पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • नोएडा भूमि अधिग्रहण मामले में फैसला 21 को

    इलाहाबाद : नोएडा व ग्रेटर नोएडा के भूमि अधिग्रहण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय पूर्णपीठ 21 अक्टूबर को फैसला सुनाएगी। पूर्णपीठ ने दोनों पक्षों की लम्बी चली बहस के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। पूर्णपीठ में न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एसयू खान व न्यायमूर्ति वीके शुक्ला शामिल हैं।

    -Dainik jagran update
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  • नोएडा एक्सटेंशन पर फैसला 21 को

    नोएडा एक्सटेंशन पर फैसला 21 को
    18 Oct 2011, 2133 hrs IST,नवभारत टाइम्स
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    एक संवाददाता
    ग्रेटर नोएडा।। जमीन अधिग्रहण के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रही नोएडा, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी, किसान, बिल्डर, निवेशकों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। किसानों के वकील पंकज दूबे और मुकेश रावल ने बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट नोएडा और ग्रेटर नोएडा के भविष्य का महा फैसला 21 अक्टूबर को सुनाएगी। फैसले पर सुनवाई सुबह 10 बजे शुरू होगी। महा फैसला तय करेगा कि किसकी दिवाली मनेगी और किसकी नहीं।

    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाऐ जाने का ऐलान कर दिया है। किसानों के हाई कोर्ट में वकील पंकज दूबे ने बताया कि जमीन अधिग्रहण के खिलाफ नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी एरिया के 65 गांवों के किसानों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें यूपी की सीएम मायावती के पैतृक गांव बादलपुर समेत नोएडा एक्सटेंशन एरिया के गांवों के किसानों ने 491 याचिकाएं दायर की थीं।

    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट नोएडा एक्सटेंशन एरिया के शाहबेरी, पतवाड़ी के अलावा गुलिस्तांपुर, मकोड़ा, सूरजपुर, बिरोड़ी, देवला के किसानों की याचिका पर फैसला सुनाते हुए जमीन अधिग्रहण रद्द किए जाने का फैसला सुना चुकी है। किसानों के वकील पंकज दूबे ने बताया कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी एरिया के 65 गांवों के किसानों की 491 याचिकाओं की सुनवाई करने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रिपल बैंच ने सुनवाई की थी, जिसमें सभी गांवों की सुनवाई 30 सितंबर को पूरी कर ली गई। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

    उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट ने दिवाली से पहले 21 अक्टूबर को रिजर्व रखे गए फैसले को सुनाए जाने का निर्णय लिया है। नोएडा एक्सटेंशन समेत ग्रेटर नोएडा में 50 बिल्डरों के प्रोजेक्ट हैं। प्रभावित नोएडा एक्सटेंशन एरिया के अलावा ग्रेटर नोएडा शहर में करीब 50 बिल्डरों के प्रोजेक्ट्स के खिलाफ किसानों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की हुई है। इसके अलावा नोएडा एरिया में भी करीब 20 बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहे हैं।

    नोएडा, नोएडा एक्सटेंशन व ग्रेटर नोएडा में 50 हजार से ज्यादा लोगों ने बिल्डरों के प्रोजेक्टों में फ्लैट बुक करा रखे हैं, जिनका भविष्य दांव पर लगा है। निवेशक भी मामले को लेकर हाई कोर्ट गए हुए हैं। 21 अक्टूबर को इन निवेशकों का भविष्य तय होगा।
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  • Originally Posted by harpreetsg_delhi
    नोएडा एक्सटेंशन पर फैसला 21 को
    18 Oct 2011, 2133 hrs IST,नवभारत टाइम्स
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    jane kya hoga rama re :bab (34):
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  • नोएडा एक्सटेंशन के भाग्य का फैसला 21 को

    नोएडा एक्सटेंशन समेत अन्य गांवों के भाग्य का फैसला 21 अक्टूबर को हो जाएगा। हाई कोर्ट ग्रेटर नोएडा के साथ नोएडा के गांवों का फैसला सुनाने जा रहा है। दीपावली से पहले फैसला आने पर किसानों, बिल्डरों, निवेशकों व प्राधिकरण अधिकारियों की धड़कन बढ़ गई हैं। जमीन अधिग्रहण को लेकर नोएडा एक्सटेंशन समेत ग्रेटर नोएडा के 40 गांवों के किसानों ने हाई कोर्ट में 491 याचिकाएं दायर की थीं। नोएडा के 24 गांव के किसान कोर्ट गए थे। नोएडा, ग्रेटर नोएडा के 64 गांवों की सुनवाई बड़ी बेंच ने की थी। कोर्ट ने 12 सितंबर से लगातार सुनवाई की थी। 30 सितंबर को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। किसानों के वकील मुकेश रावल ने बताया कि हाई कोर्ट अपना फैसला 21 अक्टूबर को सुनाएगा।

    -Dainik jagran
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  • शासन ने प्राधिकरण से मांगा आर्थिक ब्यौरा

    प्रदेश सरकार ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को आर्थिक संकट से उभारने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। शासन ने प्राधिकरण से विकास एवं निर्माण कार्यो के साथ आर्थिक स्थिति का ब्योरा भी मांगा। अधिकारी सोमवार रात लखनऊ रवाना हो गए। बताया जाता है कि शासन ने गांवों में विकास कार्य रुकने के मामले को गंभीरता से लिया है। सरकार चाहती है कि गांवों में तेजी से विकास कार्य हों, लेकिन प्राधिकरण ने खस्ता आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए गांवों में विकास कार्य करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।

    -Dainik jagran
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  • New demands :

    भूमिहीनों को भूखंड देने पर किया जा सकता है विचार


    ग्रेटर नोएडा : भूमिहीन मजदूर बुधवार को नि:शुल्क भूखंड देने की मांग को लेकर प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सीईओ रमा रमन से मिले। एक घंटे तक चली बैठक में सीईओ ने कहा कि जमीन अधिग्रहण को लेकर हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद ही इस पर विचार किया जा सकता है।

    खेतिहर मजदूर भूमिहीन संघर्ष समिति ने कहा कि वे 120 वर्गमीटर का भूखंड की मांग पिछले एक वर्ष से कर रहे हैं। भूमिहीन किसानों ने मांग को लेकर पहली जून को नोएडा एक्सटेंशन में आमरण अनशन किया था। इसमें सीईओ ने चार पांच दिन में समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया था। सीईओ के आश्वासन पर किसानों ने अनशन समाप्त कर दिया था। सौ दिन के बाद भी प्राधिकरण व प्रशासन द्वारा पुस्तैनी खेतिहर मजदूर भूमिहीनों की मांग पर कोई गंभीरता नहीं दिखा रहा है। किसानों ने कहा कि प्राधिकरण ने यदि उनकी मांगों पर शीघ्रता से विचार नहीं किया तो दोबारा अनशन करने पर मजबूर होंगे।

    -Dainik jagran
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  • what is expected result of HC
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  • High court verdict on Noida land cases tomorrow

    The Allahabad High Court will, on Friday, give its verdict on the 492 quash-acquisition petitions filed by 40 villages in Noida Extension and other areas of Greater Noida.

    The court will also decide the fate of about 80 petitions filed by farmers of about two dozen Noida villages.

    A full bench of the court had on September 30 reserved its judgement in these cases after hearing the versions of the state government, farmers, builders and buyers for more than two weeks.

    “Two earlier court orders set aside forcible acquisition in Shahberi and Patwari. The same urgency clause has been used in other villages too,” said Parminder Bhati, counsel of farmers.

    Meanwhile, developers are also hopeful. “We’re absolutely confident the crisis would be resolved,” said Pankaj Bajaj of real estate body CREDAI.

    The two industrial development authorities in Noida and Greater Noida also hope the court won’t ask them to return the land that they had acquired from villages and allotted to builders.

    The authorities also hope to get a nod for out-of-court deals they have struck with some villages, while farmers want their land back for a better bargain. In case of an “adverse” judgment, the entire Noida Extension project may be scrapped.


    -HT
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  • Originally Posted by MANISH1982
    what is expected result of HC


    This is 100% true that NA/GNA can not win the case… .

    Main issues
    1. Authority used urgency clause and acquired farm land
    2. Most of Acquired land was meant for Industry purpose but land use is changed
    3. No NCR board approval was taken
    4. Land is sold to Pvt Builders

    Sub Issue
    1. Abadi land issue/5% land issue
    2. Lower compensation amount (as per farmers)
    3. Few have not taken compensation money yet
    4. 120sqm plot for un-employed farerms.
    5. Job for one family member
    6. 5-7% developed land is still less.. they need 15-20%
    7. Farmers demanded that they should be allowed to make own project in developed land

    Authority has no answer but few excuses….
    1. Additional 550/psm compensation has been given as per HC
    2. Abadi issue will be solved
    3. 7% developed land is being given
    4. Builders have already done lots of construction
    5. Thousands investors have put money
    6. Bank has sanctions thousand crore loan
    7. Authority already spent X amount on development in NE
    8. Submitting settlement documents in court
    9. Submitting document in court for village development/scheme for farmers


    If NO political pressure from any party, HC may give judgment based of benefit of all parties

    1. Pay additional compensation for : Land which has already been developed and lots of construction/development done (Omicron, XU, Delta type sectors)… OR some sectors in NE in which builders have already constructed many floors OR sector 7X with lots of partial development.

    2. Cancel land acquisition : New sectors in NE (sector 10,12 and partial land of techzone IV, 16B) in which no development done so land acquisition may be canceled. Some sector in N-Expressway and few area of 7X sectors (e.g. near Unitech Sector 117 ).

    But even after judgment… this case will sure go to SC so don’t assume that problem is either solved or increased. But current circumstances are showing lots of political involvements and other party benefits which might impact on judgment. Lets hope for best for both buyers/builders and farmers.
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  • किसानों से हो समझौता, बिल्डर शुरू करें काम

    नोएडा। नोएडा एक्सटेंशन से जुड़े किसानों, निवेशकों, बिल्डरों और बैंकों के लिए बेहद अहम दिन है। करीब ६० गांवों की जमीन अधिग्रहण को लेकर ४६१ याचिकाओं पर आज कोर्ट का फैसला आना है। किसान जहां कोर्ट के पूर्व फैसलों को देखते हुए पक्ष में फैसला आने का पूरा भरोसा कर रहे हैं। वहीं, निवेशक और बिल्डर बीच का रास्ता निकलने की आस में हैं। सभी पक्ष अपने-अपने वकीलों से संपर्क कर पूछ रहे हैं कि क्या हो सकता है फैसला।

    एक्सटेंशन के किसान शाहबेरी और पतवाड़ी गांव पर कोर्ट के फैसले की तरह शेष गांवों का भी फैसला आने की उम्मीद कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि जिस तरह से किसानों की याचिकाएं दायर हुई हैं। उन याचिकाओं के साथ जरूरी दस्तावेज लगाए गए हैं, उसके आधार पर कोर्ट से अधिग्रहण ही रद्द हो जाने की पूरी उम्मीद कर रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि रद्द होने के बाद प्राधिकरण नए सिरे से भूमि अधिग्रहण करे। फैसले के चलते गांवों का माहौल बृहस्पतिवार से ही बदला नजर आने लगा। लोग जगह बैठकर इस फैसले से जुड़ी संभावनाओं पर चर्चा करते नजर आए। वहीं निवेशकों का मानना है कि कोर्ट पतवाड़ी के फैसले को आधार बनाकर अधिग्रहण रद्द करने के बजाय बीच का रास्ता निकालेगा। यह रास्ता किसानों केसाथ समझौता कर बिल्डरों का निर्माण कार्य जारी रहने का हो सकता है। कम से कम निवेशकों का पैसा सुरक्षित करने का विकल्प जरूर होगा। आज का फैसला देखने के बाद निवेशक शनिवार या रविवार को एकत्रित होंगे। वहीं, बिल्डर भी उम्मीद कर रहे हैं कि कोर्ट अधिग्रहण रद्द नहीं करेगा। बल्कि प्राधिकरण से गांवों के साथ समझौता करने और बिल्डरों का काम शुरू कराने का फैसला आ सकता है। बिल्डरों ने फैसले को देखकर निर्णय करने और निवेशकों तक जानकारी पहुंचाने के लिए सेक्टर १८ के एक होटल में मीडिया से रूबरू होने की तैयारी भी कर ली है।

    -Amar Ujala
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  • ग्रेनो के भविष्य का फैसला आज


    ग्रेटर नोएडा। हाईटेक शहर ग्रेटर नोएडा के भविष्य का फैसला शुक्रवार को होना है। १९९१ से लेकर अब तक अधिग्रहीत की गई जमीन को लेकर किसान कोर्ट पहुंचे थे। एक्सटेंशन समेत विभिन्न गांवों की ४९१ याचिकाओं में करीब सात हजार किसान शामिल हैं। माना जा रहा है कि सवेरे १०.३० बजे के बाद कोर्ट का फैसला आ सकता है। प्राधिकरण के ज्यादातर किसानों ने कोर्ट में जमीन अधिग्रहण पर सवाल उठाए हैं। एक तरफ किसान हैं तो दूसरी तरफ प्राधिकरण है, लेकिन इसमें बिल्डर, निवेशक और ठेकेदारों ने भी अपनी सफाई पेश की है। फैसला जो भी होगा, सभी लोग प्रभावित होंगे। किसानों की पैरवी करने वाले वकील पंकज दुबे और मुकेश रावल को आशा है कि फैसला किसानों के ही पक्ष में होगा। फैसले को लेकर पुलिस भी काफी गंभीर है। किसानों के पक्ष का फैसला आने पर किसान अति उत्साहित में तोड़फोड़ भी कर सकते हैं। अगर फैसला विरोध वाला हुआ तो गुस्से में कोई गलत कदम उठा सकते हैं। सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर सुरक्षा व्यवस्था भी प्रशासन को करनी है। निवेशक या अन्य पक्ष भी विरोध कर सकता है।


    खुशी मनाने का किया गया है इंतजाम
    क्षेत्र के किसान आशान्वित हैं कि कोर्ट जो भी फैसला देगा, वह उनके हित में ही होगा। इसलिए बृहस्पतिवार को ही गांव-गांव में जश्न मनाने की व्यवस्था की गई है। बल्कि, कुछ किसान तो कह रहे हैं कि फैसला उनके लिए दीवाली का तोहफा होगा।


    पल-पल की खबर देंगे अधिकारी
    करीब डेढ़ माह बीत चुका है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी इलाहाबाद में ही डेरा डाले हुए हैं। फैसला शुक्रवार को होना है, लिहाजा पहले ही टीम पहुंच चुकी है और पल पल की खबर वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाएगी।

    ग्रेनो प्राधिकरण के फैसले वाले गांव (४०) (Ab bacha kya hai)
    डाबरा, डाढ़ा, पाली, बिरौंडी चक्रसेनपुर, जैतपुर-बैसपुर, घोड़ी बछेड़ा, साकीपुर, रसूलपुर, कासना, बिरौंडी, खानपुर, ऐमनाबाद, सुत्थ्याना, पतवाड़ी, चूहड़पुर, बादलपुर, सादौपुर, घरबरा, छपरौला, खैरपुर गुर्जर, अजायबपुर, नामौली, मथुरापुर, सैनी, मुर्सेदपुर, हैबतपुर, चिपयाना बुजुर्ग, बिसरख जलालपुर, रिठौरी, लुक्सर, बढ़पुरा, रायपुर बांगर, लुक्सर, मायचा, शाहबेरी, खेड़ा चौगानपुर, देवला, जुनपत शामिल हैं।

    नोएडा प्राधिकरण के फैसले वाले गांव (२४) (all new projects :bab (38):
    असगरपुर, निठारी, अब्दुल्लापुर, बसीबहद्दीनपुर, कोंडली बांगर, सलारपुर खादर, सदरपुर, बाजीदपुर, झट्टा, छपरौली, खोड़ा, शहदरा, सुल्तानपुर, नगली नगली, सौरखा, बादौली, सुत्थ्याना, चौड़ा सादातपुर, सर्फाबाद, दोस्तपुर, मंगरौली बांगर, अलीबर्दीपुर और हाजीपुर शामिल हैं।

    ४४ हजार को किया गया है आवंटन
    प्राधिकरण की स्थापना १९९१ में की गई थी। तब से लेकर अब तक प्राधिकरण ने व्यक्तिगत लोगों को ४४ हजार आवंटन किए हैं। उसमें प्लाट और फ्लैट शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक हर साल डेढ़ लाख लोगों के रहने की व्यवस्था होनी चाहिए, यह किसी भी नए शहर का मानक है। अगर प्राधिकरण बिल्डरों को जमीन न देता तो मानक पूरा नहीं हो सकता था। मौजूदा समय में करीब १० लाख फ्लैट शहर में निजी बिल्डरों द्वारा बनाए जा चुके हैं।

    -Amar Ujala
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  • नोएडा एक्सटेंशन के भाग्य का फैसला आज

    नोएडा एक्सटेंशन के भविष्य का फैसला शुक्रवार को हो जाएगा। जमीन अधिग्रहण को लेकर नोएडा व ग्रेटर नोएडा के 64 गांवों का फैसला हाई कोर्ट सुनाएगा। फैसला दोपहर बाद आने की संभावना है। कोर्ट के फैसले पर सवा लाख निवेशकों, बिल्डरों, किसानों व प्राधिकरण का भविष्य टिका हुआ है। अकेले नोएडा एक्सटेंशन में निवेशकों, बिल्डरों व प्राधिकरण का करीब ढाई हजार करोड़ रुपये फंसा हुआ है। नोएडा एक्सटेंशन के गांव पतवाड़ी की 589 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 19 जुलाई को निरस्त कर दिया था। इस फैसले से 11 बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुए थे। प्राधिकरण ने फैसले पर कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। पतवाड़ी का फैसला आते ही ग्रेटर नोएडा व नोएडा के किसानों ने जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर करनी शुरू कर दी। नोएडा एक्सटेंशन समेत ग्रेटर नोएडा के 40 गांवों के किसानों ने 491 याचिकाएं कोर्ट में डालीं। नोएडा के भी 24 गांवों के किसानों ने याचिकाएं दायर की हैं। जमीन अधिग्रहण का मामला कोर्ट में जाने से नोएडा एक्सटेंशन का विकास कार्य ठप हो गया। फ्लैटों की बुकिंग बंद हो गई। अकेले नोएडा एक्सटेंशन में सवा लाख लोगों ने फ्लैट बुक कर रखे थे, उनके मकान का सपना अधर में है। जमीन अधिग्रहण का मामला कोर्ट के पाले में चला गया। 26 जुलाई को हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए नोएडा एक्सटेंशन के गांव पतवाड़ी में प्राधिकरण को किसानों से आपस में समझौता करने का सुझाव दिया। 12 अगस्त तक इसका प्रस्ताव कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया। साथ ही जमीन अधिग्रहण के सभी गांवों की सुनवाई तीन सदस्यीय बैंच को सौंप दी गई। कोर्ट के सुझाव पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने पतवाड़ी गांव के 80 फीसदी किसानों से अतिरिक्त मुआवजा व अन्य लाभ देकर समझौता कर लिया। 12 सितंबर से कोर्ट ने लगातार एक-एक गांव करके सुनवाई की। किसानों, बिल्डरों, निवेशकों, प्राधिकरण व राज्य सरकार को भी पक्ष सुना। 30 सितंबर को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। शुक्रवार को कोर्ट अपना फैसला सुनाने जा रहा है।

    -Dainik jagran
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