इंट्रेस्ट रेट के 12 फीसदी तक पहुंचने से रियल्टी सेक्टर में निराशा
28 Jul 2011, 0400 hrs IST,हेलो दिल्ली

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निर्भय कुमार।।
रिजर्व बैंक द्वारा पॉलिसी रेट्स बढ़ाने से रियल्टी सेक्टर में निराशा है। क्रेडाई समेत तमाम डिवेलपर्स ने इसे रियल्टी सेक्टर के ग्रोथ के लिए नेगेटिव बताया है। क्रेडाई के नैशनल प्रेज़िडेंट ललित कुमार जैन ने कहा : आरबीआई को क्लियर गाइडलाइन देना चाहिए। रियल्टी सेक्टर में वैसे ही सेंटिमेंट्स लो हैं और इस कदम से ग्रोथ पर नेगेटिव असर ही पड़ेगा। रियल्टी सेक्टर पहले ही इनपुट्स की बढ़ती कीमतों से परेशान है। रेट्स बढ़ने से इस सेक्टर का भार और बढ़ेगा ही।

सुपरटेक के सीएमडी आरके अरोड़ा ने कहा कि भार कस्टमर पर पड़ेगा। उन्हें ज्यादा ईएमआई देनी होगी। इस सेक्टर में पहले से ही डिमांड लो है और रेट्स बढ़ने के बाद इसमें और कमी ही आएगी। सुनील मंत्री ग्रुप के सीएफओ संजय काबरा ने सवालिया लहजे में कहा कि क्या सिर्फ ऐसा करने से महंगाई पर लगाम लगाई जा सकती है? सरकार को महंगाई बढ़ने के अन्य कारणों पर भी सोचना चाहिए। रिजर्व बैंक का यह कदम सोच से परे निकला।

एसवीपी ग्रुप के सीएमडी विजय जिंदल ने कहा कि 18 महीनों में 11वीं बार होम लोन रेट्स बढ़े हैं। इससे उन लोगों के लिए भी परेशानी पैदा हो रहा है जिन्होंने होम लेन ले रखा है। होम लोन रेट 8 साल में कभी इतने नहीं बढ़े थे। यह इंडस्ट्री के लिए अच्छा नहीं है। वैसे ही रियल्टी सेक्टर को एनसीआर में तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह रियल्टी पर दोहरी मार की तरह है। सरकार को कुछ करना चाहिए।

पंचशील बिल्डटेक प्रा. लि. के डायरेक्टर अनुज चौधरी के मुताबिक ऐसी बढ़ोतरी की सोची भी नहीं नहीं गई थी। इससे कस्टमर की खरीददारी क्षमता प्रभावित होगी और डिमांड कम होगी। पैरामाउंट ग्रुप के एग्जेक्युटिव डायरेक्टर अश्विनी प्रकाश का कहना है कि घर व्यक्ति की मूल आवश्यकता है। हम कोई अपने घर के सपने देखता है। लेकिन रिजर्व बैंक द्वारा रेट्स में बढ़ोतरी से लोन की प्रक्रिया धीमी हो जाएगी। कस्टमर को खुद को तैयार करने में वक्त लगेगा।

इनोवेटिव इंफ्राडिवेलपर्स के जेएमडी सुमित बंसल ने कहा कि इंट्रेस्ट रेट के 12 फीसदी तक पहुंचने के बाद नए कस्टमर को खरीददारी से पहले सोचना पड़ेगा। पुराने कस्टमर्स के लिए भी समस्या कम नहीं है। उनके पास दो ही विकल्प है कि वे पहले से निर्धारित ईएमआई ही देते रहें या फिर जमा पूंजी निकाल के लोन चुकाएं। हर हाल में नुकसान ही नुकसान है। राजनगर एक्सटेंशन डिवेलपर्स असोसिएशन के प्रवक्ता और लैंडक्रॉफ्ट डेवलपर्स के डायरेक्टर मनु गर्ग ने कहा कि रिजर्व बैंक के इस स्टेप का गहरा प्रभाव पड़ेगा। रियल्टी सेक्टर में पैदा हो रही डिमांड का इकनॉमिक ग्रोथ में काफी योगदान था। लेकिन इंडस्ट्री पर एक साथ आफत सी आ गई है। कंस्ट्रक्शन के साथ बढ़ी हुई लैंड कॉस्ट के बाद डिवेलपर्स के पास इसे कस्टमर पर लादने के सिवा कोई ऑप्शन नहीं है। लिहाजा प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ेगी। कस्टमर के लिए दिक्कत यह है कि फिकस्ड होम लोन रेट अब ज्यादातर जगह 13 फीसदी तक हो गए हैं।
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