About 4,500 farmers of 11 villages in Noida have refused to accept an agreement inked between the authority and Kisan Sansh Samiti, an umbrella body of farmers, on Saturday.

These villages have decided to move court, seeking their land back.
Houses and various other establishments were constructed on the land acquired from these farmers years ago.


Only 162 hectares of land — carved out of Morna, Nithari and Chhalera villages and today known as City Centre plot in sectors 32 and 25A — is vacant.

The authority sold this plot to a private builder for Rs 7,500 crore in March.

Farmers have demanded this land back too.

These are the farmers whose land was acquired before 1997. The authority started making allotment of developed land plots, measuring 5% of the total land acquired, after 1997.

Before 1997, the authority provided 17.5% reservation to farmers in housing plot schemes.

“Those whose land was acquired before 1997 also sought plots measuring 5% of their land acquired. When the authority did not promise this in the July 30 agreement, they’re upping the ante,” said a senior official.
On Saturday, farmers under the banner of Kisan Sansh Samiti in Noida said they had suspended their agitation for three months and, during this period, they would not stall any real estate projects in the city.

But the trouble is not yet over. “Our land was acquired at Rs 9 per sqm. We were not given any plots under the 17.5% quota,” said Ved Pal, a farmer. “We should also get the 5% developed land plots,” said Kripa Singh, another farmer.

“The City Centre land was acquired 35 years ago using the urgency clause. The land continues to be vacant. We want it back,” he said.
This group of farmers will on Wednesday hold another panchayat at Atta.
Wave Infrastructure, a real estate firm, sealed the City Centre deal with Noida Authority in March.

The Authority sold about 162 hectares (6 lakh sqm) of land comprising two sectors (32 and 25A) to the developer.

-HT
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  • अथॉरिटी को मिली 132.5 एकड़ जमीन


    नोएडा

    सोहरखा समेत 5 गांवों की राज्य सरकार में निहित 802 एकड़ जमीन में से 132.5 एकड़ जमीन अथॉरिटी को देने के लिए गुरुवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। बाकी जमीन पर रेवेन्यू और लीगल डिपार्टमेंट के बीच रस्साकशी चल रही है। लखनऊ में हुई कैबिनेट बैठक में शासनादेश जारी कर 132.5 एकड़ जमीन रेवेन्यू डिपार्टमेंट से अथॉरिटी को ट्रांसफर हो जाएगी। इस जमीन की बाबत किसानों को मुआवजा किस रेट पर और कैसे दिया जाएगा, यह अभी साफ नहीं है। अथॉरिटी चेयरमैन व सीईओ बलविंदर कुमार ने बताया कि बाकी जमीन पर जल्द निर्णय होने की उम्मीद है। टेक्निकल फॉल्ट के जरिये राज्य सरकार में दर्ज 802 एकड़ जमीन पर किसान 1994 से लड़ाई लड़ रहे हैं। उधर, बगैर अंतिम निर्णय हुए इस जमीन पर बिल्डरों को काम न करने देने की चेतावनी किसानों ने दी है। 2 अक्टूबर से बिल्डरों का काम बंद कराने का अल्टीमेटम दिया गया है। इस जमीन पर बिल्डरों के बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं।


    क्या है विवाद की जड़

    सोहरखा, सलारपुर, ककराला, नंगला भूड़ा, नगली वजीदपुर गांवों की 802 एकड़ जमीन पर विवाद है। इसमें 202 एकड़ जमीन सीलिंग एक्ट आने के बाद राज्य सरकार में निहित हो गई थी, जबकि 600 एकड़ किसानों की जमीन को लेकर भी विवाद चला आ रहा है। इसे वापस लेने या मुआवजा समेत किसान कोटे की जमीन मिलने पर अथॉरिटी को देने की बात किसान और अथॉरिटी के बीच चल रही है। 1982-88 के बीच प्रगतिशील सहकारी कृषि समिति ने सोहरखा समेत कई गांवों में 2-6 हजार रुपये/बीघा के रेट पर जमीन खरीदी थी। बगैर बैनामा के बेची गई इस जमीन को खसरे के आधार पर राज्य सरकार में सीलिंग एक्ट के चक्कर में निहित किया गया। डीएम ऑफिस में हुई गलती की वजह से सह खातेदार की जमीन बिना बेचे ही इसमें शामिल हो गई। जिन किसानों ने जमीन नहीं बेची थी, उन्होंने 1994 में हाई कोर्ट में इस बाबत केस डाला था। तब से मामला अटका है। हाल ही के किसान आंदोलन के दौरान अथॉरिटी ने मसला हल कराने का वादा किया था, जिसके लिए एआईजी स्टांप, एसडीएम दादरी और एडीएम फाइनैंस की टीम ने जांच कर अपनी रिपोर्ट दी है। खास बात यह है कि अथॉरिटी ने इस जमीन के अधिकांश हिस्से को बिल्डरों को बेच दिया है।


    कई बड़े प्रोजेक्ट दांव पर

    जिस जमीन को लेकर किसान और अथॉरिटी के बीच पेच फंसा है , उसमें सेक्टर - 74, 75, 76, 78, 79, 112, 113, 114, 115, 116, 117 आदि शामिल हैं। ज्यादातर सेक्टरों में बिल्डरों द्वारा फ्लैट बनाए जा रहे हैं। काम बंद होने के अल्टीमेटम से हजारों करोड़ रुपयों के प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकते हैं। कई सेक्टरों में ऊंची इमारतें तैयार हो चुकी हैं। इनमें भी नोएडा एक्सटेंशन की तरह कई हजार इनवेस्टरों का पैसा फंसा हुआ है। अथॉरिटी की कसरत इन बिल्डरों के हितों को ध्यान में रखकर ही की जा रही है।


    ' किसानों को करेंगे चिह्नित '

    जमीन बेचने वाले और जमीन न बेचने वाले किसानों को चिह्नित करने के बाद ही मुआवजे के फैसले पर कोई निर्णय लिया जा सकता है। - बलविंदर कुमार , चेयरमैन व सीईओ , नोएडा अथॉरिटी


    ' रोकेंगे बिल्डरों का काम '

    पूरी जमीन का मामला हल होने और मुआवजा समेत किसान कोटे की जमीन न मिलने तक बिल्डरों को राहत नहीं दी जा सकती। 2 अक्टूबर से बिल्डरों का काम स्थानीय किसान रोकेंगे। - नरेश यादव , ग्राम प्रधान , सोह रखा


    -navbharat times
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  • फार्म हाउस निरस्त करने के लिए किया प्रदर्शन


    फार्म हाउस योजना में प्राधिकरण को हुई 291 करोड़ रुपये की अनुमानित क्षति का मामला सामने आने पर कुछ लोगों ने बृहस्पतिवार को प्राधिकरण के सामने प्रदर्शन किया। जनसंघर्ष समिति के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग थी कि प्राधिकरण इस योजना को निरस्त करे। उन्होंने एक ज्ञापन भी प्राधिकरण अधिकारियों को दिया है। बताया जा रहा है कि मामले में प्राधिकरण ने स्थानीय निधि लेखा विभाग, इलाहाबाद को भी अपनी तरफ से ऑडिट आपत्तियों का जवाब भेज दिया है।
    सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के जरिए योजना से जुड़ी ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक करने वाले मनोज कुमार के नेतृत्व में बृहस्पतिवार सुबह कुछ लोग प्राधिकरण के सेक्टर छह स्थित कार्यालय पर प्रदर्शन करने पहुंचे। अन्ना की मुहिम से प्रेरित हो इन लोगों ने उनके नाम वाली टोपी पहन रखी थी। बाद में इन लोगों की एसीईओ अनिल राजकुमार से मुलाकात कराई गई। उन्होंने मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपा। जिसमें फार्म हाउस योजना निरस्त कर किसानों को जमीन वापस लौटाने व आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।

    -Dainik Jagran
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  • UP auditor indicts Noida authority for Rs291 cr loss

    The Local Fund Audit Department of Uttar Pradesh at Allahabad has indicted the Noida authority for causing a loss of Rs291 crore to the state exchequer because of allotment of farmhouse plots at cheap rates. The audit department has asked why prices were kept so low, for whom it was done and questioned the propriety of the scheme.

    The audit department, in its report, has said that 101 farmhouse plot allotments to 86 applicants in 16 months caused Rs291 crore loss to the state exchequer.



    The report, which has highlighted anomalies at several stages, says the authority, without permission from the government, made five changes in the policy.



    The authority launched the scheme in January 2009 after forming a seven-member committee. The committee fixed the land rate at Rs3,100 per sqm. The audit department, after its evaluation, says the minimum cost should have been Rs4,500 per sqm. Plus, there are internal development costs.
    The report says the authority floated the scheme as per an order issued in 2008 and notes the land rate must have gone up by January 2009.



    The report also says in case of residential plots, 50% land can be sold, but in case of farmhouse plots, 85% land can be sold, so the cost should have been even more.



    The reserved category plots were allotted in 2010-11 and, keeping this in mind, the cost should have been Rs5,100 per sqm. The report has pointed out some other irregularities and all put together mean there was a total loss of Rs291 crore.


    -HT
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  • सोमवार तक जारी होगी पंद्रह गांवों की सूची


    नोएडा। किसानों और प्राधिकरण के बीच हुए समझौते की समीक्षा के लिए सीसीईओ और किसान संघर्ष समिति के बीच मंत्रणा हुई। इसमें सबसे पहले खसरा संख्या पर आबादी छोड़कर पंद्रह गांव की सूची सोमवार को जारी कर दी जाएगी। इसके अलावा राज्य सरकार में निहित हुई जमीन पर डीएम के साथ वार्ता करके सीईओ जल्द निर्णय लेंगे। वहीं, सभी गांवों की आबादी को निस्तारित करने का काम १५ अक्तूबर तक पूरा होगा।

    शुक्रवार की शाम को सीसीईओ बलविंदर कुमार और किसान संघर्ष समिति के बीच बैठक हुई। इसमें कई बिंदुओं पर चर्चा करके सहमति बनाई गई। इसके बाद समिति के प्रवक्ता महेश अवाना ने बताया कि सोमवार तक प्राधिकरण ने पंद्रह गांव की सूची जारी करने की बात कही है। इसमें खसरा संख्या के आधार पर आबादी को निस्तारित किया जाएगा। इसके बाद पांच प्रतिशत आबादी के भूखंड भी जारी कर दिए जाएंगे। वहीं, अगले पंद्रह दिन में अन्य सभी गांवों की सूची जारी होगी। महेश अवाना ने बताया कि आरक्षित योजना में भूखंडों की संख्या और इनका क्षेत्रफल बनाने पर भी सहमति बनी है। इस संबंध में जल्द ही ठोस कार्रवाई की जाएगी। इस बैठक में प्राधिकरण के एओ दीप चंद्रा और सचिव हरीश चंद्रा मौजूद रहे

    -Amar Ujala
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  • Noida farmer issue will be sorted out soon
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  • Originally Posted by MANOJa
    This story has so many twists & turns, like a C grade film . I really cannot understand, what is happening, except the fact that a big political game is being played .


    Kyon bhai, you sense politics in everything :) It can be a very simple case of dreaming more money.
    I am all with farmers - and they should be paid very very well. Of course it has been their land.
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  • किसान कल से रोकेंगे बिल्डरों का काम

    किसान कल से रोकेंगे बिल्डरों का काम
    2 Oct 2011, 0400 hrs IST,नवभारत टाइम्स




    नोएडा अथॉरिटी।। सोहरखा समेत पांच अन्य गांवों के किसान कल से बिल्डरों का काम रोकेंगे। इससे पहले किसान 2 अक्टूबर को सेक्टर- 74 में अनशन पर बैठेंगे।

    किसानों का कहना है कि 802 एकड़ जमीन पर अंतिम निर्णय आने तक इलाके में बिल्डरों का काम नहीं होने दिया जाएगा। शनिवार को अथॉरिटी के मुख्य प्रशासनिक ऑफिस में चेयरमैन, सीईओ और इन गांवों के किसानों के बीच हुई बैठक फेल हो गई। किसानों के इस ऐलान से सेक्टर- 74, 75, 76, 78, 79, 112, 113, 114, 115, 116 और 117 आदि में बिल्डरों के काम प्रभावित हो सकता है।

    गत 29 सितंबर को यूपी कैबिनेट ने राज्य सरकार में निहित 132.5 एकड़ जमीन अथॉरिटी को देने के बाबत शासनादेश जारी किया था। चेयरमैन बलविंदर कुमार ने सोहरखा के किसानों को अपने खर्च पर सुप्रीम कोर्ट में मामले की पैरवी कराने का ऑफर के साथ-साथ हर संभव मदद का वादा किया। पर किसान नहीं माने। ग्राम प्रधान नरेश यादव के अनुसार अथॉरिटी के अधिकारी मामले का हल करने से बचना चाह रहे हैं, जबकि टेक्निकल फॉल्ट से राज्य सरकार में निहित हुई जमीन आसानी से अधिकारियों के स्तर पर वापस ली जा सकती है।
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  • आबादी विनियमावली से वंचित रहेंगे बाहरी

    आबादी विनियमावली से वंचित रहेंगे बाहरी
    • अमर उजाला ब्यूरो
    नोएडा। नई आबादी विनियमावली के तहत मूल किसानों को जहां कई लाभ दिए गए हैं, वहीं बाहर से आकर बसे लोगों की आबादी निस्तारित नहीं होगी। दुकानों को नियमित करने के समय ऐसे मामलों पर विचार किया जाएगा। हालांकि जिन किसानों ने जमीन बेच दी है और उसे प्राधिकरण अब तक अतिक्रमण मान रहा था, उसको समाप्त कर दिया जाएगा और उन्हें पांच प्रतिशत आबादी का भूखंड मिलेगा। वहीं, दूसरी तरफ मूल किसानों के जो भी अतिक्रमण से जुड़े हुए मामले हैं उन्हें खत्म करने में यह विनियमावली मदद करेगी।
    आबादी विनियमावली 2006 को 2009 में संशोधित किया गया, लेकिन एक बार फिर इसमें बदलाव करते हुए 2011 की नई संशोधित नियमावली लागू कर दी गई है। इसमें मूल किसानों को प्राधिकरण ने दिल खोलकर तोहफे दिए हैं। प्राधिकरण के सीसीईओ बलविंदर कुमार का कहना है कि नोएडा के अधिसूचित क्षेत्र में जो भी किसान हैं उन्हें मूल किसान का दर्जा दिया जाएगा। इसकी आबादी खसरा संख्या पर ही छोड़ दी जाएगी और लीज बैक का विकल्प भी रहेगा। वहीं, बाहर से आकर किसानों की जमीन खरीद कर निर्माण करने वालों को कोई छूट नहीं दी जाएगी। हालांकि इनकी जमीन का निस्तारण नहीं किया जा सकेगा, लेकिन दुकानों को नियमित करते समय एक पॉलिसी बनाकर लाभ देने की कोशिश होगी। वहीं, मूल किसान जिन्होंने जमीन बेची है और प्राधिकरण ने यह निर्माण अतिक्रमण की श्रेणी में डालकर पांच प्रतिशत का लाभ नहीं दिया है, उन किसानों से यह मामला समाप्त कर दिया जाएगा। बलविंदर कुमार ने बताया कि लीज बैक के मामले में अधिकतम सीमा दस प्रतिशत अथवा 450 वर्गमीटर प्रति बालिग सदस्य को निर्धारित किया गया है। नई नियमावली के लागू होने के बाद नोएडा के लगभग सभी मामले समाप्त हो जाएंगे।
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  • किसानों की सूची बनाने का काम तेज

    किसानों की सूची बनाने का काम तेज
    नोएडा। किसानों के साथ हुए समझौते को मूर्तरूप देने के लिए प्राधिकरण ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसके लिए शनिवार को छुट्टी के दिन भी लैंड विभाग में काम किया गया। सोमवार तक पंद्रह गांव की सूची को अंतिम रूप देने के लिए यह कार्रवाई हो रही है। खास बात है कि नई आबादी विनियमावली के तहत मामलों को निस्तारित किया जा रहा है। इसमें खसरा संख्या पर ही आबादी को छोड़ने का काम होगा।
    प्राधिकरण और किसानों के बीच खड़ी दीवार को गिराने का काम शुरू कर दिया गया है। लंबे समय से आबादी के मामले को लेकर दोनों के बीच विवाद है। इसे समाप्त करने के लिए किसानों के साथ समझौता करके कार्रवाई शुरू की गई है। नई आबादी विनियमावली को शासन से मंजूरी मिलने के साथ ही प्राधिकरण ने इसे लागू कर दिया है। इसमें 30 जून 2011 तक के निर्माण को आबादी में मान लिया है और इसके आधार पर आबादी के मामले निस्तारित किए जा रहे हैं।
    ब्यूरो
    शनिवार को नोएडा प्राधिकरण में छुट्टी होती है, इसके बावजूद लैंड विभाग के साथ संबंधित अधिकारियों ने कार्यों को युद्ध स्तर पर निपटाने का कार्य किया। किसानों और सीसीईओ की बीच हुई वार्ता में सोमवार को पंद्रह गांव की सूची को जारी करने पर सहमति बनी है। इसके तहत भी कार्यों को पूरा किया गया। सूत्रों ने बताया कि अधिकांश सूची बना ली गई है कुछ कार्य बाकी है जिसे रविवार को पूरा कर लिया जाएगा।
    गौरतलब है कि प्राधिकरण सभी गांव की आबादी को खसरा संख्या पर छोड़ने की बात कह चुका है, जिसे जल्द से जल्द निस्तारित कर लिया जाएगा। इसी कड़ी में यह कार्रवाई की जा रही है।
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  • U tell me, what do u sense here . Who is dreaming big money here - the Farmers or who ??

    I never said, farmers should not be paid their dues . From which comment of mine, did u infer that :bab (38):???


    Originally Posted by ashish18
    Kyon bhai, you sense politics in everything :) It can be a very simple case of dreaming more money.
    I am all with farmers - and they should be paid very very well. Of course it has been their land.
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  • Noida farmers to hold up F1 event if demands not met


    NOIDA: There's no let-up in protests by Noida farmers even as Allahabad high court is hearing the land cases on a day-to-day basis. They are getting increasingly impatient about their demands and are accusing the Noida Authority of going back on their promise. They have threatened not only to stall construction work at real estate projects, but also hold up the F1 event.

    On Sunday, farmers from several villages, including Sorkha, Jahidabad, Sarfabad, Baraula, Salarpur, Kakrala, Gadhi Chaukhandi, Parthala, Hoshiyarpur and Chhijarsi assembled at the Sector 74-76 crossing and held a protest fast. They alleged that the Noida Authority is not keen on resolving the issue.

    Also, the Yamuna Expressway farmers dealt a blow to the administration by holding a panchayat at Atta Gujran village and deciding to hold a dharna near the site where the Formula One Airtel Indian Grand Prix will be held. They plan to hold a protest at the site from October 22 - six days before the event - if their demands are not met by the Authority. About 200 farmers from Dankaur, Jaganpur, Bhatta, Parsaul, Acchhepur and other villages located along the Yamuna Expressway had assembled at the panchayat.

    "The panchayat decided that Yamuna Expressway villages, too, should be given compensation and other benefits as per the Patwari pact as well as employment to one person in the family from whom land has been acquired. On Monday, we will give a memorandum again to the Authority," said farmer leader, Roopesh Verma. "If the Authority fails to accept our demands, we will hold a dharna at the F1 site from October 22,"added Verma.

    Noida farmer leader Naresh Yadav said the deal between the farmers and Noida Authority could not materialize on July 30. "About 20 years ago, the ownership of about 20 acres of land was wrongly transferred to the state government. Later, the Authority allotted the land to the builders without paying us compensation," said Yadav.

    On Sunday, hundreds of farmers of Sorkha and its nearby villages reached several sectors in Noida Extension, including sector 74, 75, 76, 78, 79, 113, 114 and 117, and threatened to stall the under-construction projects of several builders. The police were informed about the incident after which four PCR vans and three PAC companies were sent to the spot.

    Farmers are threatening to stall all real estate projects underway in areas surrounding sector 74, as their abadi land has not been regularized. The promised developed land plots are elusive too, they alleged.

    Yadav also alleges that the Authority has cheated scores of innocent farmers in the name of land acquisition. "The Authority illegally grabbed 200 acres of gram samaj land after ceiling. The Authority also acquired land at a nominal cost, barely 10% of the market rate, and later sold it off to builders for a handsome amount. In the entire fiasco, it's only the farmer who has been duped. We have demanded 50% of the market price, 5% developed land and 100m plots to those farmers who do not have land," Yadav said.


    -TOI
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  • Sector 74-79 again in trouble...
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    Noida farmers to hold up F1 event if demands not met


    NOIDA: There's no let-up in protests by Noida farmers even as Allahabad high court is hearing the land cases on a day-to-day basis. They are getting increasingly impatient about their demands and are accusing the Noida Authority of going back on their promise. They have threatened not only to stall construction work at real estate projects, but also hold up the F1 event.

    On Sunday, farmers from several villages, including Sorkha, Jahidabad, Sarfabad, Baraula, Salarpur, Kakrala, Gadhi Chaukhandi, Parthala, Hoshiyarpur and Chhijarsi assembled at the Sector 74-76 crossing and held a protest fast. They alleged that the Noida Authority is not keen on resolving the issue.

    Also, the Yamuna Expressway farmers dealt a blow to the administration by holding a panchayat at Atta Gujran village and deciding to hold a dharna near the site where the Formula One Airtel Indian Grand Prix will be held. They plan to hold a protest at the site from October 22 - six days before the event - if their demands are not met by the Authority. About 200 farmers from Dankaur, Jaganpur, Bhatta, Parsaul, Acchhepur and other villages located along the Yamuna Expressway had assembled at the panchayat.

    "The panchayat decided that Yamuna Expressway villages, too, should be given compensation and other benefits as per the Patwari pact as well as employment to one person in the family from whom land has been acquired. On Monday, we will give a memorandum again to the Authority," said farmer leader, Roopesh Verma. "If the Authority fails to accept our demands, we will hold a dharna at the F1 site from October 22,"added Verma.

    Noida farmer leader Naresh Yadav said the deal between the farmers and Noida Authority could not materialize on July 30. "About 20 years ago, the ownership of about 20 acres of land was wrongly transferred to the state government. Later, the Authority allotted the land to the builders without paying us compensation," said Yadav.

    On Sunday, hundreds of farmers of Sorkha and its nearby villages reached several sectors in Noida Extension, including sector 74, 75, 76, 78, 79, 113, 114 and 117, and threatened to stall the under-construction projects of several builders. The police were informed about the incident after which four PCR vans and three PAC companies were sent to the spot.

    Farmers are threatening to stall all real estate projects underway in areas surrounding sector 74, as their abadi land has not been regularized. The promised developed land plots are elusive too, they alleged.

    Yadav also alleges that the Authority has cheated scores of innocent farmers in the name of land acquisition. "The Authority illegally grabbed 200 acres of gram samaj land after ceiling. The Authority also acquired land at a nominal cost, barely 10% of the market rate, and later sold it off to builders for a handsome amount. In the entire fiasco, it's only the farmer who has been duped. We have demanded 50% of the market price, 5% developed land and 100m plots to those farmers who do not have land," Yadav said.


    -TOI



    Fritolay Bhai,

    Subah 5 baje se hi post karna chalu kar dete ho....
    Shadi nahi hui kya Abhi tak....
    Lage Raho....
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  • Originally Posted by vatsalbajpai
    Fritolay Bhai,

    Subah 5 baje se hi post karna chalu kar dete ho....
    Shadi nahi hui kya Abhi tak....
    Lage Raho....


    logo ki NE/Noida farmers ke chakkar me neend udi hui hai...:D

    You too replied in early morning...
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  • What lies ahead: TOI conclave discusses land row

    What lies ahead: TOI conclave discusses land row
    Vandana Keelor, TNN | Oct 3, 2011, 01.42AM IST

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    NOIDA: Even as the Allahabad High Court has reserved its judgment in the land acquisition cases filed by farmers of Noida and Greater Noida in the Gautam Budh Nagar district, deliberations by the various stakeholders involved at a recent conclave looked at what lay ahead of the land row.

    Held at the Radisson Hotel in Noida on Saturday by the Times of India group in association with the Investors Clinic, the subject of discussion 'Noida unraveled - The road ahead' provided for a power-packed debate to clear the cloud of uncertainties being faced by not only the development authorities but also the investors and end users.

    With Noida and Greater Noida being in the eye of a land acquisition storm for the past five months, the main question asked was whether the land row would be resolved and if the government would be able to set the pace for further urban development and growth. Another query posed was whether the concept of 'affordable housing' floated by the developers in the Noida Extension-Greater Noida area had been lost forever. While farmers of nearly 63 villages have challenged the acquisition of 3,000 hectares, over a hundred builders have their projects coming up in the area and lakhs of homebuyers have put in their hard-earned money. Investments worth Rs 16,000 crore are also at stake.

    Currently, development in the area seems to have come to a standstill with investors and homebuyers vary of putting in their money, while banks having stopped disbursing loans, but a ray of hope came from an assurance that within the next few months things would get stabilized. "We are hoping for some reprieve in the next 2-3 months when we expect matters to settle down and issues to get ironed out for all the parties involved," said Balwindar Kumar, chairman and CEO of Noida Authority. "Both Noida and Greater Noida, and now the Yamuna Expressway, are evolving cities with world class infrastructure. Shifting land use from agriculture to industry is the established process of civilization and we cannot afford to ignore its importance," he said.

    With all eyes turned to the new land acquisition bill, participants of the seminar conferred on the necessity of putting into place renewed policies whereby farmland could be acquired and converted at fair and equitable means besides the need to think town planning concepts anew. "The farmer definitely needs to be compensated adequately for his land and we are making efforts towards the same," Kumar said. "We hope that the new land policy will address the shortcomings of the previous Act and facilitate the real estate industry as well as benefit all stakeholders," he added.

    While many homebuyers affected by the land crisis have adopted a wait-and-watch policy wondered about the fate of their homes, prospective investors and property pundits claimed that housing demand in the area had declined considerably. "We are hoping for some reprieve from the high court," said Mohit Arora, director Supertech. On being quizzed whether the 'affordable housing dream' was shattered, Arora answered that it "would depend on the demand for housing and the land acquisition rates in the future".

    The conclave ended with suggestions for curing the land acquisition malaise permanently and dealing with the farmers' expectation, which seem to be growing by the day. Justice (Retd) Rajesh Tandon said, "There is a need for the government to act quickly to honour their agreements with the land holders."

    "An arbitrator can be appointed for settlement and fixing a fair price for land holdings to avoid the current land crisis-like situations," said Satish Janmeda, an investor."
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