विज्ञापन की ईएमआई बढ़ाने पर बिल्डर मजबूर
9 Jun 2011, 0822 hrs IST,इकनॉमिक टाइम्स

इकनॉमिक टाइम्स - विज्ञापन की ईएमआई बढ़ाने पर बिल्डर मजबूर

नई दिल्ली ।। घरों की बिक्री कम हो गई है, कारोबार से कम कैश मिल रहा है लेकिन बिल्डर विज्ञापनों पर खर्च नहीं घटा पा रहे हैं। एचसीसी, ओमैक्स, आम्रपाली, जेपी, इंडियाबुल्स, लोढ़ा, एटीएस और डीएलएफ जैसे नामी-गिरामी बिल्डरों के लिए विज्ञापन बनाने वाले प्रफेशनल का कहना है कि ये कंपनियां विज्ञापन पर लगातार खर्च बढ़ा रही हैं।

उनके मुताबिक, रियल एस्टेट कंपनियों का विज्ञापन पर खर्च साल-दर-साल आधार पर 30 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है। आम्रपाली ग्रुप के एग्ज़ेक्युटिव डायरेक्टर शिवप्रिय ने कहा, 'हम हर साल विज्ञापन पर 50 से 70 करोड़ रुपए खर्च कर रहे हैं। हमारी 40 परियोजनाएं हैं और हमें सभी के बारे में लोगों को बताने के लिए विज्ञापन पर खर्च करना पड़ता है।' एम एस धोनी कंपनी के ब्रैंड एंबेसडर हैं। आम्रपाली आईपीएल सीजन 4 में चेन्नई सुपरकिंग्स की प्रायोजक भी थी।

इस साल इंडस्ट्री का विज्ञापन पर खर्च एक-तिहाई बढ़ा है। पिछले साल, बिल्डर और ब्रोकरेज सहित रियल एस्टेट कंपनियों ने विज्ञापन पर 1,400-1,500 करोड़ रुपए खर्च किए थे। नाम जाहिर न करने की शर्त पर एक ऐडमैन ने कहा कि यह खर्च इंडस्ट्री की कुल आमदनी का करीब 5 फीसदी है।

टैम मीडिया रिसर्च की डिविजन एडेक्स इंडिया के आंकड़ों से यह संकेत मिलते हैं कि 2009 की तुलना में 2010 में रियल एस्टेट कंपनियों द्वारा अखबारों में दिए जाने वाले विज्ञापन में 64 फीसदी और टीवी विज्ञापन में 21 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। विज्ञापन जगत के पेशेवरों का कहना है कि विज्ञापन पर खर्च करने के लिहाज से 2011 में रियल एस्टेट टॉप 10 सूची में शामिल हो सकता है।

मीडिया बाइंग कंपनी एमपीजी की चीफ एग्जिक्यूटिव अनीता नय्यर ने कहा कि 2010 मध्य से रियल एस्टेट कंपनियों ने विज्ञापन पर खर्च बढ़ाया है। उन्होंने कहा, 'रियल्टी कंपनियां विज्ञापन पर खर्च बढ़ाने के लिए मजबूर हैं, क्यांेकि स्लोडाउन के बाद उनके पास प्रॉपर्टी की बड़ी इनवेंटरी बन गई है।' जोंस लैंग लसाल के मुताबिक मुंबई, एनसीआर-दिल्ली, बंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता, पुणे जैसे बड़े मेट्रो शहरों में इस साल की पहली तिमाही तक 12 से 15 फीसदी रिहायशी प्रॉपर्टी को खरीदार नहीं मिल पाए थे। 2007 और 2008 की तेजी के दौरान रियल एस्टेट सेक्टर विज्ञापनों पर खर्च करने के मामले में टॉप 10 में शामिल था। हालांकि, मंदी के दौरान कंपनियों को लागत पर काबू पाने के लिए विज्ञापन खर्चों में कटौती करनी पड़ी।

जेडब्ल्यूटी इंडिया के मैनेजिंग पार्टनर रोहित ओहरी ने कहा, 'हालांकि, पिछले साल की तुलना में रियल एस्टेट सेक्टर के विज्ञापन बढ़े हैं, लेकिन अभी भी इंडस्ट्री पीक पर नहीं पहुंच पाई है। खासतौर पर यह अखबारों में छपने वाले विज्ञापनों के बारे में पूरी तरह सही है, जिसमें मंदी के दौरान ऐड बजट में कटौती के दौरान गिरावट आई थी।'
Read more
Reply
0 Replies
Sort by :Filter by :
No replies found for this discussion.