About 4,500 farmers of 11 villages in Noida have refused to accept an agreement inked between the authority and Kisan Sansh Samiti, an umbrella body of farmers, on Saturday.

These villages have decided to move court, seeking their land back.
Houses and various other establishments were constructed on the land acquired from these farmers years ago.


Only 162 hectares of land — carved out of Morna, Nithari and Chhalera villages and today known as City Centre plot in sectors 32 and 25A — is vacant.

The authority sold this plot to a private builder for Rs 7,500 crore in March.

Farmers have demanded this land back too.

These are the farmers whose land was acquired before 1997. The authority started making allotment of developed land plots, measuring 5% of the total land acquired, after 1997.

Before 1997, the authority provided 17.5% reservation to farmers in housing plot schemes.

“Those whose land was acquired before 1997 also sought plots measuring 5% of their land acquired. When the authority did not promise this in the July 30 agreement, they’re upping the ante,” said a senior official.
On Saturday, farmers under the banner of Kisan Sansh Samiti in Noida said they had suspended their agitation for three months and, during this period, they would not stall any real estate projects in the city.

But the trouble is not yet over. “Our land was acquired at Rs 9 per sqm. We were not given any plots under the 17.5% quota,” said Ved Pal, a farmer. “We should also get the 5% developed land plots,” said Kripa Singh, another farmer.

“The City Centre land was acquired 35 years ago using the urgency clause. The land continues to be vacant. We want it back,” he said.
This group of farmers will on Wednesday hold another panchayat at Atta.
Wave Infrastructure, a real estate firm, sealed the City Centre deal with Noida Authority in March.

The Authority sold about 162 hectares (6 lakh sqm) of land comprising two sectors (32 and 25A) to the developer.

-HT
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  • Noida Land Acquisition Controversy: No End In Sight For Abadi Land Rown Between Noida, Farmers
    By sakshi sinha, Section Noida Real Estate Property
    Posted on Tue Sep 20, 2011 at 03:15:41 AM EST

    After a day of heavy-duty negotiations between the Noida Authority and farmer leaders on Monday, they still do not seem to have arrived at a compromise on the issue of abadi (residential) land regularisation. The farmers have said that no agreement has been reached in this regard, and their agitation planned for September 21 would continue.
    However, senior officials of the Noida Authority presented a different picture, stating that there was consensus on most issues that the farmers had raised, with only one or two needing further negotiations.

    The sticking points between the two sides pertain to regularisation of abadi land, including commercial establishments, the delay in handing over developed plots, and a land dispute in Sorkha village. On Saturday, the Noida Authority had released a list of 1,095 farmers from 12 villages whose abadi land would be regularised, and would be given 5 per cent developed plots.

    Mahinder Awana, spokesperson of the Kisan Sansh Samiti, said, "Only a small part of the abadi land has been regularised. Also, some of us have shops on our abadi land. We want them to be regularised without any fee, but the Authority says that we would only get them on lease. We want them to be given to us, freehold. It was part of our agreement on July 30, due to which we stopped agitating."
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  • वार्ता के बाद भी काम रोकने पर अड़े किसान


    किसानों के दोबारा उग्र हो रहे तेवरों ने प्राधिकरण सहित प्रशासन के लिए भी परेशानी खड़ी कर दी है। यही वजह है कि सोमवार को पूरा अमला नाराज किसानों को मनाने में जुटा रहा। इस दौरान कुछ मसलों पर सहमति भी बनी है, लेकिन प्रमुख शर्तो पर वार्ता होना अभी बाकी है। इसके लिए मंगलवार को भी नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन व सीईओ बलविंदर कुमार और जिलाधिकारी हृदयेश कुमार किसानों संघर्ष समिति संग वार्ता करेंगे।

    किसान संघर्ष समिति ने रविवार को गिझौड़ तिराहे पर प्राधिकरण की तरफ से जारी की गई 12 गांवों की आबादी विनियमितिकरण की सूची की प्रतियां जलाई थीं। समिति ने निर्धारित तिथि के एक माह बाद भी आश्वासन पूरे न होने पर रोष व्यक्त करते हुए 21 सितंबर से दोबारा बिल्डरों का काम रोकने की चेतावनी दी थी। इसका पता चलते ही सोमवार को पुलिस व प्राधिकरण के अधिकारी किसानों संग बात करने में जुट गए। सुबह एसपी सिटी अनंत देव ने किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों संग बैठक कर उन्हें मनाने का प्रयास किया। यहां प्राधिकरण के प्रशासनिक अधिकारी दीपचंद्र भी मौजूद थे। किसानों के नहीं मानने पर उन्होंने दोबारा उनकी बैठक चेयरमैन से कराने की बात कही।

    शाम पांच बजे किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों और चेयरमैन बलविंदर कुमार के बीच संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में दोबारा वार्ता शुरू हुई। समिति के प्रवक्ता महेश अवाना ने बताया कि बैठक में उन्होंने मांग रखी कि आबादी नियमित करने के लिए सर्वे करने की जगह संबंधित खसरा नंबर छोड़ दिया जाए। दुकानों का सर्वे तत्काल बंद किया जाए। पांच प्रतिशत के प्लॉट में वाणिज्यिक गतिविधि पर किसी तरह का चार्ज न लगे। राज्य सरकार में निहित हुई सोरखा की 802 एकड़ जमीन का मामला मंगलवार तक किसानों के पक्ष में निपटा दिया जाए। किसानों के खिलाफ चल रहे एलएआर के मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं, इस दिशा में अब तक प्राधिकरण ने कोई कार्रवाई नही की है।

    चेयरमैन ने उन्हें जानकारी दी कि एलएआर के मुकदमों की सूची तैयार कर ली गई है। इन मामलों में वार्ता के आधार पर समझौता करने के लिए प्राधिकरण जल्द ही संबंधित किसानों को नोटिस जारी करेगा। समझौता होने के साथ ही मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया चालू कर दी जाएगी। राज्य सरकार में गलत निहित सोरखा गांव की जमीन मामले में उन्होंने मंगलवार को जिलाधिकारी संग बैठक करने को कहा है। खसरा नंबर के आधार पर आबादी छोड़ने के मांग पर भी चेयरमैन ने विचार करने को कहा है। ज्यादा बिंदुओं पर प्राधिकरण संग स्पष्ट सहमति नहीं बन सकी है। पूर्व की तरह फिर आश्वासन के जाल में फंसाया जा रहा है, जो किसानों को मंजूर नहीं। लिहाजा 21 सितंबर को एक्सप्रेस-वे और सेक्टर 74 में बिल्डरों का काम रोकने का फैसला अभी बरकरार है। अगर प्राधिकरण ने जल्द किसानों की मांग पर अमल शुरू नहीं किया तो किसानों का आंदोलन जारी रहेगा।

    जोगेंदर अवाना ने दिया समर्थन
    किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता महेश अवाना ने बताया कि स्थानीय कांग्रेसी नेता जोगेंदर अवाना ने भी उनके आंदोलन को समर्थन दिया है। ज्ञात हो कि वह इससे पहले किसान बचाओ संघर्ष समिति में शामिल थे। समिति में आपसी विवाद के बाद वह इससे अलग हो गए थे।

    -Dainik jagran
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  • समिति आज नहीं रोकेगी बिल्डरों का काम


    नोएडा:किसान संघर्ष समिति ने बुधवार को सेक्टर 74 व एक्सप्रेस-वे किनारे बिल्डरों का काम रोकने की घोषणा को वापस ले लिया हैसमिति ने यह निर्णय चेयरमैन व सीईओ बलविंदर कुमार द्वारा उनकी मांगों का जल्द निस्तारण करने के आश्वासन पर लिया। इस संबंध में मंगलवार की सुबह प्राधिकरण के बोर्ड रूम में तीसरे चरण की बैठक की गई थी। इससे पहले सोमवार को भी किसानों को मनाने के लिए पुलिस व प्राधिकरण ने दो बार उनके साथ बैठक की थी।


    समिति के प्रवक्ता महेश अवाना ने बताया कि चेयरमैन ने गांव की दुकानों का सर्वे तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं। साथ ही उन्हें आश्वासन दिया गया है कि दो अक्टूबर तक उनकी मांगों को पूरा कर दिया जाएगा। इसमें किसानों की आबादी खसरा नंबर के आधार पर छोड़ने, किसानों की आबादी को अतिक्रमण मुक्त कर पांच प्रतिशत के प्लॉट का आवंटन और प्लॉट के 50 फीसदी हिस्से में होने वाली वाणिज्यिक गतिविधियों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाने की शर्त शामिल है। साथ ही सोरखा गांव में मौजूद राज्य सरकार में निहित हो चुकी छह गांव के किसानों की जमीन प्राधिकरण वापस करने की जगह उसका मुआवजा वर्तमान दर से बांट देगा। इस भूमि पर बनी किसानों की आबादी को नहीं छेड़ने का भी आश्वासन दिया गया है। समिति प्रवक्ता के मुताबिक चेयरमैन ने यह भी आश्वासन दिया है कि जेपी समूह के अधिकारियों संग बैठक कर किसानों की समस्या का जल्द निस्तारण करने का निर्देश जारी किया जाएगा। पीपी एक्ट व अपीलीय मुकदमों का निस्तारण भी दो अक्टूबर तक शुरू कर दिया जाएगा।

    -Dainik jagran
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  • 'अथॉरिटी कहती कुछ और करती कुछ है'


    नोएडा

    गांवों में दुकानों का सर्वे न होने और किसानों की मांगों का जल्द समाधान कर देने की अथॉरिटी की घोषणा को किसान बचाओ संघर्ष समिति ने ठुकरा दिया है। समिति के अध्यक्ष रघुराज सिंह का कहना है कि अपनी फंसी गर्दन निकालने के लिए अथॉरिटी अब झूठे हथकंडे अपना रही है। वह कहती कुछ है और करती कुछ है। दुकानों का सर्वे न करवाने के आश्वासन के बावजूद मंगलवार को अथॉरिटी के लोग ममूरा गांव की दुकानों का सर्वे करने पहुंच गए। यह अथॉरिटी का झूठ नहीं, तो ओर क्या है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र के किसान अपने हक के लिए जागरूक हो चुके हैं और अब वे अथॉरिटी के किसी झांसे में आने वाले नहीं हैं। 23 सितंबर को नोएडा अथॉरिटी के घेराव का कार्यक्रम नियत है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस घेराव में क्षेत्र के ज्यादा से ज्यादा किसानों को शामिल करने के लिए मंगलवार को मोरना, चौड़ा, झुंडपुरा, हरौला, नया बांस और अट्टा गांव का दौरा किया गया। समिति के सदस्य जयबीर सिंह कसाना ने कहा कि प्राधिकरण ने किसानों की जमीनों का जबरन अधिग्रहण करते समय झूठे सब्जबाग दिखाए कि उनके बच्चों को सरकारी नौकरी के अलावा अच्छे स्कूल- कॉलेजों में निशुल्क पढ़ाई करने के मौके दिए जाएंगे। लेकिन जमीन छीनने के बाद वे सब वादे हवा हो गए।

    अब अथॉरिटी किसानों और आम जनता के जीवनयापन का साधन बनी दुकानों का सर्वे करवाकर उन पर कमर्शल टैक्स थोपने की तैयारी कर रही है। यदि ऐसा हुआ, तो आम किसान के साथ- साथ दुकानदार भी पिसकर रह जाएंगे और उनका शहर में गुजारा मुश्किल हो जाएगा। प्राधिकरण की इन जन विरोधी नीतियों के खिलाफ किसानों, मजदूरों, व्यापारियों और उद्यमियों का आंदोलन जारी रहेगा। 23 सितंबर को नोएडा अथॉरिटी पर घेराव करके अथॉरिटी को पांच सूत्रीय मांगें मानने के लिए मजबूर कर दिया जाएगा।

    -Navbharat times
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  • Party time for farmers.. each farmers get 450sqm plot (2-2.5 crore+ value)
    साढ़े तीन हजार करोड़ का पड़ेगा भार

    नोएडा: किसानों को पांच फीसदी के प्लॉट देने पर प्राधिकरण पर करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये का आर्थिक भार पड़ेगा। चेयरमैन बलविंदर कुमार के मुताबिक फिलहाल एक हजार किसानों को पांच लाख वर्ग मीटर से ज्यादा जगह पांच फीसदी के प्लॉट के रूप में दी जानी है। इसकी कीमत करीब एक हजार करोड़ रुपये है। पूरे नोएडा क्षेत्र में तीन हजार से ज्यादा किसानों को अभी पांच प्रतिशत के प्लॉट का लाभ देना शेष है। इसके लिए करीब 20 लाख वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता होगी। इसकी अनुमानित कीमत करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये होगी।

    -Dainik jagran
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  • mroe news.......
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  • more news.....
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  • good way to see your photo in newspaper... get 5-10 guys...sit on road.. and what.. you are on TV/newspaper:)
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    Party time for farmers.. each farmers get 450sqm plot (2-2.5 crore+ value)
    साढ़ेतीन हजार करोड़ का पड़ेगा भार

    नोएडा: किसानों को पांच फीसदी के प्लॉट देने पर प्राधिकरण पर करीब साढ़े तीनहजार करोड़ रुपये का आर्थिक भार पड़ेगा। चेयरमैन बलविंदर कुमार के मुताबिक फिलहाल एकहजार किसानों को पांच लाख वर्ग मीटर से ज्यादा जगह पांच फीसदी के प्लॉट के रूप मेंदी जानी है। इसकी कीमत करीब एक हजार करोड़ रुपये है। पूरे नोएडा क्षेत्र में तीनहजार से ज्यादा किसानों को अभी पांच प्रतिशत के प्लॉट का लाभ देना शेष है। इसके लिएकरीब 20 लाख वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता होगी। इसकी अनुमानित कीमतकरीब साढ़े तीन हजार करोड़रुपयेहोगी।

    -Dainik jagran


    Once this happens.. forget about cheap land deals.. and cheap flats...
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  • Farmers Sectors always command less premium than general sectors, but still 450 is gr8 deal. But still i guess farmers would want more
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  • Farmer Plots - resale market

    450 Sqmtr is a very good size......when do u suppose these will start comming into the resale market

    Even if these are in a 'less preferred' zone from a neighbours and quality of social circle perspective - I am sure there can be some good bets to be made


    Esp I would say a plot that faces one of the main roads and opposite a planned commercial/residential sector will appreciate to a very nice value in 4-5 years


    'Kothi' ka sapna poora ho sakta hai.....450 size will also allow private lawn :bab (45):
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  • Aftermath of this agreement

    Actually this time the difference in farmer agitation compared to last time was less of media coverage (negligible by Tele media) so farmers also thought no point asking for hiked compensation "jo mill raha hai blackmail karke woh lo aur khush ho jao"....so they have mellowed down a bit to two main demands only

    1. regularization of their unauthorised land
    2. PLOTS.

    But now indly suggest what is future of Sector7X projects post this agreement and if we take a 3 to 5 year mid term view. Is this a good time invest (due to recession and hike interest rates) before land acquisition bill etc and everything goes beyond reach after this.

    Please advice?
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    good way to see your photo in newspaper... get 5-10 guys...sit on road.. and what.. you are on TV/newspaper:)

    .......................................................
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  • Noida farmers call off stir after talks with Authority


    NOIDA: Just a day before farmers from Noida's 54 villages carried out their threat of stopping all ongoing construction work in the city, farmer leaders have announced a call to withdraw their stir. After two days of marathon negotiations with Noida Authority, on Tuesday the farmers seemed to have arrived at a compromise on the issue of abadi land regularization.

    The farmers have now promised not to disrupt work at any of the project sites as an agreement has been reached and their agitation planned from September 21 would now be dropped. Senior officials of the Noida Authority confirmed that they had reached a consensus on all the issues that the farmers had raised.

    "As per our agreement with the Noida Authority on July 30, the Authority was to regularize all abadi land. Also, as some of us have set up commercial establishments on our abadi land, we wanted them to be regularized without any fee," said Mahesh Awana, spokesperson of the Kisan Sansh Samiti. "The Authority has agreed to most of our demands. All our issues have been sorted out now, so we have agreed to stop agitating and now no construction projects will be targeted," Awana said.

    On its part, abiding by its 'deal' of July 30, the Authority will regularize all abadi land of the villagers, even those that it had until now regarded as encroachments. The Authority has also promised the land to be freehold instead of adopting their regular leaseback policy. Farmers awaiting allotment of compensatory plots for acquired abadi land will also get these within the next few days. "The farmers were getting restive mainly because of the abadi dispute. We have managed to finally pacify them," Balwindar Kumar, chairman, Noida Authority, said.

    "As of now, we have agreed to most of their demands and it does not seem like there would be an agitation," Kumar said. Starting September 21, the Authority has promised to kick-start the process of regularization of two villages each day. Thereafter, all the 54 villages will be tackled. "In the first place, the villages of Sorkha and Shahdara will be taken up and process of regularization will be completed as soon as possible," said the chairman.

    While most of the issues of the farmers from the villages in Noida have been settled, a matter related with the land ownership of village Sorkha remains. Around 802 acres of land in Sorkha was erroneously transferred to the state at the time of acquisition in 2005-06 and the villagers were, hence, not given any compensation for the same. The Authority has already written to the state government about the problem and is expecting a response within the next few days. "We are already in a dialogue with the government about Sorkha and as soon as we receive their nod, we will start dispensing compensation for the farmers," said Kumar.

    The farmers of Sorkha, meanwhile, have warned that if their dispute is not settled by October 1, they will once again launch an agitation. "On July 20, the Authority had promised to resolve our issue within one month. But so far they have done nothing," said Naresh Yadav, headman of Sorkha. "If the Authority does not resolve our problem, we will sit on a fast on Ghandiji's birth anniversary on October 2 and the next day we will stall all construction in Noida," Yadav said.

    -TOI
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    good way to see your photo in newspaper... get 5-10 guys...sit on road.. and what.. you are on TV/newspaper:)


    Forgot one more line… take 25-30 copies of news paper and send copies to your relatives/friends.. that you are in news paper.

    Keep 2-3 copies for your grandchildren for inspiration… that you were Hero and BECAUSE of you…. Noida is developed and farmers got money..
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