About 4,500 farmers of 11 villages in Noida have refused to accept an agreement inked between the authority and Kisan Sansh Samiti, an umbrella body of farmers, on Saturday.

These villages have decided to move court, seeking their land back.
Houses and various other establishments were constructed on the land acquired from these farmers years ago.


Only 162 hectares of land — carved out of Morna, Nithari and Chhalera villages and today known as City Centre plot in sectors 32 and 25A — is vacant.

The authority sold this plot to a private builder for Rs 7,500 crore in March.

Farmers have demanded this land back too.

These are the farmers whose land was acquired before 1997. The authority started making allotment of developed land plots, measuring 5% of the total land acquired, after 1997.

Before 1997, the authority provided 17.5% reservation to farmers in housing plot schemes.

“Those whose land was acquired before 1997 also sought plots measuring 5% of their land acquired. When the authority did not promise this in the July 30 agreement, they’re upping the ante,” said a senior official.
On Saturday, farmers under the banner of Kisan Sansh Samiti in Noida said they had suspended their agitation for three months and, during this period, they would not stall any real estate projects in the city.

But the trouble is not yet over. “Our land was acquired at Rs 9 per sqm. We were not given any plots under the 17.5% quota,” said Ved Pal, a farmer. “We should also get the 5% developed land plots,” said Kripa Singh, another farmer.

“The City Centre land was acquired 35 years ago using the urgency clause. The land continues to be vacant. We want it back,” he said.
This group of farmers will on Wednesday hold another panchayat at Atta.
Wave Infrastructure, a real estate firm, sealed the City Centre deal with Noida Authority in March.

The Authority sold about 162 hectares (6 lakh sqm) of land comprising two sectors (32 and 25A) to the developer.

-HT
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  • काम रोकने की चेतावनी दी


    नोएडा

    किसान संघर्ष समिति ने जेपी ग्रुप के अधिकारियों पर किसानों की समस्या के निस्तारण में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। समिति ने किसानों की समस्या का जल्द समाधान न होने पर जेपी ग्रुप का काम बंद कराने की चेतावनी दी है। नगली वजीदपुर गांव में सोमवार को किसानों के साथ हुई बैठक में समिति के प्रवक्ता महेश अवाना ने बताया कि पिछले महीने किसान, अथॉरिटी और जनप्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में कुछ बातों पर सहमति हुई थी। अब जेपी ग्रुप के अधिकारी सहमति के तहत काम करने से कतरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भवानी शंकर स्कूल के पास सेक्टर-46 में बन रही इमारत के चलते शहर के सबसे पुराने स्कूल का रास्ता रुक रहा है। इसके अलावा जेपी के कई अन्य कार्य से भी परेशानी हो रही है, जिसे किसान रुकवाने को मजबूर होंगे।

    -NB times
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  • हर कैटिगरी की जमीन का डेटा होगा तैयार


    नोएडा अथॉरिटी

    किसान और गांवों की समस्या के निस्तारण के बाद शहर के विकास से जुड़ी योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए अथॉरिटी नया प्लान तैयार करने में जुट गई है। इसमें शहर के कुल 54 जोन में इंडस्ट्रियल , इंस्टिट्यूशनल , रेजिडेंशयल , कमर्शल और गांव की आबादी के अलावा अतिक्रमण से जुड़ा पूरा डेटा तैयार कराया गया है। इस डेटा के आधार पर लैंड और प्लानिंग डिपार्टमेंट के अधिकारियों के साथ मिलकर शहर में लॉन्च की जाने वाली अगली स्कीमों को ड्रॉफ्ट तैयार होगा।

    अथॉरिटी चेयरमैन एवं सीईओ ने मंगलवार को अतिक्रमण समेत शहर में इस्तेमाल योग्य बची जमीन की जानकारी लेने के लिए सेक्टर - 6 स्थित मुख्य प्रशासनिक ऑफिस में बैठक बुलाई थी। इसमें सभी जोन के प्रभारी प्रोजेक्ट इंजीनियरों को अलग - अलग प्रोफॉर्मा पर पूरी डिटेल तैयार करने को कहा गया है। खासतौर पर अतिक्रमण में आई जमीन के बारे में इसमें अलग से डेटा फोटोग्राफी और सर्वे के आधार पर अंकित किया जाना है। उन्होंने बताया कि आगामी सोमवार तक का समय सभी जोन प्रभारियों को काम पूरा करने के लिए दिया गया है। इस डेटा का रिव्यू करने के बाद लैंड यूज के बाबत पॉलिसी और नई स्कीमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। खास तौर पर ग्रीनरी और पार्क के रूप में छोड़ी गई जमीन पर अतिक्रमण होने की शिकायतों का निस्तारण भी सोमवार से करना शुरू हो जाएगा।


    -NB times
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  • किसानों की समस्याओं का होगा समाधान


    नोएडा अथॉरिटी

    क्षेत्रीय किसानों की समस्याओं को लेकर मंगलवार को किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने अथॉरिटी चेयरमैन एवं सीईओ बलविंदर कुमार से मुलाकात की। बैठक में चेयरमैन ने डीसीईओ की अगुवाई में दो कमिटियों का गठन कर आबादी निस्तारण का सरल प्रोफार्मा इंटरनेट पर उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। साथ ही गांवों की आबादी निस्तारण एवं आरक्षित श्रेणी के पात्र भूखंड आवेदकों की सूची 30 अक्टूबर तक चस्पा करने को कहा। अपीलीय मुकदमों का इसी सप्ताह से कोर्ट की ओर से तय की गई बढ़ी दर पर मुआवजा देना शुरू कर दिया जाएगा।

    समिति के प्रवक्ता महेश अवाना ने कहा कि डीसीईओ की अध्यक्षता में एक लीज बैक कमिटी का गठन किया गया है। जबकि दूसरी कमिटी किसानों की अन्य समस्याओं का समाधान कराएगी।

    -NB times
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  • समस्या निस्तारण के लिए गठित हुई दो टीमें


    नोएडा: किसानों की समस्याओं के निस्तारण के लिए डीसीईओ की अध्यक्षता में चेयरमैन ने दो टीमें गठित की है। एक टीम लीजबैक का काम देखेगी और दूसरी समिति किसानों की अन्य समस्याओं का निस्तारण करने में मदद करेगी। चेयरमैन व सीईओ बलविंदर कुमार ने यह निर्णय किसान संघर्ष समिति की मांग पर लिया है। इधर, किसानों को पांच प्रतिशत का लाभ देने के लिए भी सूची तैयार कर ली गई है, जिसे दीपावली तक जारी कर दिया जाएगा।
    किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता महेश अवाना ने बताया कि मंगलवार को पदाधिकारियों ने चेयरमैन से मुलाकात कर भवानी शंकर इंटर कॉलेज दस कमरे और खेल मैदान तैयार कराने की मांग रखी। साथ ही भूमिहीन किसानों को फ्लैट अथवा आवासीय भूखंड आवंटित करने की भी मांग रखी। साथ ही समिति ने राय दी कि आबादी निस्तारण के लिए सरल प्रारूप बना इंटरनेट पर उपलब्ध कराया जाए। किसान इसी प्रारूप के साथ संबंधित दस्तावेज प्राधिकरण में जमा कराएंगे। चेयरमैन ने समिति की मांग पर विचार कर उसे तत्काल प्रभाव से लागू कराने का आश्वासन दिया। साथ ही बताया कि सभी गांव की आबादी निस्तारण की सूची एवं आरक्षित श्रेणी के पात्र भूखंड आवेदकों की सूची 30 अक्टूबर तक चस्पा कर दी जाएगी। पांच नवंबर से आरक्षित श्रेणी के किसानों को भूखंड आवंटन की तैयारी शुरू कर दी जाएगी। साथ ही अपीलीय मामलों में भी जल्द ही कोर्ट द्वारा निर्धारित बढ़ा हुआ मुआवजा देना शुरू कर दिया जाएगा। साथ ही सीईओ ने बैठक में अधिकारियों को गांवों के विकास कार्य में तेजी लाने के भी निर्देश दिए

    -Dainik jagran
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  • ‘खाली जमीनों पर अचानक तेज हुए निर्माण कार्य’


    नोएडा। शहर के गांवों में अचानक निर्माण कार्यों में तेजी देखने को मिल रही है। इसका खुलासा मंगलवार को हुई समीक्षा बैठक में हुआ। वहीं, प्राधिकरण शहर और गांवों में खाली पड़ी जमीनों का सर्वे कर रहा है। इसमें प्राधिकरण की तरफ से नौ टीम लगाई गई हैं, जो परियोजना अभियंताओं के निर्देश पर काम कर रही है। सभी टीम अपने क्षेत्र में खाली जमीन की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कर रही हैं, जिससे अवैध कब्जों और अतिक्रमण को चिह्नित किया जा सकें।

    नोएडा की जमीन पर दिन पर दिन बढ़ते अतिक्रमण की समस्या को रोकने के लिए सीसीईओ बलविंदर कुमार ने परियोजना अभियंताओं की देखरेख में नौ टीमों का गठन किया है। इन सभी की मंगलवार को समीक्षा बैठक हुई। इस दौरान यह साफ हुआ कि आबादी नियमित करने का आदेश जारी होते ही अचानक से निर्माण कार्यों में तेजी आ गई है। इस बिंदु पर चिंता जाहिर करते हुए यह निर्णय लिया गया कि सभी खाली पड़ी जमीन की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी का काम पूरा किया जाए। इसके बाद सभी अवर अभियंता अतिक्रमण और अवैध कब्जे वाले स्थानों की सूची तैयार करेंगे और इसके लिए एक मास्टर रजिस्टर बनाया जाएगा। तत्पश्चात क्षेत्र के हिसाब से एक सूची बनाई जाएगी और आगे की कार्रवाई के लिए सभी टीमें मुख्य परियोजना अभियंता के नेतृत्व में कार्रवाई शुरू करेंगी। निर्माण कार्यों की सूची बनाने के साथ इनका मिलान सैटलाइट इमेज से करवा लिया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि कार्यों को कब पूरा किया गया है।

    -Amar Ujala
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  • ३४ गांवों के पांच प्रतिशत भूखंड की सूची तैयार


    नोएडा। प्राधिकरण ने सभी ३४ गांवों को दी जाने वाली पांच प्रतिशत भूखंड की सूची तैयार कर ली है। इसमें किसानों की संख्या और दी जाने वाली जमीन का रकबा मौजूद है। देर शाम तक हुई बैठक के बाद इसे अंतिम रूप दे दिया है, लेकिन सीसीईओ के लखनऊ रवाना हो जाने के कारण इसे जारी नहीं किया गया। लैंड विभाग के अफसरों का कहना है कि बृहस्पतिवार को सीसीईओ के लौटने पर इसे जारी कर दिया जाएगा।

    ३० जुलाई को किसानों और प्राधिकरण के बीच हुए समझौते में यह तय किया कि तीन महीने में आबादी के मामले निस्तारित करते हुए पांच प्रतिशत के भूखंड आवंटित कर दिए जाएंगे। इसके मद्देनजर प्राधिकरण ने पंद्रह, दस और बारह गांव की तीन चरणों में पांच प्रतिशत की सूची तैयार कर ली है। प्राधिकरण के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि मंगलवार की देर शाम लैंड विभाग ने सूची डीसीईओ को सौंप दी। इसी बीच सीसीईओ बलविंदर कुमार लखनऊ रवाना हो गए, इसलिए सूची जारी करने का कार्यक्रम आगे बढ़ा दिया है। बलविंदर कुमार बृहस्पतिवार की सुबह वापस लौटेंगे जिसके पश्चात सभी ३४ गांव की सूची जारी हो जाएगी। यह सभी मामले १९९७ के बाद अधिग्रहण हुई जमीन के हैं। वहीं, १९७६ से १९९७ के बीच जिन किसानों को प्लॉट का लाभ नहीं मिला है उनके लिए अलग से योजना निकाली गई। इसमें किसानों ने आवेदन किए हैं उनकी जांच करके पात्र किसानों की सूची बनाई जाएगी। इसके बाद इनका ड्रा करके भूखंड आवंटित कर दिए जाएंगे।

    दूसरी तरफ किसान संघर्ष समिति ने मंगलवार की दोपहर में सीसीईओ से मुलाकात की। इसमें कैंप लगाकर लीज बैक करने पर सहमति बनी है। साथ ही समिति की ओर से मांग रखी गई कि एलआरए के जो मुकदमे चल रहे हैं उनका निस्तारण प्राथमिकता से कर दिया जाएं। इस पर बलविंदर कुमार का कहना है कि अदालत के निर्देश पर जो मुआवजा तय किया गया है, वह किसानों को दे दिया जाएगा।

    -Amar Ujala
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  • फिर टला आवासीय फ्लैट का ड्रा


    नोएडा : दीपावली पर अपने घर का तोहफा मिलने का इंतजार कर रहे लोगों को अब इसके लिए दो सप्ताह का इंतजार और करना होगा। फ्लैट की बढ़ी हुई दर निर्धारित न हो पाने की वजह से ड्रा की तिथि टाल दी गई है। प्राधिकरण को अब तक इस मामले में आपत्तियां भी प्राप्त नहीं हुई हैं।

    ज्ञात हो कि प्राधिकरण ने वर्ष 2006-07 में आवासीय योजना के तहत करीब सवा तीन हजार फ्लैट की योजना निकाली थी। योजना के लिए सफल आवंटियों का ड्रा पहले ही किया जा चुका है। अब उन्हें फ्लैट नंबर आवंटित किया जाना है। इसी योजना के एमआइजी व एचआइजी फ्लैट के नंबर आवंटित करने के लिए प्राधिकरण ने जनवरी 2011 में ड्रा किया था। निर्माण कार्य में देरी की वजह से इन फ्लैट की कीमतों में भी इजाफा किया गया था। अब बारी एलआइजी व ईडब्ल्यूएस के सफल आवेदकों को फ्लैट नंबर आवंटित करने की है। इसके लिए पहले 20 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की गई थी। इससे पहले निर्माण में हुई देरी की वजह से योजना के फ्लैटों की बढ़ी हुई कीमत का आंकलन करना था। उस पर आवेदकों से आपत्तियां प्राप्त कर उनका निपटारा भी किया जाना था।

    बताया जा रहा है कि फ्लैट की बढ़ी हुई कीमतें अब तक निर्धारित नहीं हो सकी हैं। अगले सप्ताह प्राधिकरण में दीपावली की छुट्टियां पडेंगी। लिहाजा फ्लैट की कीमत निर्धारण और आपत्तियों के निस्तारण सहित ड्रा के जरिए फ्लैट नंबर आवंटित करने का काम नवंबर के पहले या दूसरे सप्ताह में किया जाएगा। इसके लिए फिलहाल कोई आधिकारिक तिथि घोषित नहीं की गई है। योजना के तहत प्राधिकरण को सेक्टर 100 में 608 और सेक्टर 135 में 432 एलआइजी फ्लैट और सेक्टर 99 में तैयार हो चुके 400 ईडब्ल्यूएस भवनों के नंबर आवंटित करने हैं।



    -D.Jagran
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  • बाद में नियमित होंगी गांवों में बनीं दुकानें


    नोएडा : गांव में बनी दुकानें प्राधिकरण फिलहाल नियमित नहीं करेगा। खसरा नंबर के आधार पर आबादी निस्तारण के बाद इसके लिए अलग से नीति बनाकर विनियमितिकरण किया जाएगा। नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन व सीईओ बलविंदर कुमार ने ये बातें बृहस्पतिवार को किसान संघर्ष समिति के बैनर तले मिलने आए कुछ किसानों से कहीं। साथ ही उन्होंने किसानों की आबादी संबंधी समस्याओं का निपटारा 31 अक्टूबर तक करने का आश्वासन दिया।

    चेयरमैन ने किसानों को बताया कि 1997 के बाद के 34 गांवों के किसानों को पांच फीसदी के प्लॉट देने के लिए सूची तैयार कर ली गई है। इस सूची में 2663 किसान हैं जिन्हें 493183.103 वर्गमीटर (49.3183 हेक्टेयर) भूमि बतौर आवासीय प्लॉट दी जाएगी। किसानों ने चेयरमैन को बताया कि तैयार की गई सूची में कुछ किसानों के नाम छूट गए हैं। इस पर उन्होंने छूटे हुए किसानों की सूची देने को कहा है। चेयरमैन ने किसानों को यह भी बताया कि जिनके पास 450 वर्गमीटर प्रति बालिग परिवार भूमि है, उसे स्वत: लीजबैक मान लिया जाएगा। इससे ज्यादा भूमि पर बनी आबादी को नियमित करने का फैसला उच्च स्तरीय कमेटी करेगी। उन्होंने दोस्तपुर-मंगरौली गांव के किसानों के बंदोबश्त संबंधी विवाद का जल्द निस्तारण कर उचित मुआवजा देने की भी बात कही।

    -D. Jagran
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  • Noida fate to be decided tomarrow

    The Allahabad High Court will, on Friday, give its verdict on the 492 quash-acquisition petitions filed by 40 villages in Noida Extension and other areas of Greater Noida.

    The court will also decide the fate of about 80 petitions filed by farmers of about two dozen Noida villages.







    A full bench of the court had on September 30 reserved its judgement in these cases after hearing the versions of the state government, farmers, builders and buyers for more than two weeks.

    “Two earlier court orders set aside forcible acquisition in Shahberi and Patwari. The same urgency clause has been used in other villages too,” said Parminder Bhati, counsel of farmers.

    Meanwhile, developers are also hopeful. “We’re absolutely confident the crisis would be resolved,” said Pankaj Bajaj of real estate body CREDAI.

    The two industrial development authorities in Noida and Greater Noida also hope the court won’t ask them to return the land that they had acquired from villages and allotted to builders.

    The authorities also hope to get a nod for out-of-court deals they have struck with some villages, while farmers want their land back for a better bargain. In case of an “adverse” judgment, the entire Noida Extension project may be scrapped.


    Fritlo bhai ye news kaise choot gayeeeeeeee!!!!
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  • Originally Posted by Dsrivastava

    Fritlo bhai ye news kaise choot gayeeeeeeee!!!!


    Sir G... aap wrong thread me dekh rahe ho.... Jub NE ki news hai to NE ki thread me hi to hogi.... check this out

    https://www.indianrealestateforum.com/forum/city-forums/ncr-real-estate/greater-noida-real-estate/greater-noida-and-noida-extension/17581-greater-noida-west-noida-extension-latest-updates/page97?t=19761&page=97
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  • दुकानों के विनियमितिकरण का मुद्दा हुआ खत्म

    नोएडा। प्राधिकरण ने महाफैसले से ठीक एक दिन पहले किसानों की आबादी का खसरा संख्या पर छोड़ने के साथ दुकानों का विनियमितिकरण का फैसला वापस ले लिया है। किसानों की आबादी विनियमित होगी, दुकानों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। वहीं, दूसरी तरफ किसानों को दी जाने वाली पांच प्रतिशत आबादी के प्लाटों की सूची जारी कर दी है। इसमें ३४ गांव के २६६३ किसानों को ४,९३,१८३.१०३ वर्गमीटर जमीन प्राधिकरण देगा। कुछ किसानों ने सूची में नाम छुटने की शिकायत सीसीईओ के पास दर्ज करवाई। इस पर सीसीईओ ने साफ कर दिया कि जिस भी किसान का नाम छूट गया है वह अपने कागज जमा करवा दें। उसका नाम सूची में शामिल कर लिया जाएगा। ५ साल से किसानों और प्राधिकरण के बीच खींची दीवार गिरने वाली है। लंबे समय से आबादी और पांच प्रतिशत भूखंड के लिए लड़ाई लड़ने वाले किसानों को नोएडा प्राधिकरण ने नई सूची थमा दी है। प्राधिकरण के सीसीईओ बलविंदर कुमार और ५१ ग्राम प्रधानों की बृहस्पतिवार को मुलाकात हुई। इसमें आबादी के मामलों को एक बार फिर उठाया गया, जिसके बाद बलविंदर कुमार ने ३४ गांव की सूची इन्हें थमा दी। इसमें ३४ गांव के २६६३ किसानों के नाम शामिल हैं और इन्हें दी जाने वाली जमीन का क्षेत्रफल भी बता दिया गया है। इन किसानों को ४९.३१८३ हेक्टेयर यानि चार लाख ९३ हजार १८३ वर्गमीटर जमीन मिलेगी। इसके अलावा बलविंदर कुमार ने साफ कर दिया कि दुकानों के संबंध में किसानों ने आपत्ति दर्ज करवाई है, जिसके बाद इनके विनियमितिकरण का मुद्दा समाप्त कर दिया गया। सिर्फ आबादी को खसरे पर छोड़ा जाएगा। यह कार्य ३१ अक्तूबर तक पूरा हो जाएगा। वहीं, दूसरी तरफ जिन किसान परिवारों के पास ४५० वर्गमीटर जमीन प्रति बालिक के हिसाब से है उन्हें लीज बैक करवाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके लिए प्राधिकरण एक नियम पारित करेगा।
    २३ गांव के ९७ याचिका पर आएगा फैसला
    शुक्रवार को महाफैसले में नोएडा के २३ गांव शामिल हैं। इनकी तरफ से ९७ याचिकाएं डाली गई, जिस पर निर्णय किया जाएगा। इन गांवों में अलवरदीपुर, असदुल्लापुर, असगरपुर, बदौली बांगर, बसी ब्रउद्दीन नगर, छपरौली बांगर, चौड़ा सादतपुर, दोस्तपुर मंगरौली बांगर, झट्टा, हाजीपुर, खोड़ा, कोंडली बांगर, नंगली-नंगला, निठारी, सदतपुर, सलारपुर खादर, सर्फाबाद, शाहदरा, सोरखा जाहिदाबाद, सुल्तानपुर, सुथियाना, सफीपुर और गांव वाजिदपुर शामिल हैं।

    -Amar Ujala
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  • Noida Authority releases final list for land distribution


    NOIDA: In an attempt to quell any further agitation of Noida farmers ahead of the next court hearing on land acquisition, the Noida Authority on Thursday released a list of 2,663 farmers in 35 villages who will get the five per cent developed plots in the final phase. The list, according to the Authority, is the final one for all the villages where land was acquired after 1997. The Authority has also given in to the major demand of the farmers of leaving the shops, commercial establishments, etc, as they are even though most of them have been running illegally under the pretext of abadi land.

    A total of 49.32 hectares of land will be distributed among these farmers and all their claims of abadi land will also be regularized without checking against any encroachments. Following fresh protests by farmers, the Authority has also decided to leave the shops and commercial establishments "untouched" for now, said chairperson Balwindar Kumar.
    Earlier, last month, the Authority had agreed to leave all inhabited land of the farmers as it is, the same did not apply to areas where shops and other commercial establishment are run for those are considered as encroachments. For regularization of such commercial areas farmers are required to pay an extra fee but they refused to do so and threatened to disrupt construction work if the Authority did not accede to their demands.

    "The farmers, particularly those in villages like Barola, Harola, Naya Bans and Nithari, who have been running small shops, restaurants, etc, claim that it was their abadi land and, thus, these areas should be left untouched as well. We have decided to stop all surveys in these commercial areas," Kumar said.

    Meanwhile, the Authority has outsourced the task of conducting a survey via satellite images in villages that were acquired between 1976 and 1997 to verify their claims of abadi land and check for encroachments before regularizing the same.

    The list that the Authority released on Thursday includes villages like Shahadara, Mohiyapur, Parthala, Wazidpur, Badouli, Kondli, Mamura, Hajipur, Gheza and Hoshiyarpur among others. The Authority had, earlier, released a list of 2,300 farmers who are entitled to receive five per cent developed plots under the first phase of the scheme.


    -TOI
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  • जमीन को लेकर चिंतित अफसर


    नोएडा

    हाई कोर्ट के शुक्रवार को आए निर्णय के बाद अथॉरिटी को किसानों को 1178 करोड़ रुपये बतौर बढ़े हुए मुआवजे के रूप में देने पड़ेंगे। साथ ही 5 पर्सेंट एक्स्ट्रा जमीन देने के लिए 250 एकड़ डिवेलप लैंड किसानों को देनी होगी। इसकी कीमत कम से कम 2000 करोड़ रुपये आंकी गई है। अथॉरिटी चेयरमैन एवं सीईओ बलविंदर कुमार ने बताया कि 23 गांवों की तरफ से दायर 93 पिटिशन पर निर्णय लिया गया है। इसमें 1997 से पहले जमीन देने वाले 6 गांवों की याचिका निरस्त कर दी गई। 16 गांवों की कुल 2174 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई थी। इस जमीन के एवज में 64.7 पर्सेंट का बढ़ा हुआ मुआवजा जमीन देने वाले किसानों को दिया जाएगा। इस पर अथॉरिटी को कुल 1178 करोड़ रुपये बतौर बढ़ा हुआ मुआवजा देना होगा। निर्णय में 5 की जगह 10 पर्सेंट डिवेलप लैंड दिए जाने पर अथॉरिटी को अतिरिक्त 250 एकड़ जमीन अलॉट करनी पड़ेगी। इसकी कीमत करीब 2 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है। असदुल्लापुर गांव के अधिग्रहण को निरस्त करने से 33 हेक्टेयऱ जमीन प्रभावित हुई है। इस जमीन पर दो फार्म हाउस , सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट साइट की जमीन और प्रस्तावित रेलवे स्टेशन की जमीन आ रही है। इसके विकल्प के रूप में लैंड डिपार्टमेंट के साथ नई योजना बनाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार आवंटन निरस्त होने से प्रभावित होने वाले प्रोजेक्टों को बचाने के लिए अथॉरिटी जमीन को सीधे किसानों से खरीदने पर भी विचार कर रही है।

    बॉक्स

    सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी नोएडा अथॉरिटी !

    किसानों के साथ अथॉरिटी ने भी शुक्रवार को आए फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी की है। सूत्रों के अनुसार मौजूदा गांवों के किसानों को 5 पर्सेंट जमीन देने में अथॉरिटी के पसीने छूट रहे हैं , ऐसे में इस जमीन को डबल करने के निर्णय से अथॉरिटी अधिकारियों के होश फाख्ता हो गए हैं। ग्रेनो की तर्ज पर नोएडा में इस नियम का पालन करना संभव नहीं है। अथॉरिटी के पास इतनी जमीन नहीं बची है , जिससे किसानों की 10 पर्सेंट कोटे की जमीन की भरपाई की जा सके।
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  • मुआवजे को लेकर गुना-भाग में जुटे रहे किसान


    नोएडा। हाईकोर्ट का निर्णय आने के बाद शहर के कुछ गांवों में गम का माहौल देखने को मिला। २३ गांवों में छह गांवों की याचिकाएं ही निरस्त कर दी गई, जबकि अन्य गांवों के लिए फैसला सुनाया गया। इसके बाद किसान परिवार दिन भर गुणा-भाग करने में जुटे रहे। एक्सटेंशन की देखादेखी नोएडा के गांवों ने भी कोर्ट में याचिकाएं डालना शुरू कर दिया। इसमें कई गांव ऐसे रहे जो बीस साल पहले अधिग्रहित हो चुके हैं और उनके लिए अब अदालत का दरवाजा खटखटाया गया। २३ गांव में निठारी, सदरपुर, खोड़ा, सुल्तानपुर, चौड़ा सहदतपुर और अलवरदीपुर मुख्य रूप से शामिल रहे। असदुल्लापुर का अधिग्रहण रद किया गया। इसके अलावा असगरपुर, बदौली बांगर, बसी ब्रउद्दीन नगर, छपरौली बांगर, दोस्तपुर मंगरौली बांगर, झट्टा, हाजीपुर, कोंडली बांगर, नंगली-नंगला, सलारपुर खादर, सर्फाबाद, शाहदरा, सोरखा जाहिदाबाद, सुथियाना, सफीपुर और वाजिदपुर के लिए ६४.७० प्रतिशत बढ़ा मुआवजा और दस प्रतिशत विकसित भूमि देने का आदेश दिया गया है। इन गांव के किसान दिन भर बढ़े हुए मुआवजे को लेकर गुणा-भाग में जुटे रहे। सभी अपने अधिग्रहण राशि के ६४.७० प्रतिशत हिस्से के अनुसार बढ़े हुए मुआवजे का आंकलन कर रहे हैं। हजारों रुपये से लेकर करोड़ों रुपये तक किसान परिवारों को इस फैसले से मिलने वाले हैं। वहीं, नोएडा में १९९७-९८ में जहां किसानों की जमीन २५८.७५ रुपये प्रति वर्ग मीटर अर्जित की जाती थी, वहीं २०११-१२ में यह बढ़कर १२४० रुपये तक पहुंच गई। इसी तरह गैर पुश्तैनी किसान जहां ९७-९८ में २२५ रुपये पाते थे, उन्हें बढ़कर १०४० रुपये दिया जा रहा है। नोएडा प्राधिकरण ने इन चौदह सालों में सिर्फ २००९-१० में कोई वृद्धि नहीं की। इस दौरान पूरा विश्व मंदी के दौर से गुजर रहा था, इसलिए किसी भी जमीन में बढ़ोतरी नहीं हुई। इसके साथ ही १९९७ के बाद अधिग्रहित हुई जमीन के बदले किसानों को मुआवजे के साथ पांच प्रतिशत विकसित प्लॉट भी दिया जाता रहा है। इसे भी प्राधिकरण ने २०१० में बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया।

    -Amar ujala
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