पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • जू-1 : 863 मकान, रह रहे सिर्फ 2 परिवार

    ग्रेटर नोएडा
    हाईटेक सिटी ग्रेटर नोएडा का एक सेक्टर है जू-1। इस सेक्टर में 863 मकान हैं। खास बात यह है कि अथॉरिटी यहां रहने वालों को सरकारी पैसे पर अथॉरिटी वीवीआईपी सुरक्षा दे रही है। वह भी मुफ्त। यहां ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के 6 सिक्युरिटी गार्ड और गनमैन तैनात रहते हैं। ऐसा अथॉरिटी अपने कमिटमेंट से मुकरने की वजह से कर रही है। दरअसल, अथॉरिटी को यहां के अलॉटियों को 2010 में पजेशन देना था। पर अब तक बिजली पानी की व्यवस्था न होने से सेक्टर के 863 मकानों में सिर्फ दो परिवार ही रह रहे हैं। इतने बड़े एरिया में सिर्फ दो लोगों के बसने के उन्हें सुरक्षा देना अथॉरिटी की मजबूरी बन गया है।
    2 साल की देरी से मिला था पजेशन
    जू-1 के लिए अगस्त 2007 में जब ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने बने-बनाए मकानों की स्कीम लॉन्च की थी तो गाजियाबाद के वैशाली की एलआईजी कॉलोनी में रहने वाले राजबीर सिंह ने बड़े साइज के घर में रहने का सपना देखा। उन्होंने स्कीम का फॉर्म भर दिया। नवंबर 2008 में ड्रॉ हुआ। उन्हें डी ब्लॉक में मकान अलॉट हुआ। स्कीम में अथॉरिटी ने वन टाइम पेमेंट का ऑप्शन रखा था। इसके लिए राजबीर को बैंक से भारी भरकम लोन लेना पड़ा। लोन अदा करने के लिए राजबीर ने अपना फ्लैट भी बेचना पड़ा। अथॉरिटी ने नवंबर 2010 में मकान में पजेशन देने का कमिटमेंट किया। पर आज तक वहां बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं हो सकी है। इधर, मकान के किराए और बैंक की किस्त से तंग आकर राजबीर अप्रैल 2012 में मकान में शिफ्ट हो गए।
    डर के साये में जी रहे दो परिवार
    राजबीर सिंह ने पत्नी अर्पणा सिंह और दो बच्चों के साथ सेक्टर में अकेले रहने का फैसला किया। हालांकि, एक महीने पहले यहां एक और फैमिली आ गई है। संतोष गुप्ता और उनकी फैमिली डी ब्लॉक में ही 236 नंबर मकान में रह रही है। इससे राजबीर को थोड़ी हिम्मत तो मिली, लेकिन सुनसान इलाका होने के कारण डर का आलम यह है कि दोनों परिवार दिन में भी घर का गेट नहीं खोलते। किसी को बात करनी है तो ग्रिल के अंदर से ही जवाब मिलता है।


    बंद मकानों मंे हो रही चोरियां
    चोर सेक्टर में बंद पड़े कई मकानों की ग्रिल और गेट पर हाथ साफ कर चुके हैं। मकान बनाने वाले कॉन्ट्रैक्टर की ओर से तैनात सिक्युरिटी गार्ड पर फायरिंग भी हो चुकी है। ओएसडी योगेंद्र यादव ने माना कि कमी अथॉरिटी की ओर से हुई है। ऐसे में दोनों परिवारों की मांग पर अथॉरिटी ने 6 सिक्युरिटी गार्ड और गनमैन तैनात कर दिए हैं।
    क्यों नहीं आ रहे आवंटी
    सेक्टर में अब तक पानी और बिजली की व्यवस्था नहीं है। दोनों परिवार कॉन्ट्रैक्टर से जुगाड़ से बिजली - पानी लेकर काम चला रहे हैं। संतोष गुप्ता की पत्नी लक्ष्मी गुप्ता ने बताया कि बहुत से लोगों ने मकान का पजेशन ले लिया है , लेकिन वे पानी और बिजली की सुविधा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। ओएसडी योगेंद्र यादव का कहना है कि अथॉरिटी के मास्टर प्लान -2021 को अप्रूवल मिलने में देरी के कारण समय पर काम पूरा नहीं हो सका। बिजली के केबल बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है। पानी की टंकी भी तैयार है। दो महीने में यह सुविधा दे दी जा एगी।
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  • नोएडा एक्सटेन्शन में निवशकों ने बिल्डर की

    ग्रेटर नोएडा : ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन का टेंशन ख़तम होता नहीं दिख रहा है. अब आरोप लगा है एक बिल्डर पर ठगी का. और तो और जब पीड़ित बिसरख कोतवाली में मामला दर्ज करने पहुंचे तो पुलिस का रवैया भी ढुलमुल रहा. शिकायत की रीसीविंग न देने पर शिकायत करता बायर्स कोतवाली परिसर में ही धरने पर बैठ गए. बाद में मीडिया के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने शिकायतकर्ताओं को जांच का आश्वासन देते हुए तहरीर का रिसीविंग दिया.

    बिसरख कोतवाली परिसर में धरने पर बैठे ये लोग किसी और से नहीं बल्कि अपने ही बिल्डर के हाथ ठगे गए हैं. जी हाँ सन २०१० में इन्ही चंद लोगों ने प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में देविका गोल्ड होम का ऐड देखा था. इसमें बहुत ही लुवावाने सपने दिखाए गए थे. पीड़ितों की माने तो साथ ही प्रचारित किया गया की प्रोजेक्ट का एप्रूवल सभी बैंक में है. लेकिन दो साल बाद जो सच्चाई सामने आई उसने बायर्स के तो होश ही उड़ा दिए .दरअसल एक आर टी आई से ज्ञात हुआ की बिल्डर खुद डिफाल्टर है. साथ ही उनका ये प्रोजेक्ट बैंक से भी approved नहीं है. इसके बावजूद बिल्डर इनसे पैसे मांग रहा है. अपने को ठगा महसूस करते हुए बायर्स पीड़ितों ने बिसरख थाना में बिल्डर के खिलाफ धोखाधडी की शिकायत लिखित रूप में की है
    इधर पुलिस द्वारा शिकायत का रीसीविंग न देने पर पीड़ित भड़क गए. और तो और पीड़ित धरने पर बैठ गए बाद में मीडिया के हस्तछेप के बाद पुलिस ने रीसीविंग दी.
    फिलहाल पुलिस अभी इस मामले में चुप्पी साधे हुए है और जांच की बात कह रही है. अब देखना दिलचस्प होगा क्या पीड़ितों को न्याय मिल पायेगा और ढुलमुल रवैया अपना रही पुलिस न्याय दिला पायेगी.
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  • जिलाधिकारी कार्यालय में किसानों ने की ताल

    ग्रेटर नोएडा। क्षेत्र के किसानों ने अपनी मांगों को लेकर सूरजपुर स्थित गौतम बुद्ध नगर जिलाधिकारी कार्यालय में ताला बंद कर विरोध प्रदर्शन किया। किसानो का आरोप है की उनकी मांगो को लेकर जिलाधिकारी लगातार उपेक्षा कर रहे है. जिसके चलते किसानों का तालेबंदी करने पर मजबूर होना पड़ा।
    गुरूवार को ग्रेनो वेस्ट के किसानों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर ताला जड़ दिया और धरने पर बैठ गए। किसानों ने जमकर नारेबाजी की। किसानों का आरोप है कि है कि प्राधिकरण से आबादी कके मसले पर जो समझौता हुआ था उसे प्रशासन ने उसे नकार दिया। साथ ही किसानों ने का आरोप है हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद प्राणिकरण किसानों को
    मुआवजा का 60 प्रतिशत मुआवजा व 10 प्रतिशत भूमि देने की प्रक्रिया आरंभ नहीं की है। आज किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। किसान नेता मनवीर भाटी के नेतृत्व में किसान डी एम कार्यालय पहुच कर ताला जड़ दिया।

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  • भू-गर्भ जल दोहन पर उच्च न्यालय के निर्देश

    ग्रेटर नोएडा। क्षेत्र में में बिल्डरों द्वारा बहुमंजिला इमारतों के निर्माण के लिए किए जा रहे भू-गर्भ जल के अंधाधुंध दोहन से क्षेत्र के तेजी से गिरते भू-जल स्तर को रोकने के लिए सामाजिक संस्था जन सशक्तिकरण द्वारा इलाबाद उच्चन्यायालय में दायार जनहित याचिका पर फैसला देते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.के. सिंह तथा जस्टिस दिलीप गुप्ता की खंडपीठ ने प्राधिकरणों में नोएडा व ग्रेटर नोएडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग के उपकरणों को लगाने तथा इसकी विधिवत निगरानी के आदेश दिये हैं।
    भवन निर्माण के लिए कंडीशन लगाने के भी निर्देश दिए हैं, साथ ही याची संस्था को भी निर्देशित करते हुए कहा कि वह सेन्ट्रल ग्राउंड वाटर अथारिटी से आवश्यक सुझाव लेकर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार को उपलब्ध
    करवाएं ताकि इस विषय पर सही नीति का निर्णय कर सके। वहीं दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं में कृष्णकांत सिंह, कुलदीप नागर एडवोकेट तथा विक्रांत तोंगड़ ने जानकारी दी। याचिका कर्ता कृष्णकांत सिंह ने कहा कि बिल्डर बड़ी निर्ममता और निर्दयता से धरती के गर्भ से प्रतिदिन लाखों करोड़ो लीटर पानी निकालकर गंदे नालों में बहा रहे हैं। प्राधिकरण व प्रशासन की लापरवाही के कारण यह क्षेत्र भूजल के हिसाब से डार्क जोन बन गया है और प्रकृति जल के स्रोत तेजी से सूख रहे हैं।
    हैंडपम्प तथा बोरबैलो ने ग्रामीण क्षेत्रों में पानी बंद कर दिया है। रियल स्टेट कंपनियां सामाजिक तथा मानवीय सरोकारों को ताक पर रखकर केवल मुनाफाखोरी करने में लगी हैं और इस क्षेत्र की जल सम्पदा को बर्बाद कर दिया है। पर्यावरणविद विक्रांत तोंगड़ ने कहा कि इस विषय पर प्राधिकरण तथा प्रशासन संबंधित एजेन्सीज से लम्बे समय से पत्राचार किया जा रहा है लेकिन उन्होंने आज तक इतने गंभीर मामले का संज्ञान न लेकर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया, जिले में लगाता 20-70 सेमी जल स्तर गिर रहा है।
    संस्था के महासचिव एडवोकेट कुलदीप नागर ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए संस्था अपने उपयोगी सुझावों को शीघ्र ही प्राधिकरण तथा मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश को उपलब्ध करवा देगी तथा शहर के अग्रणी लोगों की एक समिति गठित कर जिसमें एक्सपर्टस होगें उनकी रिपोर्ट शासन के भेजेगें। उन्होंने कहा कि जल दोहन को लेकर शासन प्रशासन गंभीरता से नहीं ले रहा है। अगर ऐसे ही जल का दोहन होता रहा तो आने वाले दिनों में लोगों पीने के लिए पानी नसीब नहीं होगा।
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  • आबादी के प्लॉट का होगा कमर्शल इस्तेमाल!

    ग्रेटर नोएडा
    जमीन अधिग्रहण के बदले मिलने वाले छह प्रतिशत आबादी के प्लॉट का किसान कमर्शल इस्तेमाल कर सकें , इसके लिए अथॉरिटी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखेगी। अथॉरिटी के नए प्रस्ताव के अनुसार किसान 6 प्रतिशत आबादी के प्लॉट के पचास प्रतिशत हिस्से का कमर्शल और बाकी का इस्तेमाल आवासीय के रूप में कर पाएंगे। इससे किसानों को दोनों तरह का लाभ होगा।

    जिला किसान महासंघ के प्रवक्ता रूपेश वर्मा ने बताया कि किसान अथॉरिटी की इस पॉलिसी का स्वागत करते हैं। उन्होंने बताया कि पहले किसानों को मिलने वाले 6 प्रतिशत आबादी के प्लॉट पर किसान आबादी ही बना सकता था लेकिन अब अथॉरिटी पचास प्रतिशत हिस्से में कमर्शल यूज करने की छूट दे रही है। इससे किसानांे का भविष्य सुधर जाएगा। किसान दुकान मार्केट बनाकर व्यवसायिक गतिविधियां चला सकेंगे।

    ओएसडी योगेंद्र यादव ने बताया कि प्लॉट का कमर्शल इस्तेमाल करने के लिए शासन ने मंजूरी दे दी है। अथॉरिटी अब इसके लिए नियम बनाने जा रही है। उन्हांेने बताया कि अथॉरिटी इस प्रस्ताव को बोर्ड बैठक में ले जा रही है। कमर्शल यूज करने वाले किसानों को अथॉरिटी से नक्शा पास कराना होगा। नक्शा पास कराने के बाद की किसान कमर्शल और आबादी बना सकेंगे।




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  • यमुना अथॉरिटी का घेराव कर धरना दिया

    यमुना अथॉरिटी का घेराव कर धरना दिया


    किसानों ने अपनी मांगांे को लेकर राष्ट्रीय किसान यूनियन के बैनर तले गुरुवार को यमुना अथॉरिटी का घेराव कर धरना दिया। जमीन अधिग्रहण से प्रभावित दनकौर, रबुपुरा, जेवर एरिया के किसान बस, टेंपो, कार आदि में सवार होकर सुबह 11 बजे पी-2 स्थित अथॉरिटी पहंुचे। किसानों ने पहले अथॉरिटी का घेराव किया, इसके बाद अथॉरिटी की पार्किंग की जगह पर कब्जा कर धरना देकर बैठ गए। यूनियन के दनकौर ब्लाक अध्यक्ष उधम सिंह नागर ने कहा कि यमुना अथॉरिटी ने भोले-भाले किसानों की जमीन औने-पौने दामों में अर्जेंसी क्लॉज लगाकर अधिग्रहीत की है। किसानों की वर्षों पुरानी आबादी का अधिग्रहण किया गया। उन्होंने कहा कि किसानांे को छोटे से काम से लिए दर्जनांे बार धक्के खाने पड़ते हैं।
    यूनियन जिलाध्यक्ष इकपाल सिवाच ने कहा कि किसान लंबे अर्से से नोएडा-ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर 64 प्रतिशत बढ़ा हुआ मुआवजा, दस प्रतिशत आबादी के प्लॉट, पुश्तैनी और गैर पुश्तैनी का भेद समाप्त किए जाने की मांग करते आ रहे हंै। किसानांे की मांगों पर अथॉरिटी ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि जब तक किसानांे की सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, संघर्ष जारी रहेगा। राष्ट्रीय किसान यूनियन के जिला प्रवक्ता श्रीपाल भाटी ने कहा कि किसानांे को यमुना एक्सप्रेस-वे पर चलने के लिए टोल टैक्स देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए यमुना एक्सप्रेस-वे टोल फ्री किया जाए। किसानांे ने अपनी मांगांे से संबंधित ज्ञापन यमुना अथॉरिटी के तहसीलदार सुरेश शर्मा को सांैपा। किसानांे ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्दी पूरी नहीं हुइर्ं तो किसान अथॉरिटी को हमेशा के लिए बंद कर देंगे। तहसीलदार से किसानांे को आश्वासन दिया कि उनकी सभी मांगांे को जल्द पूरा किया जाएगा।

    यमुना अथॉरिटी का घेराव कर धरना दिया - Yamuna Authority picketed siege to - Navbharat Times
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  • जल्द शुरू होगा इस रोड का काम

    जल्द शुरू होगा इस रोड का काम

    ग्रेटर नोएडा
    सूजरपुर स्थित न्यू हॉलैंड कंपनी के पास से ग्रेटर नोएडा वेस्ट होते हुए एनएच-24 तक सर्विस लेन का काम जल्द शुरू हो जाएगा। फंड की कमी के कारण इस सर्विस रोड का काम रुका हुआ था। अथॉरिटी अफसरों ने बताया कि सर्विस रोड का 55 फीसदी काम पूरा कर लिया गया है।
    सूजरपुर टी-पॉइंट के पास यामाहा कंपनी से ग्रेटर नोएडा वेस्ट होते हुए राहुल विहार के पास एनएच-24 तक रोड शुरू हो गई है। अगस्त 2011 में 60 मीटर चौड़ी इस रोड के साथ सर्विस रोड का काम भी शुरू हुआ था। इस काम का एस्टिमेट तीन करोड़ 12 लाख रुपये रखा गया था। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की वित्तीय स्थिति गड़बड़ाने की वजह से इस रोड का काम रुक गया था। अथॉरिटी अफसरों ने बताया कि सर्विस रोड का जल्द बना लिया जाएगा। पानी की निकासी के लिए रोड के साथ ड्रेन भी बनाई जा रही है। अनुमान है कि अगले पांच साल में ग्रेनो वेस्ट में आबादी बसने पर 60 मीटर रोड पर ट्रैफिक का दबाव काफी बढ़ जाएगा। इसके मद्देनजर ही यह रोड बनवाई जा रही है।


    जल्द शुरू होगा इस रोड का काम - The road work will start soon - Navbharat Times
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  • any construction update.
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  • They have removed the COPIED picture from their site ... :bab (3):

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  • होम बायर्स का सेंटिमेंट बिगड़ेगा


    इकनॉमिक टाइम्स | Jan 10, 2013, 12.12PM IST
    नई दिल्ली।। ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन) को लेकर होम बायर्स का सेंटिमेंट खराब होने का डर है। प्रॉपर्टी एक्सपर्ट्स का कहना है कि पतवाड़ी गांव में कोर्ट की ओर से लगाया गया स्टे भले ही गांव में रह रहे लोगों के लैंड पर लागू हो, लेकिन इससे इलाके में होम बायर्स का इंटरेस्ट कम हो सकता है। वहीं, बिल्डर्स और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से काम पर असर नहीं पड़ेगा।

    प्रॉपर्टी रिसर्च पोर्टल .com की प्रमुख (कॉन्टेंट एवं रिसर्च) जयश्री कुरूप ने कहा, 'कोर्ट के फैसले से ग्रेटर नोएडा वेस्ट में होम बायर्स के सेंटिमेंट पर काफी असर पड़ेगा। अफोर्डेबल हाउसिंग के लिहाज से यह इलाका सबसे बेहतर है। हालांकि, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट रिटर्न पर इस फैसले से असर पड़ने की आशंका नहीं है।' उन्होंने कहा कि स्टे के बाद बायर्स की ओर से इनक्वायरी कम हो सकती है।

    रीयल एस्टेट फर्म आम्रपाली के निदेशक अनिल शर्मा ने कहा, 'कोर्ट ने इलाके में कंस्ट्रक्शन पर स्टे नहीं लगाया है। होम बायर्स को इससे घबराने की जरूरत नहीं है। नई डेडलाइन के हिसाब से हम ग्राहकों को पजेशन देने की कोशिश करेंगे।' हालांकि, शर्मा ने भी माना कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से होम बायर्स के सेंटिमेंट पर असर पड़ सकता है।

    रीयल एस्टेट वेबसाइट के ईवीपी एवं बिजनेस हेड विनीत कुमार सिंह ने कहा, 'कोर्ट के आदेश से सेंटिमेंट बिगड़ेगा। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी पिछले 2 साल से इलाके में नए अलॉटमेंट नहीं कर रही है। इसके चलते पहले से ही सेंटिमेंट नेगेटिव है। इस घटना के बाद इलाके में इन्वेस्ट करने वालों की संख्या में कमी आ सकती है।' उन्होंने कहा कि इलाके के डिवेलपमेंट और कंज्यूमर सेंटिमेंट सुधारने के लिए अथॉरिटी को नई योजनाएं लाने की जरूरत है।वहीं, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ रामा रमण ने बताया, 'कोर्ट का आदेश उस इलाके के लिए है, जहां गांव के लोग रह रहे हैं। कोर्ट ने वहां यथास्थिति बहाल रखने की बात कही है। इस फैसले से कंस्ट्रक्शन पर असर नहीं पड़ेगा।' इलाके में पहले से चल रहे विवाद की वजह से ग्राहकों का सेंटिमेंट कमजोर है। इस बारे में सुपरटेक लिमिटेड के एमडी आर के अरोड़ा ने कहा, 'ग्रेटर नोएडा वेस्ट के होम बायर्स को अदालती लड़ाई के चलते करीब 2 साल का नुकसान उठाना पड़ा है। हम तय समय पर होम बायर्स को पजेशन देंगे।'
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  • NEFOWA's effort worked and compelled the builder ( Earth INfra) for withdrawal of its unethical demand

    Today NEFOWA had a meeting with director Earth Infra, Mr Atul Gupta in which he finally resolved all the issues of various flat buyers who complained us regarding cancellation of their flats, interest on zero period etc . In this meeting, Team NEFOWA was represented by Indrish Gupta, Ravindra Jain, Manish Awasthi & Sumit Saxena. NEFOWA was making all its effort to keep pressure on the builder for the last 4-5 months by way of meeting with their director & other officials, doing protests at their site but they were not considering the demands. In between NEFOWA also complained the matter to City Magistrate, Noida in this regard. As a result of that, Earth officials had agreed on some points but were not ready to settle the matter in full.

    ... Finally, today NEFOWA's continuous effort has worked and the issues of the flat buyers has been resolved. We hope that similar approach will be taken by other builders also in the Greater Noida West for all those buyers who have complained us.
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  • अथॉरिटी, सरकार और डीएम से जवाब तलब

    ग्रेटर नोएडा
    जमीन अधिग्रहण को लेकर बादलपुर और सादोपुर गांव के किसानांे की याचिकाआंे पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। किसानों के वकील महेंद्र प्रताप तोमर ने बताया कि कोर्ट ने ग्रेनो अथॉरिटी, यूपी गवर्नमेंट और डीएम को 13 फरवरी तक जवाब दाखिल करने का समय दिया है। उन्हांेने बताया कि सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार कोर्ट मंे हुई। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने बादलपुर के किसानांे की याचिकाआंे पर सुनवाई करते हुए जवाब दाखिल करने को कहा था लेकिन अथॉरिटी, यूपी गवर्नमेंट और डीएम जवाब दाखिल नहीं कर पाए हैं। महंेद्र तोमर ने बताया कि ग्रेनो अथॉरिटी ने बादलपुर और सादोपुर गांव के किसानांे की जमीन अर्जेंसी क्लॉज लगाकर 2008 में अधिग्रहीत की थी। अथॉरिटी ने अर्जेंसी क्लॉज इंडस्ट्री लगाने के लिए लगाई थी। उन्हांेने बताया कि इंडस्ट्री लगाने के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन पर अथॉरिटी ने पार्क बना दिया। उन्होंने बताया कि दोनों गांवांे के किसानांे ने पहले हाई कोर्ट मंे याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने बढ़ा हुआ मुआवजा दिए जाने के आदेश अथॉरिटी को दिए थे। उन्होंने बताया कि किसानांे ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। महेंद्र तोमर ने बताया कि मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को होगी। बादलपुर गांव के किसान राजेंद्र नागर ने बताया कि किसान जमीन अधिग्रहण रद्द कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पूरी ताकत से अडे़ हंै। उन्होंने कहा कि किसानांे को सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है।
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