About 4,500 farmers of 11 villages in Noida have refused to accept an agreement inked between the authority and Kisan Sansh Samiti, an umbrella body of farmers, on Saturday.

These villages have decided to move court, seeking their land back.
Houses and various other establishments were constructed on the land acquired from these farmers years ago.


Only 162 hectares of land — carved out of Morna, Nithari and Chhalera villages and today known as City Centre plot in sectors 32 and 25A — is vacant.

The authority sold this plot to a private builder for Rs 7,500 crore in March.

Farmers have demanded this land back too.

These are the farmers whose land was acquired before 1997. The authority started making allotment of developed land plots, measuring 5% of the total land acquired, after 1997.

Before 1997, the authority provided 17.5% reservation to farmers in housing plot schemes.

“Those whose land was acquired before 1997 also sought plots measuring 5% of their land acquired. When the authority did not promise this in the July 30 agreement, they’re upping the ante,” said a senior official.
On Saturday, farmers under the banner of Kisan Sansh Samiti in Noida said they had suspended their agitation for three months and, during this period, they would not stall any real estate projects in the city.

But the trouble is not yet over. “Our land was acquired at Rs 9 per sqm. We were not given any plots under the 17.5% quota,” said Ved Pal, a farmer. “We should also get the 5% developed land plots,” said Kripa Singh, another farmer.

“The City Centre land was acquired 35 years ago using the urgency clause. The land continues to be vacant. We want it back,” he said.
This group of farmers will on Wednesday hold another panchayat at Atta.
Wave Infrastructure, a real estate firm, sealed the City Centre deal with Noida Authority in March.

The Authority sold about 162 hectares (6 lakh sqm) of land comprising two sectors (32 and 25A) to the developer.

-HT
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  • किसानों का बेमियादी धरना फिर शुरू


    सेक्टर-74 में अथॉरिटी के प्रयासांे से पिछले सप्ताह खत्म हुआ किसान आंदोलन दोबारा भड़क उठा है। आसपास के एक दर्जन गांवों के किसानों ने अथॉरिटी से वार्ता करने वाली किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों को दलाल करार कहते हुए समझौते को मानने से इनकार कर दिया है। गुस्साए किसानों ने शनिवार को किसान संघर्ष मोर्चा नामक नए संगठन का गठन कर सेक्टर-74 में दोबारा बेमियादी धरना शुरू कर दिया।

    मोर्चा के संयोजक धर्मपाल सिंह यादव ने बताया कि हमारी मांग सर्कल रेट पर मुआवजा देने, आबादी कोटे की 8 पर्सेंट विकसित जमीन को जनरल कैटिगरी के इलाके में देने और भूमिहीनों को ग्राम समाज की जमीन में से 100-100 गज के प्लॉट देने की है। अथॉरिटी ने अपने समझौते में इन मांगों के बारे में कोई लिखित वचन न देकर देकर हमें धोखा दिया है। इस काम में किसान संघर्ष समिति के नेताओं की भी भूमिका रही है जिन्होंने अथॉरिटी के छलावे का विरोध करने के बजाय उसका गुणगान किया। ऐसे भ्रष्ट नेताओं को अब किसानों के प्रदर्शन मंे शामिल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि रविवार सुबह 10 बजे से धरनास्थल पर सर्फाबाद, सोहरखा, गढ़ी चौखंडी, पर्थला खंजरपुर, ककराला, बरौला, सलारपुर और नंगला भूडा के सैकड़ों किसान शामिल होंगे। बैठक के बाद किसानों की जमीन पर प्रोजेक्ट बना रहे बिल्डरों का काम को बंद करा दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि उनके पास बिल्डरों का काम रुकवाने के लिए अदालती आदेश है। जिले के सिविल जज, सीनियर डिविजन ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए बिल्डरों को काम बंद करने का आदेश जारी किया है और मामले में सुनवाई के लिए 23 अगस्त की डेट लगाई है। बिल्डरों का काम बंद कराते वक्त उन्हें अदालत के आदेश से भी अवगत कराया जाएगा।

    उधर, किसानों के दोबारा प्रदर्शन से आसपास रेजिडेंशल प्रोजेक्ट बना रहे बिल्डरों की चिंता बढ़ गई है। इस क्षेत्र में आम्रपाली, सुपरटेक, आरजी रेजिडेंसी, यूनिटेक जैसे 10 बड़े बिल्डर अपार्टमेंट बना रहे हैं। अगर किसानों ने अपनी घोषणा के अनुरूप बिल्डरों का काम बंद करा दिया तो पहले से लेट चल रहे ये प्रोजेक्ट और पिछड़ जाएंगे। इसके साथ ही इन प्रोजेक्टों की लागत में भी भारी बढ़ोतरी हो जाएगी, जिसका खमियाजा अंतत: निवेशकों को भुगतना पड़ेगा। किसानों की चेतावनी के बाद पुलिस प्रशासन भी सचेत हो गया है। शनिवार को पुलिस की दो जिप्सियां पूरे दिन धरनास्थल पर जमी रहीं। रविवार को पीएसी को भी तैनात करने का फैसला किया गया है।


    -Navbharat times
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  • अब किसान निकालेंगे पैदल मार्च


    नोएडा एक्सटेंशन के निवेशकों के बाद अब किसान अपनी मांगों के समर्थन में पैदल मार्च निकालेंगे। यह फैसला 'किसान बचाओ संघर्ष समिति' ने शनिवार को मोरना गांव में हुई पंचायत में लिया। पंचायत में समिति के लोगों ने गांव वालों को अपनी मांगें बता उन्हें अभियान से जुड़ने को कहा। इधर, सोरखा गांव में कुछ किसानों ने शनिवार को बैठक कर प्राधिकरण के प्रति असंतोष जताया। यहां कुछ लोगों ने रविवार को बिल्डरों का काम रोकने की भी चेतावनी दी।

    ज्ञात हो कि नोएडा प्राधिकरण द्वारा पूर्व में किसानों को दिए गए आश्वासन से कुछ गांव के किसान संतुष्ट नहीं हैं। इनमें उन गांव के किसान शामिल हैं, जिनकी भूमि वर्ष 1976 से 1997 के बीच अधिग्रहीत की गई है। प्राधिकरण के आश्वासन से संतुष्ट हो किसान संघर्ष समिति ने एक माह के लिए आंदोलन बंद कर दिया। इसके बाद असंतुष्ट किसानों ने किसान बचाओ संघर्ष समिति के नाम से नई समिति गठित कर ली। जोगिंदर अवाना ने बताया कि किसान शासन व प्राधिकरण तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए नौ अगस्त को पैदल मार्च कर चेतावनी रैली निकालेंगे। किसान नोएडा स्टेडियम पर एकत्र होंगे और पैदल प्राधिकरण तक जाएंगे। यह तिथि इसलिए चुनी गई है क्योंकि इसी दिन मंगल पांडेय और धर्म सिंह कोतवाल ने देश को आजाद कराने के लिए मेरठ में क्रांति का बिगुल फूंका था। किसान भी इस दिन अपने हक की लड़ाई शुरू करेंगे।

    दिनेश अवाना ने बताया कि रैली में काफी संख्या में किसान शामिल होंगे। इसके लिए समिति लगातार गांवों में जनसंपर्क अभियान चला रही है। प्रत्येक गांव से चुने गए सदस्यों को भी उनके गांव में जन जागरण अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई है।

    सोरखा गांव में हुई बैठक में भी किसानों ने प्राधिकरण के आश्वासन की प्रगति पर असंतोष जताया। नरेश प्रधान ने बताया कि प्राधिकरण ने पिछली बैठक में 15 अगस्त तक पांच प्रतिशत के प्लॉट और गांव की आबादी निस्तारित करने का आश्वासन दिया था। इस दिशा में अब तक प्राधिकरण ने कोई काम नहीं किया है। अब तक किसी किसान की आबादी नियमित नहीं हुई है। इससे किसानों में रोष है। बैठक में फैसला लिया गया कि अगर निर्धारित तिथि तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो 16 अगस्त को किसान सेक्टर 74 व आसपास चल रहा बिल्डरों का काम रोकेंगे। बैठक में उच्च न्यायालय में गांव की तरफ से दायर सामूहिक याचिका की पैरवी के बारे में भी चर्चा की गई। प्रधान ने बताया कि कुछ लोगों ने रविवार को ही बिल्डरों का काम रोकने की चेतावनी दी है। इस पर लोगों ने निर्णय लिया गया है कि निर्धारित तिथि से पहले किसान काम नहीं रोकेंगे।
    -Dainik jagran
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  • प्राधिकरण कार्यालय तक होगा पैदल मार्च

    प्राधिकरण से हुए समझौते से अलग होकर अपनी मांगों को लेकर नई समिति का गठन हुआ। मोरना गांव में पंचायत में किसान बचाओ संघर्ष समिति ने सर्वसम्मित से निर्णय लिया कि नौ अगस्त को स्टेडियम से हरौला पार्क होते हुए प्राधिकरण प्रशासनिक कार्यालय तक पैदल मार्च किया जाएगा। इसमें ज्यादा से ज्यादा ग्रामीणों को जोड़ने पर जोर दिया गया। बैठक में मांगों को लेकर शांति मार्च निकालने का निर्णय लिया गया।

    मोरना गांव के बारातघर में शनिवार को समझौते से अलग हुए गांवों ने पंचायत की। इसमें गांव वालों को जन-जागरण के माध्यम से जोड़ने की बात कही गई। साथ ही यह निर्णय हुआ कि पैदल मार्च के बाद मौजूद किसानों ने मिलकर प्राधिकरण अधिकारियों के समक्ष मांगें रखेंगे। अभी किसान बचाओ संघर्ष समिति का कहना है कि गांव में जो आबादी जैसी है वहां पर उसे उसी स्थिति में छोड़ दिया जाए। प्राधिकरण और जिला प्रशासन जो सर्वे कर रहा है वह एक छलावा है। इसे तुरंत बंद कर दिया जाए। साथ ही सभी को पांच प्रतिशत आबादी का लाभ देना सुनिश्चित करें।

    -Amar Ujala
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  • Noida flats will be costly
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  • किसान नहीं बंद करा पाए बिल्डरों का काम

    सेक्टर -74
    बिल्डरों का काम बंद कराने की धमकी देने वाले किसान संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ता रविवार को अपनी घोषणा पर अमल नहीं कर पाए। धमकी की सूचना पर मौके पर भारी पुलिस फोर्स मौजूद रही। रविवार दोपहर पंचायत के बाद जैसे ही मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने बिल्डरों का काम रुकवाने के लिए भाषणबाजी शुरू की , अफसरों ने उन्हें धारा -144 की जानकारी देते हुए अवांछित हरकत करने पर जेल में डाल देने का हुक्म सुना दिया।

    पुलिस की सख्ती देखकर किसानों ने अपना इरादा बदलते हुए बेमियादी धरने को ही आगे बढ़ाने का फैसला किया। मोर्चा के संयोजक धर्मपाल यादव ने बताया कि हमारा इरादा हिंसा करके अपना हक पाना नहीं है। उन्होंने बताया कि हमने बिल्डरों का काम रोकने की घोषणा कोर्ट के आदेश का अनुपालन करवाने के लिए की थी। इस आदेश की प्रति पुलिस को भी दिखाई गई लेकिन उसने इसे मानने से इनकार कर दिया। अब सोमवार को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में इस बात को रखा जाएगा। उसके बाद अदालत के जरिए पुलिस को आदेश दिलवाकर बिल्डरों का काम रुकवाने की कोशिश की जाएगी।

    Navbharat times

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  • Now, lawyers to give legal boost to farmers

    Lawyers of Noida district will form a legal forum to guide farmers affected by the land acquisition row. They have decided to guide farmers of Patwari and other villages whose cases are pending in the Allahabad High Court. The forum will provide free services to these farmers. Before the August 12 deadline set by the High Court, the farmers and Supreme Court lawyers will hold an interactive session.

    "The manner in which the Greater Noida Authority claimed to have hammered out a pact with Patwari villagers by making few of them sign affidavits that they would withdraw their writs, without even caring to give them a written assurance on promises, is an eyewash," said Rajinder Nagar, former president of the Noida Bar Association. "Our forum will educate farmers not to get into such lop-sided agreements," said Nagar.

    "It is our responsibility to save our land from the clutches of some property dealers," said lawyer Parminder Bhati, who has been representing 10 villages of Noida Extension in Allahabad High Court.

    "On Friday, at least 50 lawyers held a meeting at the district court and decided to provide all possible legal help to farmers. We are launching the forum within a week. Some vested interests are actually misleading farmers," he said.

    Lawyers said the forum will not only guide farmers, but also help the Authority and the state government. "Meetings with Authority officials are attended by farmers' representatives, who don't understand law. Hence, actual demands and facts are not properly produced," Bhati further said.

    "I belong to a family of farmers, but live in Delhi. My brothers are still engaged in agriculture. Our life changed overnight after builders took over. My family was not only cheated, but also threatened after attempts were made to grab our land. Initially my family was misguided and the elders decided go for a compromise deal. But when I came to know about the episode, I launched a battle for our rights. I will be happy to contribute my services for my village," said lawyer Sobinder Chowdhary.

    The court had said farmers and the administration are free to hold fresh negotiations and strike an out of court settlement by August 12. "Now, we have planned to hold a meeting between farmers and Supreme Court senior lawyers. This will give an opportunity to farmers to understand their rights," said Pratap Nagar, an industrialist, who hails from Derimachha village near Badalpur.

    Villagers for Patwari, Gulistanpur, Surajpur, Roja Jalalpur, Bisrakh, Ithera, Chipiyana, Chipiyana Khurd Nagar will be attending the meeting.
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  • When there is a hope of hitting the jackpot with the new Land Accusation Act, why will farmers hurry to sell their land.

    It is therefore logical that farmers are waiting.
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  • friends, if you go back by few decades in past, all of us were farmers. Land was acquired by government for making roads, railway stations, hospitals, schools, parks..etc etc etc...and then there were those chakbandi yojna and passing a nahar etc through each village.
    Due to all the steps above, lot of farmers including my forefathers lost there land. So, here is the best deal. Sabkuch tod do. Just leave barren land and return it to us. We will do kheti and live life. Ye sab tension to nai rahegi. LIfe would be so cool.
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  • IN fact, if such acquisitions will not happen, you will never see any authorized construction. There will be no planned city. All you will see will be more of lajpat nagar and okhla types congested places to live.
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  • Originally Posted by ashar_amu
    IN fact, if such acquisitions will not happen, you will never see any authorized construction. There will be no planned city. All you will see will be more of lajpat nagar and okhla types congested places to live.


    You will be surprised to know that serves better to the politician to some housing societies.
    In housing societies, you have only finite numbers of legal residents, out of that mostly never take part in morcha/dharna, neither go to vote!!

    On the other side, you have everything grey, faida uthao jaise marji...
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  • ज्यादा मुआवजे पर नोएडा में मंथन शुरू


    इन्वेस्टर्स के हितों और इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर नोएडा एक्सटेंशन में चल रहे समझौते के दौर में मुआवजे की नई दरें और आबादी के मसले आने वाले दिनों में नोएडा अथॉरिटी की सिरदर्दी बन सकते हैं। यहां मुआवजे और आबादी के प्रतिशत पर लगभग सभी 54 गांवों में गुपचुप पंचायतों का दौर चल रहा है। बहलोलपुर गांव में हुई पंचायत में यह साफ संकेत दिया गया है कि आने वाले दिनों में यहां जमीन के अधिग्रहण में अच्छी खासी समस्या पैदा हो सकती है। किसान मुआवजा न लेकर ग्रेटर नोएडा जैसा पैकेज मांग रहे हैं। यही हालात नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे के साथ यमुना किनारे बसे गांवों में भी हैं। 3 महीने का टाइम लेकर शांत हो चुके किसानों की बदलते घटनाक्रम पर निगाहें टिकी हैं। वे अपने हर नफा नुकसान का आकलन करने में लगे हैं।

    गांवों में हो रही मीटिंगों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, नोएडा अथॉरिटी के अलॉटमेंट रेट और किसानों को दिए जा रहे मुआवजे को लेकर गणित भिड़ाया जा रहा है। झुंडपुरा गांव के जोगेंद्र सिंह अवाना कहते हैं कि हिंडन किनारे 2006 में मुलायम सिंह के कार्यकाल में जो स्कीमें आई थीं, उनमें ज्यादातर बिल्डरों को 28 हजार 800 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर पर जमीन का आवंटन किया गया था। तब किसानों को सिर्फ 350 से लेकर 400 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर पर प्रतिकर दिया गया था। अब जब नोएडा एक्सटेंशन में किसानों को 1400 रुपये प्रति वर्गमीटर मुआवजा तय हुआ है तो नोएडा के किसानों के लिए भी इसी अनुपात में मुआवजा बढ़ाने की पहल नोएडा अथॉरिटी को करनी होगी।

    यमुना नदी के किनारे बसे कोंडली, बादौली, झट्टा आदि गांवों में इन दिनों पंचायतें चल रही हैं। यहां के किसान अब अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है। जो जमीन दे चुके हैं, वे मुआवजे के लिए हाई कोर्ट में अपील करने जा रहे हैं। किसान नेता जयवीर सिंह कहते हैं कि नोएडा अथॉरिटी किसानों के साथ भेदभाव कर रही है। पहले सभी खातेदारों और सहखातेदारों को कोटे के प्लॉट मिलते थे। इसके बाद सिर्फ एक खाते में एक किसान का कोटा फिक्स कर दिया गया। इसमें भी पहले 450 मीटर तक के प्लॉट का कोटा था। अब यह घटाकर 200 मीटर का किया जा रहा है। वे कहते हैं कि जब नोएडा अथॉरिटी अपने कर्मचारियों को कोटे के प्लॉट ग्रेटर नोएडा में दे सकती है तो वह नोएडा के किसानों को पांच पर्सेंट जमीन भी नोएडा एक्सटेंशन में दे सकती है।

    मोरना गांव के लीले प्रधान कहते हैं कि 1997 में भी यूपी गवर्नमेंट ने 10 पर्सेंट आबादी की जमीन देने की घोषणा की थी। अफसरों ने इसे पांच पर्सेंट कर दिया। अथॉरिटी ने किसानों से जो वादे किए थे वे पूरे नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि अगर अथॉरिटी किसानों की हितैषी है तो उसे रिक्रूटमेंट सेल और एजुकेशन सेल का गठन तुरंत किया जाए। नोएडा , ग्रेटर नोएडा में इतनी प्रोग्रेस के बावजूद यूपी गवर्नमेंट ने जानबूझकर यहां मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज या पॉलिटेक्नीक इंस्टिट्यूट नहीं खोले। यहां पुनर्वास को लेकर सर्वे रिपोर्ट तैयार करने की मांग उठ रही ह ै।


    -Navbharat times
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  • जारी है धरना और निर्माण कार्य


    सेक्टर-74 में किसानों का धरना सोमवार को भी जारी रहा। कोर्ट के नोटिस के बावजूद बिल्डरों की ओर से काम जारी रखने के मामले में किसानों ने जिला अदालत में अर्जी दाखिल दाखिल की है। धरने की अगुवाई कर रहे सोहरखा गांव के किसान धर्मपाल यादव ने बताया कि बिल्डरों का तुरंत काम बंद करना होगा। साथ ही मांगों के पूरा नहीं होने तक बेमियादी धरना जारी रहेगा। उधर, सेक्टर-74, 75, 76, 78, 119, 120, 121 आदि सेक्टरों में बिल्डरों का निर्माण बगैर किसी बाधा के जारी है।

    धरनारत किसानों के मुताबिक, कोर्ट ने ककराला और सोहरखा गांवों की जमीन पर बिल्डरों का काम रोकने के बाबत नोटिस जारी किया था। बावजूद इसके वहां काम जारी है। धर्मपाल यादव ने बताया कि रविवार को किसान बिल्डरों का काम रुकवाने गए थे जिन्हें पुलिस ने रोक दिया था। इस मामले की शिकायत सोमवार को जिला न्यायालय में की गई है। उन्होंने बताया कि जब तक कोर्ट के आदेश का पूरी तरह से पालन और अन्य मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना जारी रहेगा।

    उधर, सोमवार को भी बिल्डरों के बुकिंग ऑफिस में प्रोजेक्ट की प्रगति का जायजा लेने बड़ी संख्या में निवेशक पहुंचे। दिल्ली से आए अमित रस्तोगी ने सेक्टर-76 में निर्माणाधीन साइट में बुकिंग करा रखी है। उनके मुताबिक, समाचारपत्रों के जरिए काम रोके जाने की सूचना के बाद वह वस्तुस्थिति देखने आए हैं। जारी निर्माण कार्य से वह पूरी तरह संतुष्ट हैं। इंदिरापुरम से आईं सविता वर्मा ने बताया कि काम इसी तेजी से जारी रहा तो मार्च 2012 से पहले काम पूरा होने की उम्मीद है। उधर, साइट पर निर्माण कार्य देख रहे कर्मियों के मुताबिक, अभी तक काम रोकने के बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। साथ ही किसानों की तरफ से काम रोकने की कोशिश नहीं हुई है।


    -Navbharat times
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  • Originally Posted by ondabhai
    You will be surprised to know that serves better to the politician to some housing societies.
    In housing societies, you have only finite numbers of legal residents, out of that mostly never take part in morcha/dharna, neither go to vote!!

    On the other side, you have everything grey, faida uthao jaise marji...


    I totally agree with you. The residence of such areas do take part in all sort of agitations, they do vote and are always ready for morcha sort of things whenever needed.
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  • Abadi land regularization steps taken by Noida Authority
    http://www.noidaauthorityonline.com/Regularization_Residential.pdf
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  • Originally Posted by fritolay_ps
    जारी है धरना और निर्माण कार्य


    सेक्टर-74 में किसानों का धरना सोमवार को भी जारी रहा। कोर्ट के नोटिस के बावजूद बिल्डरों की ओर से काम जारी रखने के मामले में किसानों ने जिला अदालत में अर्जी दाखिल दाखिल की है। धरने की अगुवाई कर रहे सोहरखा गांव के किसान धर्मपाल यादव ने बताया कि बिल्डरों का तुरंत काम बंद करना होगा। साथ ही मांगों के पूरा नहीं होने तक बेमियादी धरना जारी रहेगा। उधर, सेक्टर-74, 75, 76, 78, 119, 120, 121 आदि सेक्टरों में बिल्डरों का निर्माण बगैर किसी बाधा के जारी है।

    धरनारत किसानों के मुताबिक, कोर्ट ने ककराला और सोहरखा गांवों की जमीन पर बिल्डरों का काम रोकने के बाबत नोटिस जारी किया था। बावजूद इसके वहां काम जारी है। धर्मपाल यादव ने बताया कि रविवार को किसान बिल्डरों का काम रुकवाने गए थे जिन्हें पुलिस ने रोक दिया था। इस मामले की शिकायत सोमवार को जिला न्यायालय में की गई है। उन्होंने बताया कि जब तक कोर्ट के आदेश का पूरी तरह से पालन और अन्य मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना जारी रहेगा।

    उधर, सोमवार को भी बिल्डरों के बुकिंग ऑफिस में प्रोजेक्ट की प्रगति का जायजा लेने बड़ी संख्या में निवेशक पहुंचे। दिल्ली से आए अमित रस्तोगी ने सेक्टर-76 में निर्माणाधीन साइट में बुकिंग करा रखी है। उनके मुताबिक, समाचारपत्रों के जरिए काम रोके जाने की सूचना के बाद वह वस्तुस्थिति देखने आए हैं। जारी निर्माण कार्य से वह पूरी तरह संतुष्ट हैं। इंदिरापुरम से आईं सविता वर्मा ने बताया कि काम इसी तेजी से जारी रहा तो मार्च 2012 से पहले काम पूरा होने की उम्मीद है। उधर, साइट पर निर्माण कार्य देख रहे कर्मियों के मुताबिक, अभी तक काम रोकने के बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। साथ ही किसानों की तरफ से काम रोकने की कोशिश नहीं हुई है।


    -Navbharat times


    Can anybody please share on which sectors/projects stay order was issued? I went there on Sunday and work was going on in all the projects.
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