से समझौते का प्रयास अब भी जारी है। सोमवार को 3 गांव के किसानांे ने अथॉरिटी सीईओ के साथ मीटिंग कर समझौते के लिए शर्तें रखीं। अथॉरिटी अफसरांे ने किसानांे को हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद समझौते का आश्वासन दिया है।

    सोमवार को किसान नेता देवेंद्र मुखिया और मान सिंह के नेतृत्व में घोड़ी-बछेड़ा, बिसरख और पतवाड़ी के सैकड़ों किसान अथॉरिटी पहुंचे। किसानों का कहना है कि अथॉरिटी ने उन्हें समझौते के लिए बुलाया था। सीईओ रमा रमण व अन्य अथॉरिटी अफसरांे के साथ किसानों ने मीटिंग की। घोड़ी-बछेड़ा गांव के किसानों ने कहा कि उन्होंने मुआवजे के लिए नहीं बल्कि आबादी और 6 पर्सेंट प्लॉट को लेकर कोर्ट की शरण ली है। उनकी आबादी की समस्या अब तक नहीं सुलझी है। इसके अलावा किसानों को 6 पर्सेंट विकसित प्लॉट भी नहीं मिले हैं। अगर अथॉरिटी इन दोनांे समस्याओं का हल कर दे तो किसान अपनी रिट वापस ले लेंगे। बिसरख गांव के किसानों ने कहा कि अगर अथॉरिटी पतवाड़ी की तर्ज पर गांव के किसानों से समझौता करती है तो वे रिट वापस ले लेंगे। वहीं पतवाड़ी गांव के जिन किसानांे ने अब तक समझौता नहीं किया गया है, उनका कहना है कि वह तभी समझौता करेंगे जब उनके मन के मुताबिक आबादी की जमीन छोड़ी जाएगी। सीईओ ने किसानों की मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने किसानांे से कहा कि सुनवाई पूरी होने के बाद वह सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करेंगे और समझौते का प्रयास करेंगे
    -navbharat times
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  • एसडीएम से की मुआवजा दिलाने की मांग

    रिठौरी, समाउद्दीनपुर, कैमराला चक्रसेनपुर, लुहारली गांव के किसानों ने गेल से शेष मुआवजा राशि देने की मांग करते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों का कहना है कि कोट गांव से एनटीपीसी तक निकाली गई गेल की पाइपलाइन के लिए 100 रुपये/वर्गमीटर की दर से मुआवजा दिया गया था। वहीं उन्हें 74.34 रुपयेा/वर्गमीटर की दर से ही मुआवजा दिया गया। उस समय आश्वासन दिया गया था कि समान मुआवजा दे दिया जाएगा। लेकिन अब तक मुआवजा नहीं दिया गया है। ग्रामीणों ने सोमवार को एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर शेष मुआवजा दिलाने की मांग की।

    -navbharat times
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  • सीईओ से मिले कई गांवों के किसान


    नोएडा, सं : नोएडा एक्सटेंशन के पतवाड़ी, बिसरख, हैबतपुर व इटेड़ा गांव के किसानों ने सोमवार को ग्रेटर नोएडा के सीईओ रमा रमन से मुलाकात की। किसानों ने कहा कि वे हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिकाओं को वापस ले लेंगे, लेकिन पहले प्राधिकरण को किसानों की आबादी छोड़ने का शपथ पत्र देना होगा। किसानों की मांग पर प्राधिकरण गंभीरता से विचार कर रहा है।
    पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण की सुलह हो चुकी है। समझौते के तहत किसानों को 550 रुपये प्रति वर्गमीटर का अतिरिक्त मुआवजा दिया गया है। किसानों ने अतिरिक्त मुआवजा लेने के बाद भी कोर्ट में दाखिल याचिकाओं को वापस नहीं लिया है। सोमवार की हुई मुलाकात में सीईओ ने समझौता कर चुके किसानों से याचिकाएं वापस लेने का आग्रह किया। पतवाड़ी के किसान मान सिंह ने कहा कि प्राधिकरण ने किसानों की आबादी तो छोड़ दी है, लेकिन लिखित में कुछ नहीं दिया गया। भविष्य में प्राधिकरण अपने वादे से न मुकरे, इसलिए किसानों को प्राधिकरण का शपथ पत्र चाहिए। इसके मिलते ही याचिकाएं वापस ले ली जाएंगी। घोड़ी बछेड़ा गांव के किसानों ने भी सीईओ से मुलाकात की। किसानों ने आबादी अधिग्रहण का आरोप लगाते हुए कहा कि वे बेघर होने की स्थिति में आ गए हैं

    -Dainik jagran
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  • हाईकोर्ट में आज से लगातार होगी सुनवाई


    ग्रेटर नोएडा: नोएडा एक्सटेंशन समेत अन्य गांवों में जमीन अधिग्रहण मामले की हाईकोर्ट में मंगलवार से फिर लगातार सुनवाई होगी। हाईकोर्ट ने अब तक दो दर्जन गांवों की सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई को लेकर प्राधिकरण के अधिकारी सोमवार की शाम इलाहाबाद के लिए रवाना हो गए।

    मालूम हो कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण के 65 गांवों के किसानों ने जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हाईकोर्ट में 495 याचिकाएं दायर कर रखी हैं। हाईकोर्ट की बड़ी बेंच 12 सितंबर से एक-एक गांव करके लगातार सुनवाई कर रहा है। शनिवार व रविवार को अवकाश होने से सुनवाई नहीं हुई। मंगलवार से कोर्ट से अन्य गांवों की सुनवाई करने का निर्णय लिया है। नोएडा एक्सटेंशन के गांव पतवाड़ी समेत दो दर्जन गांवों के मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। सभी गांवों की सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट फैसला सुनाएगा। उम्मीद है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह तक सभी गांवों की सुनवाई पूरी हो जाएगी। सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने के लिए प्राधिकरण के अधिकारी सोमवार शाम इलाहाबाद रवाना हो गए। किसान, बिल्डर व निवेशक भी अपना पक्ष रखने के लिए हाईकोर्ट के लिए रवाना हुए हैं।

    -Dainik jagran
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  • मायावती के गांव में रिकार्डों की छानबीन, क

    मायावती के गांव में रिकार्डों की छानबीन, कल हो सकती है सुवाई

    Source: bhaskar news | Last Updated 10:19(19/09/11)



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    नोएडा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण की मुसीबत बढ़ा दी है। कोर्ट ने मुख्यमंत्री मायावती के गांव बादलपुर में बनने वाले पार्क, हैलीपैड और सड़क आदि के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन का ब्यौरा तलब करके नई मुसीबत पैदा की है।



    प्राधिकरण के अधिकारी शनिवार को रिकार्ड की छानबीन में लगे रहे। मंगलवार को कोर्ट में बादलपुर की जमीन अधिग्रहण मामले पर सुनवाई हो सकती है।



    बीते सोमवार से इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा नोएडा एक्सटेंशन, मुख्यमंत्री मायावती के गांव बादलपुर सहित अन्य गांवों से लगातार याचिकाएं दायर हो रही हैं। शुक्रवार तक कोर्ट में 8 गांवों की सुनवाई हो चुकी है।



    बादलपुर में हैलीपैड, पार्क और स्पोट्र्स काम्पलेक्स बनाने के लिए भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। कुछ जगहों पर भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है।



    बादलपुर सहित आसपास के गांवों के करीब 300 किसानों ने अधिग्रहण के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की है। मंगलवार को सुनवाई संभव है। उधर, कोर्ट के निर्देश के बाद प्राधिकरण की मुसीबत बढ़ गई है।



    प्राधिकरण सूत्रों की मानें तो शनिवार को प्रॉपर्टी व लैंड विभाग ने रिकार्डों को खंगाला। कौन सी जमीन किस प्रयोजन के लिए ली गई थी और उसका लैंड यूज क्यों बदला गया आदि सवालों के जवाब की तैयारियों में अधिकारी जुट गए हैं।
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  • सुनवाई तक अन्य गांवों के किसानों से समझौता नहीं


    ग्रेटर नोएडा: समझौते के बाद भी पतवाड़ी गांव के कुछ किसानों को कोर्ट में देख प्राधिकरण को झटका लगा है। किसानों के रवैये को देख कोर्ट का फैसला आने के बाद ही प्राधिकरण कोई कदम उठाना चाहता है। हालांकि इटैड़ा व हबैतपुर गांव के कुछ किसान अब भी समझौते के लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें प्राधिकरण इंतजार करने को कह रहा है।

    नोएडा एक्सटेंशन समेत अन्य गांवों में जमीन अधिग्रहण को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू होने से पहले प्राधिकरण ने किसानों से समझौता करने का पूरा प्रयास किया था। पतवाड़ी गांव के करीब साढ़े बारह सौ किसानों से समझौता हो चुका है। इसके अलावा इटैड़ा व पतवाड़ी गांव के कुछ किसानों ने समझौते पर हस्ताक्षर किया। 12 सिंतबर से हाईकोर्ट की बड़ी बैंच ने सुनवाई शुरू कर दी। समझौता कर अतिरिक्त मुआवजा उठा चुके पतवाड़ी गांव के कुछ किसान समझौते से मुकर गए। जमीन अधिग्रहण को लेकर किसान हाईकोर्ट में मुकदमे की पैरवी करने पहुंच गए। प्राधिकरण कार्यालय में पत्र देकर किसानों ने समझौता करने से इंकार कर दिया। ऐसे किसानों को हाईकोर्ट में देखकर प्राधिकरण अधिकारियों को झटका लगा। इससे समझौते को लेकर प्राधिकरण अधिकारियों में संशय पैदा होने लगा। अब प्राधिकरण यह नहीं चाहता कि अन्य गांवों के किसानों से समझौता करे। प्राधिकरण को लग रहा है कि अन्य गांवों के किसान भी लाभ लेने के बाद समझौते से मुकर जा सकते हैं। कोर्ट में सुनवाई शुरू होने से पहले प्राधिकरण ने इटैड़ा व हैबतपुर गांव के कुछ किसानों से समझौता कर लिया था। सुनवाई शुरू होने के बाद भी किसान समझौते के लिए प्राधिकरण कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। प्राधिकरण अब समझौता करने के बजाय कोर्ट के फैसला का इंतजार कर रहा है। प्राधिकरण के एक अधिकारी का कहना है कि हाईकोर्ट में सुनवाई के चलते सीईओ समेत अन्य अधिकारी इलाहाबाद में व्यस्त हैं। इसलिए अभी किसानों से समझौता नहीं किया जा रहा है।




    -Dainik jagran
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  • समझौते को लेकर चलाया जन जागरण अभियान


    ग्रेटर नोएडा: ग्रामीण पंचायत मोर्चा ने मंगलवार को चिपियाना खुर्द व इटैड़ा गांव में जनजागरण अभियान चलाकर किसानों को समझौते के प्रारूप से अवगत कराया। चौपाल लगाकर किसानों से कहा गया कि प्राधिकरण के झांसे में आकर समझौते न करें।

    ग्रामीण मोर्चा के संयोजक रणवीर प्रधान ने चौपाल में कहा कि पतवाड़ी गांव में जो समझौता प्रारूप कुछ किसानों के साथ हुआ है। उस प्रारूप को शासन से स्वीकृति मिलने की सूचना प्राधिकरण ने किसानों को नहीं दी है। आबादी का स्पष्टीकरण अधिग्रहण से मुक्त गांव के माजरा के खसरा नंबर लीज डीड कराए जाने वाले खसरा नंबर व आठ फीसदी जमीन विकसित सेक्टरों में देना, गांव का विकास, शैक्षणिक संस्थानों व अन्य संस्थानों में आरक्षण की बाबत शासन की स्वीकृति के बाद ही प्राधिकरण समझौता शपथ पत्र दाखिल कर सकता है।

    समझौता प्रारूप में स्पष्ट लिखा है कि एक भी याचिका हाईकोर्ट में लंबित रहने पर समझौता लागू नहीं होगा। ऐसी स्थिति में प्राधिकरण समझौते को नकार सकता है। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम यादव ने कहा कि हाईकोर्ट में सुनवाई चलने तक किसानों को प्राधिकरण के साथ समझौता नहीं करना चाहिए। किसान हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार करें।

    -Dainik Jagran
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  • भूमि अधिग्रहण मामले की सुनवाई जारी

    इलाहाबाद : गौतमबुद्धनगर के नोएडा, ग्रेटर नोएडा व नोएडा एक्सटेंशन भूमि अधिग्रहण मामले में आज वृहदपीठ द्वारा उन गांवों की सुनवाई हुई जो प्रथम चरण की सुनवाई में शामिल नहीं हो सके थे। आज पाली, एमनाबाद, खानपुर, बिरौंदी आदि गांवों के किसानों की याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई कल भी जारी रहेगी।

    न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एसयू खान व न्यायमूर्ति वीके शुक्ला की वृहदपीठ सुनवाई कर रही है। मालूम हो कि किसानों की भूमि प्राधिकरण द्वारा अर्जेसी क्लाज के आधार पर अधिग्रहीत की गई थी जिसे याचिका में चुनौती दी गई है। आरोप लगाया गया कि अर्जेसी क्लाज दिखाकर प्राधिकरण द्वारा भूमि का कामर्शियल प्रयोग किया जा रहा है। उद्देश्य से विपरीत जाकर भूमि का प्रयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही किसानों को दिए गए मुआवजे को भी कम बताया गया है। गौतमबुद्धनगर जिले के कुल 40 गांवों की याचिकाएं दाखिल की गई हैं

    -Jagran News
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  • Originally Posted by fritolay_ps

    न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एसयू खान व न्यायमूर्ति वीके शुक्ला की वृहदपीठ सुनवाई कर रही है। मालूम हो कि किसानों की भूमि प्राधिकरण द्वारा अर्जेसी क्लाज के आधार पर अधिग्रहीत की गई थी जिसे याचिका में चुनौती दी गई है। आरोप लगाया गया कि अर्जेसी क्लाज दिखाकर प्राधिकरण द्वारा भूमि का कामर्शियल प्रयोग किया जा रहा है। उद्देश्य से विपरीत जाकर भूमि का प्रयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही किसानों को दिए गए मुआवजे को भी कम बताया गया है। गौतमबुद्धनगर जिले के कुल 40 गांवों की याचिकाएं दाखिल की गई हैं



    In earlier judgment, Allahabad HC asked GN authority for settlement… HC may also asked authority to pay additional compensation. In recent judgment of SC on Delhi land acquisition… SC has asked DDA to pay additional compensation in land acquisition (North Delhi-Rohtak Road )…so in NE case, If it is happened… than authority may again increase rates of Noida extension land which would impact allotment/circle rate of G.Noida…
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  • बिना सूचना दिए आवंटित कर दी जमीन
    Sep 20, 08:16 pm
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    ग्रेटर नोएडा, सं : कासना गांव में प्राधिकरण ने किसान को बिना सूचना दिए उसकी जमीन एक कंपनी को आवंटित कर दी है। किसान ने जमीन का मुआवजा भी नहीं उठाया है। किसान ने प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को ज्ञापन देकर कंपनी का आवंटन निरस्त करने की मांग की है।
    कासना गांव के ऋषिपाल, रणजीत व संदीप आदि का आरोप है कि गांव में उनके नाम 15 बीघा जमीन है। जमीन पर कुछ आबादी व फलदार बाग है। कुछ जमीन पर खेती होती है। जमीन अधिग्रहण के संबंध में उन्हें अब तक प्राधिकरण की तरफ से कोई सूचना नहीं दी गई। जमीन का मुआवजा भी नहीं उठाया है। प्राधिकरण ने उनकी जमीन एक कंपनी को आवंटित कर दिया है। कंपनी के कुछ कर्मचारी जब उनकी जमीन का जाकर पैमाइश करने लगे तब उन्हें आवंटन के बारे में जानकारी लगी। प्राधिकरण से संपर्क करने पर पता चला कि सर्वे के दौरान राजस्व कर्मचारियों ने गलत रिपोर्ट लगा दी, जिस जमीन पर बाग है, उसमें किसी दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज किया है। किसानों ने सीईओ को ज्ञापन देकर कहा कि गलत तरीके से आवंटित जमीन के बारे में उनकी शिकायत सुनी जाए और आवंटन निरस्त किया जाए।
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  • किसानों ने एडीएम लैंड का किया घेराव


    ग्रेटर नोएडा

    जमीन अधिग्रहण के बदले मिल रहे मुआवजे के चेक समय पर न देने और चेक देते समय रिश्वत मांगे जाने से गुस्साए दर्जनांे गांवांे के किसानों ने बीकेयू पदाधिकारियांे के साथ यमुना अथॉरिटी के एडीएम लैंड दफ्तर का घेराव किया। किसानांे ने एडीएम लैंड को दफ्तर में बंद कर दिया, जबकि तहसीलदार और नायब तहसीलदार को घेरकर बाहर अपने बीच बैठा लिया। करीब ढाई घंटे तक बंधक बने रहने के बाद एडीएम लैंड यमुना अथॉरिटी ने घेराव कर रहे बीकेयू पदाधिकारी और किसानांे को वार्ता करने के लिए बुलाया। लेकिन किसानांे ने यह कहकर साफ इंकार कर दिया कि बात करनी है तो किसानों के बीच आकर करें।

    एडीएम लैंड अरविंद कुमार किसानों के बीच पहंुचे और रिश्वत मांगने वाले अफसर और बाबूओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने व 15 दिनों में किसानांे को मुआवजे के चेक दिए जाने का आश्वासन दिया। इसके बाद बीकेयू पदाधिकारी किसानांे के साथ बीटा -2 स्थित यमुना अथॉरिटी दफ्तर पहंुचे। यहां किसानांे की 20 सूत्रीय मांगांे से संबधित ज्ञापन सौंपा, जिसमें तीन अथॉरिटी के किसानांे को पतवाड़ी के बराबर मुआवजा और आठ प्रतिशत आबादी, पुश्तैनी और गैर पुश्तैनी का भेद समाप्त करने व पुर्नवास नीति साल 1997 से लागू करने की मांगें शामिल थीं।

    सेक्टर अल्फा-2 स्थित यमुना अथॉरिटी एडीमए लैंड दफ्तर पहंुचने वाले यमुना अथॉरिटी एरिया के गांव भटटा पारसौल, रौनीजा, रीलखा, मुतैना, धनौरी, महमूदपुर समेत दर्जनांे गांवांे के किसानों का नेतृत्व बीकेयू के जिलाध्यक्ष अजयपाल शर्मा कर रहे थे। अजयपाल शर्मा ने बताया कि यमुना अथॉरिटी ने किसानों का मुआवजा 35 रुपये बढ़ाया है। किसान बढे़ हुए मुआवजे की फाइल तैयार करने और चेक देने पर रिश्वत मांगते हंै। बगैर रिश्वत लिए मुआवजे के चेक नहीं दिए जाते हैं। आरोप है कि एडीएम लैंड दफ्तर में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। किसान नेता अनिल कसाना ने कहा कि यमुना अथॉरिटी एडीएम लैंड मंे फैले भ्रष्टाचार से किसान परेशान हैं। किसानांे से मुआवजे की फाइल तैयार करने के नाम पर घूस ली जाती है। जो किसान घूस नहीं देता है, उसकी फाइल मंे कमियां बताकर रोक दी जाती हैं। किसान मुआवजे के चेक के लिए चक्कर लगाता रहता है। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार समाप्त नहीं हुआ तो बीकेयू दफ्तर को सील कर देगी।
    -Navbharat times
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  • हाई कोर्ट में हुई 22 गांवों की सुनवाई


    ग्रेटर नोएडा

    नोएडा , ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी एरिया के करीब 69 गंावों के किसानांे की जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हाई कोर्ट में दी गई याचिकाओं पर मंगलवार को फिर से सुनवाई शुरू हो गई। सबसे पहले यूपी की सीएम के पैतृक गांव बादलपुर के किसानांे की याचिकाआंे पर सुनवाई हुई। अथॉरिटी की ओर से काउंटर दाखिल न किए जाने की वजह से बादलपुर की सुनवाई स्थगित कर दी गई। बुधवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।

    किसानों का पक्ष रख रहे एडवोकेट जैदी ने कोर्ट को बताया कि बादलपुर के किसानों की जमीन अर्जेंसी क्लॉज लगाकर अधिग्रहीत की गई थी। अब यहां इंडस्ट्री के बजाय दो पार्क और हेलिपैड बन रहा है। अथॉरिटी की ओर से काउंटर फाइल दाखिल न करने की वजह से बादलपुर को छोड़कर बाकी गांवों की सुनवाई पूरी हो गई।

    किसानांे के वकील पंकज दूबे और प्रमेंद्र भाटी ने बताया कि कि अब तक 22 गांवों की सुनवाई पूरी हो चुकी है। मंगलवार को बादलपुर के बाद पाली , डाढा , ऐमनाबाद , बिरोड़ा , चूहड़पुर , सादौपुर , घरबरा , छपरौला , खैरपुर , अजायबपुर , नामौली , जैतपुर आदि गांवांे की पर सुनवाई हुई। बड़ी बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।


    -navbharat times
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  • Same condition in Noida extension.. Authority has stopped all development activities....

    यमुना एक्सप्रेस-वे के गांवों में विकास धीमा


    ग्रेटर नोएडा: किसान आंदोलन के कारण ग्रेटर नोएडा के गांवों में विकास कार्य ठप पड़ा हुआ है। इसका असर अब यमुना एक्सप्रेस-वे के गांवों में दिखाई देने लगा है। ज्यादातर गांवों में विकास की गति धीमी पड़ गई हैं। कई गांवों में बारातघर व सड़क निर्माण अधूरा पड़ा है। कर्ज में डूबे प्राधिकरण के पास आवासीय सेक्टरों में विकास कार्य शुरू करने के लिए बजट कम पड़ रहा है। गांवों के विकास कार्यो के लिए पैसा जुटाना प्राधिकरण के लिए भारी पड़ रहा है।

    विकास कार्यो के लिए प्राधिकरण ने यमुना एक्सप्रेस-वे के आसपास गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया था। करीब 16 गांवों की जमीन पर प्राधिकरण ने 2009 में 21 हजार भूखंडों की योजना लाई थी। इसके अलावा संस्थागत, बिल्डर्स ग्रुप हाउस हाउसिंग के लिए छह गांवों की जमीनों का अधिग्रहण किया है। जिन गांवों की जमीनों का अधिग्रहण किया गया है प्राधिकरण ने उन गांवों का शहर की तर्ज पर विकास कार्य कराने का निर्णय लिया था। सन 2011-12 के बजट में प्राधिकरण ने गांवों के विकास कार्य पर डेढ़ सौ करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय लिया था। विकास कार्यो में हर गांव में बारातघर, सड़क, सीवर, स्ट्रीट लाइट, स्कूल आदि का विकास कार्य शामिल था। करीब 20 गांवों में बारातघर निर्माण के लिए प्राधिकरण ने डेढ़ साल पूर्व योजना तैयार कर ली थी। कुछ गांवों में बारातघर का निर्माण पूरा हो चुका है। अभी कई ऐसे भी गांव है जहां पर बारातघर का निर्माण अधूरा पड़ा है, जबकि सीवर व सड़क का निर्माण अभी किसी गांव में पूरा नहीं हुआ है। कुछ गांव सड़क का निर्माण शुरू भी हुआ तो वह अधूरा पड़ा है। इधर, किसान आंदोलन के कारण जमीन आवंटन की प्रक्रिया ठप पड़ गई है। जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को मुआवजा देने में प्राधिकरण पांच हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूब चुका है। प्राधिकरण को हर माह 42 करोड़ रुपये कर्ज का ब्याज देना पड़ रहा है। नोएडा एक्सटेंशन में जमीन अधिग्रहण रद होने पर बैंकों ने यमुना प्राधिकरण को भी कर्ज देने से हाथ खड़ा कर दिया था। ऐसे में प्राधिकरण को गांवों के विकास कार्यो पर पैसा खर्च करने के लिए बजट कम पड़ रहा है। इसलिए प्राधिकरण विकास कार्यो के खर्च में कटौती कर रहा है

    -Dainik Jagran
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  • more news....
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  • Is there any update on NE issue... do you people feel that its on path of settlement for end users point of view or it looks doomed....
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