पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • Originally Posted by Totaram
    That a city or area has become so famous before Birth of the city.
    Now acros the India people are discussing Noida extension. By God. What will happen when this city comes into full swing.

    But yes Noida extension is going to be very important city in future.


    Cheers!!
    I wish the same, being an end user :bab (22):
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  • I have full sympathy with farmers

    But untill new law comes into picture there is no other way. There land will be acquire in present law. But option available is they should get compensation. In Noida extension case also farmers are getting better compensation than the rate before noida extension was in the picture.

    Farmers should invest their money wisely. They can also purchase land / plot with compensation. Invest some amount in fixed as well as liquid instrument.



    Originally Posted by Totaram
    That a city or area has become so famous before Birth of the city.
    Now acros the India people are discussing Noida extension. By God. What will happen when this city comes into full swing.

    But yes Noida extension is going to be very important city in future.
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  • हाईकोर्ट के फैसले से खुश नहीं हैं किसान

    हाईकोर्ट के फैसले से खुश नहीं हैं किसान
    Oct 22, 09:45 pm
    बताएं
    ग्रेटर नोएडा, संवाददाता : देवला, यूसुफपुर चकशाहबेरी व असदुल्लाहपुर गांव की तर्ज पर भूमि अधिग्रहण रद करने की मांग को लेकर गांवों के किसान एकजुट होने लगे हैं। किसान अलग-अलग गांवों में पंचायत कर रहे हैं। बैठक कर किसान अधिग्रहण रद कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करने की रणनीति बना रहे हैं।
    इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय पर छोटी मिलक गांव के श्याम सिंह का कहना है कि कोर्ट का फैसला किसानों के हक में कतई नहीं है। फैसले के खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। बिसरख गांव के बिन्नू भाटी का कहना है कि सभी गांवों का मामला एक जैसा है। ऐसे में सभी गांवों में भूमि अधिग्रहण रद होना चाहिए।
    गढ़ी चौखंडी गांव के किसान देवेंद्र ने बताया कि जमीनों का अधिग्रहण उद्योगों के लिए हुआ था। सरकार ने बिल्डरों से समझौता कर जमीन उन्हें बेंच दी। जो नियम विरुद्ध है। अपने हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी। देवला गांव के शरदा राम भाटी का कहना है कि जमीन सिर्फ उद्योगों के विकास के लिए दी जाएगी। सोसायटी का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। बिसरख गांव के रणवीर सिंह का कहना है कि उद्योग लगने से किसानों के बच्चों को भविष्य में रोजगार मिलेगा। अगर सरकार क्षेत्र में उद्योग लगाती है, तो हम जमीन देंगे, लेकिन सोसायटी के निर्माण के लिए नहीं। बिसरख गांव के राजपाल का कहना है कि प्राधिकरण ने गांव की जमीनों का लैंड यूज चेंज किया है। नियम विरुद्ध काम करने के लिए प्राधिकरण पर दंड लगाया जाना चाहिए। घोड़ी बछेड़ा गांव के रमेश रावल का कहना है कि हमारे साथ न्याय नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। देवला गांव के ईश्वर कुमार व घोड़ी गांव के जगदीश का कहना है कि अधिग्रहण हो जाने से किसानों के हाथ से उनका रोजगार छिन जाएगा। गांव में रोजगार के साधनों का विकास होने पर ही जमीन देंगे। खेड़ी भनौता गांव के अरुण का कहना है कि कोर्ट का फैसला हमारे हक में नहीं है। मुआवजे का पैसा कुछ समय बाद खत्म हो जाएगा। आय का साधन न होने से भविष्य में किसानों के पास खाने के लिए रोटी नहीं होगी।
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  • Now Farmers Going to Supreme court & NCRPB approval needed for projects to start

    Picture abhi baaki hain........

    It was choti diwali,,,, Big diwali yet to come.............
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  • Originally Posted by harpreetsg_delhi
    Now Farmers Going to Supreme court & NCRPB approval needed for projects to start

    Picture abhi baaki hain........

    It was choti diwali,,,, Big diwali yet to come.............


    I have read GN Authority is also going to SC against the 10 percent developed land to be give to farmers. What would happen if hiked rates is reduced in SC?:bab (4):
    Though there is not even 1% possibility of this.
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  • Originally Posted by harpreetsg_delhi
    Now Farmers Going to Supreme court & NCRPB approval needed for projects to start

    Picture abhi baaki hain........

    It was choti diwali,,,, Big diwali yet to come.............


    Like HC, Now decision from SC will also be in the favor of all parties...... SC can not make 2Lac+ Buyers into trouble...... Yes, it will take some time in 100% problem solved but finally all will be Well....

    Happy Diwali to ALL.
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  • Order fuels hope among Yamuna E-way farmers

    The Allahabad high court verdict on Noida and Greater Noida land acquisition cases has fuelled hopes of a better deal among the farmers of Yamuna Expressway, the third industrial development authority in Gautam Budh Nagar district. Many of the 30-odd villages along the Noida-Agra toll
    road have moved court, seeking increased cash relief, regularisation of abadi land and allotment of developed plots.

    In the first phase, the high court had heard only Noida and Greater Noida cases. Hearing in the Yamuna Expressway cases will begin post-Diwali.
    The Bhartiya Kisan Union (BKU) has, along with other organisations, demanded that villages along the Yamuna Expressway, too, should be given a Noida/Greater Noida-like hike in terms of money and developed land. "We also want the state's rehabilitation policy be implemented with effect from 2001,"said BKU president Ajay Pal Sharma.

    A total of 11 builders have planned one lakh houses in the area. In the initial phase, they are building 20,000 units.

    Of them, 3,000 have been booked. A total of 21,900 applicants have been allotted residential plots by the authority. The authority has also reserved 10,000 hectares for a proposed airport in Jevar. Besides, a mega township - Yamuna City - proposed on 4,500 acres may also be jeopardised. Some educational institutions fall in the area the farmers are trying to reclaim.
    Farmer leader Roopesh Verma said, "Last month, the Yamuna Expressway authority had announced a bonus of Rs 35 per sqm to farmers whose land was acquired to quell an agitation for increased compensation going on there. Who will accept this? We will wait for the high court order."

    Farmers in Yamuna Expressway have alleged the authority is not doing anything for industries. New units would mean employment opportunities for local people. "No industry has been set up," said Virendra Dhada, farmer leader.

    "The authority has projected to acquire 58,000 hectare of land. Of this, 10,000 hectares have been earmarked for an airport and aviation hub. The rest has been earmarked for residential, commercial and institutional purposes. There is no thrust on industries," said Dhada.

    Even as the court will hear these cases, Yamuna Expressway farmers, whose land was acquired for the Formula One race circuit, have issued 'an open letter' to Uttar Pradesh chief minister Mayawati, threatening to disrupt India's maiden Grand Prix if their demands were not met.

    -HT
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  • सुप्रीम कोर्ट जाएंगे किसान


    ग्रेटर नोएडा ।। इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के मद्देनजर किसानों ने शनिवार को ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन एरिया के छोटी मिल्क गांव मंे महापंचायत की। महापंचायत में ग्रेटर नोएडा एरिया के 16 किसान संघर्ष समितियों के प्रतिनिधि और 11 गांवों के किसान शामिल हुए। किसानों ने महापंचायत में कहा वे फैसले से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि फैसला पूरी तरह ग्रेटर नोएडा और नोएडा अथॉरिटी के हक में आया है। किसानों ने सामूहिक रूप से फैसला किया कि हाई कोर्ट के फैसले को वे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। किसान जल्द ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

    किसानों ने अपने वकीलों से सलाह मशवरा करना शुरू कर दिया है। किसानों ने डाढा गांव मंे भी एक पंचायत की जिसमंे किसानांे ने हाई कोर्ट के फैसले को मानने से इनकार कर दिया। किसानांे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का ऐलान किया है। महापंचायत के संयोजक सरदाराम वर्मा ने कहा कि हाई कोर्ट ने फैसले में सभी के हित साधने की कोशिश की है। साथ ही धारा -17 और लैंडयूज को बदलने व बडे़ पैमाने पर जमीन अधिग्रहण को गलत माना है। घोड़ी - बछेड़ा किसान संघर्ष समिति के किसान नेता रमेश रावल और राजपाल सिंह ने कहा कि अगर पतवाड़ी के किसान फैसला करने में जल्दी नहीं करते तो केन्द्र सरकार नया जमीन अधिग्रहण कानून बनाने जा रही है जिसमें किसानों को 4 गुणा अधिक मुआवजा मिलता।

    खैरपुर गुर्जर गांव के किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष दीपचंद खारी ने कहा कि किसानांे को अपने हक की लड़ाई के लिए एकजुट होना बेहद जरूरी है। एकजुटता के आगे ही अथॉरिटी झुक सकती है। उन्होंने कहा कि खैरपुर गुर्जर गांव के किसान जल्द सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। सुप्रीम कोर्ट में वकीलांे से दिवाली के बाद संपर्क कर याचिका दायर की जाएगी।

    बादलपुर किसान संघर्ष समिति के संरक्षक और नंबरदार जगदीश नागर ने कहा कि बादलपुर में अथॉरिटी ने अर्जेंसी क्लॉज लगाकर इंडस्ट्री लगाने के नाम पर जमीन अधिग्रहण की थी। अधिग्रहीत जमीन अथॉरिटी ने इंडस्ट्री को न देकर पार्क बना डाले। अगर अथॉरिटी को इस जमीन पर पार्क बनाने थे तो किसान पहले से खेती कर रहे थे। इसके लिए अधिग्रहण की क्या जरूरत थी। उन्होंने बताया कि बादलपुर के किसानांे ने शनिवार को हाई कोर्ट का फैसला आने के तुरंत बाद पंचायत करके जमीन अधिग्रहण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट किसानों के हक में जरूर फैसला देगा।

    -Navbharat times
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  • असदुल्लापुर एसटीपी प्लांट से छंटे संकट के बादल


    नोएडा। प्राधिकरण के सेक्टर-१६८ यानि असदुल्लापुर गांव में बन रहे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से संकट के बादल छंट गए हैं। हाईकोर्ट से इस गांव का अधिग्रहण रद होने के साथ ही वाह्य एजेंसी ने पूरी फाइलें खंगालना शुरू कर दिया, जिसमें यह जानकारी मिली कि यह भूमि समझौते के आधार पर खरीदी हुई है। इसके अलावा चार फार्म हाउस भी अधिग्रहण रद होने की आंच से बच गए हैं। सिर्फ खाली पड़ी ४० एकड़ जमीन ही रद्द हुई है, जिसके कुछ हिस्से पर गांव के बाहरी सिरे पर आठ से दस मकान बने हैं।

    हाईकोर्ट से शुक्रवार को नोएडा के असदुल्लापुर गांव का अधिग्रहण रद्द कर दिया। इस गांव में कुछ ७० एकड़ जमीन है, जिसके किसान छपरौली-मंगरौली के हैं। यहां पर प्राधिकरण के जल विभाग ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम शुरू किया, जिसमें एक्सप्रेस-वे के किनारे बसे एक दर्जन से ज्यादा सेक्टरों और गांव के सीवर को ट्रीट करने का काम किया जाएगा। अधिग्रहण रद होने की खबर मिलने के बाद जल-सीवर विभाग और वाह्य एजेंसी कागजों की जांच पड़ताल में जुट गई। लैंड और नियोजन विभाग के साथ हुई लंबी मंत्रणा और कागजों की जांच करने पर यह साफ हो गया कि असदुल्लापुर यानि सेक्टर-१६८ में तैयार हो रहा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रभावित नहीं हुआ है। प्राधिकरण के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एसटीपी के लिए जो जमीन ली गई है उसके लिए किसानों से समझौता हुआ था। इसमें बैनामा के आधार पर खरीदी गई है। यमुना नदी के किनारे बसे हुए इस गांव में ७० एकड़ जमीन है। इसमें कुछ किसानों ने ३० एकड़ जमीन समझौते के आधार पर प्राधिकरण को बेच दी है। इसमें एसटीपी के साथ फार्म हाउस का कुछ हिस्सा भी आया है। इसके अलावा बची हुई ४० एकड़ जमीन के लिए किसान कोर्ट गए। गांव के प्रधान चमन ने बताया कि दरअसल, गांव के बाहर की तरफ पुश्तैनी मकान बने हुए हैं। अधिग्रहण के समय इनका भी अर्जन कर लिया गया था, जिसके खिलाफ किसानों ने अदालत में अर्जी लगाई और उन्हें न्याय मिला।

    -Amar Ujala
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  • अभियान चलाकर किसानों को किया जाएगा एकजुट

    ग्रेटर नोएडा इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर विचार करने के लिए शनिवार को मिलक लच्छी, सैनी व डाढ़ा गांव में किसानों की पंचायत हुई। मुआवजे की बढ़ी दरों को लेकर किसान दो गुटों में बंटे हुए हैं। एक पक्ष कोर्ट के फैसले को मानने को तैयार है तो दूसरा सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है। किसानों का कहना है कि वे चालीस गांवों में जागरुकता अभियान चलाकर सभी को एकजुट करेंगे और उसके बाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। मिलक लच्छी गांव में आयोजित पंचायत में किसानों ने कहा कि मुआवजे में 64 प्रतिशत की वृद्धि का निर्णय सही नहीं है। किसानों को बाजार दर पर मुआवजा मिलना चाहिए। हाई कोर्ट के निर्णय के खिलाफ किसान शीघ्र सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। सैनी गांव के किसानों ने भी कोर्ट के फैसले पर नाखुशी जाहिर की और कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती देंगे। डाढ़ा गांव में किसानों ने पंचायत कर कहा कि यदि प्राधिकरण सभी किसानों को 550 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा देता है तो इस पर विचार किया जाएगा। इससे कम दर पर मुआवजा दिया गया तो किसान उसे नहीं लेंगे। हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। जिन गांवों के किसानों की जमीन का अधिग्रहण पांच से छह वर्ष पहले किया गया था, उन गांवों के किसान कोर्ट के फैसले से खुश हैं। उनका कहना है कि वे फैसले को मानने के लिए तैयार हैं। रविवार को भी बिसरख गांव में किसानों की पंचायत बुलाई गई है। राष्ट्रीय किसान यूनियन का कहना है कि कोर्ट का फैसला किसान हित में नहीं आया है।
    यूनियन के अध्यक्ष ओमपाल तलान का कहना है कि इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली जाएगी। किसान नेता अजीत दौला का कहना है कि किसान की उम्मीद के हिसाब से फैसला नहीं आया। हाई कोर्ट ने प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी से मामले की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच सीबीआइ से कराई जानी चाहिए।

    -Dainik jagran
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  • Now brokers put tant on NE road
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  • update............
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  • Noida farmers want more, to move SC

    The Allahabad high court ruling on compensation for land acquisition has not pleased many farmers in Greater Noida and Noida Extension. On Saturday, the farmers held a mahapanchayat in Milak Lachhi village where they decided they would not "settle for a few hundred rupees" but would move Supreme Court for a better deal.

    The high court on Friday had cleared land acquisition in 40-odd villages of Greater Noida, asking the government to give more money and bigger plots to the farmers.

    "We want our land back. If we go by the court order, we would get Rs 1,400 per sqm. The market rate is more than Rs 10,000 per sqm," said Roopesh Verma of Kisan Pratirodh Andolan Samiti, a farmers' body.

    The high court judgment gave a fresh lease of life to several stalled projects in Noida Extension where about 1 lakh middle-class buyers have booked flats.
    "We have full faith in the apex court. It recently quashed the acquisition of 156 hectares of land in village Shahberi despite the fact that more than 6,000 house had been booked there. The land, which had been acquired forcibly, was returned to farmers," said Ranbir Pradhan, convener of the Gramin Panchayat Morcha, a farmers' body.

    Farmers said the court, in its judgment, had admitted that the land had been acquired illegally.
    "If we go by the Centre's land acquisition (draft) bill, we should have been given at least R3,200 per sqm," said Ajit Daula, a farmer.

    On Sunday, another panchayat will be held at Jaganpur village to decide the next course of action.

    "The Greater Noida authority was already offering, as part of out-of-court settlement, R1,400 per sqm. So what's the difference? We will fight on," said Dushyant Nagar, a Kisaan Sansh Samiti, another farmers' body.

    "We have demanded that no land acquisition should take place till the Central land acquisition and rehabilitation bill is passed," said Virendra Dhada, convenor of the Rashtriya Kisaan Union

    HT
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  • Scarce land may spoil HC verdict euphoria


    Thousands of homebuyers in Noida and Greater Noida may be breathing easy after the Allahabad high court's Friday order, but solving the realty crisis in the twin cities will not be easy. Even as builders, now hopeful of uninterrupted execution of projects, are praying that farmers don't
    move the Supreme Court to challenge the verdict, the industrial development authorities in Noida and Greater Noida will find it difficult to please farmers because of scarce land in developed areas.



    The court had asked the authorities to pay hiked compensation and 10% (instead of the current 5-6%) of the developed land to farmers. This means an additional burden of Rs 10,000 crore. The authorities say they will pay cash, but allotting bigger plots of developed land to farmers will be an issue. Farmers were already entitled to plots measuring 5-6% of the total land acquired, apart from cash compensation.

    The Noida Authority has hardly any land left for such allotments. "We are mulling to move the Supreme Court to challenge the land allotment part of the order. Land is extremely scarce and costly in Noida. Because of poor planning in the past, we are still struggling to allot, despite sustained agitations by farmers, 5% plots to those whose land was acquired years ago," said a senior official.

    The increased cash payment will mean more than Rs 1,000 crore burden on the authority. The required land for farmers, not visible though, will cost more than Rs 2,000 crore.

    "After much struggle, we have managed to squeeze out 5% plots to 5,000-odd farmers in Noida. There is no land left now," said Noida authority CEO Balvinder Kumar.

    Unlike the Greater Noida authority, the Noida authority had neither hiked cash compensation, nor increased the area of plots given as part of rehabilitation benefits despite a sustained agitation by farmers as part of out-of-court deal.

    The Greater Noida authority will not challenge the HC order, but try to find a 'middle path'.

    "We are exploring the option of paying cash in lieu of land," said an official of the GNIDA. But there is a catch. The authority has already taken loans worth more than Rs 3,000 crore to acquire and develop land in Noida Extension. The increased cash compensation ordered by the court alone will mean the authority has to pay Rs 4,000 crore.

    "First, we will take loans from financial institutions and the Noida Authority will arrange for funds to be incurred on increased compensation and bigger developed plots to farmers. Later, we will recover the amount from those whom we have allotted land, including builders, individual allottees and institutions. The court has empowered us to do so," Greater Noida chief executive officer Rama Raman said.

    -HT
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  • Land Acquisition is no more a holy cow, says judge


    Justice SU Khan, a member of the three-judge bench of the Allahabad high court that delivered the Noida land acquisition judgment, came out with some interesting observations. In one of such observations, he said, "Land Acquisition is no more a holy cow. At present it is a fallen ox.

    Everybody is a butcher when the ox falls." In the 400-page judgment delivered on Friday, last 12 pages have additional views of Justice Khan.

    "The correctness of this phrase is best illustrated by this bunch of more than 1000 writ petitions (about half of which are to be decided after this judgment) almost all of which have been filed after 06.07.2011 (the date on which judgment of the Supreme Court reported in Greater Noida Industrial Development Authority Vs. Devendra Kumar, 2011 (6) ADJ 480 was delivered) challenging land acquisitions in New Okhla Industrial Development Area (NOIDA) and Greater NOIDA," he said.

    "Almost all the acquisitions since formation of NOIDA through notification dated 17.04.1976 under U.P. Industrial Area Development Act of 1976 (which received the assent of the Governor on 16.04.1976) have been challenged. In all the writ petitions, barring few, there are several petitioners. Total number of petitioners is more than ten thousand. Similar petitions are still being filed. It is not opening of flood gate. It is tsunami. It has helped us in understanding the problem in its entirety," he said.

    Justice Khan said, "Till a couple of years before, it was considered almost indecent to suggest that acquisition of land might be quashed by higher judiciary. That was one extreme. Quashing of the acquisition lock, stock and barrel will be full swing to the other extreme."

    "However, spirit of law is BALANCE. Each side may have legitimate arguments in its favour. However, this is a world of compromises and no argument can be brought to its logical conclusion. Balance in nature is necessary for survival of the Universe. Similarly balance in society is also essential for its survival. We have tried to maintain the delicate balance through the leading judgment," he said.

    In the matter of land acquisition, the Supreme Court realised the importance of the resentment of the people at an early stage. Without waiting for the flames to rise, fire fighting efforts were initiated immediately after seeing the smoke during last couple of years, he stated.

    -HT
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