लगातार बढ़ रही ब्याज दरों से परेशान रियल एस्टेट कंपनियां अफोर्डेबल हाउसिंगप्रोजेक्ट पर खास ध्यान देरही हैं। यही वजह है किइन कंपनियों का जोर 20 से 50 लाख रुपए की कीमत वाली परियोजनाओं पर है। अफोर्डेबलहाउसिंग के तहत आने वाले फ्लैट की कीमतों में इजाफा न हो इसके लिए आम्रपाली, ओमैक्स, सुपरटेक जैसी कंपनियां लागत कम करने की कोशिश में हैं।

रियल एस्टेटकंपनियों के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष में ब्याज दरों में हुई बढ़ोतरी का प्रभावफिलहाल उनके कारोबार पर नहीं पड़ा है। हालांकि यह सिलसिला जारी रहा तो इससे निश्चिततौर पर मांग में कमी आ सकती है। सुपरटेक के डायरेक्टर विकास त्यागी के मुताबिक, 'अप्रैल के दौरान ब्याज दरों में हुई बढ़ोतरी और पॉलिसी रेट में हुए इजाफे का असरअब तक कारोबार पर नहीं पड़ा है, लेकिन अगर एक बार फिर से ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैंतो इससे कारोबार प्रभावित होने की आशंका है।' त्यागी ने कहा कि कंपनी ग्राहकों केबजट के हिसाब से उन्हें हाउसिंग के विकल्प उपलब्ध करा रही है। ऐसे में भविष्य में 700 वर्ग फुट से 1,000 वर्ग फुट के फ्लैट वाली परियोजनाओं पर जोर रहेगा।

ब्याज दरों और अन्य खर्चों में हो रही बढ़ोतरी का असर अफोर्डेबल हाउसिंगपरियोजनाओं की कीमत पर न पड़े इसके लिए कंपनियां लागत कम करने की कोशिश में हैं।आम्रपाली के सीएमडी अनिल कुमार शर्मा ने बताया, 'फ्लैट की कुल लागत में 40 फीसदीस्ट्रक्चर की होती है और60 फीसदी खर्च फिनिशिंग का होता है। स्ट्रक्चर की क्वालिटीसे समझौता नहीं किया जा सकता है। यही वजह है कि फिनिशिंग में किफायती प्रोडक्ट काइस्तेमाल कर खर्च को कम किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर टेक्सचर पेंट की बजायसाधरण पेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है, साथ ही अन्य सुविधाओं के लिए लग्जरीउत्पादों का इस्तेमाल न कर साधारण प्रोडक्ट लगाए जा रहे हैं।'

शर्मा केमुताबिक ब्याज दरों का फिलहाल कारोबार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है इसके बावजूदकंपनी काफी सोच समझकर अपनी परियोजनाओं पर काम कर रही है। आम्रपाली की फिलहालदिल्ली-एनसीआर में अफोर्डेबल हाउसिंग की 10 परियोजनाएं चल रही हैं। अगरब्याज दरों में इजाफा होता है तो इसका सबसे ज्यादा असर 20 से 50 लाख रुपए की श्रेणीपर पड़ता है। इस श्रेणी की मांग सबसे ज्यादा होने की वजह से इसपर कंपनियां खासध्यान दे रही हैं। ओमेक्स के प्रवक्ता के मुताबिक, 'हमारी कोशिश है कि ग्राहकों कीजरूरत के हिसाब से उन्हें बेहतर सुविधाओं के साथ फ्लैट उपलब्ध कराया जाए। यही वजहहै कि फ्लैट की फिनिशिंग में अपनी पसंद के अलावा उनकी जरूरत और बजट का ध्यान रखा जारहा, ताकि फिजूल खर्च को रोका जा सके।'

अफोर्डेबल हाउसिंग वाली परियोजनाओंके चलते सेनेटरीवेयर निर्माताओं के उत्पादों की बिक्री में करीब 20 फीसदी तक काइजाफा हुआ है। इसके तहत 5,000 रुपए से 20,000 रुपए के उत्पादों को ज्यादा तवज्जो दीजा रही है। कारोबारियों के मुताबिक यह पूरा साल इन उत्पादों की बिक्री के लिहाज सेकाफी अच्छा रहने वाला है।सेनेटरीवेयर के बहुत से ब्रांड में डील करने वालेसदर बाजार के कारोबारी रूपेश अरोड़ा के मुताबिक, 'कंपनी सब कॉन्ट्रैक्ट के जरिए कईरियल एस्टेट कंपनियों को अपने उत्पाद सप्लाई करती है। तीन महीने में तुलना करें ताआयातित और महंगे उत्पादों की तुलना में सस्ते सेनेटरीवेयर की बिक्री में काफी इजाफाहुआ है। फिलहाल उपभोक्ता लुक्स के बजाय कीमत पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
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  • आयातित उत्पादों से तुलना करें, तो स्थानीय मैन्युफैक्चरर्स के उत्पादों केदाम 50 फीसदी से भी कम हैं। यही कारण है कि इनकी खरीदारी उपभोक्ताओं को सस्ती पड़तीहै। सदर बाजार के एक सेनेटरी वेयर डीलर सुरेश भाटी के मुताबिक, 'आयातित सेनेटरीवेयर की कीमतें 30,000 रुपए से शुरू होती हैं और 1 लाख रुपए से ऊपर जाती हैं, जबकिस्थानीय कारोबारियों के उत्पादों के दाम 5,000 रुपए से शुरू हो जाते हैं। ऐसे इनकीबिक्री में पिछले तीन महीने में करीब 20 फीसदी तक का इजाफा हुआ है।' ब्याजदरों में जिस तरह बढ़ोतरी की जा रही है उसे देखते हुए यह पूरा साल घरेलू उत्पादोंकी बिक्री के लिए काफी अच्छा रहने वाला है। नोएडा के सेनेटरी वेयर डीलर रोहितअग्रवाल ने बताया, 'यह पूरा साल अफोर्डेबल हाउसिंग के लिहाज से काफी अच्छा रहनेवाला है। इस कारण से सस्ते सेनेटरी वेयर की बिक्री में तेजी बरकरार रहेगी। हालांकि, लग्जरी उत्पादों की मांग भी बनी हुई है।'

    -Economic Times
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  • प्रॉपर्टी तो महंगी होगी ही!


    आरबीआई द्वारा पॉलिसी रेट में बदलाव से प्रॉपर्टी के और महंगा होने की बात कही जा रही है। पार्श्वनाथ डिवेलपर्स और कंफेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डिवेलपर्स असोसिएशन के चेयरमैन प्रदीप जैन का कहना है कि इस बढ़ोतरी से प्रॉपर्टी के दाम बढ़ेंगे।

    जोंस लैंग लसाल के चेयरमैन और कंट्री हेड अनुज पुरी का भी ऐसा ही मानना है। उनके मुताबिक यह प्रॉपर्टी और खासकर हाउसिंग सेक्टर के लिए अच्छी खबर नहीं कही जा सकती। पिछले कुछ समय में बार बार इंट्रेस्ट रेट में बढ़ने के कारण ऐसे ही खीरदफरोख्त पर काफी असर पड़ा है। अब इसमें और गिरावट आ सकती है।

    उनके मुताबिक इंट्रेस्ट रेट के असर को काउंटर करने के लिए प्रॉपर्टी के रेट गिराने की बात डिवेलपर्स की क्षमता पर निर्भर करेगी। बड़े डिवेलपर्स तो कम से कम ऐसा नहीं ही करेंगे। हां, छोटे डिवेलपर्स जिन्हें अपना स्टॉक निकालने की मजबूरी होगी, ऐसा कर सकते हैं।

    प्रदीप जैन ने कहा कि इंडस्ट्री पहले से ही बढ़ते इनपुट कॉस्ट से जूझ रही है, इसका भार कस्टमर पर ट्रांसफर करने के अलावा कोई चारा नहीं है। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई है कि इन डिवेलपमेंट्स से खरीददार नहीं डिगेंगे।

    आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर का भी कहना है कि वर्तमान हालात में बैंकों का फंडिंग कॉस्ट और लेंडिंग रेट बढ़ सकता है। आरबीआई द्वारा इंफ्लेशन को कम करने के लिए उठाए जा रहे कदमों को कई एनालिस्ट संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। लेकिन उनका भी मानना है कि इससे देश के इकनॉमिक ग्रोथ पर असर पड़ेगा।

    इंट्रेस्ट रेट में बढ़ोतरी से लोन के महंगा होने के साथ-साथ कंज्यूमर को मिलने वाली लोन की रकम पर भी असर पड़ता है। बैंक लोन देते वक्त यह जरूर देखती है कि ईएमआई की रकम लोन लेने वाले परिवार या व्यक्ति के टोटल मंथली इनकम के 40 प्रतिशत से ज्यादा न हो। इंट्रेस्ट रेट बढ़ने से सबसे पहले तो ईएमआई ही बढ़ती है। एडेलवेइस ग्रुप के चेयरमैन अनिल कोथूरी का कहना है कि आज जो स्थिति है उसके मुताबिक एक आम उपभोक्ता को मिलने वाले लोन की रकम में साल भर पहले की तुलना में करीब 25 फीसदी की कमी आ चुकी है।

    -navbharat times
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