पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • Originally Posted by Johny123
    All those 14 buyers of Earth Towne project, who attended the meeting with the City Magistrate, at Sec-19, Noida alongwith Team NEFOWA, complaining problems of their booking in Earth Towne are advised to attend the meeting called by NEFOWA on SUNDAY the 30th December,12 at 12:00 noon at Star City Mall, Mayur Vihar-I, to discuss the progress of solving their problem with Earth, so as to decide the further course of action in the matter soon.


    Earth key sath meeting ??? Chor key sath kya baat karengey ,,, innocent log .... this is time pass :D
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  • वेटलैंड बचाने के लिए सीईओ से लगाई गुहार

    ग्रेटर नोएडा : ग्रेटर नोएडा के बील वेटलैंड बचाने के लिए अथॉरिटी सीईओ से गुहार लगाई गई है। पर्यावरणविद विक्रांत तोगड़ ने सीईओ को लेटर भेजकर आरोप लगाया है कि एक बिल्डर इस वेटलैंड पर अतिक्रमण कर हाउसिंग प्रोजेक्ट बना रहा है। इससे काले हिरनों की मौत हो रही है।
    बील अकबरपुर गांव की जमीन पर प्राचीन वेट लैंड पर सर्दियों के मौसम में देश-विदेश के हजारों पक्षी पहुंचते हैं। इसके अलावा, यहां साल भर देसी पक्षी, हिरन, खरगोश, कछुआ आदि जानवर रहते हैं। तोगड़ ने आरोप लगाया है कि कुछ समय से एक बिल्डर यहां कंस्ट्रक्शन करा रहा है। इसके चलते हिरनों व अन्य जीवों की मौत हो रही है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने भी इसके चलते बिल्डर को कारण बताओ नोटिस दिया था। हाल ही में जिला स्तरीय समिति ने भी इस वेट लैंड को नोटिफाई करने का निर्णय लिया है, लेकिन एसडीएम स्तर पर कार्रवाई रुकी हुई है। उन्होंने मांग है कि इस लैंड को अतिक्रमण मुक्त कराकर यहां फॉरेस्ट गार्ड नियुक्त किए जाएं।
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  • अलॉटमेंट कैंसल करने की तैयारी में अथॉरिटी

    ग्रेटर नोएडा : यमुना अथॉरिटी आवंटित डबल अलॉटमेंट और वक्त पर किस्त न देने वालों का अलॉटमेंट कैंसल करने की तैयारी कर रही है। किस्त न देने वाले 4 हजार आवंटियों को नोटिस भेजा जा रहा है। यमुना एक्सप्रेस - वे अथॉरिटी के एसीईओ हरीश कुमार वर्मा ने बताया कि यमुना अथॉरिटी वर्ष 2009 में लॉन्च हुई 21 हजार प्लॉटों की स्कीम की जांच करा रही है। जांच में कई खामियां मिली हैं।

    इसमें सामने आया है कि एक ही शख्स के नाम दो - दो प्लॉट अलॉट कर दिए गए हैं। ऐसे 64 मामले पकड़ में आ चुके हैं। बाकी की जांच अभी जारी है। ऐसे प्लॉटों का अलॉटमेंट कैंसल किया जाएगा। उन्हांेने बताया उन प्लांटों की भी जांच की जा रही है जिन आवंटियों ने 3 किस्तों के बाद बाकी किस्तें जमा नहीं कराई है। ऐसे 4 हजार आवंटियों को नोटिस भेजा जा रहा है।

    डिफॉल्टरों को नोटिस : ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी डिफॉल्टर आवंटियों को नोटिस भेज रही है। इनमें ग्रेनो वेस्ट के बिल्डर भी शामिल हैं। 15 दिन में किस्त न जमा कराने वाले का आवंटन कैंसल कर दिया जाएगा। एसीईओ ने बताया कि अथॉरिटी को हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार किसानों को 64 प्रतिशत बढ़ा हुआ मुआवजा और दस पर्सेंट आबादी के प्लॉट देने हंै। इसके लिए रकम जुटाने के लिए डिफॉल्टरों को नोटिस भेजा जा रहा है। ग है कि इस लैंड को अतिक्रमण मुक्त कराकर यहां फॉरेस्ट गार्ड नियुक्त किए जाएं।
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  • कब्जा हटाया तो सड़क पर फूटा गुस्सा

    ॥ ग्रेटर नोएडा || ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने गुरुवार को नाइट सफारी के लिए यमुना एक्सप्रेस - वे के किनारे अरक्षित जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाया। इस मार्केट में प्रॉपर्टी डीलरों ने अपने दफ्तर बना लिए थे और दफ्तरों के पीछे बडे़ पैमाने पर अवैध कॉलोनी काटी जा रही थी। मार्केट तोड़े जाने को लेकर अथॉरिटी के अधिकारियांें और प्रॉपर्टी डीलरों के बीच कहासुनी भी हुई। दस्ते के वापस लौटते ही डीलरों ने आसपास के गांवों के किसानों के साथ मिलकर यमुना एक्सप्रेस - वे पर जाम लगा दिया।

    करीब दो घंटे तक लोग जाम में फंसे रहे। इस दौरान , पुलिस और ग्रामीणों के बीच नोंकझोंक भी हुई। बाद में मौके पर पहंुचे ग्रेनो सीओ फर्स्ट आलोक प्रियदर्शी के आश्वासन के बाद जाम खोला गया। ग्रेनो अथॉरिटी के ओएसडी योगेंद्र यादव ने बताया कि नाइट सफारी के लिए मुर्शदपुर गांव की जमीन आरक्षित कर ली गई है।

    उन्होंने बताया कि इस जमीन पर यमुना एक्सप्रेस - वे अथॉरिटी के एंट्री गेट के पास कुछ प्रॉपटी डीलरों ने अपने दफ्तर बना लिए और पीछे की और जमीन पर अवैध कॉलोनी काटनी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि अवैध कॉलोनी और मार्केट को सीईओ के निर्र्देश पर गुरुवार सुबह को गिराया गया। दर्जनों दुकानों को गिरा दिया गया जबकि कुछ दुकानों में प्रॉपटी डीलरों का सामान होने व ताला लगा होने के चलते कार्रवाई नहीं की गई।

    इन दुकानदारों को नोटिस भेजकर सूचना दे दी गई है। अगर इन्होंने सामान नहीं हटाया तो इसे जब्त करके कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अभियान जारी रहेगा। वहीं , दुकानें गिराए जाने के विरोध में प्रॉपर्टी डीलर इकट्ठा हो गए। इस दौरान , प्रॉपर्टी डीलर और अथॉरिटी की टीम के बीच नोंकझोंक भी हुई। लेकिन मौके पर तैैनात भारी पुलिस बल के चलते डीलर अधिक विरोध नही कर सके। दस्ते के जाने के बाद डीलरों ने आसपास के गांवों के किसानों के साथ मिलकर यमुना एक्सप्रेस - वे जाम कर दिया।
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  • धुआं व राख आसपास रहने वालों की जिंदगी में ज

    ॥ नोएडा || लगभग एक दशक पहले थर्मल पावर स्टेशन की चिमनी से निकलने वाला धुआं व राख आसपास रहने वालों की जिंदगी में जहर घोलता था। मगर अब सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन व पर्यावरण के प्रति पहल से अब इसी राख ( फ्लाईएश) ने निर्माण क्षेत्र में नई क्रांति ला दी है। अकेले दादरी स्थित एनटीपीसी के कैंपस में हो रहे निर्माण के लिए प्रोजेक्ट के परिसर में ही 20 हजार ईंटें डेली फ्लाईएश से तैयार हो रही हैं। दादरी के निकट बन रहे बाईपास में एनटीपीसी की फ्लाईएश इस्तेमाल हो रही है। इसके साथ ही नेशनल हाइवे अथॉरिटी को भी सड़क बनाने में फ्लाईएश इस्तेमाल करने की सिफारिश की गई है।
    सेक्टर-18 में आयोजित एक कार्यक्रम में एनटीपीसी के रीजनल इग्जेक्युटिव डायरेक्टर ए.एन. दवे ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फ्लाईएश का मल्टीपल यूज होने से इसका उपयोग बढ़ गया है। यही वजह है कि एनटीपीसी चिमनी से निकलने वाली फ्लाईएश को सीमेंट कंपनियों को सप्लाई करती है। यह लगभग 1500 टन प्रतिदिन है। इन कंपनियों ने भी अपने ग्राइंडिंग प्लांट दादरी के पास ही स्थापित किए हैं। इसके अलावा, बॉटम से निकलने वाली फ्लाईएश से एनटीपीसी कैंपस में ही प्रतिदिन 20 हजार ईंटों के अलावा एक हजार टाइल्स व 1400 के करीब कर्व स्टोन तैयार हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि जमीन में 2 मीटर से नीचे की खुदाई पर रोक लगाई गई है। इसलिए अब वेस्टर्न यूपी की लगभग 60 ईंट बनाने वाली कंपनियों ने फ्लाईएश के लिए संपर्क साधा है। इससे बनने वाली ईंट की लागत सवा तीन रुपये के करीब है। इसकी मजबूती जांचने को सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टिट्यूट से रिसर्च भी कराई गई है।
    कोयले की सप्लाई से पावर सेक्टर की जेनरेशन में पड़ने वाले अंतर पर ए.एन. दवे ने बताया कि इसका असर तो पड़ रहा है। घरेलू सेक्टर से कोयले की सप्लाई नहीं हो पा रही है। इसकी भरपाई आयात कर की जा रही है। इनकी लागत में अंतर है। देश में मौजूद कोयले की लागत 3500 रुपये प्रति टन है जबकि विदेश से आने वाले कोयले की लागत 6000 से 8000 रुपये प्रति टन है। इस अवसर पर इग्जेक्युटिव डायरेक्टर एस.सी. पांडेय, जीएम दादरी डी.के. सूद व ए. चिदंबरम आदि मौजूद थे।
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  • ग्रेनो टु जेवर सर्विस रोड का गिफ्ट जनवरी म

    ग्रेटर नोएडा से जेवर तक यमुना एक्सप्रेस - वे के किनारे बन रही सर्विस रोड का काम 15 जनवरी तक पूरा होने की उम्मीद है। इसका निर्माण कर रही कंपनी के अफसरों का कहना है कि अलग - अलग जगह लेन का काम तेजी से चल रहा है। 15-20 दिन में काम पूरा होने की उम्मीद है। हालांकि , अधिकारियों ने पहले सितंबर तक सर्विस रोड बन जाने का दावा किया था। सर्विस रोड बनने से जेवर के लोगों को काफी सहूलियत होगी। ग्रेनो से जेवर तक आने - जाने वालों को फिलहाल यमुना एक्सप्रेस - वे पर टोल देना पड़ता है।

    सर्विस रोड का काम रबुपुरा तक पूरा हो चुका है। यहां से जेवर के बीच टुकड़ों में काम किया जा रहा है। करीब 15 किलोमीटर तक सड़क बननी बाकी है। तय शर्तों के अनुसार जेपी इन्फ्राटेक को 56 किलोमीटर लंबी सर्विस लेन बनानी है। यह एक्सप्रेस वे चालू होने के साथ ही बन जानी थी। जेपी इन्फ्राटेक के जॉइंट एमडी समीर गौड़ ने बताया कि जेवर तक सर्विस लेन का काम टुकड़ों में चल रहा है। एक्सप्रेस - वे के दोनों ओर यह सर्विस लेन टुकड़ों में होगी। उम्मीद है कि अगले 15 से 20 दिनों में इसका काम पूरा हो जाएगी।

    बता दें कि 9 अगस्त को एक्सप्रेस - वे चालू होते वक्त जेपी इन्फ्राटेक के अधिकारियों ने 30 सितंबर तक सर्विस लेन चालू करने का दावा किया था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि 15 जनवरी तक इसका काम हो जाएगा।
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  • बिल्डर की जमीन पर किसानों का कब्जा

    ॥ ग्रेटर नोएडा || ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन एरिया में किसानांे ने एक बिल्डर को दी गई तीन सौ एकड़ जमीन पर टै्रक्टर चलाने के बाद कब्जा कर लिया है। किसान अब इस जमीन पर बुआई करेंगे। जमीन पर कब्जा लेने के दौरान सांसद सुरेंद्र नागर भी अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहंुच गए। सांसद के पहंुचने से किसानांे की हिम्मत और बढ़ गई। बिल्डर की जमीन पर टै्रक्टर चलाते समय पुलिस दूर-दूर तक नजर नहीं आई। किसानों ने अब सेकंड फेज में अब बिल्डर का निर्माण कार्य बंद कराने का फैसला किया है।
    जिला किसान महासंघ के प्रवक्ता डॉ. रूपेश वर्मा ने बताया कि बिल्डर प्रभावित 8 गांवों के किसानों ने डीएम को शुक्रवार को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा था। किसानांे ने रविवार तक मांगों को मानने का वक्त दिया था। उन्होंने बताया कि डीएम ने किसानों की मांगों पर कोई एक्शन नहीं लिया। इससे किसानों का गुस्सा बढ़ गया।
    किसान रविवार सुबह 10 बजे कैमराला चक्रसैनपुर गांव में एकत्रित हुए और महापंचायत की। सांसद ने महापंचायत में कहा कि किसानांे को विकास के नाम पर लूटा जा रहा है। लीलू नेताजी ने कहा कि किसानों ने अपनी जमीन पर कब्जा लेना शुरू कर दिया है। अब किसान बिल्डर का काम बंद कराएंगे।
    राजेश मास्टर ने कहा कि बिल्डर ने पांच साल पहले टाउनशिप बनाने के लिए किसानों से जमीन ली थी। पांच साल मंे बिल्डर टाउनशिप नहीं बना पाया। अब किसानों ने अपनी जमीन पर कब्जा ले लिया है। एडवोकेट विजय पाल भाटी ने कहा कि जो किसान बिल्डर को जमीन दे चुके हैं, उनको बढ़ा हुआ मुआवजा औैर दस प्रतिशत आबादी की जमीन विकसित करके ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर दी जाए।
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  • डीएम के आश्वासन के बाद माने किसान

    ॥ ग्रेटर नोएडा || हाईटेक सिटी से प्रभावित 18 गांवों के किसान सोमवार को नायफल गांव में बिल्डर साइट पर पहंुचे। यहां किसानों ने बिल्डर की कई साइटांे पर काम बंद करा दिया। इसके बाद किसान बिल्डर के काजीपुरा स्थित दफ्तर पर ताला जड़ने के लिए बढ़े, लेकिन मौके पर मौजूद गाजियाबाद के सीओ और एसडीएम ने पुलिस की सहायता से बैरिकेडिंग लगाकर किसानों को रोक लिया। इस दौरान पुलिस और किसानांे के बीच काफी देर तक नोकझोंक भी चली। किसान वहीं पर धरने पर बैठ गए।
    जिला किसान महासंघ के प्रवक्ता रूपेश वर्मा ने बताया कि काफी देर के बाद एसडीएम गाजियाबाद और सीओ ने वार्ता का प्रस्ताव किसानों के पास भेजा। किसान वार्ता करने के लिए तैयार हो गए। उन्होंने बताया कि एसडीएम की डीएम से बात हुई है। डीएम ने 29 दिसंबर तक का समय मांगा है। हमने डीएम के आश्वासन को मानते हुए 29 तक का समय दे दिया है। रूपेश वर्मा ने बताया कि अगर 29 तक किसानों की मांगे पूरी नहीं हुईं, तो हम बिल्डर का काम फिर से बंद कराकर दफ्तर पर ताला जड़ देंगे। वहीं दुजाना मंे किसानांे का अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।
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  • Originally Posted by trialsurvey
    johny bhai in form ........ post pe post !!

    kal latest update doonga bhai logon ... if there is not too much fog then i will visit NE again tomorrow :)


    Trialsurvey bhai or johny bhai, if possible Gaurcity 2, 11th avenue ke photos bhi upload kar dijiye........
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  • Originally Posted by trialsurvey
    johny bhai in form ........ post pe post !!

    kal latest update doonga bhai logon ... if there is not too much fog then i will visit NE again tomorrow :)




    Trial Boss

    pl update Steller, Arihant and Vedantam

    thanks in advance.
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  • Trial bhai, Aap bhi NE mai koi project launch kar hi do. You are in great demand :)
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  • Originally Posted by realestate00
    The project u choosed is not very promosing as such. Supertech:bab (45): is not known for either timely delivery or quality also. I am still to understand why or how u got into this.

    My suggestion is little different from what others have suggested in this thread. If you r new to RE then stick to RTM or near completion project. From your 2nd property start taking calculated risk. Also as u r not in town so its better and safe and peaceful to book in near completion or RTM projects. TRY CR or NOIDA not RNE(very bad gentry).
    Try Ajnara in CR. I almost booked there but backed away for budget constrains . But if u think that dumping ground can be a reality in future then dont invest there at all.

    Get out of Supertech even with a 10% loss. As it will be a better decision for long term perspective. You will get more head aches from this builder in time to come. Why to stick to the most fraud builder for the sake of loosing 10%.

    And if you think NE is better that CR then you can go for Stellar project as well. I have booked there so I am defiently baised in this case.

    Do let us know your decision. Wish u luck.:)


    Thanks friend but I didn't book in Supertech. I think you mixed two threads. I booked in Galaxy North Avenue GC3 Gaur City 1. What about this project? I know this is new builder but in current situation do you think it's ok to be with them?
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  • Rs 3,800 cr land scam unearthed in Noida - The Times of India


    NOIDA: Another scam related to allotment of land to private companies and individuals has been unearthed in Noida. The Noida Authority has revealed that the Rs 3,800 crore scam took place in 2011 during the erstwhile BSP government wherein around 3.81 lakh square metres land was leased to three private companies and 'favoured individuals'.

    An inquiry into the matter began in June after the regime change in the state. While a Naib Tehsildar has been removed, the Authority CEO Sanjeev Saran has recommended suspension of a PCS officer currently posted as additional district magistrate (land) in Noida. An FIR may soon be lodged against the accused officers.

    The inquiry has revealed that the PCS officer Harish Chandar, who was then posted as secretary, Ajay Shrivastav (Tehsildar), and Manoj Kumar Singh (Naib Tahsildar) had allegedly allotted 3,81,527 square metres of developed prime land along the expressway in Sectors 140A, 141, 142 and 143 violating all laid down norms.

    The Noida Authority has removed Manoj Kumar Singh from his post while Ajay Shrivastav had been sacked earlier. TOI has a copy of the letter written to UP principal secretary (appointment) Rajeev Kumar recommending sacking of PCS officer Harish Chandar. The land was allotted at a marginal rate of Rs 11,000 per square metre even though the prevailing market rates were as much as Rs 1 lakh per square metre, said officials.

    The land has been allotted to the three private companies and a dozen ineligible individuals under the guise of regularizing Abadi land dispute among farmers in Sehadra village along the expressway.

    Officials said that in the case of Abadi land regularization, Noida Authority only has the power to leaseback a plot to a villager if he was in possession of it and was an original resident of the village. "The officials blatantly violated these norms and got lease deeds done to ineligible people and private companies, which otherwise cannot be done through legal means," said Vijay Kumar Yadav, deputy CEO, Noida Authority.

    "The officials had used the farmer unrest of 2011 as an excuse and stated that if they did not leaseback the land, violence would break out," said an official. The inquiry has also revealed that the accused officers had also managed to fool a high-level committee headed by the DM and the SSP, that exclusively takes care of Abadi land issues, by not revealing the specific area of the land allotted in the scam.
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  • Kanshiram hospital Out Patient Department to start in Feb TOI

    GREATER NOIDA: With the construction work of the much delayed multi-crore Kanshiram Hospital in Greater Noida almost complete now, authorities have said that the Out Patient Department (OPD) services will become operational from February next year.

    As per the initial plan, the construction work was to have been completed almost a year ago. The OPD services were to have begun from November 30. However, several factors such as paucity of funds, elections, land acquisition row, etc, led to the project being severely delayed. However, the Greater Noida Authority CEO Rama Raman has said that the OPD services will finally begin in February, 2013.

    The OPD services at the Kanshiram Hospital are likely to benefit thousands of residents of Greater Noida and its neighbouring villages. In the absence of a government hospital in Greater Noida, currently there is increased pressure on the multispecialty Ambedkar hospital in Noida. "Over 2,000 patients, including several from Greater Noida visit the district hospital in Noida every day. The Noida hospital isn't equipped to deal with such pressure," said an Authority official.

    The under-construction Kanshiram Hospital in Greater Noida is spread across 15 acres. As per the Detailed Project Report, the multispecialty hospital will have more than 16 departments, including pulmonary, endocrinology, diabetic, neurology, nephrology, skin allergy, psychiatry, cardiology, ophthalmology, orthopedics, etc. To cater to the surgical needs of patients, 16 modular operation theatres and eight intensive care units have been built. Considering its strategic location, near NH-91, a trauma centre has also been approved for the hospital. According to Rama Raman, "the 500-bed hospital will have world class treatment facilities" similar to that in the Ambedkar Hospital in Noida.

    As per the initial plan, the Kanshiram Hospital, one of former UP Chief Minister Mayawati's dream projects was scheduled to become functional from June 2011. However, following the delay, in February this year the authorities had constituted a sub-committee comprising the Greater Noida Authority's DCEOs and several members of the Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences, Lucknow to help procure essential medical equipment for the hospital and bring the project back on track.

    The state government had also allocated a sum of Rs. 350 crore to facilitate the procurement of the required equipment etc. The Hospital is being constructed at a total cost of Rs. 760 crore.
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  • Originally Posted by maxhoney2001
    Rs 3,800 cr land scam unearthed in Noida - The Times of India


    NOIDA: Another scam related to allotment of land to private companies and individuals has been unearthed in Noida. The Noida Authority has revealed that the Rs 3,800 crore scam took place in 2011 during the erstwhile BSP government wherein around 3.81 lakh square metres land was leased to three private companies and 'favoured individuals'.

    An inquiry into the matter began in June after the regime change in the state. While a Naib Tehsildar has been removed, the Authority CEO Sanjeev Saran has recommended suspension of a PCS officer currently posted as additional district magistrate (land) in Noida. An FIR may soon be lodged against the accused officers.

    The inquiry has revealed that the PCS officer Harish Chandar, who was then posted as secretary, Ajay Shrivastav (Tehsildar), and Manoj Kumar Singh (Naib Tahsildar) had allegedly allotted 3,81,527 square metres of developed prime land along the expressway in Sectors 140A, 141, 142 and 143 violating all laid down norms.

    The Noida Authority has removed Manoj Kumar Singh from his post while Ajay Shrivastav had been sacked earlier. TOI has a copy of the letter written to UP principal secretary (appointment) Rajeev Kumar recommending sacking of PCS officer Harish Chandar. The land was allotted at a marginal rate of Rs 11,000 per square metre even though the prevailing market rates were as much as Rs 1 lakh per square metre, said officials.

    The land has been allotted to the three private companies and a dozen ineligible individuals under the guise of regularizing Abadi land dispute among farmers in Sehadra village along the expressway.

    Officials said that in the case of Abadi land regularization, Noida Authority only has the power to leaseback a plot to a villager if he was in possession of it and was an original resident of the village. "The officials blatantly violated these norms and got lease deeds done to ineligible people and private companies, which otherwise cannot be done through legal means," said Vijay Kumar Yadav, deputy CEO, Noida Authority.

    "The officials had used the farmer unrest of 2011 as an excuse and stated that if they did not leaseback the land, violence would break out," said an official. The inquiry has also revealed that the accused officers had also managed to fool a high-level committee headed by the DM and the SSP, that exclusively takes care of Abadi land issues, by not revealing the specific area of the land allotted in the scam.



    Can this effect current going projects in sec 140,141,142 and 143 ???
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