Hi all,

Please throw some light on status og noida expressway sec 137 .. there are quite a few projects running there and as HC is giving decision against builders it looks like sec 137 express way may also gets affected.. can any senior member please tell what could be the scenario like . is the land in sec 137 free from triuble. when i go there i see a blue and white tall building and its an MNC company .. if big companies have invested in this sector. then i guess the sector cant be duped by the court or any farmer . Please let us know what can happen if sec 137 is safe or is iut risky ..:bab (38):
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  • Sector 137 is as risky as is sector 37!!!
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  • From here you get this info? Can we have more detail about it? Could you please know us the project names?
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  • Originally Posted by noidaa
    Sector 137 is as risky as is sector 37!!!


    Good answer!!
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  • express way 137 supertech ecociti

    I have booked a flat in supertech ecocity and i am really worried about it.
    I see some has posted sec 137 is risky as sec 37 On what basis he has posted this statement. Please mention some grounds on which u can logically prove that 137 expessway projects can also get doomed . Please suggest so that i can put my hard earned in banks rather that wasting it on fraud Land
    and a request. PLEASE DONT POST ANY STATEMENTS WHICH CANT HOLD ANY WATER.
    Thankyou.
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  • Originally Posted by czar1944
    I have booked a flat in supertech ecocity and i am really worried about it.
    I see some has posted sec 137 is risky as sec 37 On what basis he has posted this statement. Please mention some grounds on which u can logically prove that 137 expessway projects can also get doomed . Please suggest so that i can put my hard earned in banks rather that wasting it on fraud Land
    and a request. PLEASE DONT POST ANY STATEMENTS WHICH CANT HOLD ANY WATER.
    Thankyou.


    Sir,

    As of now there is no agitation seen on the eway sectors.On this forum everybody is putting his own views/opinions and trying to assess the situation from here on.Thats why you see so many threads on this forum discussing abt the future of Noida RE , legal matters etc.

    NE buyers are frustrated and under tension because no body knows what would be the soln.4 months back they didn't think this could have happened.

    If situation goes wrong you can not blame anybody.You can;t take anybody words here to come to a conclusion whether it is safe or not.So I would say it all depends on the person risk appetite.Therefore depending on your risk appetite think accordingly
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  • Originally Posted by czar1944
    I have booked a flat in supertech ecocity and i am really worried about it.
    I see some has posted sec 137 is risky as sec 37 On what basis he has posted this statement. Please mention some grounds on which u can logically prove that 137 expessway projects can also get doomed . Please suggest so that i can put my hard earned in banks rather that wasting it on fraud Land
    and a request. PLEASE DONT POST ANY STATEMENTS WHICH CANT HOLD ANY WATER.
    Thankyou.


    just chill,man.high court had dismissed farmer's plea regarding sec 137 last year.don't panic.
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  • अब नोएडा पहुंची नोएडा एक्स. की आग
    21 Jul 2011, 0045 hrs IST,नवभारत टाइम्स

    एनबीटी टीम।। नोएडा एक्सटेंशन/नोएडा
    नोएडा एक्सटेंशन एरिया में रोजा याकुबपुर गांव के मामले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 26 जुलाई तक सुनवाई टाल दी। इस गांव की करीब 460 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण के खिलाफ दायर की गई याचिका पर बुधवार को सुनवाई होनी थी। बिसरख , इटैडा , देवला , हैबतपुर , बादौली , घंघोला आदि गांवों के किसानों की याचिका पर भी गुरुवार को सुनवाई होनी थी , लेकिन याचिकाकर्ताओं के वकील पंकज दूबे के मुताबिक कोर्ट सभी संबंधित मामलों की सुनवाई एक साथ 26 जुलाई को करेगा। वहीं दूसरी ओर , कोर्ट के फैसले का असर अब नोएडा तक पहुंच गया है। बुधवार को सौहरखा , सर्फाबाद , सालारपुर , ककराला , भूड़ा , बरौला आदि गांव के किसान सुबह से धरने पर बैठ गए हैं। इस गांव की जमीन के इलाके में सेक्टर- 74 , 75 , 76 , 77 , 78 , 79 , 115 और 117 में बड़ी संख्या में प्राइवेट बिल्डर फ्लैट बना रहे हैं।

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    बुधवार को रोजा याकुबपुर और आस-पास के गांवों के किसान हाईकोर्ट का फैसला आने के इंतजार में प्रधान की चौपाल पर सुबह से जमा हो गए थे। खुशी मनाने के लिए किसानों ने मिठाई , ढोल नगाडे़ बजाने के लिए पूरा इंतजाम कर लिया था। सुनवाई टाले जाने की खबर सुनने के बाद किसान लौट गए।

    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंगलवार को पतवाड़ी में 589 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण रद्द कर दिया था। पतवाड़ी गांव के करीब 83 पर्सेंट किसानों ने मुआवजा उठा लिया है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी यह मान रही थी कि जिस गांव में 80 पर्सेंट से अधिक किसानों ने मुआवजा उठा लिया है , वहां खतरे की बात नहीं है। लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय से अथॉरिटी के इस मंसूबे को झटका लगा है। इस निर्णय से करीब एक दर्जन प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं। इनमें रेजिडेंशल के अलावा इंस्टिट्यूशनल और कमर्शल प्रोजेक्ट भी शामिल हैं।

    पहले शाहबेरी , फिर पतवाड़ी में जमीन अधिग्रहण खारिज करने के कोर्ट के निर्णय से ग्रेटर नोएडा के प्रॉपर्टी मार्केट को भारी झटका लगा है। निवेशक न आने से प्रॉपर्टी मार्केट से जुड़े लोगों को पसीने छूट रहे हैं।

    शाहबेरी और पतवाड़ी गांवों के मामले पर कोर्ट के फैसले का असर अब नोएडा तक पहुंच गया है। इस क्रम में बुधवार को सौहरखा , सर्फाबाद , सालारपुर , ककराला , भूड़ा , बरौला आदि गांव के किसान सुबह से धरने पर बैठ गए हैं। इस गांव की जमीन के इलाके में सेक्टर- 74 , 75 , 76 , 77 , 78 , 79 , 115 और 117 में बड़ी संख्या में प्राइवेट बिल्डर फ्लैट बना रहे हैं।

    किसानों के धरने प्रदर्शन के चलते ज्यादातर साइटों पर काम रुका रहा। हालांकि , किसानों का पहले दिन का धरना प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा लेकिन बिल्डर भयभीत थे। शाम को घबराए बिल्डरों के प्रतिनिधि मंडल ने अथॉरिटी के चेयरमैन से मुलाकात कर मदद की मांग की। धरने को शांत कराने गए अथॉरिटी के ओएसडी अजय श्रीवास्तव की बात मानने से किसानों ने इनकार कर उन्हें बैरंग लौटा दिया।

    निवेशक भी पहुंचे कोर्ट
    नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट बायर्स वेलफेयर असोसिएशन ने बुधवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका में दाखिल कर दी। इन्होंने कहा है कि जमीन अधिग्रहण पर फैसला देने से पहले हमारी बात भी सुनी जाए।

    मंगलवार को पतवाड़ी में 589 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण रद्द करने के हाई कोर्ट के निर्णय के बाद बुधवार को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में दिनभर निवेशकों का तांता लगा रहा।

    निवेशकों को अथॉरिटी के अफसरों ने यह आश्वासन दिया है कि इस निर्णय के खिलाफ हाई कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दायर होगी। सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (एसएलपी) भी दायर करने का विकल्प खुला है।

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