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No Metro for Sec 137????

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No Metro for Sec 137????

Last updated: June 3 2011
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  • #11

    #11

    Re : No Metro for Sec 137????

    Originally posted by dhanam View Post
    YES IF YOU WILL PAY METRO PLC

    Sir if you paid PLC then metro reaches every room of your flat
    Garg

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    • #12

      #12

      Re : No Metro for Sec 137????

      Keep the faith.... Authority babus are reading IREF !!

      Originally posted by thinker View Post

      Nutshell, no metro in Sec137 - rates to fall from current ~3400psf to ~2700psf very soon!!!!

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      • #13

        #13

        Re : No Metro for Sec 137????

        People should read the new paper more attentive.

        There is no change in Previous route
        If You Guys Are Going To Be Throwing Beer Bottles At Us At Least Make Sure They Are Full

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        • #14

          #14

          Re : No Metro for Sec 137????

          Originally posted by StudRawk View Post
          People should read the new paper more attentive.

          There is no change in Previous route

          excusez-moi masseur!


          Comment

          • #15

            #15

            Re : No Metro for Sec 137????

            5 साल पुराना है नोएडा से ग्रेनो तक मेट्रो का झुनझुना

            नोएडा से ग्रेटर नोएडा के बीच मेट्रो रेल का टै्रक बिछाने की बात सबसे पहले 2006 में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट का एमओयू साइन करते वक्त कही गई थी। तब नोएडा अथॉरिटी के तत्कालीन चेयरमैन राकेश बहादुर और सीईओ संजीव सरन ने डीएमआरसी अफसरों के साथ हुई पब्लिक मीटिंग में कहा था कि नोएडा के बाद अब ग्रेटर नोएडा से भी इस प्रोजेक्ट को लिंक करने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

            नोएडा में 7 किलोमीटर मेट्रो टै्रक बिछाने का काम 1 अगस्त 2006 में शुरू हुआ और 12 नवंबर 2009 को यहां मेट्रो चालू भी हो गई। लेकिन अब तक नोएडा से ग्रेटर नोएडा के बीच मेट्रो रेल लिंक के प्लान को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। यह बात अलग है कि मेट्रो को ब्रांड के रूप में इस्तेमाल किया गया और इसी बहाने प्रॉपर्टी के दाम भी खूब बढ़ाए गए।


            पहले प्रस्ताव में 52 किलोमीटर था मेट्रो ट्रैक
            नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक मेट्रो प्रोजेक्ट के पहले प्रस्ताव में टै्रक 52 किलोमीटर लंबा था। मुलायम सिंह के कार्यकाल में प्रस्ताव तैयार किया गया था। तब इसकी स्टडी रिपोर्ट तैयार की गई थी। रिपोर्ट में नोएडा से परी चौक होते हुए ग्रेटर नोएडा के बोडाकी रेलवे स्टेशन को लिंक करने का प्रस्ताव था। इसके बाद इसे वापसी में ग्रेटर नोएडा के बिसरख आदि (तब नोएडा एक्सटेंशन नहीं था) से होते हुए नोएडा में लिंक करना था। प्रोजेक्ट पर विचार करने से पहले इस मुद्दे पर भी बहस हुई थी कि नोएडा से ग्रेटर नोएडा के बीच मेट्रो की बजाय लाइट रेल के प्रोजेक्ट को लागू किया जाए। इसके पीछे लागत में कमी बताई गई थी। मेट्रो रेल के टै्रक पर तब 120 करोड़ प्रति किलोमीटर का खर्च आ रहा था और लाइट रेल के टै्रक पर यह 70 से 80 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर था। लाइट रेल में कम स्पेस की भी जरूरत होती थी।


            जनवरी 2009 में फिर हुई सुगबुगाहट
            जनवरी 2009 में जब नोएडा के मेट्रो प्रोजेक्ट का रिव्यू हुआ तब सीएम के निर्देश पर नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक मेट्रो प्रोजेक्ट को भी तेजी से आगे बढ़ाने की चर्चा हुई। तब टै्रक का फाइनल निर्धारण भी हुआ। यह भी तय किया गया था कि नोएडा के सिटी सेंटर से चलकर मेट्रो सेक्टर-50, 77, 78, 85, 92, से होती हुई सेक्टर-137 के पास से निकलकर सीधे परी चौक पहुंचेगी। वहां से यह बोडाकी स्टेशन तक लिंक करेगी। इस पूरे रूट की लंबाई 25 किलोमीटर होगी। इस रूट में 22 स्टेशन होंगे जिसमें 19 नोएडा एरिया में होंगे।


            सीएम ने नोएडा से जेवर तक मेट्रो ले जाने की घोषणा की
            39 महीने के अंदर नोएडा में 7 किलोमीटर मेट्रो टै्रक तैयार हो गया और इसमें टे्रन दौड़ने लगी। इस अवसर पर सीएम मायावती ने न सिर्फ ग्रेटर नोएडा बल्कि जेवर तक इस प्रोजेक्ट को बढ़ाने की बात की। सारी कवायद के बाद यह प्रोजेक्ट एक बार फिर तब पटरी से उतर गया जब डीएमआरसी चीफ श्रीधरन ने इसे अनफिट बताते हुए टै्रक को बनाने में असमर्थता व्यक्त की थी। जब कुछ आगे बात चली तो घाटे की भरपाई के रूप में डीएमआरसी ने कुछ जगह कमर्शल लैंड देने का प्रस्ताव दिया। डीएमआरसी का तर्क था कि पूरे टै्रक में 22 स्टेशनों में सिर्फ पांच या छह स्टेशनों को छोड़कर बाकी पर सवारी नहीं मिलेगी। तब डीएमआरसी घाटे में कैसे मेट्रो दौड़ाएगा। इस पर नोएडा , ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने इसे प्राइवेट सेक्टर को सौंपने की तैयारी कर दी।


            बिल्डरों ने बनाया मेट्रो को मार्केटिंग का जरिया
            नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक कोई भी प्रोजेक्ट मेट्रो के लालच के बिना पूरा नहीं हो रहा है। लोगों को लुभाने के लिए सभी बिल्डरों ने अपने प्लॉट की लोकेशन के साथ मेट्रो की कनेक्टिविटी को जरूर बताया है। इन दिनों एक्सप्रेस - वे के दोनों तरफ और नोएडा एक्सटेंशन में मेट्रो की कनेक्टिविटी मार्केटिंग का मुख्य हथियार बन गई है।


            अथॉरिटी ने भी छोटे प्लॉट के बढ़ाए दाम
            नोएडा अथॉरिटी ने भी मेट्रो के आने की भनक का खूब फायदा उठाया है। 2004 में आई रेजिडेंशल स्कीम के प्लॉट के रेट 3300 रुपये प्रति वर्गमीटर से लेकर 11 हजार रुपये थे। जैसे ही 2008 में मेट्रो का निर्माण तेजी से चला , नोएडा में स्कीम के रेट आसमान छूने लगे। यहां आम आदमी के लिए प्लॉट के रेट 14 हजार 400 रुपये से लेकर 39 हजार 600 रुपये प्रति वर्गमीटर तक पहुंच गए। इस वक्त नोएडा में रेजिडेंशल प्लॉट के रेट 20 हजार से लेकर 50 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर तक जा पहुंचे हैं ।

            -Navbharat times

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