पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • Originally Posted by FieldWorker


    As per GNA, GC1 is a single Group Housing Plot, so all the building by-laws like FAR and ground coverage will apply to the whole GC1 in total.

    GC2 is a different GH plot, so restrictions on FAR and ground coverage etc, apply to GC2 independently of GC1.



    But all large or even medium sized GHP are on more than one Plot. Builders take approval for one project as a whole ( or for one Phase of the project at a time, if it is done in phases,....., each phase on more than one plot).
    So, I think FAR applies not on the basis of Plot but project (or phase of the project) as a whole.

    For example, in case of JP Greens Noida or JP Greens G. Noida many of the plots will just fall in Golf Course Area, where builder do not have a single dwelling unit to sell (FAR Availed = 0). So builder will have high rises on area not en marked for golf course (FAR availed here = many time of FAR allowed by authority)........such that average FAR of the project as a whole is within the FAR limit allowed.
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  • Originally Posted by Sunder_Lal
    Pehle to andaja tha ki Gaur aur Stellar sabse pehle possession denge .. lekin ab Gaur ne date 2 saal aage badha ke badtamiji kar di hai .. so I think Stellar hi sabse pehle dega.



    All are revising their possesion date. Wait for steller's new agreement.
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  • Originally Posted by del_sanju
    GC 2 plan changed check images. and compare

    11,12- police station, nursing home
    1-1 school


    A lot of green area will go for sure. But wat is there in hands of buyers. Sign kar aaya mai toh. mine is 1010 so ekdum road facing hai. NO issue of high rise etc. Once officially this site plan is updated things will clear.

    Even the site map ws missing from the gaur office in sec63.

    Possession date aug 2015. yaar bahut jada time mang rhe hai.
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  • I wonder what could happen to those buyers who had signed BBA 1.5 Years before and now refuse (to the builder) to sign the new T & C regarding Increased FAR, New Possession Date etc.
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  • Noida sec 75, 120 construction stayed - Indian Express

    sirf further stay se bacha rahe to possession 2 se 3 saal mein mil hi jayegi.....
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  • Originally Posted by ManGupta
    I wonder what could happen to those buyers who had signed BBA 1.5 Years before and now refuse (to the builder) to sign the new T & C regarding Increased FAR, New Possession Date etc.





    They will get full deposited money with 11% interest.
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  • Originally Posted by sksinha05
    Noida sec 75, 120 construction stayed - Indian Express

    sirf further stay se bacha rahe to possession 2 se 3 saal mein mil hi jayegi.....


    :bab (29):
    There is already separate thread for this topic........
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  • Originally Posted by FieldWorker


    As per GNA, GC1 is a single Group Housing Plot, so all the building by-laws like FAR and ground coverage will apply to the whole GC1 in total.

    GC2 is a different GH plot, so restrictions on FAR and ground coverage etc, apply to GC2 independently of GC1.



    So basically what you are saying is that the FAR for GaurCity1 will not increase. Is it correct?
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  • Guys any news bout bank loan disbursement. Has any private bank like HDFC,ICICI etc has started disbursing or how much more time will it take.
    Any one know about the outcome of meeting between CEO and bank officials on 3rd oct???
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  • Originally Posted by ManGupta
    I wonder what could happen to those buyers who had signed BBA 1.5 Years before and now refuse (to the builder) to sign the new T & C regarding Increased FAR, New Possession Date etc.


    In Gaur's demand letter, for such buyers it is mentioned that they can take their entire money back with 11% interest.
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  • With bank interest rates more that 9% p.a in India, I am sure cost of capital for businesses/builders will be a lot higher. 11% is a nonsense.....
    You should be able to challenge their decision in consumer court.
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  • मुआवजा न मिलने पर सीईओ से शिकायत

    ग्रेटर नोएडा : कासना गांव का एक किसान दो साल से मुआवजा को लेकर प्राधिकरण कार्यालय पर चक्कर लगा रहा है। मुआवजा न मिलने पर किसानों ने बृहस्पतिवार इसकी शिकायत प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी से की है।

    कासना गांव के रज्जी का आरोप है कि प्राधिकरण ने दो साल पूर्व आपसी सहमति पर उसकी जमीन ली थी। मुआवजे के लिए उसने दस्तावेज प्राधिकरण कार्यालय में जमा कर दिए, इसके बाद भी उसे जमीन का पैसा नहीं मिल पा रहा है। भूलेख विभाग के अधिकारी जान बूझ कर मुआवजा भुगतान को रोक रखा है।

    dainik jagran
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  • More land

    ग्रेनो के बीमार उद्योगों पर लटकी तलवार

    ग्रेटर नोएडा :
    उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआइडीसी) के तहत आने वाले बीमार उद्योगों (सिक इंडस्ट्रीज) पर तलवार लटक रही है। उनका लैंडयूज बदला जा सकता है। इसके तहत भू-आवंटन परिवर्तित कर आवासीय (रेजिडेंसियल) योजनाओं के इस्तेमाल में लाया जाएगा।

    इस संबंध में मसौदा तैयार करने के लिए गत दिनों यूपीएसआइडीसी की बोर्ड की बैठक लखनऊ में हुई थी। इस योजना के तहत ग्रेटर नोएडा भी है। इसके तहत ग्रेटर नोएडा औद्योगिक क्षेत्रों में बीमार उद्योगों का चिन्हांकन किया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि ग्रेटर नोएडा कई उद्योग हैं जो इस श्रेणी में आ रहे हैं। कुछ ऐसे भी है जो उजड़ने की कगार पर हैं। इसमें कुछ बड़े उद्योग भी शामिल हैं। यूपीएसआइडीसी को उनके जीर्णोद्धार की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। उनपर तलवार लटकने लगी है। यूपीएसआइडीसी ग्रेनो के क्षेत्रीय प्रबंध मयंक श्रीवास्तव का कहना है बोर्ड ने अपना मसौदा तैयार कर शासन को भेज दिया है। निर्देश मिलते ही बीमार उद्योगों को चिन्हित कर नोटिस भेजनी की कार्रवाई की जाएगी।

    dainik jagran
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  • Noida Extn farmers to get cheques worth Rs 150cr

    GREATER NOIDA: The Greater Noida Authority on Thursday released Rs 150 crore to its land acquisition department to resume disbursement of pending cheques to farmers of Greater Noida West (Noida Extension).

    This step is in response to farmers venting their ire against developers last month by stalling construction of few housing projects.

    The Authority has also decided to take a loan of around Rs 800 crore from banks to pay the farmers their compensation dues at the enhanced rate of 64.7%. The Authority had stalled disbursement of compensation cheques in December last year as it was facing a severe cash crunch.

    The Authority is yet to pay at least Rs 1,000 crore due to the farmers as enhanced compensation directed by the Allahabad high court in October last year. While it has already written to the state government requesting financial aid, developers with upcoming projects in the Greater Noida West area have also resumed paying their instalments on allotment after the NCR Planning Board approved the Master Plan 2021.

    "The Authority hopes to receive all due instalments from developers for the period between October 2011 and September 2012 by the end of this month. Following this, we hope to pay the farmers their enhanced compensation and settle their grievances," an Authority official said. "Once money from the developers is received, the Authority can also resume development work that had remained stalled for almost 10 months," he said.

    The developers owe the Authority around Rs 20,000 crore as instalment for the land allotted to them in Noida Extension. The Authority had collected nearly Rs 300 crore from the developers. However, following the land dispute, most developers stopped paying the instalments. For just the period between October 2011 and September 2012, the developers owe the Authority a sum of around Rs 1,000 crore.



    TOI
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