पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • फैसला आने के बाद होगा छह फीसदी आवंटन


    ग्रेटर नोएडा : जिन गांवों के किसानों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमीन अधिग्रहण को चुनौती दी है, उनमें न्यायालय का फैसला आने तक छह प्रतिशत का आवंटन नहीं होगा। पूर्व में आवंटित भूखंडों के विकास कार्यो को भी प्राधिकरण ने बंद करा दिया है। विवाद सुलझने तक भूखंडों की रजिस्ट्री, नाम परिवर्तन व एग्रीमेंट टू लीज भी बंद करा दी गई है। भूखंड मालिकों को अब इनके लिए कोर्ट के फैसले का इंतजार करना पड़ेगा।

    ग्रेटर नोएडा में किसानों को अर्जित भूमि की एवज में छह फीसदी जमीन मिलती है। इसको बढ़ाकर अब आठ फीसदी कर दिया गया है। प्राधिकरण नोएडा एक्सटेंशन के गांव पतवाड़ी, ऐमनाबाद, इटेड़ा, रोजा याकूबपुर व हैबतपुर के अलावा तुस्याना, सैनी, खेड़ा चौगानपुर, घोड़ी बछेड़ा, घरबरा, साकीपुर, जैतपुर-वैसपुर, बिरौंडी व बिरौंडा आदि गांवों के अधिकतर किसानों को छह प्रतिशत के भूखंडों का आवंटन कर चुका है। जिस जगह आवंटन किया गया था, वहां सड़क, सीवर, नाली व बिजली की तार लाइन आदि बनाने का विकास कार्य चल रहा था। इन गांवों के किसान हाईकोर्ट में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ याचिका दायर कर चुके हैं। इसे देखते हुए प्राधिकरण ने इन गांवों में विकास कार्यो को बंद करा दिया है।

    अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि जिन गांवों का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है, उनमें आवंटन नहीं होगा। कोर्ट ने जमीन अधिग्रहण रद कर दिया तो पुराने आवंटन भी स्वत: रद हो जाएंगे। ऐसे में वहां विकास कार्य कराने का कोई औचित्य नहीं है। प्राधिकरण अब कोर्ट का फैसला आने तक इन गांवों में आवंटित किए गए भूखंडों की रजिस्ट्री, नाम परिवर्तित व एग्रीमेंट टू लीज भी नहीं करेगा

    -Dainik Jagran
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  • I am fed up and sick of hearing these hopeless news everyday.
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  • Noida Extn homebuyers get BJP support


    - TOI

    NOIDA: Rising up to support thousands of homebuyers in Noida Extension, whose fates have been hanging in balance following the land acquisition row, the BJP on Sunday organized a rally in Noida demanding that all buyers be handed over their houses in the stipulated time as promised to them. The huge rally was attended by Lok Sabha MP of Ghaziabad and former chief minister of Uttar Pradesh, Rajnath Singh, apart from several party officials from the state.

    "Flat buyers in Noida Extension have been suffering for no fault of theirs," said Rajnath Singh, addressing the rally. "The problems of everyone who has been affected by the land crisis should be solved immediately," added Singh.

    The huge rally titled, Janadhikar Rally, was organized by the Uttar Pradesh investors' cell of the BJP. "Our primary demand is that all homebuyers should get their homes as promised to them at the time of booking," said national president of BJP investors' cell, Arun Singh. "If investors want their money back, it should be returned together with the interest accrued over the period," added Singh.

    Homebuyers are at the bottom of the spectrum in the land acquisition row in Noida Extension and would suffer the most if the crisis is not resolved quickly. "The average middle-income families who have booked flats are paying rents for their housing, EMIs on the loans they have availed from banks as well as interest on loans," said Arun Singh. "At the end of the day, they are weighed down by inflationary pressures and are unsure as to whether or not they would get their flats," he added.

    The BJP said that the state government has committed a breach of trust. "Homebuyers came in hordes to Noida Extension because the state government was an intermediary between buyers and builders," said state president of the BJP investors' cell, Mahesh Chauhan. "The unprecedented housing crisis in Noida Extension took place due to the callousness of the state government. The guilty should be brought to book by conducting a thorough probe," added Chauhan.

    "Farmers and flat buyers have been the most affected in the land acquisition row. Farmers have lost their source of livelihood following land acquisition, while homebuyers invested all their savings into the houses," said former minister and BJP leader, Nawab Singh Naagar.
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  • मांगें नहीं मानीं तो शुरू होगा काम रोको आंदोलन


    ग्रेटर नोएडा

    यमुना अथॉरिटी एरिया के किसानांे ने अथॉरिटी के खिलाफ फिर से मोर्चा खोल दिया है। किसानांे ने फॉर्म्युला-1 रेस ट्रैक से सटे अट्टा गुजरान गांव मंे 18 मांगों को लेकर रविवार को महापंचायत की और ज्ञापन अथॉरिटी को भेजा। किसानों ने फैसला किया कि उनकी सभी मांगे 2 अक्टूबर से पहले अथॉरिटी ने पूरी नहीं की तो वे काम रोको आंदोलन शुरू करेंगे।

    अट्टा गुजरान गांव के शिव मंदिर पर औरंगपुर, जगनपुर, अफजलपुर, गुनपुरा, औरंगपुर मडैया आदि गांवों के सैकड़ों किसान जमा हुए। पंचायत के संयोजक अट्टा गुजरान के प्रधान रविन्द्र नागर ने किसानों को संबोधित किया। किसानों ने मांग की है कि उनकी पूरी आबादी छोड़ी जाए। पूर्व प्रधान बिशंबर सिंह ने कहा कि 5 गांवांे के किसानांे की जमीन पर फॉर्म्युला-1 रेस ट्रैक बना है। इन पांचांे गांवों के किसान परिवार के प्रत्येक सदस्य को नौकरी दी जाए। भूमिहीन किसानों को कम से कम डेढ सौ वर्ग मीटर के प्लाट दिए जाए। देशराज जगनपुर ने कहा कि किसानांे को 8 प्रतिशत जमीन के आवासीय प्लाट गांवों की सीमा से लगाकर 12 मीटर रोड बनाकर दिए जाए। पांचांे गांवांे के किसानांे के बच्चांे की पढ़ाई के लिए एरिया मंे इंटर व डिग्री कॉलेज खोला जाए। लज्जा राम प्रधान ने कहा कि जिस रेट में कंपनी प्लाट बेच रही है उसमें से कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सेदारी दी जाए। आबादी का लाभ बाहरी किसानांे को भी दिया जाए।

    -Navbharat times
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  • 23 गांवों की याचिकाआंे पर सुनवाई आज


    ग्रेटर नोएडा

    ग्रेनो एक्टेंशन के किसानों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अब सोमवार से नोएडा के किसानों की याचिकाओं पर हाई कोर्ट में सुनवाई शुरू होगी। किसानांे के वकील पंकज दूबे और प्रमेन्द्र भाटी ने बताया कि सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने 23 गांवों की लिस्ट जारी कर दी है। इनमें निठारी, चौड़ा सादतपुर, सर्फाबाद के अलावा नोएडा एक्सप्रेस-वे से सटे गांव शामिल हैं। जानकारों का कहना है कि नोएडा एक्सटेंशन की तरह इन गांवांे में चल रहे बिल्डरांे के प्रोेजेक्टों पर भी संकट के बादल छा सकते हैं।

    लिस्ट में शामिल गांव

    नोएडा का असगरपुर, असादुल्लापुर, निठारी, कोडली बागर, सलारपुर खादर, सदरपुर, नगली वाजिदपुर, झट्टा बादौली, छपरौली बागर, सुलतानपुर, नगला नगली, सौरखा, बादौली बागर, हाजीपुर, अलीबिर्दीपुर, सर्फाबाद, दोषपुर मगरौली, चौड़ा सादतपुर आदि गांव शामिल हैं। नोएडा के किसान अपना पक्ष मजबूती के साथ रखने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के लिए रवाना हो गए है। वहीं, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अधिकारी जमीन अधिग्रहण, अलॉटमेंट आदि का पूरा ब्यौरा आज हाई कोर्ट में दाखिल करेंगे।

    यमुना अथॉरिटी के लिए नही राह आसान

    प्रॉपर्टी के जानकारांे और हाई कोर्ट में किसानों के वकीलों का मानना है कि यमुना अथॉरिटी के लिए कोर्ट की राह आसान नहीं है। उनका कहना है कि है कि अथॉरिटी ने अब तक जितनी भी जमीन का अधिग्रहण किया है, वह इंडस्ट्री लगाने के लिए किया है। लेकिन आज तक एक इंच जमीन इंडस्ट्री लगाने के लिए अलॉट नहीं की है। जबकि बिल्डरों को जमीन अलॉट की गई है। इनमंे से ज्यादातर जमीन पर किसानांे का कब्जा है। किसान आज भी वहां खेती कर रहे हैं। इस कारण किसानांे का पक्ष मजबूत लग रहा है।

    -Navbharat times
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  • Now Noida get fast heart beat......
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  • Are Paras seasons or Tieriea safe ?

    Hi
    I am planning to buy in Paras seasons or Tieriea. I have few concerns, please other members reply
    1) Are Paras seasons or Tieriea area safe from ongoing legal tangle ?
    2) Has there been any previous judgement for village of these areas ? If, yes, and as construction is going on, that will mean, the judgement was in builders favour. I remember vaguley, somewhere I read in this forum that for Noida expressway, deciosone has come in builders favor, but I can not find that thread, other members please guide me for this.



    Originally Posted by fritolay_ps
    23 गांवों की याचिकाआंे पर सुनवाई आज


    ग्रेटर नोएडा

    ग्रेनो एक्टेंशन के किसानों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अब सोमवार से नोएडा के किसानों की याचिकाओं पर हाई कोर्ट में सुनवाई शुरू होगी। किसानांे के वकील पंकज दूबे और प्रमेन्द्र भाटी ने बताया कि सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने 23 गांवों की लिस्ट जारी कर दी है। इनमें निठारी, चौड़ा सादतपुर, सर्फाबाद के अलावा नोएडा एक्सप्रेस-वे से सटे गांव शामिल हैं। जानकारों का कहना है कि नोएडा एक्सटेंशन की तरह इन गांवांे में चल रहे बिल्डरांे के प्रोेजेक्टों पर भी संकट के बादल छा सकते हैं।

    लिस्ट में शामिल गांव

    नोएडा का असगरपुर, असादुल्लापुर, निठारी, कोडली बागर, सलारपुर खादर, सदरपुर, नगली वाजिदपुर, झट्टा बादौली, छपरौली बागर, सुलतानपुर, नगला नगली, सौरखा, बादौली बागर, हाजीपुर, अलीबिर्दीपुर, सर्फाबाद, दोषपुर मगरौली, चौड़ा सादतपुर आदि गांव शामिल हैं। नोएडा के किसान अपना पक्ष मजबूती के साथ रखने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के लिए रवाना हो गए है। वहीं, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अधिकारी जमीन अधिग्रहण, अलॉटमेंट आदि का पूरा ब्यौरा आज हाई कोर्ट में दाखिल करेंगे।

    यमुना अथॉरिटी के लिए नही राह आसान

    प्रॉपर्टी के जानकारांे और हाई कोर्ट में किसानों के वकीलों का मानना है कि यमुना अथॉरिटी के लिए कोर्ट की राह आसान नहीं है। उनका कहना है कि है कि अथॉरिटी ने अब तक जितनी भी जमीन का अधिग्रहण किया है, वह इंडस्ट्री लगाने के लिए किया है। लेकिन आज तक एक इंच जमीन इंडस्ट्री लगाने के लिए अलॉट नहीं की है। जबकि बिल्डरों को जमीन अलॉट की गई है। इनमंे से ज्यादातर जमीन पर किसानांे का कब्जा है। किसान आज भी वहां खेती कर रहे हैं। इस कारण किसानांे का पक्ष मजबूत लग रहा है।

    -Navbharat times
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  • Need for a Middle Path


    New land acquisition Bill should keep both real estate developers, farmers happy

    Land is a symbol of pride, security and wealth. When someone has to part with his land, it is not a happy occasion for the individual. Losing your land is akin to taking a huge blow on your pride and social stature. It is this social and emotional behaviour that works against any forceful acquisition of land.

    In Uttar Pradesh, the government had been acquiring land without much resistance while there were huge protests against forceful land acquisition in other parts of the country.

    When the court ruled in favour of villagers in Noida Extension, the farmers of the state finally started giving vent to their anger against land acquisitions. Due to widespread protests against land acquisitions, the Land Acquisition Act, which is more than a century old, will now be amended.

    In Noida Extension, the authorities made three major mistakes. The first was invoking the urgency clause for all acquisitions. The farmers should have been given an opportunity to raise objections according to the law. Second, the acquiring authority should have offered a larger portion of developed land to the original owners. As the value of land appreciates, the farmer feels cheated. This may happen due to a change in government policy or value addition by the developer, but the original owner still feels cheated. The third mistake was to offer compensation not commensurate with the future potential of land valuation.

    The row shows that even government commitments cannot be relied upon. Before buying land from the government, the developers will now have to verify even the government's title and the process it has followed for acquiring that land. In order to avoid this, a more practical approach is required. Some ways to avoid confrontation with those affected by land acquisitions include:

    >> Offer 10-25% developed land to original owners

    >> Provide farmers alternative irrigated land

    >> Fix price of acquired land through negotiations

    >> Give land owners partnership in the project as equity

    >> Try to avoid forceful acquisition unless warranted for social welfare

    The proposed land acquisition law tries to address these issues. Unfortunately, our system is always swinging between extremes. Either we don't do it or overdo it. The proposed Bill also deals with the issue with an impractical approach. It aims to bring developers that acquire land for townships under the new law, which is ridiculous.

    Private land transactions are at much higher price and to the satisfaction of owners/sellers. So, bringing their transaction under the new law will make development of townships difficult. The legislation should not be such that acquiring land becomes impossible.

    We need a middle path.

    - businesstoday
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  • I talk to my builder in PATWARI VILLAGE and he said HIGH COURT WILL give decision on NOIDA extension case on 28 September 2011? just checking anybody is having idea or news on the same?

    Thx,
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  • Noida skipping heart beats

    Originally Posted by fritolay_ps
    Now Noida get fast heart beat......


    Thanks Frito_lays for posting this.

    Is there a mapping of the names of these villages to the existing sectors in Noida or a wiki link where these villages' names can be mapped?

    One I know is Sorkha which maps to sector 7x. Supertech Capetown-2 affected. Can anyone list down all sectors in Noida where these litigations map to.

    Its turn of Noida to skip heart beats
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  • जमीन अधिग्रहण पर मीटिंग बेनतीजा

    ग्रेटर नोएडा

    गुरू द्रोण गौशाला की सैकड़ों एकड़ अधिग्रहीत जमीन के मामले पर सोमवार को दनकौर में बैठक हुई। इसमंे जेपी ग्रुप, एसपी, बीकेयू व गुरू द्रोणाचार्य गौशाला समिति के पदाधिकारी शामिल हुए। गुरू द्रोणाचार्य समिति ने जेपी गु्रप के पदाधिकायिों से कहा कि उन्हें मुआवजा नहीं जमीन वापस चाहिए। जेपी गु्रप ने जमीन देने में कुछ आनाकानी की। पर बीकेयू, एसपी और समिति के सदस्य जमीन लेने पर अडे़ रहे। ऐसे में बैठक बेनतीजा रही।

    गुरू द्रोणाचार्य गौशाला समिति के अध्यक्ष बेदप्रकाश ने बताया कि दनकौर ऐतिहासिक कस्बा है। यहां महाभारत काल से करीब 132 एकड़ में गौशाला बनी हुई है। यह जमीन यमुना अथॉरिटी ने अधिग्रहीत की थी। जेपी गु्रप इस पर कब्जा लेने का प्रयास कर रहा है। बीकेयू ने आरोप लगाया कि यमुना अथॉरिटी के नायब तहसीलदार किसानों को परेशान कर रहे हैं। किसानांे को मिलने वाली 7 प्रतिशत आवासीय जमीन के प्लांट में वे हिस्सेदारी की बात करते हैं। मीटिंग में जेपी गु्रप की ओर से मैनेजर ईश्वर सिंह, अशोक खेड़ा, एसपी के जिलाध्यक्ष बिजेंद्र भाटी, बीकेयू के महेंद्र सिंह समेत कई लोग शामिल थे।

    -Navbharat times
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  • फैसले पर टिकीं सबकी निगाहें


    ग्रेटर नोएडा

    नोएडा एक्सटेंशन समेत 40 गांवों के किसानांे की सुनवाई पूरी हो जाने के बाद किसान, निवेशक, बिल्डर और अथॉरिटी की निगाहें हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी गई हैं। नोएडा एक्सटंेशन एरिया के गांवांे के किसानांे ने मिल्क मेें पंचायत की। ग्रामीण पंचायत मोर्चा के संयोजक प्रधान रणवीर नागर ने कहा कि जिस तरह से हाइ र्कोर्ट मंे किसानांे ने अपना पक्ष मजबूती के साथ रखा है उससे लगता है कि फैसला किसानों के पक्ष में ही आने की पूरी उम्मीद है। फैसला आने तक किसान किसी तरह का आंदोलन नही करेंगे। पर जनजागरण अभियान जारी रहेगा। ग्रामीण पंचायत मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम यादव ने कहा कि अथॉरिटी पतवाड़ी के किसानों पर याचिका वापस लेने के लिए दबाव बना रही है। पर किसान याचिका वापस नहीं लेंगे।

    -navbharat times
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  • नोएडा के 12 गांवों की सुनवाई पूरी

    ग्रेटर नोएडा।। जमीन अधिग्रहण मसले पर नोएडा अथॉरिटी के 23 गांवों के किसानों की याचिकाओं पर सोमवार से सुनवाई शुरू हो गई। सोमवार को 12 गांवों की सुनवाई पूरी हो गई। सबसे पहले सुनवाई अब्दुलपुर व असगरपुर गांव के किसानों की याचिकाओं पर हुई।

    किसानों के वकील प्रमेंद्र भाटी और मुकेश रावल ने बताया कि असगरपुर गांव के किसानों ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अथॉरिटी ने किसानों की जमीन इंडस्ट्री लगाने के लिए अर्जेंसी क्लॉज लगाकर अधिग्रहण की और किसानों को धारा 5 ए में सुनने का मौका भी नहीं दिया गया। इंडस्ट्री के नाम पर अधिग्रहीत की गई जमीन को अथॉरिटी ने फार्महाउस के लिए अलॉट कर दिया। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने अथॉरिटी और यूपी सरकार से जवाब मांगा तो दोनों जवाब दाखिल नहीं कर सके। जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से वक्त मांगा गया है। किसानों के वकील पंकज दूबे ने बताया कि इसके बाद नोएडा के सिलारपुर खादर, सदरपुर, वाजिदपुर, झट्टा, छपरौली बागर, खोड़ा, सुलतानपुर, नगला नगली, सोरखा समेत 12 गांवों के किसानों की याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो गई।

    वकीलों ने बताया कि सोहरखा की सुनवाई आधी हो पाई। मंगलवार को भी सुनवाई होगी। उन्हांेने बताया कि नोएडा अथॉरिटी एरिया के 11 गांवों के किसानों की याचिकाओं पर सुनवाई आज होगी। यमुना अथॉरिटी एरिया के गांवों के किसानों की याचिकाआंे पर सुनवाई बुधवार से शुरू होगी। वकीलों ने बताया कि ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को सोमवार को हाई कोर्ट में पूरे ब्यौरे के साथ जवाब दाखिल करना था लेकिन वह जवाब दाखिल नहीं कर सकी। सूत्रों के मुताबिक, अथॉरिटी अफसर जवाब दाखिल करने इलाहाबाद रवाना हो गए है। किसानों के वकीलों का कहना है अब तक हाई कोर्ट में हुई सुनवाई में किसानों का पक्ष मजबूत लग रहा है।

    -navbharat times
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  • ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने किया जवाब दाखिल

    ग्रेटर नोएडा इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को नोएडा के 12 गांवों के किसानों की सुनवाई भी पूरी कर ली। शेष गांवों की सुनवाई मंगलवार को होगी। राज्य सरकार की तरफ से जवाब दाखिल किया जाएगा। कोर्ट ने असगरपुर गांव में फार्म हाउस आवंटन के मामले में नोएडा प्राधिकरण से जवाब मांगा है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने भी सोमवार को न्यायालय में अपना जवाब दाखिल कर दिया। बुधवार से प्राधिकरण, बिल्डर व निवेशकों के वकील बहस करेंगे। सप्ताह के अंत तक बहस पूरी हो जाएगी। माना जा रहा है कि दशहरा की छुट्टियों के बाद कोर्ट का निर्णय आ सकता है। नोएडा एक्सटेंशन के 11 गांवों समेत 63 गांवों के किसानों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमीन अधिग्रहण को चुनौती दी थी। इनमें ग्रेटर नोएडा के 40 व नोएडा के 23 गांवों के किसान शामिल है। ग्रेटर नोएडा के गांवों की सुनवाई शुक्रवार को ही पूरी हो गई थी। सोमवार को नोएडा प्राधिकरण के सदरपुर, सालारपुर खादर, सुल्तानपुर, नंगला-नंगली, सोरखा, निठारी, अब्दुलपुर, वाजिदपुर, झट्टा व बादौली गांव के किसानों की याचिका सुनी गई। 11 गांवों की सुनवाई मंगलवार को पूरी की जाएगी। किसानों के वकील मुकेश रावल ने बताया कि न्यायालय ने नोएडा प्राधिकरण से असगरपुर गांव में फार्म हाउस आवंटन के मामले में जवाब दाखिल करने को कहा है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को सोमवार तक नियोजन, अधिग्रहण व आवंटन की पत्रावलियों की मूल प्रति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। प्राधिकरण ने पांच ट्रकों के फाइलों को भरकर शनिवार को ही इलाहाबाद भेज दी थी। प्राधिकरण के वकील ने पत्रावलियों को कोर्ट में दाखिल कर दिया।

    -Dainik Jagran
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  • this remind me one famous line... Jub lagi fatne.. kaam laga batne
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