नए मकान का अपना जादू होता है, खास तौर से तब जब उसकी कीमत आसमान तक न पहुंची हो। कई लोग निर्माणाधीन इमारत में फ्लैट बुक कराने का जोखिम केवल इसी कारण लेते हैं। इससे न केवल अपना मकान होने का ख्वाब पूरा करने में मदद मिलती है, बल्कि यह रहने के लिए तैयार फ्लैट की तुलना में सस्ता भी पड़ता है।

हालांकि, बिल्डरों के परियोजना को वक्त पर तैयार करने में नाकाम रहने से जुड़ी खबरें मकान खरीदने वाले कई लोगों को निर्माणाधीन प्रॉजेक्ट में फ्लैट बुक कराने के बारे में दोबारा सोचने पर मजबूर कर रही हैं। कई लोग खुद से यह सवाल भी करते हैं कि क्या ऐसी प्रॉपर्टी बुक कराना समझदारी होगी, जिसका अंतिम चेहरा अब तक सामने नहीं आया है।

नाइट फ्रैंक इंडिया के नैशनल डायरेक्टर (रिसर्च ऐंड एडवाइजरी) गुलाम जिया ने कहा, 'निर्माणाधीन फ्लैट के साथ सबसे बड़ा फायदा यह है कि निर्माण की प्रगति के हिसाब से पैसा धीरे-धीरे निकलता है। इसके अलावा आप अपनी जरूरतों के हिसाब से फ्लैट में बदलाव भी कर सकते हैं।' जब बिल्डर अपनी परियोजना शुरू कर रहा होता है, तो आपके पास फ्लैट की लोकेशन, दिशा और फ्लोर चुनने का विकल्प रहता है। इनकी तलाश आसान होती है, क्योंकि आम तौर पर कंपनी हाल में लॉन्च हुए प्रॉजेक्ट को लेकर बड़े विज्ञापन अभियान चलाती है, ऐसे में आपको ब्रोकरों के जरिए जाने की जरूरत नहीं होती, लेकिन निर्माणाधीन परियोजना में फ्लैट बुक कराने से पहले कुछ अहम बिंदुओं पर गौर करना चाहिए।

आवश्यक मंजूरियां

यह सुनिश्चित करना आपके हित में है कि प्रॉजेक्ट वक्त पर पूरा हो। बिल्डर तभी निर्माण कार्य शुरू कर सकता है, जब उसके पास इंटिमेशन ऑफ डिसअप्रूवल (आईओडी) और कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (सीसी) हो। आईओडी के तहत वे शर्तें होती हैं, जिनके आधार पर इमारत का निर्माण किया जाता है। यह आम तौर पर एक साल की अवधि के लिए वैध होता है और उसके बाद संबंधित प्रशासन से दोबारा वैलिडेशन की जरूरत होती है। सीसी स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी किया जाता है और यह बिल्डर को निर्माण शुरू करने की इजाजत देता है। एसएनजी ऐंड पार्टनर्स में पार्टनर (रियल एस्टेट) धीरज जैन ने कहा, 'आपको तभी निर्माणाधीन फ्लैट खरीदना चाहिए, जब बिल्डर के पास उस फ्लोर के लिए कमेंसमेंट सर्टिफिकेट हो, जिसमें आप अपने फ्लैट की बुकिंग करा रहे हैं।'

मालिकाना हक

जैन का कहना है, 'टाइटल पर ड्यू डिलिजेंस अनिवार्य है। मालिकाना हक का टाइटल तमाम अवरोधों और कानूनी विवादों से दूर होना चाहिए।' खरीदार के पास टाइटल से जुड़े दस्तावेजों की जांच-पड़ताल का अधिकार होता है। ऐसे भी उदाहरण सामने आए हैं, जिनमें ग्राहक फ्लैट खरीदने के लिए डेवलपर से समझौता करते हैं और उसके बाद उसे संबंधित प्रशासन के पास रजिस्टर कराया जाता है। अगर डेवलपर के पास फ्लैट का मालिकाना अधिकार नहीं है, तो वह उसका रजिस्ट्रेशन कराकर भी नए खरीदार को उसकी ओनरशिप ट्रांसफर नहीं कर सकता। टाइटल सर्च के लिए किसी सक्षम वकील की मदद लेने में समझदारी है। इसके अलावा आप होम लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। होम फाइनेंस कंपनियां और बैंक जरूरी 'टाइटल सर्च' करते हैं और लोन को मंजूरी देने से पहले ड्यू डिलिजेंस करते हैं। वे लोन प्रोसेसिंग शुल्क वसूलते हैं, लेकिन इसे चुकाने में फायदा ही है, क्योंकि भविष्य में गतिविधियां शांतिपूर्वक तरीके से निपटेंगी।

फ्लैट का नमूना

ज्यादातर प्रतिष्ठित बिल्डर इसे मार्केटिंग टूल के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यूनिकॉन फाइनैंशल इंटरमीडियरीज के कंट्री हेड (वेल्थ मैनेजमेंट, इनवेस्टमेंट बैंकिंग एंड बिजनेस स्टैटेजी) राजीव शर्मा ने कहा, 'खरीदार जो खरीदने जा रहा है, यह उसका विजुअल प्रस्तुतिकरण होता है। सैम्पल फ्लैट बुनियादी रूप से खरीदार को स्पेस और डाइमेंशन का अंदाजा देने का उद्देश्य पूरा करता है।' जोंस लैंग लसाल मेघराज इंडिया के सीओओ (रेजिडेंशल सर्विसेस) मुहम्मद असलम ने कहा, 'सैम्पल फ्लैट खरीदार को इस बात का अंदाजा देता है कि तैयार होने पर उसकी यूनिट कैसी दिख सकती है। हालांकि, आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खरीदी जाने वाली यूनिट में डाइमेंशन और विशेषताएं, सैम्पल फ्लैट जैसी हों।' इस बात की जांच करना भी बेहतर रहता है कि फ्लैट में दी गई सुविधाएं आपके और बिल्डर के बीच हुए समझौते में एक जैसी हैं। ऐसे भी उदाहरण है कि बिल्डरों ने सैम्पल फ्लैट को आकर्षक बनाने के लिए तो शैंडिलर्स या महंगी बाथरूम फिटिंग लगाईं, जबकि बिक्री के लिए उपलब्ध फ्लैट में ये फीचर नजर न आएं।

मॉर्गेज प्रॉपर्टी

बिल्डर बैंकों और एनबीएफसी से कर्ज लेते हैं और बैंक के पास प्रॉजेक्ट को गिरवी रखा जाता है। निर्माणाधीन फ्लैट खरीदते वक्त अगर आपसे किसी बैंक के साथ बिल्डर के खास खाते के पक्ष में चेक काटने के लिए कहा जा रहा है, तो यह इस बात का साफ संकेत है कि प्रॉजेक्ट बैंक के पास मॉर्गेज रखा गया है। ऐसे प्रॉजेक्ट में फ्लैट खरीदते वक्त आपको बैंक से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की जरूरत होगी। एनओसी में आपके फ्लैट का ब्योरा शामिल होना चाहिए, जैसे आपके फ्लैट का नम्बर, इमारत आदि। अगर बिल्डर बैंक से लिया गया पैसा चुकाने में नाकाम रहता है, तो बैंक प्रॉजेक्ट पर कब्जा कर सकता है और खरीदार को फ्लैट खाली करने के लिए कह सकता है। एनओसी से सुनिश्चित होता है कि खरीदार को दिक्कतों का सामना न करने पड़े, क्योंकि अगर खरीदार प्रॉपर्टी के लिए पूरी कीमत चुकाता है, तो फ्लैट पर बैंक का कब्जा नहीं रहता।

कीमत

कई लोग निर्माणाधीन फ्लैट खरीदने का विकल्प इसलिए चुनते हैं, क्योंकि रेडी टू मूव इन फ्लैट की तुलना में इनकी कीमतें कम रहती हैं, लेकिन आपको स्टाम्प ड्यूटी और प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन में आने वाले खर्च, इलेक्ट्रिक मीटर, गैस कनेक्शन, फर्निशिंग का खर्च, फिटिंग और बदलावों के खर्च पर गौर करना चाहिए। बड़े आवासीय प्रॉजेक्ट और टाउनशिप में बिल्डर पांच साल तक का मेंटेनेंस डिपॉजिट एडवांस वसूलते हैं।

निर्माणाधीन फ्लैट के खरीदार को प्रॉपर्टी वैल्यू के 2.38 फीसदी के हिसाब से सर्विस टैक्स चुकाना होता है, लेकिन सर्विस टैक्स के लेवी को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। इसलिए बिल्डरों को बैंकों के साथ एस्क्रो फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने के लिए कहा जाता है। अगर अदालत सर्विस टैक्स के पक्ष में फैसला सुनाती है, तो इससे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कर चुकाने में किया जाता है। लेकिन कुछ बिल्डर इनडेमनिटी बॉन्ड के साथ जाना पसंद करते हैं, जिनमें खरीदार अदालत के टैक्स के पक्ष में फैसला सुनाने पर सर्विस टैक्स चुकाने की जिम्मेदारी अपने कंधे पर लेता है।

बिल्डर का ट्रैक रिकॉर्ड

असलम ने कहा, 'संभावित खरीदार को डेवलपर की विश्वसनीयता, अतीत की उसकी परियोजनाओं और प्रदर्शन तथा डिलीवरी रिकॉर्ड पर गौर करना चाहिए।' बढ़िया ट्रैक रिकॉर्ड वाले बड़े खिलाड़ियों के साथ बने रहना बेहतर है, क्योंकि वे परियोजना को अमली जामा पहनाने की क्षमताएं रखते हैं और साथ ही संसाधनों तक उनकी बेहतर पहुंच होती है।

निवेशकों का बाहर निकलना

अगर आप निर्माणाधीन प्रॉजेक्ट में पैसा लगाने वाले निवेशक हैं और कीमतें बढ़ने पर फ्लैट बेचकर मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो जब प्रॉजेक्ट पूरा होने के करीब पहुंचे, समझौते की शर्तों पर गौर करना सही रहता है। बिल्डर सेल एग्रीमेंट में 'नो सेल' क्लॉज रखते हैं, जिसके तहत खरीदार प्रॉजेक्ट पूरा होने के बाद कुछ अवधि तक फ्लैट नहीं बेच सकते। अगर आपने उससे पहले बाहर निकलने की योजना बनाई है, तो आपको बिल्डर से एनओसी लेना होगा।

-navbharat times
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