पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • Originally Posted by trialsurvey
    yaar supreme court should think a little bit about the lakhs of middle class flat buyers whose money is stuck in extension .. they keep delaying the final judgement and hence farmers still are aggresive and hoping that its still their land !

    Supreme Court is vry intellignt.. thy knw if d decision wil cum either farmers wil boil or buyers will.. bt nw both r in sum way at eaze dat decision is pending.. so wait n watch..
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  • Originally Posted by Abhishek Agg
    Supreme Court is vry intellignt.. thy knw if d decision wil cum either farmers wil boil or buyers will.. bt nw both r in sum way at eaze dat decision is pending.. so wait n watch..

    bhai wait and watch mein kahin aisa naa ho jaye ki flat banke ready hon and then land acquisition scrapped !! :D
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  • ye india hai mere dost.. hr evrythin to nythin is possible.. hope 4 d best..
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  • पुराने बायर्स का फ्लैट न करें कैंसल : सीईओ


    नवभारत टाइम्स | Feb 22, 2013, 08.00AM IST
    एनबीटी न्यूज॥ ग्रेटर नोएडा
    ग्रेनो वेस्ट के ऐसे बिल्डरों को अथॉरिटी ने कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो पुराने निवेशकों का फ्लैट कैंसल कर रहे हैं। साथ ही उनसे जीरो पीरियड का भी ब्याज मांग रहे हैं।

    बुधवार देर शाम ग्रेनो अथॉरिटी के सीईओ के साथ नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ओनर्स वेलफेयर्स असोसिएशन (नेफोवा) के पदाधिकारियों ने मीटिंग कर बिल्डरों के खिलाफ शिकायत की। मीटिंग में तीन बिल्डरों के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया था।

    नेफोवा की जनरल सेक्रेटरी श्वेता भारती ने बताया कि ग्रेनो वेस्ट में 7-8 बिल्डर पुराने निवेशकों का फ्लैट कैंसल कर रहे हैं। कुछ ऐसे भी बिल्डर हैं, जो जीरो पीरियड का लाभ निवेशकों को नहीं दे रहे थे। पदाधिकारियों की बात सुनने के बाद सीईओ ने तत्काल तीनों बिल्डरों के पदाधिकारियों को फ्लैट कैंसल वापस लेने के निर्देश दिए।

    उन्होंने नेफोवा के साथ मिलकर बिल्डरों को निवेशकों की समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी चेतावनी दी है कि यदि पुराने निवेशकों को किसी भी प्रकार से तंग किया जाता है तो संबंधित बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नेफोवा के प्रेसिडेंट अभिषेक कुमार ने बताया कि सीईओ के निर्देश के बाद एक बिल्डर ने शुक्रवार को नेफोवा के पदाधिकारियों को मीटिंग के लिए बुलाया है।
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  • Originally Posted by Johny123
    Work Start Letter for PanchSheel buyres ... Good news




    Where did this come from?? News item??
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  • क्यों ज़रूरी है रियल एस्टेट रेगुलेटरी बिल?





    15 जनवरी को बिल्डरों के दो संगठन CREDAI और NAREDCO ने केंद्रीय मंत्री कमल नाथ और अजय माकन से मुलाक़ात कर रियल एस्टेट रेगुलेटरी बिल पर विरोध जताया..इनका कहना था की ये बिल एकतरफा है..इसका फायदा सिर्फ उपभोक्ता को मिलेगा, उन्हें नहीं. बड़ा सवाल है की क्या वाकई इस बिल के पास होने से बिल्डरों के अधिकारों का हनन होगा? या फिर बेचारे buyers को भी फैसला लेने में भागीदारी के अधिकार से डरने लगे हैं बिल्डर्स..सवाल ये है की आखिर क्यों सरकार इस एहम बिल को लाने से डरती है..या फिर UP जैसे राज्यों में UP अपार्टमेंट एक्ट आज तक लागू क्यों नहीं हुआ.दोस्तों अगर रियल एस्टेट रेगुलेटरी बिल होता तो बिल्डर क्या नहीं कर पाते

    1 आपका फ्लैट कैंसिल नहीं कर सकते थे
    2 आप पर ज़बरदस्ती इंटरेस्ट नहीं लगा सकते थे
    3 आपके फ्लैट का साइज़ अचानक बढा या घटा नहीं सकते थे
    4 buyers और बिल्डर साड़ी सुविधा के बराबर के भागीदार होते
    5 बिल्डर्स buyers एग्रीमेंट एकतरफा नहीं होता

    दोस्तों जब आपस में लड़ते हुए बिल्डर्स अपने फायदे के लिए एक साथ आ सकते हैं, तो फिर हमलोग क्यों नहीं..ये बड़ा सवाल है..मैं रविवार को उनसे आने की अपील कर रहा हूँ जिन्होंने अपने मेहनत के पैसे से घर ख़रीदा है..उनसे नहीं जो इन्वेस्टर हैं..क्योंकि उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा..वो दूसरी जगह घर खरीद लेंगे..लेकिन क्या हमलोग ऐसा कर सकते हैं..सोचियेगा ज़रूर..ये अधिकार की लड़ाई है और ये लड़कर ही मिल सकती है..ये सोचना हो सके तो बंद कर दीजिये की मेरी परेशानी ख़त्म हो गई तो में क्यों जाऊं..या फिर मेरा बिल्डर परेशान नहीं कर रहा है तो मैं क्यों जाऊं..क्योंकि इसी सोच ने हमलोगों को सबसे ज्यादा बांटा है.. क्या इस रविवार भी हम बंटे हुए दिखना चाहते हैं या फिर पूरी ताक़त से आगे की लड़ाई जारी रखने के लिए मिलेंगे..
    दूसरी बड़ी बात है की रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लगभग ना के बराबर है. जो कुछ भी तय होता है उससे मानने के लिए हम मजबूर हैं..अगर रेगुलेटरी बिल पास होगा तो कम से कम हमारा शोषण तो रुकेगा. कुछ राज्य इस कोशिश में हैं की रेगुलेटरी बॉडी बने जाए.सवाल ये है की उस बॉडी की बात बिल्डर मानेंगे.खुद के लिए एनसीआर में क्रेडाई नाम की संस्था बिल्डर्स ने बनाई..ये भरोसा दिया गया की मकसद हमारी मदद है..लेकिन हालत ये है की क्रेडाई की बात सुनाने को कई बिल्डर तैयार ही नहीं हैं.क्रेडाई के भरोसे के बाद भी फ्लैट कैंसिल हो रहे हैं..साफ़ है जब तक कानून नहीं होगा हालात नहीं बदलेंगे..बिल्डर को ज़मीन से जुडी जानकारी, निर्माण से जुडी जानकारी देनी होगी.आज ग्रेटर नॉएडा वेस्ट में बिल्डर क्यों हाथ खड़े कर रहे हैं..इसके पीछे एक बड़ी वजह ये है की इस बात पर कोई रोक नहीं है की आप एक प्रोजेक्ट का पैसा दुसरे में नहीं खर्च कर सकते..जब ग्रेटर नॉएडा वेस्ट में रोक लगी तो यही हुआ की बिल्डरों ने पैसा दूसरी जगह इन्वेस्ट कर दिया और अब उन्हें समझ नहीं आ रहा की यहाँ इमारत खड़ी करने के लिए क्या करें..वैसे रास्ते हैं जिनपर जाने की जगह पुराने लोगों को हटाने की कोशिश हो रही है.अगर ये बिल आया तो बिल्डर को मनमाने फैसले के लिए रजिस्ट्रेशन रद्द होने का खतरा होगा..आज ऐसा नहीं है..अगर ये बिल बना तो सुनवाई के लिए REAL ESTATE APPELLATE ट्रिब्यूनल होगा..जो सिर्फ रियल एस्टेट से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगा..सोचियेगा ज़रूर..आपका इंतज़ार रहेगा..नई लड़ाई के आगाज़ के लिए, इस बात की परवाह के बिना की अंजाम क्या होगा
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  • nbt

    एफएआर के साथ बढे़गा इन्फ्रास्ट्रक्चर



    Feb 23, 2013, 08.00AM IST
    एक संवाददाता ॥ ग्रेटर नोएडा
    ग्रेनो वेस्ट में बिल्डरों का एफएआर बढ़ाने के बाद अथॉरिटी ने अब इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाए जाने की तैयारी शुरू कर दी है। अथॉरिटी सीवर, पानी की अतिरिक्त लाइन बिछाने के साथ ही सड़कों को और चौड़ा करेगी। इस पर अथॉरिटी पर 15 पर्सेंट अतिरिक्त खर्च पडे़गा। इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने में आने वाले अतिरिक्त खर्च को लेकर ग्रेनो अथॉरिटी में एसीईओ ने शुक्रवार को प्लानिंग और प्रोजेक्ट विभाग के अधिकारियों के साथ मीटिंग की। ये काम मार्च के बाद शुरू होने की उम्मीद है। एसीईओ हरीश वर्मा ने बताया कि ग्रेनो वेस्ट में बिल्डरों का एफएआर 2.75 से बढ़ाकर 3.5 कर दिया गया है। इससे आबादी में काफी इजाफा हो जाएगा। आबादी के हिसाब से ही इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना पड़ेगा ताकि आगे लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि अभी तक ग्रेनो वेस्ट एरिया में पुराने एफएआर के हिसाब से बिजली, पानी, सीवर और सड़क की व्यवस्था की जा रही थी। लेकिन अब एफएआर के हिसाब से इन सुविधाओं में इजाफा करना होगा। बता दें कि ग्रेनो वेस्ट में 80 बिल्डरों को अथॉरिटी ने प्लॉट अलॉट किए हैं। यहां एफएआर बढ़ने से पहले 12 लाख की आबादी बसनी थी लेकिन अब यह बढ़कर 15 लाख हो सकती है।
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  • nbt

    गांव की जमीन की रजिस्ट्री पर लगी रोक



    Feb 23, 2013, 08.00AM IST
    प्रस/नस॥ ग्रेटर नोएडा
    ग्रेटर नोएडा वेस्ट के चिपियाना खुर्द के पास कालोनी ढहाने को लेकर लोगों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को सैकड़ों की संख्या में लोग ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के ऑफिस पहुंचे और जमकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने तोड़फोड़ की कार्रवाई के दौरान पुलिस पर महिलाओं के साथ मारपीट करने का आरोप भी लगाया। प्रदर्शनकारियों ने एसीईओ को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई बंद कराने की मांग की है। वहीं, एसीईओ ने कहा है कि कालोनी अवैध थी और कॉलोनाइजर के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन मैनेजरों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी, जिनके एरिया में अवैध कालोनियां काटती रहीं थी और वह चुप बैठे रहे। उधर प्रशासन ने इस गांव के संबंधित खसरा की जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी है। इसके संबंध में दादरी तहसील में भी प्रशासन ने बोर्ड लगा दिया है। तत्काल प्रभाव से रजिस्ट्रार ऑफिस में इस जमीन की रजिस्ट्री रोक दी गई है।
    गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अतिक्रमण हटाओ दस्ते ने 19 फरवरी को चिपियाना खुर्द गांव के पास अवैध कालोनी को ढहाया था। इसे अथॉरिटी की अधिसूचित एरिया में काटा गया था। करीब 10 एकड़ जमीन पर बनी अवैध कालोनी में 300 से अधिक परिवारों ने यहां प्लॉट बुक कराया था। कई ले निर्माण चालू कर रहना भी शुरू कर दिया था।
    सामान तक नहीं ले पाए लोग
    शुक्रवार को अथॉरिटी ऑफिस में प्रदर्शन करने पहुंचे कॉलोनी के लोगों ने कहा कि बगैर नोटिस दिए प्रशासन ने अचानक कार्रवाई की। लोगों को अपना सामान समेटने तक का मौका नहीं दिया गया। इस मामले में पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। लोगों ने अतिक्रमण हटाओ दस्ते पर महिलाओं के साथ मारपीट व अभद्रता का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वह इसके खिलाफ महिला आयोग में जाएंगे। लोगों ने न्याय की मांग की है। साथ ही केस वापस लेने की भी मांग की है। ऐसा न करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
    जिंदगी भर की कमाई लुट गई

    विपुल देव ने दिल्ली में अपना घर बेचकर यहां 8 दिन पहले ही प्लॉट खरीदा था। रामचंदर ने पत्नी व मां की जूलरी गिरवी रखकर साहूकार से कर्ज लिया था और यहां घर बनाया था। राम प्रवेश गुप्ता ने अपने खून-पसीने की कमाई को यहां लगा दिया था। अजय कुमार, कमलेश, चंदन कुमार आदि का कहना है कि जिस समय विज्ञापन जारी कर कालोनाइजर यहां प्लॉट बेच रहा था और रजिस्ट्री व दाखिल खारिज तक हो रहे थे, तब अधिकारी कहां थे। इसमें उनकी क्या गलती है। हालांकि एसीईओ हरीश कुमार वर्मा ने कालोनाइजर के खिलाफ भी जांच की बात कही है।
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  • किसानों की याचिकाआंे पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई


    Feb 23, 2013, 08.00AM IST
    एस ॥ ग्रेटर नोएडा : पाली गांव के किसानांे की याचिकाआंे पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए यथा स्थिति बनाए रखने को कहा है और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और यूपी गर्वनमेंट से चार हफ्ते में जवाब देने को कहा है। पाली गांव के किसानों के वकील सुनील नागर ने बताया कि हाई कोर्ट ने किसानांे की याचिकाआंे पर सुनवाई करते हुए 21 अक्टूबर को फैसला सुनाया था कि किसानों को 64 प्रतिशत बढ़ा हुआ मुआवजा और 10 प्रतिशत आबादी के प्लॉट दिए जाएं। 135 किसानों ने इस फैसले को मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद किसानों ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए कहा कि जिसका जमीन पर कब्जा है, उसका कब्जा बरकरार रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक यथा स्थिति बनाए रखने को कहा है।
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  • किसान और अथॉरिटी के बीच बातचीत बेनतीजा



    नवभारत टाइम्स | Feb 23, 2013, 03.54AM IST
    ग्रेटर नोएडा।। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में किसान और अथॉरिटी अधिकारियों के बीच शुक्रवार को मीटिंग हुई। मीटिंग में कोई नतीजा नहीं निकल सका। किसानों ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट में निर्माण कार्य फिर से बंद कराने की चेतावनी दी है।

    काम बंद करने को लेकर किसानों ने रविवार को बिसरख गांव में महापंचायत करने का फैसला किया है। किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती है ग्रेटर नोएडा वेस्ट में काम नहीं चलने देंगे, भले ही किसानों को जेल भेज दिया जाए। किसानों की संघर्ष समिति के प्रवक्ता मनवीर भाटी ने बताया कि मीटिंग में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के एसीईओ हरीश वर्मा, ओएसडी योगेंद्र यादव मौजूद थे। किसानों ने मांग रखी कि हाई कोर्ट के आदेश पर किसानों को सबसे पहले 10 प्रतिशत आबादी के प्लॉट और मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा किसानों की छोड़ी गई आबादी को फ्री होल्ड करके वापस दिया जाए और भूमिहीन किसानों को कम से कम 120 वर्ग मीटर के प्लॉट दिए जाएं।

    भाटी ने कहा कि नई आबादी नियमावली में संशोधन करने की जरूरत है। संशोधन होने के बाद ही आबादी नियमावली को शासन के पास भेजा जाए। फिलहाल किसानों की किसी भी मांग पर सहमति नहीं बन पाई है।
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  • सोमवार को लॉन्च होगी सबसे सस्ते फ्लैटों कì

    ग्रेटर नोएडा में सस्ते मकान का सपना अब सिर्फ सपना नहीं रहेगा। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी इस सपने को सच करने जा रही है। वह भी ग्रेटर नोएडा वेस्ट एरिया में। सोमवार को अथॉरिटी चार मंजिला फ्लैटों की स्कीम लॉन्च करेगी। अथॉरिटी ने फ्लैटों की कीमत भी तय कर दी है। फ्लैट 30 वर्ग मीटर के होंगे। ग्राउंड फ्लोर का फ्लैट 8 लाख 63 हजार, जबकि फर्स्ट, सेकंड और थर्ड फ्लोर के फ्लैटों की कीमत 7 लाख 52 हजार तय की गई है। आवंटी को 7 साल तक इसकी किश्त देने की सुविधा होगी। अथॉरिटी 3 साल में फ्लैट तैयार कर पजेशन दे देगी। यहां रहने वाले लोगों को तमाम सुविधा एक ही छत के नीचे मिलेगी।


    कुल 7100 फ्लैट स्कीम में

    26 फरवरी से नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली के अलग-अलग 22 बैंकों की ब्रॉन्च में स्कीम के फॉर्म मिलने शुरू हो जाएंगे। इस स्कीम में कुल 7100 फ्लैट होंगे। जिनमें से 2 हजार हजार फ्लैट ग्रेटर नोएडा वेस्ट में होगे, जबकि बाकी के फ्लैट्स ओमीक्रॉन सेक्टर में बनाए जाएंगे। 30 वर्ग मीटर के फ्लैट में एक बेडरूम, किचन, बाथरूम और लॉबी होगी। इन फ्लैटों में रहने वाले लोगों को सेक्टरों की तर्ज पर तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। यहां रहने वाले लोगों के बच्चों के लिए स्कूल, प्ले ग्राउंड आदि भी होंगे। इसके अलावा कम्यूनिटी सेंटर, फल सब्जी दूध आदि की दुकानें होंगी। ओपन एरिया में ग्रीनरी डिवेलप की जाएगी।

    ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के एसीईओ हरीश वर्मा ने बताया कि इससे सस्ते फ्लैट बिल्डर भी बनाकर नहीं दे रहे हैं। जबकि इन फ्लैटों को बिल्डरों की टाउनशिप की तरह डिवेलप किया जाएगा। यहां रहने वाले लोगों को तमाम सुविधा मुहैया कराई जाएंगी। आवंटी को 3 साल में फ्लैट बनाकर कब्जा दे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्कीम सोमवार को लॉन्च होगी। इसके लिए अथॉरिटी ने सभी तैयारी पूरी कर ली है। फॉर्म की कीमत 1100 रुपये रखी गई है। ये फॉर्म नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली में विभिन्न बैंकों की शाखाओं में मिलेंगे। आवंटी को 7 साल में किस्तें जमा करानी होगी।



    सोमवार को लॉन्च होगी सबसे सस्ते फ्लैटों की स्कीम - Monday to launch the cheapest flats scheme - Navbharat Times
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  • Guys,

    Made paymnt of 15 cent at gaur new office in abhay khand. Mast office hai unka.

    Same again. huge crowd there.

    One person ws from jammu Bhaia nex ke buyers dur dur tak hai.

    1 chai bi pila di gaur walo ne aaj.

    but pathetic service hai. only a centralised reception for all paymnt/ demand letter/ ledger statemnt. Kichi paki hui thi. I asked for the demand letter as i didnt receivd it. they took 30 mins bt nhi provid kr paye. at last made paymnt with the online demand letter dat i hd.
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  • Originally Posted by del_sanju
    Guys,

    Made paymnt of 15 cent at gaur new office in abhay khand. Mast office hai unka.

    Same again. huge crowd there.

    One person ws from jammu Bhaia nex ke buyers dur dur tak hai.

    1 chai bi pila di gaur walo ne aaj.

    but pathetic service hai. only a centralised reception for all paymnt/ demand letter/ ledger statemnt. Kichi paki hui thi. I asked for the demand letter as i didnt receivd it. they took 30 mins bt nhi provid kr paye. at last made paymnt with the online demand letter dat i hd.

    Bihar aur Jharkhan se bhi baught hai.
    I know few guys personally.
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  • Originally Posted by cookie
    Bihar aur Jharkhan se bhi baught hai.
    I know few guys personally.



    Ka bhaiya ji. Bihar tak. Itna craze hai ka. BIHAR SHINING. nitishwa ka kamal.

    BDI ho gaya ye toh BIHAR DIRECT INVESTMENT :)
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  • sanju you also do a NEFT/RTGS ... baar baar jaane ki jaroorat nahi hai.

    on first time transfer 10 rupees to them to confirm the account transfer from them....once verified send the due amount ....
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