About 4,500 farmers of 11 villages in Noida have refused to accept an agreement inked between the authority and Kisan Sansh Samiti, an umbrella body of farmers, on Saturday.

These villages have decided to move court, seeking their land back.
Houses and various other establishments were constructed on the land acquired from these farmers years ago.


Only 162 hectares of land — carved out of Morna, Nithari and Chhalera villages and today known as City Centre plot in sectors 32 and 25A — is vacant.

The authority sold this plot to a private builder for Rs 7,500 crore in March.

Farmers have demanded this land back too.

These are the farmers whose land was acquired before 1997. The authority started making allotment of developed land plots, measuring 5% of the total land acquired, after 1997.

Before 1997, the authority provided 17.5% reservation to farmers in housing plot schemes.

“Those whose land was acquired before 1997 also sought plots measuring 5% of their land acquired. When the authority did not promise this in the July 30 agreement, they’re upping the ante,” said a senior official.
On Saturday, farmers under the banner of Kisan Sansh Samiti in Noida said they had suspended their agitation for three months and, during this period, they would not stall any real estate projects in the city.

But the trouble is not yet over. “Our land was acquired at Rs 9 per sqm. We were not given any plots under the 17.5% quota,” said Ved Pal, a farmer. “We should also get the 5% developed land plots,” said Kripa Singh, another farmer.

“The City Centre land was acquired 35 years ago using the urgency clause. The land continues to be vacant. We want it back,” he said.
This group of farmers will on Wednesday hold another panchayat at Atta.
Wave Infrastructure, a real estate firm, sealed the City Centre deal with Noida Authority in March.

The Authority sold about 162 hectares (6 lakh sqm) of land comprising two sectors (32 and 25A) to the developer.

-HT
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  • नई नीति से ही नियमित होगी आबादी


    प्राधिकरण नोएडा के गांवों में नई नीति के तहत ही आबादी नियमित करेगा। बुधवार को डीसीईओ एसके सिंह ने किसान संघर्ष समिति के साथ बैठक कर दोबारा इस आश्वासन को दोहराया। समिति पदाधिकारी प्राधिकरण के समक्ष सर्वे के तरीके को लेकर विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे।

    समिति के प्रवक्ता महेश अवाना ने बताया कि गांवों में जो सर्वे किया जा रहा है वह पुराने तरीके पर ही हो रहा है। जिसमें प्रत्येक बालिक परिवार के लिए 450 वर्ग मीटर आबादी छोड़ने का ही प्रावधान है। इसके विपरीत प्राधिकरण ने उन्हें 30 जून तक की आबादी जस की तस नियमित करने का आश्वासन दिया था। सर्वे के तरीके से किसानों में आक्रोश है। इस पर प्राधिकरण ने समिति पदाधिकारियों को बताया कि सर्वे का तरीका चाहे जो भी हो, आबादी नई नीति के तहत ही नियमित होगी। शासन से आबादी व्यवस्थापन नियमावली में संशोधन को मंजूरी मिलते ही इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। तब तक प्राधिकरण पुराने प्रपत्र पर ही यह सर्वे करा रहा है कि किस किसान को कितनी जमीन लीज बैक करनी है। प्राधिकरण के मुताबिक गांव में सर्वे के लिए जा रहे अधिकारियों को भी निर्देशित किया जाएगा कि वह किसानों में किसी तरह का भ्रम पैदा न करें।

    -Dainik Jagran
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  • लीज बैक की लिस्ट मानने से इनकार


    किसान संघर्ष समिति के साथ हुए समझौते के तहत नोएडा अथॉरिटी ने बुधवार शाम पांच गांवों के 1280 किसानों की सूची जारी कर दी। इन किसानों के लिए करीब साढे़ आठ लाख वर्ग मीटर आबादी की जमीन लीज बैक के तहत छोड़ी जाएगी। अथॉरिटी जल्द किसानों को लेटर देगी। किसान संघर्ष समिति ने इस लिस्ट पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि अथॉरिटी ने जो सूची तैयार की है कि वह पुरानी नीति के तहत बनाई गई है।

    नोएडा के लैंड रेकॉर्ड डिपार्टमेंट से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि सोहरखा गांव के 800, बादौली गांव के 62, पर्थला खंजरपुर के 71, सदरपुर के 222 और आगाहपुर के 124 किसानों की सूची जारी कर दी गई है। इन सभी किसानों को आबादी नियमावली के तहत हर वारिसान के परिवार में बालिग को भी प्लॉट की कैटिगरी का पात्र मानते हुए जमीन छोड़ी गई है। अथॉरिटी का प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा किसानों की आबादी के मामले निपटाए जाएं। इस प्रक्रिया के तहत किसानों को अथॉरिटी के खिलाफ केस वापस लेने होंगे। इस सूची को लेकर अथॉरिटी कार्यालय में देर शाम एक मीटिंग हुई। इसमें चेयरमैन बलविंदर कुमार के साथ डिप्टी सीईओ एस . के . सिंह आदि के साथ किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारी दलवीर यादव , महेश अवाना व अन्य पदाधिकारी शामिल हुए।

    किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने सूची पर ऐतराज जताया है। समिति के प्रवक्ता महेश अवाना ने कहा है कि अथॉरिटी ने जो सूची जारी की है वह आबादी नियमावली की पुरानी नीति के तहत तैयार की गई है। समिति ने इस सूची को संशोधन के बाद तैयार आबादी नियमावली के तहत बनाने की डिमांड चेयरमैन बलविंदर कुमार से की है। समिति का दावा है कि चेयरमैन ने आपत्ति पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

    -Navbharat times
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  • नई नीति के तहत होगी आबादी निस्तारित

    नोएडा। पांच गांवों को पांच प्रतिशत के प्लॉट देने के लिए हो रही कार्रवाई के साथ आबादी निस्तारण के मामलों के लिए पुरानी प्रक्रिया अपनाने पर किसान संघर्ष समिति ने विरोध जताया, जिसके बाद सीसीईओ ने साफ कर दिया कि ३१ अगस्त तक पंद्रह गांव का निस्तारण कर लिया जाएगा और सभी को नई नीति के तहत लाभ मिलेगा। जो सर्वे हो रहा है, वह सिर्फ जमीन की पैमाइश के संबंध में है। इसका कोई और औचित्य नहीं है। इसके साथ ही पांच गांव की सूची भी तैयार कर ली गई है, जिसे इस सप्ताह जारी कर दिया जाएगा।
    प्राधिकरण व किसान संघर्ष समिति के बीच हुए समझौते को आगे बढ़ाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसमें सबसे पहले आबादी निस्तारण पर कार्रवाई हो रही है। प्राधिकरण ने पांच गांव की सूची तैयार कर ली है, जिसे जल्द ही सार्वजनिक कर दिया जाएगा। वहीं, किसान संघर्ष समिति ने प्रक्रिया पर संशय जताते हुए सीसीईओ बलविंदर कुमार से मुलाकात की और अपना विरोध जताया। इसके बाद बलविंदर कुमार ने आश्वासन दिया कि ३१ अगस्त तक पंद्रह गांव के मामलों को निस्तारित कर लिया जाएगा और सभी पर नई नीति लागू होगी। ३० जून २०११ तक जो जहां बसा है उसे नियमित करने का प्रस्ताव शासन के पास भेज दिया गया है और जल्द ही इस पर मंजूरी मिल जाएगी। सीसीईओ ने साफ कर दिया कि जो भ्रांतियां हैं उन्हें किसानों के साथ मिलकर निपटा लेंगे। इस संबंध में समिति के प्रवक्ता महेश अवाना और मनोज सिंह चौहान ने बताया कि समझौते के आधार पर होने वाली प्रक्रिया को मंजूर किया जाएगा अगर इसके अलावा को अन्य कार्रवाई हुई तो उसका विरोध होगा।

    -Amar Ujala
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  • Developed plots for Noida farmers soon: Authority

    Noida: The Noida Authority on Wednesday issued a list of 1,161 farmers of five Noida villages who are eligible to get five per cent developed land of the total land that was acquired from them.Soon,the Authority will start transferring the developed land in the farmers names.

    Speaking to TOI,Noida Authority chairman Balwinder Kumar said that a survey was undertaken after the farmers in Noida started an agitation citing that they had not received their share of the developed land that was promised to them after their farmlands were acquired.

    We have also circulated the list of five villages,including Sorkha,Parthla,Khanjarpur,Badoli and Agahpur.Soon,the Authority will allot the land to the beneficiaries, Kumar added.

    The Authority will also settle the abadi regularization issue by the end of this month.In the next phase,the Authority will settle the issues of the rest of the nine villages involved in the dispute.The farmers will be eligible to get five per cent developed plot only after their abadi is regularized.Thats why we are first regularizing the abadi land, Kumar said.
    There are 54 villages in Noida and land of 27 villages was acquired between 1976 and 1997.The farmers whose land was acquired between 1976 and 1997 were kept out of the benefit pool of developed plots.Now,even they have been demanding reopening of all land acquisition cases in entire Noida,ever since the township began.

    If heeded,these demands could cripple Delhis bustling satellite town and create an unprecedented urban upheaval.Day by day the demands of farmers are notching up.Earlier,the farmers had been demanding regularization of abadi land and five per cent developed plots,but now the dispute includes additional compensation and share of transfer charge.
    According to farmer leader Jaiveer Kasana,the Authority had given 40 per cent of the total land acquired to those trusts whose land was acquired before 1976.Farmers are not demanding 40 per cent land,but they are at least eligible to get five per cent of the developed land, Kasana said.
    Increasing land compensation is not in the Authoritys hand.We only have the power to regularize land of Noida farmers and give them five per cent plots in lieu of the total land acquired, Kumar said.

    Meanwhile,on Wednesday,Farmers had held a panchayat in Salarpur village in Dankaur area wherein it was decided that all small samitis would put forth their demands to the government collectively under one common banner.

    Representatives of 50 villages falling under the Noida,Greater Noida and Yamuna Expressway authorities attended the panchayat.The next move of the Samiti will be unveiled in the next panchayat that would be held in Jaganpur on August 28.

    -TOI
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  • Hi Fritolay..Thanks for your posts..To me, your posts are just like a consolidate newspaper which is dedicated only to Noida, N/E and GN RE issues...Thanks Buddy.

    2 Question to everyone:

    1) Is there any hope of this issue getting resolved in 2-3 months for Noida 7x?

    2) What would be the worst case scenario for Noida 7X ?

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  • In Recent update of Noida Ext (Patwari village), approx 1000 settlement ( kararnama) done by Authority and Court would prefer to go with settlement only. SC has also give preference to settlement.

    You can not judge worst case (Not in Noida).
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  • जमीनी मामलों को निपटाने में जुटा प्राधिकरण

    किसानों से हुए समझौते के बाद प्राधिकरण ने जमीन से जुड़े हुए मामलों को निस्तारित करने का काम तेजी से शुरू कर दिया है। इसके लिए दूसरे जिलों से भी कई तहसीलदार बुलाए गए हैं। इसमें पांच अधिकारियों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है, जबकि अभी तक कई नायाब तहसीलदार और तहसीलदार नहीं पहुंचे हैं। इनके खिलाफ प्राधिकरण कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजने की तैयारी कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ ३० तक पंद्रह गांव की आबादी का मामला निस्तारित करने का दावा भी किया जा रहा है।

    प्राधिकरण में लैंड विभाग का काम देख रहे सभी अफसरों को साफ निर्देश जारी कर दिया है कि गांव की आबादी और पांच प्रतिशत प्लॉट के मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ निस्तारित किया जाए। इस आदेश के बाद लैंड विभाग का काम देख रहे उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसके सिंह ने बताया कि इलाहाबाद से अजय कुमार, रायबरेली से राम शंकर, गढ़ से बिजेंद्र कुमार शर्मा, दादरी से पीयूष श्रीवास्तव, और गाजियाबाद से अजय पाल सिंह ने शुक्रवार को कार्यभार ग्रहण कर लिया। इन सभी तहसीलदार और नायाब तहसीलदारों को कार्य विभाजित कर दिया है। गांव के मामलों को समय पर निस्तारित करने के लिए प्रदेश के दूसरे जिलों से और नायाब तहसीलदार और तहसीलदारों को स्थानांतरण नोएडा प्राधिकरण में किया गया है, लेकिन अभी तक कई अफसरों ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। ऐसे में इन सभी के खिलाफ प्राधिकरण कार्रवाई के लिए शासन को लिखित शिकायत भेज रहा है। एसके सिंह ने दावा किया कि महीने के अंत तक १५ गांव के मामलों को निस्तारित करने का कार्य कर लिया जाएगा।

    -Amar Ujala
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  • The same has acknowledged by Mr Balvinder..see Property Plus on Zee Business

    Originally Posted by fritolay_ps
    जमीनी मामलों को निपटाने में जुटा प्राधिकरण

    किसानों से हुए समझौते के बाद प्राधिकरण ने जमीन से जुड़े हुए मामलों को निस्तारित करने का काम तेजी से शुरू कर दिया है। इसके लिए दूसरे जिलों से भी कई तहसीलदार बुलाए गए हैं। इसमें पांच अधिकारियों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है, जबकि अभी तक कई नायाब तहसीलदार और तहसीलदार नहीं पहुंचे हैं। इनके खिलाफ प्राधिकरण कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजने की तैयारी कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ ३० तक पंद्रह गांव की आबादी का मामला निस्तारित करने का दावा भी किया जा रहा है।

    प्राधिकरण में लैंड विभाग का काम देख रहे सभी अफसरों को साफ निर्देश जारी कर दिया है कि गांव की आबादी और पांच प्रतिशत प्लॉट के मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ निस्तारित किया जाए। इस आदेश के बाद लैंड विभाग का काम देख रहे उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसके सिंह ने बताया कि इलाहाबाद से अजय कुमार, रायबरेली से राम शंकर, गढ़ से बिजेंद्र कुमार शर्मा, दादरी से पीयूष श्रीवास्तव, और गाजियाबाद से अजय पाल सिंह ने शुक्रवार को कार्यभार ग्रहण कर लिया। इन सभी तहसीलदार और नायाब तहसीलदारों को कार्य विभाजित कर दिया है। गांव के मामलों को समय पर निस्तारित करने के लिए प्रदेश के दूसरे जिलों से और नायाब तहसीलदार और तहसीलदारों को स्थानांतरण नोएडा प्राधिकरण में किया गया है, लेकिन अभी तक कई अफसरों ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। ऐसे में इन सभी के खिलाफ प्राधिकरण कार्रवाई के लिए शासन को लिखित शिकायत भेज रहा है। एसके सिंह ने दावा किया कि महीने के अंत तक १५ गांव के मामलों को निस्तारित करने का कार्य कर लिया जाएगा।

    -Amar Ujala
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  • आबादी की सार्वजनिक सूचना जारी करे प्राधिकरण

    गांव के किसानों की जो आबादी जहां पर है, उसे उसी रूप में छोड़ने और सभी गांवों की एक साथ सार्वजनिक अधिसूचना जारी करने की मांग की गई। पंचायत में किसानों ने आबादी की जमीन को फ्री होल्ड करने की भी मांग की। यह सुविधा नोएडा के सभी ५४ गांवों को मिलनी चाहिए।

    जनजागरण अभियान के तहत रविवार को ममूरा गांव के बारातघर में एक दर्जन गांव के किसानों की पंचायत हुई। किसानों ने १८ अगस्त की बैठक में प्राधिकरण के सीईओ और किसानों के बीच हुए बातचीत के आधार प्राधिकरण नोएडा के सभी गांवों के किसानों की आबादी की जमीन को जहां है और जैसे है की तर्ज पर छोड़े। इसकी एक सार्वजनिक अधिसूचना सभी गांवों की एक साथ जारी करें। किसानों का कहना है कि प्राधिकरण आबादी की जमीन की लीज कराने की शर्त को खत्म करें। इस जमीन को फ्री होल्ड किया जाना चाहिए। किसान अपने हिसाब से जमीन का उपयोग कर सके। किसानों ने इस जमीन पर व्यवसायिक उपयोग पर प्राधिकरण के अंकुश लगाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जमीन जाने के बाद किसानों के पास रोजी-रोटी का कोई जरिया नहीं है। इसलिए वे इन जमीनों पर व्यवसाय कर अपना जीवन बसर कर रहे हैं। इसमें प्राधिकरण को आपत्ति न करें।

    इसके साथ ही १९७६ से २०११ तक के सभी किसानों को पांच प्रतिशत आवासीय प्लॉट, सभी किसानों को एकसमान मुआवजा, भूमिहीन किसानों को आवासीय भूखंड और किसानों के बच्चों को रोजगार की मांग भी दोहराई। अगली पंचायत २४ अगस्त को बरौला से सटे सेक्टर ४९ के बारातघर में करने का निर्णय लिया गया।

    -Amar Ujala
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  • Cong looking to trip Maya with land law?


    The central land acquisition Act would be binding on all pending projects where compensation has not been notified or where possession of land remains with owners, in what appears a calculated Congress gambit to force higher costs on acquisitions in Uttar Pradesh.

    The revised compensation and R&R package on Mayawati's acquisitions would disturb the poll-bound CM who is against cost escalation for land already acquired.

    A higher compensation for Mayawati's projects would project her as having shortchanged the farmers. The strategy has brought in urgency in UPA to clinch the bill at the earliest so that it kicks in before UP polls in April-May, evident in rural development minister Jairam Ramesh curtailing public consultation process this week and sending the new draft for inter-ministerial consultations. The new bill would apply to all acquisitions where compensation has not been notified under Section 11 of the 1894 Act or where landowners have not given up possession.

    Rahul Gandhi, who is heading the Congress charge in UP, has already identified land acquisition by the state as its key poll campaign with his recent march along Yamuna Expressway and a rally in Aligarh only amplifying the campaign after his protest in Bhatta Parsaul villages in Noida. A confrontation between farmers and authorities would suit the Congress in furthering its agenda among farmers.

    The R&R would now be applicable to private purchase above 50 acres (earlier 100) in urban areas and 100 acres in rural areas. The lowering of limit in urban areas may impose higher costs for housing projects in UP. A land-for-land compensation clause promises to give five times the land acquired from SCs/STs, an olive branch for BSP's core constituency which may not be seen kindly by Mayawati.

    -TOI
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  • ब्याज सहित मुआवजे की मांग


    किसान बचाओ संघर्ष समिति ने बुधवार को सेक्टर 49 स्थित बारात घर में बैठक की। धर्मवीर की अध्यक्ष में हुई बैठक में मांग रखी कि कोर्ट ने जिन किसानों को मुआवजा बढ़ाकर देने का आदेश दिया है, प्राधिकरण उन्हें ब्याज सहित मुआवजा दे। साथ ही किसानों की आबादी बिना शर्त फ्री-होल्ड जस की तस छोड़ी जाए। किसानों पर प्राधिकरण की तरफ से दायर मुकदमे वापस लिए जाएं। किसान के बारिश को प्राधिकरण में नौकरी देने का प्रावधान किया जाए। भूमिहीन किसानों को 120 वर्गमीटर के प्लॉट आवंटित किए जाएं। समिति ने अगली बैठक रसूलपुर नवादा गांव में 27 अगस्त को करने की योजना तैयार की है।


    -Dainik jagran
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  • अथॉरिटी ने शुरू किया कमर्शल लैंड का सर्वे


    अथॉरिटी ने नोएडा की स्थापना के 35 साल बाद गांवों की कमर्शल लैंड पर भी निगाहें तेज कर दी हैं। यहां बनी दुकानों को अथॉरिटी रेग्युलर करेगी। इसके लिए शुक्रवार से सर्वे शुरू हो जाएगा। इसके लिए पुराने गांवों में लेखपालों की टीम लगा दी गई है। नोएडा अथॉरिटी इनके लिए पॉलिसी तैयार करने जा रही है। जिन लोगों ने गांवों की कमर्शल लैंड खरीदी है या किराए पर चल रही है इनके लिए अलग पॉलिसी बनाई जाएगी। यह जानकारी चेयरमैन बलविंदर कुमार ने दी।

    उन्होंने बताया कि हर गांव के सेक्टर के विकास पर डिवेलप करने के उद्देश्य से पुराने गांवों की मार्केटों को रेग्युलर करना जरूरी है। इनमें अट्टा , हरौला , नयाबांस , निठारी , झुंडपुरा , चौड़ा , रघुनाथपुर , आगाहपुर , होशियारपुर , मामूरा , गिझौड व बरौला जैसे गांव शामिल हैं। इनमें कमर्शल लैंड का सर्वे करने के बाद इनका पूरा प्लान व पॉलिसी तैयार हो जाएगी।

    चेयरमैन ने साफ किया कि गांवों में अतिक्रमण पर अथॉरिटी की निगाहें टिक गई हैं। सभी 54 गांवों में टीमें भेजी जाएंगी। हर जमीन का डिजिटल फोटोग्राफी कराई जाएगी। इसके लिए क्षेत्र के जूनियर इंजीनियरों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। 31 अगस्त तक 15 गांवों की सूची लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। अब तक 10 गांवों की सूची लगाई जा चुकी है। इनकी आपत्तियों का निस्तारण अथॉरिटी के लैंड रेकॉर्ड डिपार्टमेंट के अफसर कर रहे हैं।


    -Navbharat times
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  • Authority acts to save builders' projects

    Noida authority, at its board meeting on Thursday, approved of several decisions it made while signing a three-month truce agreement with farmers on July 30. The decisions had been taken to quell farmers' agitations and save real estate projects in the city. The pact depends on the implementation on these decisions and ends on October 30.

    The board meeting said 1,000 plots would be allotted, through a draw of lots, to farmers whose land was acquired before 1997. For farmers in 15 villages, whose land was acquired after 1997, plots measuring 5% of the total land acquired would be allotted by August 30. The rest of villages will get this benefit by October 30.

    Noida chairman Balvinder Kumar said, "The board has approved of the decision that farmers and the authority would withdraw cases from court and compensation, in those cases, would be paid as per court orders."

    -HT
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  • किसानों को भूखंड निर्माण में मिली छूट

    नोएडा। किसानों को मिलने वाले पांच प्रतिशत के भूखंड पर निर्माण की अवधि को दो साल से बढ़ाकर तीन साल करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा तीन और साल की छूट के लिए सशर्त अनुमति देने का प्रावधान भी शामिल कर लिया गया है। वहीं, दूसरी तरफ होशियारपुर के शेष किसानों को भी पांच प्रतिशत का लाभ दिया जाएगा।


    प्राधिकरण की १७४ वीं बोर्ड बैठक में अधिकांश मामले किसानों से संबंधित रहे। इसी श्रृंखला में एक और निर्णय लिया गया,जिसमें पांच प्रतिशत आबादी के प्लॉट पर निर्माण करने की समय सीमा बढ़ा दी गई है। अभी तक पांच प्रतिशत के प्लॉट को बनाने के लिए दो वर्ष का समय दिया जाता है, इसके बाद पेनाल्टी वसूल कर अनुमति दी जाती है। नए नियम के अनुसार अब दो साल की जगह तीन साल तक निर्माण किया जा सकता है। सीसीईओ बलविंदर कुमार ने बताया कि तीन वर्ष गुजरने के बाद भी किसानों को और तीन साल का समय दिया जाएगा, लेकिन इसके लिए आवंटित भूखंड का नक्शा पास करवाने के साथ-साथ चारदीवारी और मेन गेट भी लगवाना होगा। साथ ही सामान्य दर की पेनाल्टी देकर यह समय सीमा बढ़ सकती है।

    बलविंदर कुमार ने बताया कि एक और निर्णय में होशियारपुर गांव के किसानों को लाभान्वित किया गया है। भूमि अर्जन के बाद होशियारपुर के कई किसान पांच प्रतिशत आबादी के लाभ से वंचित रह गए थे, लेकिन बोर्ड ने इनके प्रस्ताव पर मोहर लगने के साथ ही सभी गांव वासियों को पांच प्रतिशत का प्लॉट मिलेगा।

    -amar Ujala
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  • सेक्टर-१५१ में मिलेंगे ७५० किसानों का भूखंड

    नोएडा। प्राधिकरण ने किसानों के साथ हुए समझौते के आधार पर १९७६ से १९९७ के बीच जिन किसानों को भूखंड का लाभ नहीं मिला है उनके लिए एक हजार आवासीय प्लॉट की योजना निकाली है, जिसे १७४ वीं बोर्ड बैठक ने मंजूरी दे दी है। इसमें ७५० किसानों को सेक्टर-१५१ में १६० मीटर के प्लॉट आवंटित किए जाएंगे, जबकि २५० किसानों के लिए अलग-अलग सेक्टर में प्लॉट चिह्नित हुए हैं। यह योजना जल्द ही बाजार में उतार दी जाएगी। सेक्टर-१५१ के प्लॉट का आवंटन १७,८२० रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से होगा।

    प्राधिकरण ने किसानों की मांगों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास शुरू कर दिया है। इसके लिए पिछले महीने जो समझौता हुआ उसमें काफी संख्या में ऐसे किसान हैं, जिनकी जमीन का अधिग्रहण तो किया गया पर उन्हें आवासीय भूखंड का लाभ नहीं मिला। ऐसे किसानों की एक सूची बनाई जा रही है। इसमें पहले चरण में एक हजार किसानों को प्लॉट दिए जाएंगे। इसके लिए सेक्टर-१५१ की जमीन का उपयोग बदल दिया गया है। यहां पर संस्थागत के लिए यह आरक्षित हुआ था, लेकिन बाद में इसे बदल कर किसानों के लिए आवासीय कर दिया गया। प्राधिकरण के चेयरमैन बलविंदर कुमार ने बताया कि सेक्टर-१५१ में १६० मीटर के प्लॉट नियोजित कर दिए गए हैं। इनकी संख्या ७५० है जिनका आवंटन दर १७८२० रुपये होगा, जो प्राधिकरण का सबसे कम दाम है। इसके अलावा अन्य सेक्टरों में जो प्लॉट चिह्नित किए गए हैं उनकी दर सेक्टर के अनुसार होगी। इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। बोर्ड से अनुमति मिलने के साथ ही इसे जल्द ही बाजार में उतारने की तैयारी शुरू कर दी जाएगी। सभी सेक्टरों में प्लॉट खोजने के लिए अवर अभियंता स्तर के अधिकारियों को नियुक्त किया गया था, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

    -Amar Ujala
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