प्रॉपर्टी वही जो इन्वेस्टर को रिटर्न दिलाए
10 Jun 2011, 0400 hrs IST

Navbharat Times - How to choose property which also gives good return

प्रॉपर्टी में भला कौन इन्वेस्ट नहीं करना चाहता, यह सेफ जो है! प्रॉपर्टी डीलरों के हथकंडों को छोड़ दें तो आपने जमीन की वैल्यू कम होने के बारे में शायद ही कभी सुना होगा। यही वजह है कि आप और हम, सभी कमाई के पहले दिन से ही प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट को टु डू लिस्ट में सबसे ऊपर जगह दे देते हैं। लेकिन इन्वेस्टमेंट के लिए इस सेफ ऑप्शन में भी कई बातों पर गौर करने की जरूरत होती है।

पसंद और रीपेमेंट
सबसे पहले तो प्रॉपर्टी के सही प्रकार का चुनाव करें। मतलब यह कि आपको क्या चाहिए? प्लॉट या फ्लैट? सबसे पहले तो यह सही से तय करें। इसके बाद यह देखें कि क्या आपको इसके लिए लोन की जरूरत है? अगर हां, तो यह अच्छी तरह सोच लें कि आप पे कर पाएंगे या नहीं? अक्सर इंसान जोश में जोखिम तो ले लेता है, लेकिन ऐसे में कई बार औने-पौने दाम बेच कर निकल जाना चाहता है। इसलिए यहां यह देखना जरूरी है कि जिस सोर्स के जिरये आप लोन री-पे करने की सोच रहे हैं, वह कितान ड्यूरेबल है। यह भी कि आपकी आमदनी का ग्राफ किस कदर बढ़ेगा?

आस-पड़ोस
जिस जगह पर आप इन्वेस्ट करने जा रहे हैं, उसके आस-पड़ोस जरूर ध्यान दें। यह एक हद तक इन्वेस्टमेंट पर रिटर्न का डिसाइडिंग फैक्टर है। मान लीजिए आपने कोई प्रॉपर्टी एजुकेशनल एरिया या किसी कॉलेज के आसपास ली है और आप उसे रेंट पर लगाना चाहते हैं। यहां किराएदारों को आकषिर्त करने और हैंडसम किराया लेने में आस-पड़ोस अहम हो जाएगा। कॉलेज पास होने की सूरत में आपके किराएदार ज्यादातर स्टूडेंट ही होंगे, और हो सकता है कि आपका घर महीनों खाली रहे।

फ्यूचर का नेचर
प्लानिंग आस पड़ोस से कम अहम फैक्टर नहीं है। कई बार हम लोग बिना जाने-समझे यार-दोस्त या रिश्तेदारों के कहने पर कहीं भी इन्वेस्ट कर देते हैं। लेकिन ऐसा होना नहीं चाहिए। आप अगर आंख-नाक-कान खुले रखेंगे तो इन्वेस्मेंट पर रिटर्न के चांसेज बेहतर बनेंगे। मान लीजिए आप किसी सड़क के किनारे इन्वेस्ट करने की सोच रहे हैं, वहां यह जरूर देखें कि कल को वह सड़क चौड़ी तो नहीं हो जाएगी या क्या उस सड़क को स्टेट या नेशनल हाईवे में बदलने की कोई योजना है। इस सूरत में फायदा और नुकसान दोनों है। नुकसान ऐसे कि अगर आप जमीन पर घर या दुकान बना लेते हैं तो उसका हिस्सा सड़क में जाने का डर रहेगा और वहीं दूसरी तरफ जो हिस्सा सड़क में जाएगा, उसके बदले आप को सरकार से ठीक-ठाक राशि मिल जाएगी जिसे आप कहीं और भी इन्वेस्ट कर सकते हैं। और अगर आपने ठीक सड़के के किनारे जमीन नहीं ली तो सड़क के स्टेटस में बदलाव से प्रॉपर्टी हॉट बन जाएगी।

रेडीमेड प्रॉपर्टी और सुविधाएं
रेडीमेड यानी अपार्टमेंट कल्चर का अलग ही अकर्षण है। लेकिन किसी अपार्टमेंट या अन्य किसी रेडीमेड कॉलेनी में इन्वेस्ट करने के लिए बिल्डरों के दावों को तो ठीक तरह परखे हीं, यह भी देखें कि फ्यूचर में उस स्थान के इर्द-गिर्द डेवलपमेंट की क्या संभावनाएं हैं? और, अपार्टमेंट में आपको क्या वे सुविधाएं मिल रही हैं जो प्यूचर में आप रेंट लगाना चाहें तो क्या इस रेडी टु यूज एज के किराएदारों को लुभा पाएंगे। कहने का मतलब यह है कि उसमें किचन, बेड रूम और वॉशरूम वगैरह में वे तमाम सुविधाएं हैं जो आज का किराएदार चाहता है। उन शहरों में जहां भूकंप का खतरा बना रहता है, लोग ज्यादा ऊंची इमारतों में रहना पसंद नहीं कर रहे। अहमदाबाद इस बदलती सोच का जीता-जागता उदाहरण है। यही हालत अपनी दिल्ली और मुंबई की भी है। हालांकि इस सोच को बदलने की जरूरत है। साइंस की मदद से अब कंस्ट्रक्शन के आसान होने के साथ-साथ इसमें मजबूती भी आई है। नई ऊंची इमारतें भूकंप भी झेल जाती हैं।
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  • Growth rate in NCR Properties is good from last 6 months - ET

    ग्रोथ की दहलीज पर एनसीआर
    10 Jun 2011, 2153 hrs IST,ईटी हिंदी

    Growth rate in NCR Properties is good from last 6 months - ET

    नई दिल्ली
    मजबूत अर्थव्यवस्था, तेज शहरीकरण, खरीदने की क्षमता में बढ़ोतरी और फाइनैंस तक पहुंच जैसे सकारात्मक कारकों के बूते देश का प्रॉपर्टी बाजार एक बार फिर जोरदार वापसी करता दिख रहा है। यह बिक्री में इजाफे, नई लॉन्चिंग और विभिन्न क्षेत्रों में प्रॉपर्टी कीमतें बढ़ने, जैसे रियल एस्टेट सेक्टर की गतिविधियों से साफ होता है। जो क्षेत्र इस मामले में रफ्तार दिखा रहे हैं, उनमें दिल्ली-एनसीआर भी शामिल है।

    एसोचैम के एक हालिया अध्ययन में कहा गया था कि 2010-11 की पहली छमाही में फ्लैट और अपार्टमेंट की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, दूसरी छमाही रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक रह सकती है, क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ के बूते रियल एस्टेट गतिविधियों में एक बार फिर जान आती दिख रही है। इससे आवासीय और कमर्शल स्पेस, दोनों सेगमेंट में गति बढ़ने की उम्मीद है।

    केपीएमजी में निदेशक (एडवाइजरी सविर्सेज) नीरज बंसल ने कहा, 'एनसीआर में मांग में कमी नकारात्मक कारोबारी माहौल की वजह से दर्ज की जा रही है, लेकिन इसे खत्म हुए अब करीब एक साल बीत चुका है। बीते कुछ महीने के दौरान एनसीआर में रियल एस्टेट के लिए बढि़या कारोबार में तेजी आती देखी गई है। कई नई परियोजनाएं लॉन्च की गई हैं और कीमत से जुड़े नए बेंचमार्क तय किए जा रहे हैं।'

    अर्न्स्ट ऐंड यंग में एसोसिएट डायरेक्टर (रियल एस्टेट ऐंड हॉस्पिटैलिटी प्रैक्टिस) मोना छाबड़ा भी इस बात से इत्तफाक रखती हैं। उन्होंने कहा, 'अगर किसी को आवासीय बाजार में 2010 के हालात की तुलना 2008 की दूसरी छमाही और 2009 की पहली छमाही से करनी है, तो सेल्स वेलोसिटी और नई परियोजनाओं की कीमतों में स्पष्ट बढ़ोतरी नजर आ रही है। मसलन, गुड़गांव में नए लॉन्च की कीमतें 2008 के शुरुआती दिनों में पीक स्तर से भी आगे निकल गई हैं।'

    एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि किफायती सेगमेंट की तुलना में मिड और प्रीमियम सेगमेंट के हिस्से में इजाफा हुआ है, जो हालिया महीनों में कई मिड-सेगमेंट और लग्जरी परियोजनाओं की बढ़ती बिक्री और नई लॉन्चिंग से साफ होता है। कमशिर्यल स्पेस के मामले में भी सेल्स और लीजिंग गतिविधियां तेज हुई हैं। इसके अलावा रेंटल और कैपिटल वैल्यू मंदी के दौर की तुलना में काफी बढ़ी हैं, हालांकि उन्हें मंदी से पहले के पीक स्तरों को छूना अभी बाकी है। भले जो भी हो, उद्योग पर निगाह रखने वाले जानकार और विशेषज्ञ इस क्षेत्र में रियल एस्टेट सेक्टर की संभावनाओं को लेकर काफी सकारात्मक रुख दिखा रहे हैं।

    उनका कहना है कि बीते एक दशक के दौरान दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के बाशिंदों ने देश में सबसे ज्यादा प्रति व्यक्ति आय की बढ़ोतरी दर्ज की है। खर्च करने लायक आय में इजाफा रियल एस्टेट में ग्रोथ और क्षेत्र के कैपिटल गुड्स उपभोग में साफ झलकती है। देश के लिए अनुमानित जीडीपी ग्रोथ और क्षेत्र के लिए तय बजटीय खर्च पर निगाह डालें, यह कहना सुरक्षित होगा कि क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट में भारी निवेश होने का चलन आगे भी जारी रहेगा।

    केपीएमजी के बंसल ने कहा, 'इस तरह एनसीआर सबसे तेज रफ्तार दिखाने वाले क्षेत्रों में शामिल रहेगा, यह प्रति व्यक्ति आय और जनसंख्या घनत्व दोनों के मामले में है, क्योंकि पलायन करके यहां आने वाले लोगों की तादाद काफी ज्यादा है। और यह तो साफ ही है कि यह क्षेत्र औद्योगिक, कमशिर्यल और आवासीय डिवेलपमेंट में निवेश खींचने के लिहाज से बेहतरीन स्थिति में खड़ा है।' हालांकि, जमीन की कमी और उसकी ऊंची कीमतें बड़े पैमाने पर औद्योगिक डेवलपमेंट को कुछ मुश्किल बना देंगी, लेकिन सविर्सेज उद्योग (फाइनेंशियल तथा आईटी एवं आईटीईएस सर्विसेज, रीटेल, हॉस्पिटैलिटी आदि) के बूते कमशिर्यल डेवलपमेंट की ग्रोथ और उसके नतीजतन आवासीय सेगमेंट में आने वाली मांग ऊंचे स्तरों पर और सतत आधार पर बनी रहेगी।
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