पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • मुआवजा सिर्फ समझौता करने वालों को
    नोएडा अथॉरिटी से बिना समझौते बढे़ मुआवजे का लाभ लेने का मंसूबा पालने वाले किसानों के लिए बुरी खबर है। अथॉरिटी अफसरों ने मीटिंग कर सिर्फ उन्हीं किसानों को बढ़े हुए मुआवजे का लाभ देने का निर्णय किया है जो अथॉरिटी से समझौता करेंगे। हालांकि आबादी और 8 पर्सेंट प्लॉट समेत अन्य सुविधाओं का लाभ सभी किसानों को मिलेगा।

    रविवार को समझौते के खिलाफ नोएडा एक्सटेंशन में किसानों की हुई महापंचायत के बाद अब ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी भी सजग हो गई है। गांव के सभी किसानों को बढ़े मुआवजे का लाभ देने का मन बना चुकी अथॉरिटी ने सोमवार को अचानक यू टर्न ले लिया। अथॉरिटी अफसरों ने मीटिंग कर अब सिर्फ उन्हीं किसानों को बढे़ मुआवजे का लाभ देने का निर्णय किया है जिन्हें अथॉरिटी का समझौता स्वीकार होगा। दरअसल , पतवाड़ी गांव में अथॉरिटी ने जो जमीन अधिग्रहीत की थी , वह करीब 3500 किसानों की है। इनमें से करीब 1700 किसान ऐसे हैं जो मूलरूप से पतवाड़ी गांव के निवासी नहीं है। ये किसान बेदपुरा , मिल्क लच्छी , बमहैटा , हैबतपुर , सोरखा , सादुल्लापुर , रोजा और बिसरख के हैं। इसके अलावा दो किसान कासना और दो गाजियाबाद के भी हैं। अथॉरिटी अफसरों का कहना है कि गांव के सभी किसानों से अलग - अलग वार्ता की जाएगी , चाहे उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है या नहीं। अफसरों का कहना है कि बढे़ मुआवजे के अलावा 6 पर्सेंट की जगह 8 पर्सेंट विकसित प्लॉट , आबादी , स्कूल - कॉलेजों में एडमिशन में 10 पर्सेंट रिजर्वेशन , लीज - बैक की शर्तों के सरलीकरण आदि का लाभ सभी किसानों को मिलेगा।

    -navbharat times
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  • फिलहाल फोकस सिर्फ पतवाड़ी पर


    नोएडा एक्सटेंशन एरिया के गांवों के किसान भले ही पतवाड़ी गांव से अथॉरिटी के हुए समझौते को खारिज करने के लिए जनसभाएं और पंचायत कर रहे हों , लेकिन अथॉरिटी 12 अगस्त तक सिर्फ पतवाड़ी पर फोकस करेगी। सोमवार को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ ने अधिकारियों के साथ मीटिंग कर इलाहाबाद हाई कोर्ट में रिट दायर करने वाले गांव के सभी किसानों के साथ समझौता करने के निर्देश दिए।

    अथॉरिटी अफसरों के मुताबिक , मीटिंग में निर्णय किया गया है कि 12 अगस्त तक अथॉरिटी अफसर सिर्फ पतवाड़ी गांव पर ही फोकस करेंगे। दरअसल , 12 अगस्त को अथॉरिटी को इलाहाबाद हाई कोर्ट में पतवाड़ी गांव के किसानों से हुए समझौते से संबंधित जवाब दाखिल करना है। अधिकारियों के मुताबिक , अन्य गांवों में मुआवजे को लेकर हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक काम किया जाएगा। सीईओ ने सोमवार को सभी अफसरों को गांव के उन सभी किसानों से संपर्क करने के निर्देश दिए हैं जिन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। अफसरों ने बताया कि यूं तो गांव में हुई पंचायत के बाद ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में बनी 12 सदस्यीय कमिटी से अथॉरिटी का लिखित समझौता हो गया है। इसके बाद भी यह प्रयास किया जाएगा कि रिट दायर करने वाले सभी किसानों से अलग - अलग समझौता हो जाए। मीटिंग में एसीईओ हर्ष तन्खा , डीसीईओ पी . सी . गुप्ता और डीसीईओ अखिलेश सिंह समेत अथॉरिटी के कई सीनियर अधिकारी मौजूद थे।
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  • यमुना अथॉरिटी मंे भी हो पतवाड़ी जैसा समझौता


    ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ हुए समझौते को यमुना अथॉरिटी में भी लागू करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। बीकेयू के पदाधिकारी इस मसले पर सोमवार को किसानांे के साथ यमुना अथॉरिटी के सीईओ से मिले और पांच सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। किसानांे ने सीईओ से कहा कि तीनों अथॉरिटी की पॉलिसी एक जैसी हैं, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी व यमुना अथॉरिटी के चेयरमैन भी एक हैं। इसलिए किसानों के बीच मुआवजे और आबादी का भेदभाव समाप्त किया जाए। किसानों ने कहा कि यमुना अथॉरिटी एरिया के किसानों को भी पतवाड़ी के किसानांे के बराबर मुआवजा, 8 प्रतिशत आवासीय प्लॉट और शिक्षण संस्थाआंे में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। बीकेयू ने यमुना अथॉरिटी के सीईओ को मांगों को मानने के लिए 2 दिन का वक्त दिया है। साथ ही बीकेयू ने बुधवार को कनारसी गांव मंे पंचायत का ऐलान किया है। पंचायत में किसान आगे की रणनीति तय करेंगे। बीकेयू के जिला महासचिव मास्टर श्योराज सिंह रावल ने बताया कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना अथॉरिटी की नीति एक जैसी है। हाल ही में हाई कोर्ट के आदेश के बाद ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ समझौता किया है। इस समझौते को यमुना अथॉरिटी एरिया में लागू किया जाए और किसानों को लाभ दिया जाए। बीकेयू के जिलाध्यक्ष अजयपाल शर्मा ने बताया कि जिले में पुनर्वास नीति 2001 से लागू की जाए। उन्होंने कहा कि बिल्डरांे के स्थान पर जमीन इंडस्ट्री लगाने के लिए अलॉट की जाए। बीकेयू ने कहा है कि किसानांे की मांग पूरी नहीं की गई तो किसान आंदोलन करने पर मजबूर हांेगे और हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।


    -navbharat times
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  • Patwari truce falters: Villager goes to SC

    Wants Out-Of-Court Settlement Order Quashed


    Greater Noida: Since the Greater Noida Authority has failed to arrive at a cordial settlement with all landowners in Patwari village,farmers have now turned to the Supreme Court for justice.In a first,a villager has knocked the apex courts door to quash the process of out-of-court settlement between villagers and the Authority.
    Khemchand Sharma,a resident of Nithari village in Noida,who owns 32 bighas of land in Patwari,has filed a writ petition asking the Supreme Court to quash the Allahabad High Court order for an out-of-court settlement in Patwari.If one division bench of the high court has quashed the notification for land acquisition in Patwari,the affected parties can only appeal to the Supreme Court, said counsel for Khemchand Sharma,advocate Pankaj Dubey.There is no question of a fresh hearing for the same notification by any other bench of the high court, he said.

    Allahabad High Court had cancelled notification of around 119 hectares of land in Patwari on July 19.On July 26,the court referred the case to a larger bench.It had granted time to the Greater Noida Authority to arrive at an out-ofcourt settlement with Patwari villagers before August 12.

    Petitioner Khemchand Sharma said that the agreement was reached between a few handpicked villagers from Patwadi and the Greater Noida Authority officials in the most arbitrary and non-transparent manner,without taking into consideration the opinions of most landowners.

    Greater Noida Authority considers all land in Patwari belonging to people who are not normally residents of the village as non-ancestral property.We were paid 15 per cent less compensation for our land in comparison to those who have their homesteads in Patwari, said Sharma.The promise of eight per cent developed land does not apply to us, added Sharma.

    Several other villagers say that they were not consulted before the deal was inked between Patwari villagers and the Authority.We are not aware of the contents of the agreement.Neither do we know if we would get the enhanced compensation, said Sharma.We want market rates for the acquired land and will not settle for anything less, said Akshay Naagar,a Patwari resident.

    The Authority used the dual tactics of pressure and inducement to get a few villagers to agree, said the president of Grameen Panchayat Morcha,Ranbir Pradhan,who has lost around 40 bighas of land in Patwari.The Authority has allowed those who signed affidavits to take huge tracts of land out of the acquisition process, said Pradhan.At least one influential person from the village has been let off with a bonanza of 1,00,000 sqm of his land,which he can sell off later at the minimum prevalent market rate of Rs 12,500 per sqm, he alleged.

    _TOI
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  • new hope from GNA
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  • While groups of farmers continue to protest the out-of-court agreement reached between a 15-member committee of Patwari and the state government on Saturday, officials have been “super quick” in payment of revised land rates. Officials on Tuesday distributed cheques among 24 farmers. A total of 14 more farmers have signed the draft agreement. They will get the money on Wednesday. Greater Noida Industrial Development Authority (GNIDA) CEO Rama Raman confirmed the payment.

    If the Patwari pact stands, it will save 20,000 underconstruction houses in the village. “It takes months for the authority to pay compensation. But in its desperation, it's in a hurry to issue cheques to a select few," said a farmer.

    "The task's not easy. Even a handful of disgruntled farmers may challenge the deal in court and mar the prospects of the crisis being resolved," said a senior official.
    The authority had, three years ago, acquired 589 hectares of land in Patwari at R850 per sq m. About 15% farmers had not accepted compensation. Now, the compensation has been hiked to R1,400 per sqm. Of R550 hiked, R290 will be borne by builders.

    GNIDA will give the increased cash compensation only to those farmers who agree to the deal through affidavits, stating they will withdraw petitions and will never challenge the deal in court.

    A total of 19 petitions representing dozens of farmers of the village had been filed in the High Court. Farmers of several other villages have land in Patwari and most of them have refused the deal. The state government has made it clear the compensation will not be hiked, come what may.

    -TOI

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  • सरकारी बैंकों ने दिया 2166 करोड़ का लोन

    नोएडा एक्सटेंशन में बिल्डरों व निवेशकों को पब्लिक सेक्टर के बैंकों ने 2166.2 करोड़ रुपये का लोन जारी किया है। इसमें होम लोन सहित कंस्ट्रक्शन लोन भी शामिल है। यह जानकारी सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में दी। नोएडा एक्सटेंशन से जुड़े एक सवाल का जवाब वित्त राज्य मंत्री मानो नारायण मीना ने बताया कि 31 मार्च 2010 तक पब्लिक सेक्टर बैंक ने नोएडा एक्सटेंशन में निर्माण और हाउसिंग लोन के तहत 2166.2 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसमें 1258.7 करोड़ रुपये 12330 उपभोक्ताओं को बतौर होम लोन दिए गए, जबकि 907.5 करोड़ रुपये कंस्ट्रक्शन लोन के रुपये में जारी किए गए। ज्ञात हो कि उच्च न्यायालय ने किसानों की याचिका पर दो अलग-अलग फैसलों में नोएडा एक्सटेंशन में भूमि अधिग्रहण को निरस्त किया है। इस फैसले का असर करीब 750 हेक्टेअर भूमि पर पड़ा है। इससे नोएडा एक्सटेंशन में चल रहे 20 हाउसिंग प्रोजेक्ट और करीब 26,000 फ्लैट उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं।


    -Dainik Jagran
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  • I don't know how much time it will take to settle the dispute in Noida, NE, GN,YEA but obviously it would be sorted out some day or another.

    We need to understand that this is not the farmers vs authority, its BMW vs Rahul Gandhi, Ajit Singh and part time farmer leaders.

    Farmers were sleeping all this time just to be enlightened by Rahul and their well wishers to know that their land is grabbed by the almighty using urgency clause with lesser compensation? They should have protested at the time of acquisition or when compensation was FORCIBLY given to them.

    Farmers do not want to till the land for the benfit of the country and grow vegetables and grain, the only thing they want is more money by hook or crook any of the means possible.

    Election is a big game in UP and with Rahul trying to prove a point in congress (so called future leader but to me he is kid 40+) things ought to settle down either before election courtsey BMW or after election when the next govt comes up.

    Authority is also playing its own cards by using the same philosphy of divide and rule by having pacts with farmers who are known to them and signing off papers in hurry forgeting that other villagers will not turn a blind eye to it.

    If everything is to be given back to the farmers including the Rashtrapati bhavan ( as claimed by one farmer of sonepat) then we should go back to the prehistoric era and start living in caves.

    Farmers don't understand that the land they have given has appreciated not bcos the MSP set by government for food grains has risen every year, its only bcos of the development on that land and people who have started staying or working there.

    Builders who paid 3000 rs/sqmtr to the authority in black in addition to the circle rate and got preferential allotment with high FSI's in NE turned a blind eye to the disputes on this land and sold it to end users like us and minted money.

    BMW was busy making money by selling entire landbank in Noida, GN,NE,YEA as if she already knows that there will be no second term for her with full majority or any sort of power at all. She sold chunks of lands in acres and hectares to builders who are close to her (read jaypee, amarpali,3C etc. specifically)

    How could a project which is giving huge land bank of 6 cities to a private builder altogether for the sake of building a highway i.e. YE is justified??

    Was there a single scheme of plots by the noida authority for end users in last 5 years? I remember one in 2005-2006 where there was fraud conducted multiple times and do not know what happened in the end. Though BMW was not in power that time.

    Forget everything else, I am still hopeful that this issue will be resolved once everyone is done with their motives and gains i.e. TRP's for news channels, farmer leaders and well wishers for some paltry gains like election tickets or publicity, BMW/Rahul/Ajit for power tussle in UP and POOR INNOCENT farmers with some more money.

    I am not trying to justify that farmers should not be benfitted if they are selling their land, they should be compensated well for whatever they sell off to authority/builders but nobody should be allowed to take the country to ransom in the name of democracy for what has been done long back. Its only possible in banana republic like us.
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  • हस्ताक्षर करते ही मिल रहा है मुआवजा

    ग्रेटर नोएडा, संवाददाता : नोएडा एक्सटेंशन के गांव पतवाड़ी में समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले किसानों को प्राधिकरण साथ ही साथ अतिरिक्त मुआवजे का चेक दे रहा है। अतिरिक्त मुआवजे का चेक मिलने की सूचना मिलते ही मंगलवार को समझौते पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले किसानों की प्राधिकरण में लाइन लग गई। करीब 75 किसानों ने मंगलवार को समझौते पर हस्ताक्षर कर अतिरिक्त मुआवजे का चेक प्राप्त किया। प्राधिकरण को उम्मीद है कि बुधवार तक गांव के सभी किसान समझौते पर हस्ताक्षर कर देंगे। प्राधिकरण के साथ समझौता होने के बाद भी पतवाड़ी गांव के किसान शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने से कतरा रहे थे। उन्हें भरोसा नहीं था कि प्राधिकरण हस्ताक्षर करने के बाद उन्हें अतिरिक्त मुआवजा व अन्य लाभ जल्द देगा। किसानों को विश्वास दिलाने के लिए प्राधिकरण ने मंगलवार को समझौते पर हस्ताक्षर करने के साथ ही अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्णय लिया। इसके लिए प्राधिकरण ने एडीएम (एलए) को सौ करोड़ रुपये रिलीज भी कर दिया। अतिरिक्त मुआवजा मिलने की सूचना मिलते ही समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए पतवाड़ी गांव के किसान प्राधिकरण कार्यालय पहुंचने लगे। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रमा रमन ने बताया कि मंगलवार को करीब 75 किसानों ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया। हस्ताक्षर करने के साथ किसानों को 550 रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से अतिरिक्त मुआवजे का चेक दिया गया। उन्होंने बताया कि किसानों को मुआवजे का चेक एडीएम कार्यालय से दिया जा रहा है। किसानों को अपने साथ दो फोटो व खतौनी की नकल लानी होगी। चेक देने से पहले किसानों को स्टांप पेपर पर एक शपथ पत्र देना पड़ रहा है कि वे रजामंदी से समझौता कर रहे हैं। जमीन अधिग्रहण के खिलाफ वे कोर्ट में याचिका नहीं दायर करेंगे। देर रात तक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों की कतार लगी थी। मालूम हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की अधिसूचना रद कर दी थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने प्राधिकरण की पुनर्विचार याचिका की सुनवाई करते हुए प्राधिकरण, किसान व बिल्डरों को 12 अगस्त से पूर्व समझौता करने का सुझाव दिया था। 17 अगस्त को हाईकोर्ट की बड़ी बेंच मामले की सुनवाई करेगी। प्राधिकरण ने यहां करीब 14 सौ किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया था। इसमें 11 सौ किसानों ने मुआवजा उठा लिया था। काफी प्रयासों के बद शुक्रवार को प्राधिकरण को किसानों के साथ समझौता करने में सफलता मिली।

    News frok Dainik Jagran
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  • समझौते के फायदे बताने लगे नारेबाजी करने वाले
    सीईओ से ग्राम प्रधान समेत अन्य किसान मिले

    ग्रेटर नोएडा। पतवाड़ी के किसानों और प्राधिकरण में शनिवार को जब समझौता हुआ तो उस दौरान सिर्फ ग्राम प्रधान समेत 11 लोगों ने ही सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। उस दिन गांव के ज्यादातर किसानों ने सुलह को नकार दिया था। लेकिन जैसे-जैसे समय निकलता गया, माहौल बदलता गया। जो किसान नारेबाजी कर रहे थे वे मंगलवार को सुलह के फायदे गिनाते नजर आए। ग्राम प्रधान रेशपाल यादव समेत ढेर सारे किसानों ने प्राधिकरण सीईओ रमा रमन, डीसीईओ पीसी गुप्ता, अखिलेश सिंह से वार्ता की। प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी किसान के साथ नाइंसाफी नहीं होगी। दरअसल, किसान चाहते हैं कि 12 अगस्त तक उन्हें मुआवजा का चेक मिल जाए और आबादी का निस्तारण भी हो जाए। बैक लीज के कागजात इसलिए नहीं मिल सकते हैं क्योंकि हाईकोर्ट जमीन अधिग्रहण रद्द कर चुका है।
    पतवाड़ी में अतिरिक्त मुआवजा प्राप्त करने के लिए खतौनी एवं दो फोटो साथ लानी है। बुधवार को ज्यादातर किसान अपना मुआवजा उठा लेंगे और सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर देंगे, ऐसा अधिकारियों को विश्वास है।

    खतौनी और दो फोटो साथ लानी होगी
    प्राधिकरण दफ्तर के आगे दिनभर भीड़
    मंगलवार को जब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पतवाड़ी के किसानों को मुआवजा बांटना शुरू किया। गांव में सूचना मिलते ही प्राधिकरण कार्यालय के बाहर भीड़ लगनी शुरू हो गई। नोएडा के एक्सटेंशन के गांव बिसरख, रोजा याकूबपुर, इटैड़ा, हैबतपुर, खैरपुर गुर्जर समेत अन्य गांवों में मंगलवार को जोरों की चर्चा रही। पतवाड़ी गांव टूट गया है और मुआवजा के चेक लेने के लिए किसान प्राधिकरण दफ्तर की तरफ दौड़ रहे हैं।


    1400 खातेदार हैं, 295 करोड़ बंटना है
    पतवाड़ी गांव में कुल 1400 खातेदार हैं। 300 ही किसान ऐसे बचे हैं जिन्होंने अभी मुआवजा नहीं उठाया है। इनमें करीब 150 किसान ऐसे हैं जो कोर्ट गए हैं। इसलिए जो किसान मुआवजा उठा चुके हैं, उनको बढ़ी हुई दर देने में कोई दिक्कत नहीं होगी। जिन्होंने नहीं उठाया था, उनकी फाइल तैयार की जा रही है। प्राधिकरण को कुल 295 करोड़ मुआवजा देना है। प्राधिकरण का कुछ पैसा पहले ही एडीएम कोषागार में जमा था।


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  • Dont know what next is in store.


    Originally Posted by fritolay_ps
    समझौते के फायदे बताने लगे नारेबाजी करने वाले
    सीईओ से ग्राम प्रधान समेत अन्य किसान मिले

    ग्रेटर नोएडा। पतवाड़ी के किसानों और प्राधिकरण में शनिवार को जब समझौता हुआ तो उस दौरान सिर्फ ग्राम प्रधान समेत 11 लोगों ने ही सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। उस दिन गांव के ज्यादातर किसानों ने सुलह को नकार दिया था। लेकिन जैसे-जैसे समय निकलता गया, माहौल बदलता गया। जो किसान नारेबाजी कर रहे थे वे मंगलवार को सुलह के फायदे गिनाते नजर आए। ग्राम प्रधान रेशपाल यादव समेत ढेर सारे किसानों ने प्राधिकरण सीईओ रमा रमन, डीसीईओ पीसी गुप्ता, अखिलेश सिंह से वार्ता की। प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी किसान के साथ नाइंसाफी नहीं होगी। दरअसल, किसान चाहते हैं कि 12 अगस्त तक उन्हें मुआवजा का चेक मिल जाए और आबादी का निस्तारण भी हो जाए। बैक लीज के कागजात इसलिए नहीं मिल सकते हैं क्योंकि हाईकोर्ट जमीन अधिग्रहण रद्द कर चुका है।
    पतवाड़ी में अतिरिक्त मुआवजा प्राप्त करने के लिए खतौनी एवं दो फोटो साथ लानी है। बुधवार को ज्यादातर किसान अपना मुआवजा उठा लेंगे और सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर देंगे, ऐसा अधिकारियों को विश्वास है।

    खतौनी और दो फोटो साथ लानी होगी
    प्राधिकरण दफ्तर के आगे दिनभर भीड़
    मंगलवार को जब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पतवाड़ी के किसानों को मुआवजा बांटना शुरू किया। गांव में सूचना मिलते ही प्राधिकरण कार्यालय के बाहर भीड़ लगनी शुरू हो गई। नोएडा के एक्सटेंशन के गांव बिसरख, रोजा याकूबपुर, इटैड़ा, हैबतपुर, खैरपुर गुर्जर समेत अन्य गांवों में मंगलवार को जोरों की चर्चा रही। पतवाड़ी गांव टूट गया है और मुआवजा के चेक लेने के लिए किसान प्राधिकरण दफ्तर की तरफ दौड़ रहे हैं।


    1400 खातेदार हैं, 295 करोड़ बंटना है
    पतवाड़ी गांव में कुल 1400 खातेदार हैं। 300 ही किसान ऐसे बचे हैं जिन्होंने अभी मुआवजा नहीं उठाया है। इनमें करीब 150 किसान ऐसे हैं जो कोर्ट गए हैं। इसलिए जो किसान मुआवजा उठा चुके हैं, उनको बढ़ी हुई दर देने में कोई दिक्कत नहीं होगी। जिन्होंने नहीं उठाया था, उनकी फाइल तैयार की जा रही है। प्राधिकरण को कुल 295 करोड़ मुआवजा देना है। प्राधिकरण का कुछ पैसा पहले ही एडीएम कोषागार में जमा था।


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  • 600 किसानों किए समझौते पर हस्ताक्षर


    पतवाड़ी में मुआवजा उठाने के लिए एडीएम कार्यालय में लगी भीड़
    - किसानों के बीच करीब 150 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा गया

    ग्रेटर नोएडा, संवाददाता : नोएडा एक्सटेंशन के गांव पतवाड़ी में 1400 में से 600 किसानों ने प्राधिकरण के साथ समझौते पर हस्ताक्षर कर लिए हैं। बुधवार को प्राधिकरण ने इन किसानों को करीब 150 रुपये की मुआवजा राशि बांटी। मुआवजा उठाने के लिए एडीएम (एलए) कार्यालय में दिन भर किसानों की भीड़ लग रही है। प्राधिकरण ने संभावना जताई है कि अन्य किसान भी अगले दो दिन में समझौते पर हस्ताक्षर कर लेंगे।

    गौरतलब है कि शनिवार को पतवाड़ी गांव के किसानों व प्राधिकरण में समझौता हो गया था। मंगलवार से प्राधिकरण ने समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले किसानों को 550 रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्णय लिया था। मंगलवार रात करीब साढ़े 11 बजे तक 100 किसानों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। वहीं बुधवार प्रात: समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए प्राधिकरण कार्यालय पर किसानों की लाइन लग गई। शाम तक 1400 में से करीब 600 किसानों ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। प्राधिकरण के अधिकारी व कर्मचारी भी किसानों के साथ कार्यालय में बैठे रहे। प्राधिकरण कार्यालय में समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद किसानों को सेक्टर बीटा-एक स्थित एडीएम एलए कार्यालय से मुआवजे का चेक दिया जा रहे हैं। मुआवजा लेने के लिए बुधवार सुबह से एडीएम कार्यालय पर किसानों की भीड़ लग गई। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से मौके पर पुलिस बुलानी पड़ी। बुधवार को किसानों के बीच करीब 150 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा गया।

    प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रमा रमन ने बताया कि बृहस्पतिवार व शुक्रवार को भी किसान समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। जो किसान हस्ताक्षर कर देगा उसे मुआवजा दिया जाएगा। 17 अगस्त को कोर्ट में सुनवाई है। 12 अगस्त के बाद कोर्ट में जवाब दाखिल किया जा सकता है। यदि बृहस्पतिवार तक अगर गांव के सभी किसान समझौते पर हस्ताक्षर कर देते हैं तो 12 अगस्त को हाईकोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया जाएगा।

    -Dainik jagran
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  • Patwari issue is getting easy
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  • नेता गांव में घुसने की कोशिश कर रहे थे तो किसानों ने उन्हें गांवों की सीमा से बाहर दौड़ा दिया।



    ग्रेटर नोएडा। प्राधिकरण दफ्तर में इन दिनों पतवाड़ी के किसानों की समस्याएं सुलझाने के अलावा अन्य किसी कार्य पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सवेरे से लेकर देर रात तक प्राधिकरण दफ्तर और एडीएम (एलए) कार्यालय में किसानों की भीड़ जमा हो रही है। एक हाथ से किसान मुआवजा का चेक ले रहे हैं और दूसरे हाथ से शपथ पत्र पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। बुधवार देर रात तक ६०० खातेदारों को करीब डेढ़ सौ करोड़ मुआवजा देने का लक्ष्य रखा गया । तय किया गया कि जब तक किसान आते रहेंगे, चेक वितरण का काम जारी रहेगा। प्राधिकरण ने किसानों को २९५ करोड़ का मुआवजा बांटने की व्यवस्था कर रखी है। किसान भी मौका नहीं चूक रहे हैं और दो गाड़ियां सिर्फ किसानों को ले आने-जाने में लगा रखी हैं। दोपहर के वक्त तो उस समय स्थिति बिगड़ती दिखी जब एक नेता गांव में घुसने की कोशिश कर रहे थे तो किसानों ने उन्हें गांवों की सीमा से बाहर दौड़ा दिया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि किसानों और प्राधिकरण के बीच हुई सुलह में कोई रोड़ा अटकाया तो अच्छी बात नहीं होगी। मुआवजा के साथ-साथ किसानों ने प्राधिकरण सीईओ रमा रमन से आबादी के मसले पर भी बात की। -Amar Ujala
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    नेता गांव में घुसने की कोशिश कर रहे थे तो किसानों ने उन्हें गांवों की सीमा से बाहर दौड़ा दिया।



    ग्रेटर नोएडा। प्राधिकरण दफ्तर में इन दिनों पतवाड़ी के किसानों की समस्याएं सुलझाने के अलावा अन्य किसी कार्य पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सवेरे से लेकर देर रात तक प्राधिकरण दफ्तर और एडीएम (एलए) कार्यालय में किसानों की भीड़ जमा हो रही है। एक हाथ से किसान मुआवजा का चेक ले रहे हैं और दूसरे हाथ से शपथ पत्र पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। बुधवार देर रात तक ६०० खातेदारों को करीब डेढ़ सौ करोड़ मुआवजा देने का लक्ष्य रखा गया । तय किया गया कि जब तक किसान आते रहेंगे, चेक वितरण का काम जारी रहेगा। प्राधिकरण ने किसानों को २९५ करोड़ का मुआवजा बांटने की व्यवस्था कर रखी है। किसान भी मौका नहीं चूक रहे हैं और दो गाड़ियां सिर्फ किसानों को ले आने-जाने में लगा रखी हैं। दोपहर के वक्त तो उस समय स्थिति बिगड़ती दिखी जब एक नेता गांव में घुसने की कोशिश कर रहे थे तो किसानों ने उन्हें गांवों की सीमा से बाहर दौड़ा दिया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि किसानों और प्राधिकरण के बीच हुई सुलह में कोई रोड़ा अटकाया तो अच्छी बात नहीं होगी। मुआवजा के साथ-साथ किसानों ने प्राधिकरण सीईओ रमा रमन से आबादी के मसले पर भी बात की। -Amar Ujala


    :bab (59): Ha Ha , Actually. This is a good one. :bab (22):

    We all know Its all about MONEY and Farmers understood Its no more agriculture Land for them. Better to take compensation with no more further politics.

    If NA/GNA will decide to give higher compensation for rest all areas then whole Drama will solve in one short.

    Aug 17 2011 is like judgment day and what would be the next situation for Noida / Greater Noida. It will be getting clear.

    Authority/BMW already made lot of profits even we can not calculate about that so even if in case Court will give the judegement in the favor of Farmers. BMW will sort it by hook or crook. :bab (45):

    "Kursi Hai toh Power aur Money dono Hai "
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