पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • Originally Posted by planner
    Aage aage dekhiye - Kya hota hai.
    Kab project par kaam hoga
    Kab Project hand over hoga
    Kitna paisa extra dena hoga.
    Registry kab aur kaise hogi?

    All these question - GOD knows better

    haan noida extn 10 varshiya yojna lagti hai !! ;)
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  • बिना तहकीकात न खरीदें प्रॉपर्टी

    अगर डेवलपर या बिल्डर ने विभिन्न प्राधिकरणों से आवश्यक मंजूरी नहीं ली है तो न केवल प्रोजक्ट में विलंब हो सकता है बल्कि प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट भी आ सकती है

    अपना घर, भले वह छोटा हो, एक सुकून देता है। लेकिन प्रॉपर्टी की दिन दूनी, रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ती कीमतों के कारण मध्यम वर्गीय के लिए मुख्य शहर में अपना घर खरीदने की बात एक सपना बनता जा रहा है। डेवलपर भी बड़े खरीदारों को ध्यान में रखते हुए ज्यादातर प्रोजेक्ट लांच करते हैं जिनसे वह मोटा मुनाफा कमाते हैं। शहर के आस-पास बनने वाले मकान भी सस्ते नहीं रहे लेकिन ज्यादातर लोगों के पास इसके अलावा कोई विकल्प बच भी नहीं रहा। बड़े-छोटे शहरों में आपको विभिन्न डेवलपरों और बिल्डरों की होर्डिंग और अखबारों में विभिन्न प्रोजेक्ट के विज्ञापन जरूर दिख जाएंगे।

    बिना तहकीकात किए इन हाउसिंग प्रोजेक्ट में अपने लिए फ्लैट या मकान बुक कराना बुद्धिमानी नहीं कही जा सकती। बिल्डरों और डेवलपरों को परियोजना शुरू करने से पहले विभिन्न प्राधिकरणों से तमाम तरह की अनुमति लेनी होती हैं। अगर, बिल्डर ने किसी संबंधित प्राधिकरण से परियोजना के लिए अनुमति नहीं ली है तो परियोजना विलंबित हो सकती है और बाद में न केवल प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट आ सकती है बल्कि खरीदार को लोन लेने और उस प्रॉपर्टी को बेचने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। अपनी मेहनत की कमाई को डूबने से बचाने के लिए प्रॉपर्टी की खरीदारी से पहले कुछ जरूरी तहकीकात कर यह सुनिश्चित कर लें कि बिल्डर के पास परियोजना को सफल बनाने से संबंधित प्राधिकरण की मंजूरी हासिल है।

    जमीन की हकीकत
    सबसे बड़ा मसला जमीन का होता है। जिस तेजी से रियल एस्टेट परियोजनाएं पांव पसार रही हैं उसमें यह देखना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है कि निर्माण के लिए प्रस्तावित जमीन आवासीय निर्माण के लिए प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत है या नहीं। सरकार खास जमीनों के विशेष इस्तेमाल के लिए ही मंजूरी देती है। अगर, खेती वाली जमीन पर हाउसिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है तो बाद में खरीदारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि यह अवैध माना जाता है। इसलिए, यह सुनिश्चित कर लें कि आपके बिल्डर ने खेती के जमीन पर हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए कन्वर्जन की आवश्यक मंजूरी ली हुई है।

    विभिन्न प्राधिकरणों की मंजूरी
    विभिन्न राज्यों में अलग-अलग प्राधिकरणों से अनुमति लेनी होती है। जिसमें, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, पॉल्यूशन बोर्ड, टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट और कई अन्य स्थानीय प्राधिकरणों की मंजूरी शामिल है है। स्थानीय नगर निगम प्राधिकरण से बिल्डिंग प्लान की मंजूरी लेना जरूरी होता है। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले बिल्डर को संबंधित प्राधिकरण के पास बिल्डिंग प्लान जमा कराना होता है।

    प्राधिकरण की स्वीकृति यह सुनिश्चित करती है कि डेवलपर का बिल्डिंग प्लान शहर के बिल्डिंग नियमों के उप-नियमों के अनुरूप है। जैसे दिल्ली में बिल्डिंग प्लान की अनुमति दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) देता है, वहीं गुडग़ांव में इसके लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) की अनुमति लेनी होती है।

    प्रॉपर्टी की बुकिंग से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि बिल्डर विभिन्न नागरिक प्राधिकरणों जैसे प्रदूषण बोर्ड, जलापूर्ति विभाग आदि से अनापत्ति प्रमाणपत्र या नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) ले चुका है। इसके अतिरिक्त पड़ोस के जायदाद मालिक से भी अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होता है ताकि यह साबित हो सके बिल्डर अपने ही जमीन पर निर्माण करने जा रहा है। किसी भी तरह का निर्माण कार्य शुरू करने से पहले संबंधित विभिन्न विभागों से एनओसी लेना जरूरी होता है।

    जमीन का मालिकाना हक
    जमीन के मालिकाना हक को लेकर किसी तरह का विवाद तो नहीं है? यह देखा जाना भी जरूरी है। अगर जमीन विवादास्पद है और मालिकाना हक को लेकर दो पक्षों के बीच मुकदमा चल रहा है तो एक खरीदार के तौर पर आपको ऐसी प्रॉपर्टी से दूर ही रहना चाहिए। विवादित जमीन के मामले में खरीदार को होम लोन लेने में परेशानी हो सकती है। जमीन विवादास्पद होने से निर्माण-कार्य भी विलंबित हो सकता है। निर्माण कार्य समाप्त होने के बाद सबसे अंत में बिल्डरों को ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट लेना होता है। इसके बाद ही आप उस प्रॉपर्टी में रहने जा सकते हैं।

    रेडी टु मूव प्रॉपर्टी को दें तरजीह
    किसी निर्माणाधीन या हाल में शुरू हुए प्रोजेक्ट में अपने लिए घर खरीदना न केवल महंगा पड़ता है बल्कि इस बात की भी कोई गारंटी नहीं होती कि उसका पजेशन निर्धारित समय पर मिल ही जाएगा। इसलिए हमेशा रेडी टु मूव मकान यानी जो मकान तैयार है उसकी खरीदारी करना ज्यादा अच्छा विकल्प है। यह देखा जाना चाहिए कि मकान में पानी, बिजली आदि की वैध सुविधा है और दस्तावेज देख कर यह तस्दीक कर लें कि जमीन या नक्शे से जुड़ा कोई विवाद नहीं है।

    उद्देश्य के अनुसार करें प्रॉपर्टी का चयन
    प्रॉपर्टी का चयन इस बात पर निर्भर करता है कि आप घर अपने इस्तेमाल के लिए खरीद रहे हैं या फिर इंवेस्टमेंट के लिए। इसी के मुताबिक उचित कीमत पर मिलने वाली प्रॉपर्टी का चयन किया जाना चाहिए। रहने के इरादे से खरीदे गए घर दीर्घावधि के निवेश के समान हैं। भले ही घर की कीमत में बढ़ोतरी हो लेकिन आप उसका इस्तेमाल स्वयं ही कर रहे होते हैं।

    ऐसे में प्रॉपर्टी के रेट बढऩे या घटने की दशा में कोई फर्क नहीं पड़ता। लंबी समयावधि में प्रॉपर्टी के मूल्य में बढ़ोतरी होगी, यह बात तो तय है। अगर निवेश के लिहाज से प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं तो उसकी असली कीमत उसे बेचने पर ही मिलेगी। अगर मूल्य के हिसाब से प्रॉपर्टी अच्छी है और अन्य सुविधाओं के लिहाज से भी वह दुरूस्त है तो फिर उसकी खरीदारी में विलंब न करें।
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  • जमीन अधिग्रहण बिल पर हायतौबा गलत

    क्या है खास
    :जमीन अधिग्रहण और पुनर्वास बिल, 2011 को मिली संसद से मंजूरी
    :निजी सेक्टर के लिए अधिग्रहण हेतु 80 फीसदी जमीन मालिकों की
    मंजूरी जरूरी
    :पीपीपी परियोजनाओं के लिए 70 फीसदी जमीन मालिकों की मंजूरी

    जमीन अधिग्रहण बिल को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई और अब इसे संसद में पारित करना है। देश में उद्योग के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़े इस बिल की राह में यह एक अहम पड़ाव है लेकिन यहीं से इसकी गुत्थियां भी शुरू होती हैं।

    जमीन अधिग्रहण और पुनर्वास बिल, 2011 को संसद से मंजूरी मिलने के बाद उद्योग के लिए जमीन खरीदने का सौदा विवादास्पद नहीं रहेगा और अब तक सिंगुर से लेकर नोएडा एक्सटेंशन में पैदा जन विरोधों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस बिल के प्रावधानों के मुताबिक निजी सेक्टर के लिए जमीन अधिग्रहण से पहले 80 फीसदी जमीन मालिकों की मंजूरी जरूरी होगी। जबकि पीपीपी परियोजनाओं के लिए 70 फीसदी जमीन मालिकों की मंजूरी की शर्त रखी गई है।

    लेकिन इन्हीं प्रावधानों ने इंडस्ट्री की चिंता बढ़ा दी है। रियल एस्टेट डेवलपर हों या फिर इन्फ्रास्ट्क्र्चर परियोजनाएं लाने वाली कंपनियां, हर कोई बढ़ी लागतों को लेकर चिंतित है। कॉन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के नेशनल प्रेसिडेंट ललित कुमार जैन का साफ कहना है कि अगर बिल अपने मौजूदा स्वरूप में पारित हो जाता है निश्चित तौर पर मकानों की कीमतें बढ़ जाएंगी।
    अस्सी फीसदी जमीन मालिकों की मंजूरी का मतलब यह है कि पहले से ज्यादा लोगों को मुआवजा।

    जाहिर है, अब परियोजनाओं के शुरू होने से पहले ही कंपनियों को एक बडी़ रकम मुआवजे के तौर पर देनी होगी। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में प्रोफेसर विवेक देवरॉय का कहना है कि निश्चित तौर पर इससे इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी और उसके ग्रोथ को मुश्किल में डालेगी। देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में आगे काफी जोर होगा और जमीन की बढ़ी हुई कीमतों का इस पर असर पडऩा तय है।

    जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया से जुड़े कुछ अन्य विशेषज्ञ भी इस राय से सहमत हैं। उनका कहना है कि इससे इंडस्ट्री की लागत तीन से चार गुणा तक बढ़ जाएगी। पुनर्वास की लागत बढ़ जाएंगी और अधिग्रहण की प्रक्रिया काफी लंबी खिंच जाएगी। इंडस्ट्री इतना बोझ नहीं सकती है और जाहिर है इससे इसका विकास धीमा हो जाएगा।

    सरकार ने इस बिल में पुनर्वास का जिम्मा भी उन निजी कंपनियों पर डाल दिया है, जो बहुत ही छोटी हैं। उनके लिए पुनर्वास की लागत उठाना मुश्किल है। इन कंपनियों का कहना है कि जब लोगों को बाजार कीमत पर मुआवजा मिल रहा है तो फिर अलग से पुनर्वास की लागत वहन करने के लिए दबाव डालना जायज नहीं होगा। इंडस्ट्री की बढ़ी हुई लागत का असर कीमतों पर बढ़ेगा और इससे महंगाई निश्चित तौर पर बढ़ेगी।

    जमीन अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रिया को देख रहे एक उद्योग संगठन के प्रतिनिधि ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जमीन अधिग्रहण की बढ़ी लागतों का असर रोजगार पर दिखेगा। अगर लागतों की वजह से रियल एस्टेट या इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की रफ्तार धीमी हुई तो इनमें पैदा होने वाले रोजगार की तादाद निश्चित तौर पर कम होंगे। खास कर अद्र्धकुशल श्रमिकों के सामने बेरोजगारी की स्थिति गंभीर होगी। इसलिए इंडस्ट्री संगठनों ने सरकार से मांग की है इस बिल में संतुलन पैदा करने की कोशिश करें।

    हालांकि अर्थशास्त्रियों  का एक वर्ग इस राय से इत्तेफाक नहीं रखता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी में प्रोफेसर और वरिष्ठ अर्थशास्त्री ी एन आर. भानुमूर्ति का मानना है कि पहली बार जमीन अधिग्रहण और इससे जुड़े मुद्दे पर एक स्पष्ट माहौल तैयार हो गया है। पहले यह स्थिति नहीं थी। जमीन अधिग्रहण बिल के प्रावधानों से इंडस्ट्री की लागत थोड़ी बढ़ेंगी। लेकिन इंडस्ट्री के निवेश लंबी अवधि के होते हैं। इतने लंबे समय के हिसाब से देखें तो इंडस्ट्री पर इस बढ़ी हुई लागत का कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसका बेहतरीन उदाहरण हरियाणा है। इस राज्य में उद्योग के लिए जमीन अधिग्रहण बेहतर तरीके से हो रहा है।

    यहां जमीन की कीमतें ज्यादा है। फिर भी इंडस्ट्री बढ़ी हुई लागतों की शिकायत नहीं कर रही है। उसे मालूम है कि लंबी अवधि के निवेश के लिए इस बढ़ी हुई लागत से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। इसलिए उद्योग बढ़ी हुई लागतों को लेकर जो हायतौबा मचा रहा है उसमें दम नहीं है। इंडस्ट्री को अब इसे ध्यान में रख कर ही अपनी प्रतिस्पद्र्धा क्षमता बढ़ानी होगी। यह इंडस्ट्री पर निर्भर है कि वह बढ़ी हुई लागतों का बोझ उपभोक्ताओं पर किस हद तक डाले कि प्रतिस्पर्धा रह सके।

    इस तरह देखा जाए तो उद्योग के सामने शुरु आत में अड़चनें आएंगी लेकिन यह बहुत मुश्किल भरी नहीं होंगी। सबसे अहम बात यह है कि अब जमीन अधिग्रहण और पुनर्वास नीति में चली आ रही अस्पष्टता खत्म हो चुकी है। सारी चीजें साफ हैं। इसलिए किसी एक प्रावधान की आड़ लेकर चीजों को उलझाना आसान नहीं रह जाएगा।
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  • किसानों के लिए आएगी फार्म हाउस स्कीम

    एनबीटी न्यूज ॥ ग्रेटर नोएडा
    अथॉरिटी किसानांे के लिए फार्म हाउस स्कीम लॉन्च करने जा रही है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। बोर्ड मीटिंग में प्रस्ताव को रखा जाएगा। बोर्ड की मुहर लगते ही स्कीम लॉन्च कर दी जाएगी। किसानों के लिए ऐसी स्कीम लॉन्च करने वाली ग्रेनो अथॉरिटी प्रदेश की पहली इंडस्ट्रियल अथॉरिटी होगी। इस स्कीम से पर्यावरण को भी स्वच्छ बनाए रखने में मदद मिलेगी।
    अफसरांे ने बताया कि स्कीम के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। अलॉटमेंट रेट का निर्धारण बोर्ड मीटिंग में तय किया जाएगा। फार्म हाउस उन्हीं किसानों को अलॉट किया जाएगा जो पुश्तैनी हैं और जिनकी जमीन अथॉरिटी ने अधिग्रहीत की है। फार्म हाउस अलॉट होने के बाद किसान दस साल तक उसे नहीं बेच सकेंगे। अफसरांे ने बताया कि फार्म हाउस के अंदर किसानों को सब्जी और फल उगाने व डेयरी खोलने की छूट होगी। बहुत ही कम एरिया में परमानेंट कंस्ट्रक्शन की अनुमति दी जाएगी। अफसरों ने बताया कि फार्म हाउस स्कीम के तहत काफी बड़ा एरिया ओपन रहेगा। इस स्कीम से शहर में ग्रीन बेल्ट का एरिया और बढ़ जाएगा।
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  • Originally Posted by trialsurvey
    haan noida extn 10 varshiya yojna lagti hai !! ;)




    mujhe yeh national saving certifcate - 6 years waali lagti hai
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  • Originally Posted by Johny123
    mujhe yeh national saving certifcate - 6 years waali lagti hai


    hahahaha yeah or better still 8 years wala kisan vikas patra (KVP) !! ;)
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  • so noida extn mahagun , gaur city side is safe. n why is gnoida is again aquiring sahberi wen it is closest to DG.

    Ye ho kya rha hai. Builders bi sale installment le lete hai na koi update dete hai ya koi email. bus paise mangte rehte hai
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  • Originally Posted by del_sanju
    so noida extn mahagun , gaur city side is safe. n why is gnoida is again aquiring sahberi wen it is closest to DG.

    Ye ho kya rha hai. Builders bi sale installment le lete hai na koi update dete hai ya koi email. bus paise mangte rehte hai




    may be total 36 acres jismain DG ban na hai - 14 ghaziabad waali land aur bachi hui 22 acress ki land jo ki shaahberi se aayegi umsin banayenge DG o
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  • Originally Posted by trialsurvey
    haan noida extn 10 varshiya yojna lagti hai !! ;)


    Aapki yeh baat bahut buri Lagi mujhe----

    but all the Logic support your statement.
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  • Originally Posted by del_sanju
    so noida extn mahagun , gaur city side is safe. n why is gnoida is again aquiring sahberi wen it is closest to DG.

    Ye ho kya rha hai. Builders bi sale installment le lete hai na koi update dete hai ya koi email. bus paise mangte rehte hai



    Johny Bhai already replied you for 1st Para

    For 2nd Para = Wahi unka Dharm hai, unke Pass kaam karne wale unse bhi kamine hote hain -- Sale khud to kabhi kharid nahi Payenge kabhi - Aur customers se bhi jalte hain - Khud ko to Builder ka Baap hi samajhte hain ye Fakir ki aulaad --

    Dost meri baat ka bura na mano = This is based on my experience = Jab accounts department se aap account settle , interest settle kareinge tab pata chalega ki yeh "Planner bechara sahi bol raha tha.
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  • Originally Posted by planner
    Aapki yeh baat bahut buri Lagi mujhe----

    but all the Logic support your statement.



    planner I do agree with you... i too have hopes from NE.. may be this a better place to live in for hundreds of families....

    i pray for better being of the place and wish ki sab kuch kushal mangal tarike se ban jaye 2-3 saal main ...

    i am end-user as well as investor....

    lets c how this place shapes ...i may be residing there then :)
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  • DG ki baddbu toh IREF pe aane lagi hai..
    I have decided to get out of Noida Extension before that Holy Mountain overshadows the high rises of CR and NE..
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  • Originally Posted by cookie
    DG ki baddbu toh IREF pe aane lagi hai..
    I have decided to get out of Noida Extension before that Holy Mountain overshadows the high rises of CR and NE..



    a broker is aksing for a unit in Mywwods ...internal kuch jugad se .. he said ki he will transfer the flat ..;)
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  • Originally Posted by Johny123
    planner I do agree with you... i too have hopes from NE.. may be this a better place to live in for hundreds of families....

    i pray for better being of the place and wish ki sab kuch kushal mangal tarike se ban jaye 2-3 saal main ...

    i am end-user as well as investor....

    lets c how this place shapes ...i may be residing there then :)



    Bahut sare Financers, Investors, endusers ka paisa laga hai,

    May GOD approve this pitition in this new year Happy moments.

    ----Aameen-----
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  • Originally Posted by planner
    Bahut sare Financers, Investors, endusers ka paisa laga hai,

    May GOD approve this pitition in this new year Happy moments.

    ----Aameen-----



    bhai ab toh 2 petition hain ...

    ek SC ki land aquisiation waali
    doosari DG waali ...
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