पतवाड़ी के किसानों का लिखित समझौता
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा किसानों के साथ समझौते की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हासिल हुई। पतवाड़ी गांव के किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता हो गया। इससे बिल्डरों व निवेशकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। समझौता भी किसानों के लिए फायदेमंद रहा। उन्हें अब 550 रुपये प्रति वर्गमीटर अतिरिक्त मुआवजा देने पर सहमति बन गई है। साथ ही आबादी व बैकलीज की शर्तो को हटा लिया गया है। हालांकि नोएडा के सेक्टर-62 में गुरुवार को देर रात तक अन्य मुद्दों पर प्राधिकरण व किसानों के बीच बातचीत जारी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को पतवाड़ी गांव की 589 हेक्टयेर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था। अधिग्रहण रद होने से सात बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुई हुए थे। 26 हजार निवेशकों के फ्लैट का सपना भी टूट गया था। प्राधिकरण के ढाई हजार भूखंड़ों, चार सौ निर्मित मकानों व दो इंजीनियरिंग कॉलेज की योजना भी अधर में लटक गई थी। 26 जुलाई को हाईकोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण, बिल्डर व किसानों को 12 अगस्त तक आपस में समझौते करने का सुझाव दिया था। हाईकोर्ट के सुझाव पर प्राधिकरण ने किसानों से समझौते के लिए वार्ता की पहल शुरू की। 27 जुलाई को प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन ने सबसे पहले पतवाड़ी गांव के प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया। दूसरे दिन ग्राम प्रधान रेशपाल यादव ने प्राधिकरण कार्यालय पहुंच कर सीईओ से बातचीत कर उनका रुख जानने का प्रयास किया था। 30 जुलाई को सीईओ ने गांव पतवाड़ी जाकर किसानों से सामूहिक रूप में बात की। इस दौरान मुआवजा वृद्धि को छोड़कर किसानों के साथ अन्य मांगों पर प्राधिकरण ने सकारात्मक रुख दिखाया। मुआवजा बढ़ोतरी पर बातचीत करने के लिए किसानों को आपस में कमेटी गठित कर वार्ता का प्रस्ताव सीईओ दे आए थे। इसके बाद किसानों के साथ गुरुवार को नोएडा के सेक्टर-62 में बैठक बुलाई गई। इसमें प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन, ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री जयवीर ठाकुर, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर व जिलाधिकारी के साथ किसानों की वार्ता शुरू हुई। आठ घंटे तक वार्ता चलने के बाद किसान समझौते के लिए तैयार हो गए। सूत्रों के अनुसार पतवाड़ी गांव के किसानों को मिले 850 रुपये प्रति वर्गमीटर के अलावा 550 रुपये प्रति वर्गमीटर और देने पर सहमति बन गई है। देर रात तक बैठक जारी थी। अभी इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि गांव के कुछ किसानों ने वार्ता की पुष्टि की है। इससे पूर्व किसानों की आबादी को पूरी तरह से अधिग्रहण मुक्त रखा जाएगा। बैकलीज की शर्ते हटा ली जाएगी। पतवाड़ी गांव का समझौता होने पर प्राधिकरण को नोएडा एक्सटेंशन के अन्य गांवों में किसानों के साथ समझौता करने की राह आसान हो गई है। नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने रोके खरीददार : नोएडा एक्सटेंशन विवाद ने समूचे ग्रेटर नोएडा एवं यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर ब्रेक लगा दिया है। दोनों जगह ढूंढे से भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कुछ समय पहले तक जो लोग शहर में अपना आशियाना बनाने के लिए आतुर थे, वे अब यहां संपत्ति खरीदने से हिचकिचा रहे हंै। पिछले बीस दिनों में भूखंड व मकानों की गिनी-चुनी रजिस्ट्री हुई हैं। सिर्फ गांवों में कृषि व आबादी भूमि की रजिस्ट्री हो रही है। इससे प्रदेश सरकार को राजस्व की भी हानि उठानी पड़ रही है
-Dainik Jagran.
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  • ग्रेनो डिपो से एनएच-24 तक बस आज से

    Noida | अंतिम अपडेट 15 जुलाई 2013 5:30 AM IST पर
    ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा डिपो से एनएच-24 तक रोडवेज बस सेवा आज से शुरू होगी। यह बस एच्छर, अथॉरिटी, जगत फार्म, सूरजपुर, यामाहा, इको थ्री, बिसरख, गौर सिटी होते हुए विजय नगर, एनएच-24 पहुंचेगी। इस रूट पर बस सेवा शुरू होने गाजियाबाद जाने और आने वालों को सुविधा होगी।
    कुल 35 किलोमीटर लंबे सफर के लिए 30 रुपये देने होंगे। यात्रियों को सुबह आठ से शाम छह बजे तक बस मिलेगी और एक-एक घंटे के अंतराल पर मिलेगी। ग्रेटर नोएडा डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक सतेंद्र वर्मा ने बताया कि यात्रियों की मांग बढ़ने और राजस्व की स्थिति देखने के बाद इस रूट पर बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। उन्होंने बताया कि अथॉरिटी की मांग पर इस रूट पर बस चलाई गई है।

    One of the Best news for GNW:)

    पहले दिन मिली सिर्फ 20 सवारियां


    Jul 16, 2013, 08.00AM IST एक संवाददाता ॥ ग्रेटर नोएडा
    शहर के लोगों का इंतजार खत्म हुआ, सोमवार को गे्रटर नोएडा से गाजियाबाद बस सेवा शुरू हो गई। बस को सुबह 8 बजे ग्रेनो डिपो से गाजियाबाद के विजय नगर के लिए रवाना किया गया। पहले दिन रेस्पॉन्स अच्छा नहीं रहा। ग्रेनो डिपो के स्टेशन इंचार्ज राजेंद्र सिंह ने बताया कि पहले दिन बस को करीब 20 सवारियां मिलीं। हालांकि उन्हें उम्मीद है कि जैसे-जैसे लोगांे को इस रूट की जानकारी होगी, वैसे ही बस में यात्रियांे की संख्या बढ़ने लगेगी।
    ग्रेनो डिपो के एआरएम सतेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि ग्रेनो टु गाजियाबाद रूट पर बस का संचालन शुरू हो गया है। बस डिपो से चलकर डेल्टा-1 लेबर चौक होती हुई जगत फार्म पहुंचेगी। वहां से सूरजपुर, पुलिस लाइन होते हुए गौड़ सिटी गोल चक्कर पहुंचेगी। इसके बाद बस सीधा एनएच-24 को टच करेगी और वहां से विजय नगर तक जाएगी। वहां पहुंचने के बाद बस वापस इसी रूट से ग्रेनो डिपो आएगी। फिलहाल रूट पर एक बस उतारी गई है, जो दिन में 8 फेरे लगाएगी। उसकी फ्रीक्वेंसी 2 घंटे की होगी। बस सुबह 8 बजे से चलेगी और शाम 8 बजे तक डिपो वापस आ जाएगी।
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  • Originally Posted by trialsurvey
    GAURSONS SCHOOL !




    Within Gaur city??? Location ka kuch idea?
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  • कॉलोनी रेग्युलर कराने को उठाई आवाज

    ग्रेनो वेस्ट स्थित दूधेश्वर एनक्लेव को रेग्युलर करने की मांग को लेकर कॉलोनी के लोगों ने मंगलवार को अथॉरिटी ऑफिस पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अवैध कॉलोनी काटे जाने से रोकने और कॉलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। लोगों ने अथॉरिटी के ओएसडी योगेंद्र यादव को अपनी मांगो से संबंधित ज्ञापन सौंपा। ओएसडी ने कॉलोनी के निरीक्षण का आश्वासन दिया है।
    प्रदर्शन से पहले लोग अमृतपुरम गोलचक्कर पर जमा हुए। यहां से वे अथॉरिटी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अथॉरिटी के गेट पर पहुंचे। दूधेश्वर सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष यतेंद्र नागर यतेंद्र नागर ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट एरिया के चिप्याना खुर्द के पास यह कॉलोनी 10 साल से बसी हुई है। कॉलोनी में करीब 80 फीसदी लोग घर बनाकर अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। पिछले 6 महीने से कॉलोनी को नियमित करने की मांग की जा रही है। इसके लिए सीएम को भी पत्र लिखा गया है। लोगों ने ओएसडी को ज्ञापन सौंपकर कार्यवाही की मांग की। ओएसडी ने कहा कि वे खुद जाकर कॉलोनी का निरीक्षण करेंगे। आबादी वाले क्षेत्र को नहीं तोड़ा जाएगा। प्रदर्शन में कपिल गुर्जर, रवि जिंदल, विनोद कुमार, अमृता सिंह समेत कई लोग शामिल रहे।


    कॉलोनी रेग्युलर कराने को उठाई आवाज - Regular voice raised him to colony - Navbharat Times
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  • सबसे सस्ता 2 BHK अब 35 लाख रुपए का


    इकनॉमिक टाइम्स | Jul 16, 2013, 08.58AM IST एनसीआर के सबसे बड़े और मॉडर्न रेजिडेंशल हब के तौर पर उभर रहे नोएडा एक्सटेंशन में वो दिन लद गए, जब घर खरीदने वाले और बनाने वाले दोनों के चेहरे पर मायूसी थी। यहां घर बनने से पहले ही महंगाई के सातवें आसमान को छूने लगे हैं। दो-तीन साल पहले तक जहां फ्लैट 1700 से 2000 रुपए प्रति वर्ग फुट की दर पर बुक हो रहे थे, वहां कीमतें 3200 से 3800 रुपए प्रति वर्ग फुट की रेंज में जा चुकी हैं और मार्केट के जानकार आने वाले दिनों में यहां और तेजी देख रहे हैं। बेस रेट के साथ सभी चार्जेज जोड़कर देखें तो आज की तारीख में नोएडा एक्सटेंशन में सबसे सस्ता 2 बेडरूम फ्लैट भी लगभग 35 लाख रुपए का पड़ेगा।

    गौड़ सिटी, सुपर टेक इकोविलेज, आरजी लग्जरी होम्स, आम्रपाली ड्रीम वैली हाई, अजनारा होम्स, पंचशील ग्रीन्स, महागुन मायवुड्स, पैरामाउंट इमोशंस सहित दर्जनों प्रॉजेक्ट्स में अफोर्डेबल सेगमेंट में भी फ्लैट के रेट 32 लाख प्लस पार्किंग, लोकेशन वाइज पीएलसी और अन्य चार्जेज के साथ शुरू होते हैं। कुछ छोटे बिल्डर 25, 28 और 30 लाख के कंपोजिट रेट टैग के तहत भी मकान बेच रहे हैं, लेकिन वहां भी हिडेन चार्जेज और साइज को लेकर चिंताएं हैं।

    आम्रपाली के ड्रीम वैली-2 प्रॉजेक्ट के तहत 585 से 1715 वर्गफुट के औसत साइज में 1, 2 और 3 बेडरूम फ्लैट के लिए लॉन्चिंग प्राइस 1,700 रुपए प्रति वर्गफुट थी, जो अब बढ़कर 3,600 रुपए प्रति वर्गफुट हो गई है। जुलाई 2010 में लॉन्च हुए इस प्रॉजेक्ट में फ्लैट खरीदने वालों को तीन साल में 100 फीसदी से ज्यादा का एप्रिसिएशन मिला है। यह प्रॉजेक्ट अंडर-कंस्ट्रक्शन है और पजेशन की घोषित तारीख दिसंबर 2015 है। इसी तरह टेकजोन फोर एरिया में कंपनी के कई प्रॉजेक्ट में 80 से 90 फीसदी प्राइस एप्रिसिएशन की बात कही जा रही है।

    करीब 60 से 70 फीसदी काम पूरा कर चुके सुपरटेक इकोविलेज 2 और 3 में सबसे छोटे और सस्ते 890 वर्गफुट साइज के 2 बेडरूम फ्लैट का फ्लेक्सी बेस प्राइज 35,000 रुपए प्रति वर्गफुट है, जबकि डाउनपेमेंट पर रेट 3,316 और सीएलपी में 3,685 रुपए है। बेस प्राइज के आधार पर इस साइज के फ्लैट की कीमत भी करीब 32 लाख रुपए है, जिसके बाद पीएलसी, क्लब मेंबरशिप, वन टाइम लीज रेंट, कवर्ड पार्किंग (2.5 लाख रुपए), इलेक्ट्रिसिटी इंस्टालेशन चार्जेज, पावर बैक अप सहित कुछ अन्य चार्जेज भी हैं। कुल मिलाकर कीमत 35 लाख के आसपास पहुंच जाती है। सुपरटेक के एक बिजनस डिवेलपर (सेल्स) विकास कुमार बताते हैं, 'आज की डेट में 2 बेडरूम का कोई भी फ्लैट आपको 35 लाख से कम में नहीं पड़ेगा। छोटे बिल्डर दो-तीन लाख कम पर भी ऑफर कर दें, लेकिन आपको कहीं न कहीं समझौता करना पड़ेगा।'

    1106 वर्गफुट साइज के 2 बेडरूम फ्लैट की बेसिक कीमत 35,00 रुपए प्रति वर्गफुट के हिसाब से 38 लाख 71 हजार बैठेगी, जबकि अन्य चार्जेज के साथ बजट 42 लाख को पार कर जाएगा।

    जानकारों के मुताबिक कीमतों में तेजी का दौर अक्टूबर 2011 के हाई कोर्ट के फैसले के बाद आया। लेकिन असली उड़ान शुरू हुई पिछले साल ग्रेटर नोएडा के रिवाइज्ड मास्टर प्लान को मंजूरी मिलने के साथ। आरजी होम्स, गौड़ और सुपरटेक सहित कई कंपनियों के चैनल पार्टनर्स के लिए काम करने वाले स्थानीय सेल्स एग्जेक्युटिव सचिन चौधरी बताते हैं, 'पिछले साल अगस्त-सितंबर में रेट रिवाइज होने के बाद 1175 वर्गफुट वाला टॉप फ्लोर 2बीएचके दो टॉयलेट्स के साथ 32 लाख 90 हजार रुपए का था। फ्लोर वाइज पीएलसी जोड़कर मिडल फ्लैट की कीमत पार्किंग और अन्य चार्जेज के साथ 35 लाख तक थी। आज की तारीख में यह कीमत 40 से 43 लाख हो चुकी है। प्री-रिवाइज रेट के आधार पर तो एक साल में ही करीब 25 फीसदी का एप्रिसिएशन मिल चुका है।

    पंचशील ग्रीन्स के सबसे छोटे फ्लैटों की सीरीज के 890 वर्गफुट का फ्लैट पिछले साल 30 लाख की रेंज में बिक रहा था, जो अब 35 से 38 लाख के बीच है। इसमें पार्किंग चार्ज शामिल नहीं है। कवर्ड पार्किंग के लिए पिछले साल रेट 2 लाख से ज्यादा नहीं थे, लेकिन अभी यह 2.5 लाख हो गया है। सभी डिवेलपर्स ने बेसिक रेट के अलावा अदर चार्जेज में भी इजाफा किया है। लीज रेंट 90 से 100 रुपए प्रति वर्गफुट, मेंटेनेंस डिपॉजिट 30 रु. प्रतिवर्गफुट, ड्यूअल मीटर 35000 रुपए एक मुश्त के साथ 10 फीसदी तक महंगाई लेकर आए हैं।
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  • ड्रीम होम को लगे पंख





    इकनॉमिक टाइम्स | Jul 16, 2013, 08.47AM IST अक्टूबर 2011 में हाई कोर्ट की हरी झंडी और अगस्त 2012 में एनसीआर प्लैनिंग बोर्ड की मंजूरी के बावजूद महीनों तक कई लोचे झेलने वाले नोएडा एक्सटेंशन की तस्वीर अब बदलने लगी है। करीब 2.5 लाख घरों वाले 70 से ज्यादा प्रॉजेक्ट्स में से ज्यादातर पर काम तेजी पकड़ चुका है और कई बड़ी रियल्टी कंपनियां एक साल के भीतर ही पजेशन देने के दावे करने लगी हैं, हालांकि उनके और ग्राहकों के बीच कुछ मुद्दों पर दूरियां अब भी कायम हैं, प्रमोद राय की रिपोर्ट:

    करीब 2.5 लाख घरों वाले नोएडा एक्सटेंशन के 70 से ज्यादा प्रॉजेक्ट्स में से ज्यादातर पर काम तेजी पकड़ चुका है और कई बड़ी रियल्टी कंपनियां साल भर में पजेशन के दावे कर रही हैं। इस बीच यहां कीमतों ने अच्छी तेजी दिखाई है और लगभग सभी प्रॉजेक्ट्स में करीब तीन साल पहले बुकिंग कराने वाले ग्राहकों को अब तक दोगुने से ज्यादा का एप्रिसिएशन मिल चुका है। हालांकि, तस्वीर जितनी साफ होती जा रही है, चिंता की कुछ लकीरें भी उभर रही हैं। सिटी प्लानर्स और रियल्टर्स के मुताबिक, आने वाले कई साल तक इस रेजिडेंशल हब में तेजी जारी रहेगी, लेकिन अथॉरिटी के कामकाज और राजनीतिक दखल के बीच आशंका यह भी जताई जा रही है कि साइट प्लान में बदलाव, कपैसिटी से ज्यादा वर्टिकल ग्रोथ और ग्रीन एरिया में एनक्रोचमेंट जैसी गतिविधियां इस हॉट स्पॉट को किसी बदतर मुकाम तक न पहुंचा दें।

    नोएडा एक्सटेंशन में प्रस्तावित कुल ढाई लाख यूनिटों में 40 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली आधा दर्जन बड़ी रियल्टी फर्मों का कंस्ट्रक्शन वर्क 60 से 70 पर्सेंट पूरा हो गया है। इको-विलेज सीरीज के तहत यहां तीन प्रॉजेक्ट्स में 25,000 मकान बना रही सुपरटेक लिमिटेड के चेयरमैन आर के अरोड़ा कहते हैं, 'हम यहां अब तक 17,500 यूनिटें सेल कर चुके हैं। पिछले छह महीने में जिस तेजी से डिमांड आ रही है, जल्द ही बाकी 30 फीसदी मकान भी बुक होने की उम्मीद है।'
    अरोड़ा का दावा है कि वह अपने बायर्स को दिसंबर 2013 से पजेशन देना शुरू कर देंगे और जुलाई 2014 तक 10,000 हजार लोगों को मकान हैंडओवर कर दिया जाएगा।

    2015 के अंत तक हैंडओवर
    सभी यूनिटें सौंपने का काम 2015 के अंत तक होने की उम्मीद है। गौड़ सिटी के नाम से टाउनशिप डेवलप कर रहे गौड़ संस ने 237 एकड़ जमीन पर करीब 25 हजार मकानों वाले 9 प्रॉजेक्ट्स शुरू किए हैं। औसतन 60 फीसदी काम हो चुका है। कंपनी के वाइस प्रेजिडेंट (सेल्स) विपिन मोदी कहते हैं, 'पूरी टाउनशिप में 12,000 मकान हम खुद बना रहे हैं, जबकि बाकी छोटे डिवेलपर्स को दे रखा है। इनमें से 9,000 यानी करीब 75 पर्सेंट यूनिटें हम बेच चुके हैं। हम अप्रैल 2014 से पजेशन देना शुरू कर देंगे। नॉर्थ एवेन्यू, पार्क एवेन्यू, गैलेक्सी, राज रेजिडेंसी जैसी कंपनियां हमारे साइट प्लान के मुताबिक अलग-अलग प्रॉजेक्ट देख रही हैं।'

    आम्रपाली के ड्रीमवैली हाई राइज और दूसरे प्रोजेक्ट्स में भी तकरीबन 60 फीसदी बुकिंग हो चुकी हैं, जबकि कंपनी इस फेस्टिव सीजन इनवेंटरी फिनिश करने की रणनीति के साथ काम कर रही है। इसके लिए प्रीकास्ट टेक्नॉलजी से कंस्ट्रक्शन में तेजी लाई जा रही है। अजनारा होम्स, पंचशील ग्रीन्स, महागुन मायवुड्स, पैरामाउंट इमोशंस जैसे प्रॉजेक्ट में भी काम 40 से 60 फीसदी तक पूरा होने और एक साल के भीतर पजेशन शुरू करने के दावे किए जा रहे हैं। कुछ मौजूदा कंपनियां नए प्रॉजेक्ट्स भी ला रही हैं, जबकि कुछ ने हाल ही में सॉफ्ट लॉन्चिंग की है और मौजूदा रेट पर ही ग्राहकों को नई सहूलियतें पेश कर रही हैं।

    अमारा ग्रुप ने 3000 से 3300 रुपए प्रति वर्गमीटर के रेट पर 2 बेडरूम साइज के साथ इलेक्ट्रिकल अप्लायंसेज, एसी, मॉड्युलर किचन के साथ पजेशन में देरी पर 15 रुपए प्रति वर्गफुट की दर से मंथली कंपनसेशन देने की बात कही है। कंपनी के एक चैनल पार्टनर ने बताया, 'पिछले दिनों जो कुछ हुआ, उससे सबक लेकर भी कंपनियां अपने ऑफर ला रही हैं। यहां पजेशन एक बड़ी चिंता है और यह कंपनी इस बात की गारंटी दे रही है कि फलां तारीख के बाद से ग्राहकों को लगभग 15,000 रुपए मंथली रेंटल के तौर पर मिलेंगे।'

    नोएडा एक्सटेंशन में आधे से ज्यादा डिवेलपर खासतौर से छोटे बिल्डर बड़े टाउनशिप के बजाय छह से दस टावरों वाले प्रॉजेक्ट ही लॉन्च किए हैं। इनकी ग्रोथ स्लो है, लेकिन दावा किया जा रहा है कि प्रॉजेक्ट छोटा होने के चलते ये जल्द पूरे होंगे।

    रेजिडेंशल हब का फ्यूचर ब्राइट
    रियल्टी कंपनियों के संगठन क्रेडाई-एनसीआर के चेयरमैन अनिल कुमार शर्मा कहते हैं, 'आज की तारीख में मैं कह सकता हूं कि इस रेजिडेंशल हब का फ्यूचर ब्राइट है। तमाम मुश्किलों के बाद अब काम फुल स्विंग मोड में आ चुका है। नई तकनीक के इस्तेमाल से कंपनियां भी जल्द से जल्द प्रॉजेक्ट पूरा करने की कोशिश में लगी हैं। डेढ़ लाख से ज्यादा ग्राहकों अभी अच्छा-खासा एप्रिसिएशन मिल चुका है और जैसे-जैसे यहां वॉटर, रोड, इलेक्ट्रिसिटी और दूसरे तरह के इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलप हो रहे हैं, नए कस्टमर्स की दिलचस्पी बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में जो कुछ हुआ, उससे यहां की कंपनियों ने भी कई सबक लिए हैं। उसमें एक यह है कि ग्राहकों के साथ सही कम्यूनिकेशन जरूरी है और उन्हें वास्तविकता से लगातार अवगत कराना चाहिए। कुछ मुद्दों पर छोटी-मोटी दिक्कतें हैं, जिन्हें हम अथॉरिटीज के साथ मिलकर जल्द से जल्द सुलझा लेंगे।'

    बिल्डर्स के बिजनस जाल में फंसे हैं कई ग्राहक
    दो साल पहले नोएडा एक्सटेंशन प्रॉजेक्ट्स को कोर्ट की हरी झंडी मिलने के बाद से ही बड़े पैमाने पर ग्राहकों की ओर से ऐसी शिकायतें आने लगी थीं कि कंपनियां छोटी-मोटी गलती और कई दूसरी वजहें बताकर उनकी बुकिंग कैंसल कर रही हैं। ऐसी शिकायतों का दौर अब भी जारी है। दूसरी ओर किसानों के साथ हालिया विवाद के बाद कई डिवेलपर्स ने अपने कुछ टावर कैंसल होने का हवाला देकर ग्राहकों पर ओरिजिनल बुकिंग के अमाउंट के साथ 10-20 फीसदी कंपेनसेशन लेकर बाहर निकल जाने का दबाव भी बना दिया था तो कुछ ने उनसे ज्यादा रकम लेकर दूसरे प्रॉजेक्ट में शिफ्ट करने का विकल्प भी दिया। हालांकि, इन कंपनियों ने पूछताछ में ऐसे किसी रद्दोबदल से इनकार किया है, लेकिन ग्राहकों को मिले अनधिकृत मेल से ऐसी शर्तों की पुष्टि होती है।

    राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग के सूत्रों के मुताबिक, 'इस साल के शुरू में दर्जनों ग्राहकों की बुकिंग कैंसल करने के डिवेलपर्स के फैसले पर स्टे के बाद भी ऐसी शिकायतें बड़ी संख्या में आ रही हैं। अब ज्यादातर मामलों में कैंसलेशन के बजाय ग्राहकों पर शर्तें थोपने और प्रोजेक्ट से बाहर निकलने के मामले आ रहे हैं।' दो महीने पहले ही करीब 100 बायर्स ने बिसरख पुलिस स्टेशन में कुछ बड़ी कंपनियों के खिलाफ मनमानी की शिकायत की थी। कुछ संगठनों की मदद से इन लोगों ने अथॉरिटी में भी गुहार लगाई। लेकिन अभी तक ज्यादातर लोगों की समस्या सुलझी नहीं है। उल्टे कंपनियों की ओर से उन्हें तरह-तरह की शर्तों वाले लेटर और ऑफर मिल रहे हैं।

    रीसेल मार्केट खुलने के इंतजार में बायर
    बढ़ती कीमतों के बीच जहां कई ग्राहक 80 से 100 फीसदी का रिटर्न लेकर निकलने की सोच रहे होंगे, वहीं लोकल मार्केट में ऐसे ग्राहकों की चहलकदमी बढ़ रही है जो फ्रेश बुकिंग के बजाय पुराने ग्राहकों से मकान लेना चाहते हैं। लेकिन डिवेलपर्स ने अभी रीसेल को इजाजत नहीं दी है। संग रियल एस्टेट सॉल्यूशंस के रवींद्र यादव ने बताया, 'रीसेल सेगमेंट में डिमांड तो आ रही है, लेकिन न तो कंपनियां इसकी इजाजत दे रही हैं और न ही कोई चैनल पार्टनर ही इसमें कोई दिलचस्पी दिखा रहा है। इसके पीछे कंपनियों की मंशा यही है कि एक बार रीसेल शुरू हुई तो भाव टूटने लगेंगे और उनके बचे-खुचे फ्लैट ग्राहक को तरस जाएंगे।'

    गैलेक्सी वेगा के चैनल पार्टनर सुरेंद्र नागर कहते हैं, 'मेरे पास रोजाना ऐसे कस्टमर आते हैं, जो रीसेल के माध्यम से फ्लैट खरीदना चाहते हैं। लेकिन हम उन्हें टाल देते हैं। इसकी एक बड़ी वजह लोन अग्रीमेंट को लेकर बैंकों के से पैदा होने वाली दिक्कत और खुद रियल्टर्स की ओर से भी कई अड़ंगे लगाने की आशंका है।' वह बताते हैं कि तीन-चार साल पहले यहां प्रॉजेक्ट 1400, 1600 और 1700 रुपए प्रति वर्ग फुट के बेस प्राइस के साथ शुरू हुए थे, जहां अब कीमतें 3000 रुपए प्रति वर्ग फुट को पार कर गई हैं। कंपनियां हर तीन महीने पर कीमतें रिवाइज कर रही हैं और उनके 30 से 40 फीसदी फ्लैट अभी बिके नहीं हैं। ऐसे में अगर रीसेल को इजाजत देती हैं तो मार्केट में जबर्दस्त बार्गेनिंग होगी और पुराने ग्राहक थोड़ा कम मार्जिन पर भी प्रॉफिट बुकिंग कर सकते हैं।

    उधर, ग्राहकों के संगठन नेफोवा का कहना है कि कंपनियों की ओर से रीसेल की इजाजत नहीं देना गैरकानूनी है और इसकी अथॉरिटी में शिकायत की गई है। संगठन के मुताबिक बहुत से ग्राहकों की माली हालत अब तक की देरी के चलते खराब हो चुकी है और वे मजबूरी में बाहर निकलना चाहते हैं। कई ग्राहकों को जॉब कट और दूसरी दिक्कतों से गुजरना पड़ा है और वे बैंक के साथ डिफॉल्ट की पोजिशन में हैं। ऐसे में अगर रीसेल कर वे आसानी से बाहर आ सकते थे।
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  • Important lines regarding Gaur City:

    'पूरी टाउनशिप में 12,000 मकान हम खुद बना रहे हैं, जबकि बाकी छोटे डिवेलपर्स को दे रखा है। इनमें से 9,000 यानी करीब 75 पर्सेंट यूनिटें हम बेच चुके हैं। हम अप्रैल 2014 से पजेशन देना शुरू कर देंगे।
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  • Originally Posted by trialsurvey
    GC1 - 4th Avenue



    Hats off to Gaur Sahab.....

    Construction speed is incredible.......

    BUT......

    What about the distance between towers....

    doesnt it looks congested .......?
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  • Originally Posted by ManGupta
    Hats off to Gaur Sahab.....

    Construction speed is incredible.......

    BUT......

    What about the distance between towers....

    doesnt it looks congested .......?

    There is no Gap between towers.
    But such congestion is common in Greater Noida West projects..

    Thanks
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  • Originally Posted by trialsurvey
    GAURSONS SCHOOL !



    School ka Building banana aur School chlana ....... do alag-alag baaten hain.

    It may be another step towards building "Gaursons" Brand

    ...... but after RTM ..... for running the school ...... it would be better if they hand it over to some experienced and professional educational society like DPS.
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  • Originally Posted by cookie
    There is no Gap between towers.
    But such congestion is common in Greater Noida West projects..

    Thanks


    Right Bro....

    Salaried Middle Class people have no option but to learn to live up with congestion.

    Thanks
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  • Originally Posted by cookie
    There is no Gap between towers.
    But such congestion is common in Greater Noida West projects..

    Thanks


    I think ATS Village me bhi there is no gap between towers.

    - tapatalk free
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  • Originally Posted by fatichar
    I think ATS Village me bhi there is no gap between towers.

    - tapatalk free

    Bhai

    Even The most Premium apartment of Noida "Pearls Gateway tower" has no Gap but those are not High Density.

    Thanks
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  • Why compare Noida Extension societies with High end Premium Societies .....

    Salaried Middle Class people have no option but to learn to live up with congestion.

    PERIOD.
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