About 4,500 farmers of 11 villages in Noida have refused to accept an agreement inked between the authority and Kisan Sansh Samiti, an umbrella body of farmers, on Saturday.

These villages have decided to move court, seeking their land back.
Houses and various other establishments were constructed on the land acquired from these farmers years ago.


Only 162 hectares of land — carved out of Morna, Nithari and Chhalera villages and today known as City Centre plot in sectors 32 and 25A — is vacant.

The authority sold this plot to a private builder for Rs 7,500 crore in March.

Farmers have demanded this land back too.

These are the farmers whose land was acquired before 1997. The authority started making allotment of developed land plots, measuring 5% of the total land acquired, after 1997.

Before 1997, the authority provided 17.5% reservation to farmers in housing plot schemes.

“Those whose land was acquired before 1997 also sought plots measuring 5% of their land acquired. When the authority did not promise this in the July 30 agreement, they’re upping the ante,” said a senior official.
On Saturday, farmers under the banner of Kisan Sansh Samiti in Noida said they had suspended their agitation for three months and, during this period, they would not stall any real estate projects in the city.

But the trouble is not yet over. “Our land was acquired at Rs 9 per sqm. We were not given any plots under the 17.5% quota,” said Ved Pal, a farmer. “We should also get the 5% developed land plots,” said Kripa Singh, another farmer.

“The City Centre land was acquired 35 years ago using the urgency clause. The land continues to be vacant. We want it back,” he said.
This group of farmers will on Wednesday hold another panchayat at Atta.
Wave Infrastructure, a real estate firm, sealed the City Centre deal with Noida Authority in March.

The Authority sold about 162 hectares (6 lakh sqm) of land comprising two sectors (32 and 25A) to the developer.

-HT
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  • मुकदमों को समाप्त करके बांटेंगे ५७२ करोड़

    नोएडा। प्राधिकरण ने किसानों के साथ चल रहे मुआवजे संबंधी मुकदमों को समाप्त करने की पहल शुरू कर दी है। इसके लिए बकायदा बोर्ड से मंजूरी प्राप्त करते हुए १२०० वादों को निपटाने की कवायद हो रही है। इसमें प्राधिकरण ५७२ करोड़ रुपये मुआवजे के तौर पर बांटेगा। यह सभी मामले १९७६ से १९९७ के बीच हुई जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हुए हैं।

    जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजे को लेकर चल रहे ३० से ३५ साल मुकदमों को सदैव के लिए समाप्त करने का काम शुरू किया गया है। सीसीईओ बलविंदर कुमार ने बताया कि प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र के अंतर्गत अनेक गांव ऐसे हैं जहां मुआवजे को लेकर विवाद चल रहा है। इन गांव को जनपद न्यायालय की तरफ से एक मुआवजे की दर तय की दी गई थी, लेकिन इसके खिलाफ प्राधिकरण उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक गया। सभी मामले १९७६ से १९९७ तक की अवधि के बीच के हैं। इसमें अब प्राधिकरण आगे की लड़ाई नहीं लड़ेगा और जनपद न्यायालय की निर्धारित दर के हिसाब से मुआवजा देगा। बलविंदर कुमार ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में प्राधिकरण पर ५७२ करोड़ रुपये का भार पड़ेगा। बोर्ड से अनुमति मिलने के साथ ही ग्रामीणों की सूची तैयार करके सभी को मुआवजे की राशि प्रदान कर दी जाएगी। इसके लिए प्राधिकरण शपथ पत्र पर समझौता करेगा, जिससे विवाद सदैव के लिए समाप्त हो सकें।

    Amar Ujala
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  • ३१ तक जारी होगी पंद्रह गांवों की सूची

    गांवों के मामलों को निस्तारित करने के लिए प्राधिकरण ने ३१ अगस्त तक पंद्रह गांवों की सूची को जारी करने का दावा किया है। इसके अलावा गांव में कॉमर्शियल क्षेत्र को नियमित करने के लिए एक नई नीति का गठन किया जाएगा, जिसके तहत ग्रामीणों को सुविधा उपलब्ध करवाई जा सके।
    प्राधिकरण के सीसीईओ बलविंदर कुमार ने दावा कि दस गांवों की सूची जारी करके उनकी आपत्तियों पर सुनवाई की जा रही है। वहीं, दूसरी तरफ ३१ अगस्त तक पंद्रह गांव की अंतिम सूची जारी कर देंगे। किसानों के साथ हुए समझौते के आधार पर ही कार्रवाई हो रही है। इसमें अफसर गांव में जाकर किसानों से सीधी वार्ता कर रहे हैं। वहीं, शहर के तमाम गांव ऐसे हैं जहां पर कॉमर्शियल क्षेत्र विकसित हो गया है। ऐसे में गांव के मूल किसानों के लिए नई नीति बनाकर निस्तारण किया जाएगा। इसमें किसानों को विशेष सुविधा मिलेगी। इसके तहत कम शुल्क पर इसका निस्तारण होगा। यह मूल किसान और उनके परिवार के लिए होगा। इस नीति के तहत अट्टा, निठारी, नया बांस, हरौला, झुंडपुरा, चौड़ा, रघुनाथपुर, सादतपुर, आगहपुर सहित कई गांव लाभान्वित होंगे।
    -Amar Ujala
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  • किसानों को नहीं लुभा सकी रेजिडेंशल स्कीम


    किसान बचाओ संघर्ष समिति ने किसानों के लिए घोषित नई आवासीय स्कीम का विरोध किया है। सेक्टर-62 स्थित नवादा गांव में शनिवार को आयोजित पंचायत में किसानों ने कहा कि अथॉरिटी ने आज से 34 साल पहले भूमि अधिग्रहण करते वक्त सिर्फ 3 रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से मुआवजा दिया था। उस वक्त वादा किया था इसी रेट के आसपास किसानों को विकसित सेक्टरों में प्लॉट दिए जाएंगे। इस वादे को निभाने के बजाय अथॉरिटी 34 साल तक किसानों को टरकाती रही।

    किसानों का कहना है कि हाई कोर्ट के डर से अथॉरिटी ने किसानों की आवासीय स्कीम घोषित की तो उसका रेट 17 हजार 500 रुपये प्रति वर्गमीटर रख दिया गया है जिसे चुका पाना किसानों के वश की बात नहीं है। अथॉरिटी का यह कदम किसानों के साथ घोर नाइंसाफी है। समिति से जुड़े रघुराज सिंह ने कहा कि अथॉरिटी को ये प्लॉट या तो 3 रुपये प्रति वर्गमीटर या आज के रेट में सिर्फ डिवेलपमेंट चार्ज लेकर देने चाहिए। जयवीर कसाना ने कहा कि अथॉरिटी ने कालिंदी कुंज में किसानों के साथ हुई बैठक में मूल किसानों की जमीन जहां की तहां छोड़ने की घोषणा की थी, लेकिन उस संबंध में अब तक कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। पंचायत में दधिपाल चौहान ने गांवों में किए जा रहे नोएडा अथॉरिटी के सर्वे कार्य पर आपत्ति जताई। सुदेश यादव, जयकरण एडवोकेट और विमलेश शर्मा ने सांसद सुरेंद्र सिंह नागर और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह से अपील की है कि वे अथॉरिटी को वादों का पालन करने के लिए मनाएं। बैठक के अंत में फैसला किया गया कि अगली पंचायत 2 सितंबर को छिजारसी गांव के बरात घर में आयोजित की जाएगी और जब तक क्षेत्र के किसानों को हक नहीं मिलता, आंदोलन चलता रहेगा।


    -navbharat times
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  • छोटे प्लॉट पर राजी नहीं हैं किसान


    नोएडा। प्राधिकरण ने एक हजार किसानों के लिए आरक्षित आवासीय योजना की घोषणा की। इसमें १६० मीटर के भूखंड का निर्धारण हुआ है। इसके बाद किसान संघर्ष समिति ने योजना का विरोध करना शुरू कर दिया। १२०-४५० मीटर तक के अलग-अलग श्रेणी के प्लॉट की मांग की जा रही है। छोटे प्लॉट पर किसान राजी नहीं हैं और पूरी योजना का विरोध करेंगे।

    किसानों को संतुष्ट करना प्राधिकरण के लिए टेढ़ी खीर साबित होता जा रहा है। समझौते के आधार पर १९७६ से १९९७ के बीच अधिग्रहण की गई जमीनों के किसान जिन्हें आवासीय भूखंड नहीं मिले हैं, उनके लिए आरक्षित योजना बाजार में उतारने का वादा किया। इसके लिए पूरे एक सेक्टर का लैंडयूज बदल कर जमीन की व्यवस्था की गई और १६० मीटर के ७५० प्लॉट निकाले गए। इसके साथ ही किसान संघर्ष समिति ने इसका विरोध शुरू कर दिया। समिति के प्रवक्ता महेश अवाना का कहना है कि प्राधिकरण को १२० से ४५० वर्ग मीटर के श्रेणी के प्लॉट बाजार में उतारने होंगे। १६० मीटर के प्लॉट पर किसान राजी नहीं हैं। यह प्राधिकरण की वादाखिलाफी है और इसका कड़ा विरोध किया जाएगा।

    -Amar Ujala
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  • किसानों को करना पड़ेगा लंबा इंतजार



    नोएडा ।। अथॉरिटी 30 अगस्त तक 15 गांवों की आबादी नियमित कर 5 पर्सेंट जमीन की लिस्ट फाइनल नहीं कर पाएगी। आबादी मामलों पर आपत्ति दर्ज कराने की आखिरी तारीख 28 अगस्त के बाद अथॉरिटी मंगलवार को डीएम के साथ इस मामले पर बैठक करेगी। इसके बाद कितनी जमीन आबादी के नाम बचेगी और उसके सापेक्ष कितनी जमीन किसान कोटे के 5 पर्सेंट जमीन के तहत अलॉट की जाएगी, इसका फैसला होगा।

    यही नहीं आबादी मामले पर तैयार हुई संशोधित नियमावली को अभी शासन से मंजूरी का इंतजार है। शासन से कब तक मंजूरी मिलेगी, इसके बारे में अथॉरिटी अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। उधर, किसानों ने अथॉरिटी पर फिर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। किसानों के मुताबिक, अभी तक शासन से आबादी नियमावली को मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में अथॉरिटी केवल टाइम खींचना चाह रही है। सोहरखा ग्राम प्रधान नरेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनावों की अधिसूचना जारी करने तक अथॉरिटी के अधिकारी किसानों को टालना चाह रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब शहर के सभी गांवों के किसान 5 सितंबर को पंचायत कर बिल्डरों का काम रोकने का निर्णय लेंगे।

    बता दें कि अथॉरिटी चेयरमैन एवं सीईओ बलविंदर कुमार ने 1 अगस्त को महीने भर के भीतर 15 गांवों के किसानों की आबादी की समस्या हल कराकर 5 पर्सेंट जमीन की लिस्ट जारी करने का दावा किया था। अथॉरिटी अधिकारियों के मुताबिक, 30 जून तक निर्माण हो चुकी जमीन को आबादी में दर्ज किया जाएगा लेकिन इसे तय करने की जिम्मेदारी पटवारी और नायब तहसीलदार को सौंपी गई है। अथॉरिटी के डीसीईओ एस. के. सिंह ने बताया कि शासन को नई आबादी नियमावली को मंजूरी के लिए भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही किसानों की आबादी नियमित कर 5 पर्सेंट जमीन की लिस्ट जारी कर दी जाएगी।


    अलग-अलग कमिटी तय करेगी आबादी
    30 अगस्त तक अथॉरिटी जून 2011 तक बने निर्माण का नियमित करने का दावा कर रही है। इसमें कमर्शल रूप से इस्तेमाल की जाने वाली जमीन, प्लानिंग के तहत चिन्ह्ति इलाके और बड़ी आबादी से जुड़े मामले रुटीन सिस्टम के तहत नहीं निपटाए जाएंगे। इन सभी मामलों के लिए अलग-अलग कमिटी बनाई गई है जो मामलों की पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

    उल्लेखनीय है कि अथॉरिटी को 30 अगस्त तक सोहरखा , पर्थला खंजरपुर , बादौली बांगर , सदरपुर , आगाहपुर के अलावा शाहदरा , गुलावली , मोहियापुर , नलगढ़ा , झट्टा , वजीदपुर , शाहपुर और सुल्तानपुर गांवों की आबादी नियमित कर 5 पर्सेंट जमीन की लिस्ट जारी करनी थी।
    -navbharat times
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  • A ray of hope

    somehow i believe (may b b'coz i m an effected buyer) dat if u read in between the lines in the court's order i smell that even after the farmers case being the same as for earlier court verdict of de-notification....the court is taking time and trying to find solution which can b of benefit to all d effected parties.
    Court has asked the authority to submit the details of the progress along with the counter affidavit by authority, builder n buyer. this shows dat court is being lenient and not looking for the same veridict as in earlier cases.
    hope i m smelling right....:bab (4):
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  • आवासीय भूखंड के लिए रखा विकल्प


    नोएडा, : किसान संघर्ष समिति ने आवासीय भूखंड की योजना के लिए प्राधिकरण को एक्सप्रेस-वे किनारे एक जगह बताई है। समिति की मांग है कि प्राधिकरण एक हजार भूखंड की योजना लाने की जगह एक साथ तीन हजार प्लॉट की योजना लाए, जिससे ज्यादा से ज्यादा किसानों का हित हो सके।

    समिति के प्रवक्ता महेश अवाना ने बताया कि सेक्टर 151 में कामबख्शपुर और मोमनाथन के पास काफी जमीन खाली पड़ी है। प्राधिकरण ने इस पर अब तक कोई योजना प्रस्तावित नहीं की है। चेयरमैन व सीईओ बलविंदर कुमार के साथ बैठक कर समिति ने मांग रखी है कि 1976 से 1997 के बीच वाले किसानों के लिए आरक्षित श्रेणी के तहत बड़े प्लॉट की भी योजना लाई जाए। साथ ही उनकी संख्या एक हजार से बढ़ाकर तीन हजार कर दी जाए। साथ ही उन्होंने जेपी की तरफ से किसानों की समस्याओं के निस्तारण के आश्वासन पर असंतोष व्यक्त किया है। इस पर चेयरमैन ने जमीन का भू-उपयोग पता करने और जेपी के अधिकारियों संग बैठक पर समस्याओं के निस्तारण की समीक्षा का निर्देश दिया है।

    -Dainik Jagran
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  • Originally Posted by Dsrivastava
    somehow i believe (may b b'coz i m an effected buyer) dat if u read in between the lines in the court's order i smell that even after the farmers case being the same as for earlier court verdict of de-notification....the court is taking time and trying to find solution which can b of benefit to all d effected parties.
    Court has asked the authority to submit the details of the progress along with the counter affidavit by authority, builder n buyer. this shows dat court is being lenient and not looking for the same veridict as in earlier cases.
    hope i m smelling right....:bab (4):

    Why do people forget that HC, Allahabad is not the final frontier. What ever the decision of the HC in current matters, it would be 100% challenged in the Supreme Court. And all of "us" know the direction in which Supreme Court is now a days delivering the judgements which is in favor of farmers (like it did in Shaberi).

    This is a WAR. Current battle is in Allahabad High Court. But the outcome of the WAR would be decided in the Supreme Court and that would take couple of more quarters i.e. 4-6 months.

    And going by the judgement given by SC in Shaberi case, I am not very hopeful of a positive outcome in favor of builders.

    The projects of NE are sure shot delayed by 1-2 years with a big question mark on the quality of the final delivered product.
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  • On Aajtak news ticker today.. I saw HC cancelled land acqusition of 2 projects in Gaziabad and Mathura and put fine 1 crore on builder.
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  • Originally Posted by sanjeevchaudhri
    Why do people forget that HC, Allahabad is not the final frontier. What ever the decision of the HC in current matters, it would be 100% challenged in the Supreme Court. And all of "us" know the direction in which Supreme Court is now a days delivering the judgements which is in favor of farmers (like it did in Shaberi).

    This is a WAR. Current battle is in Allahabad High Court. But the outcome of the WAR would be decided in the Supreme Court and that would take couple of more quarters i.e. 4-6 months.

    And going by the judgement given by SC in Shaberi case, I am not very hopeful of a positive outcome in favor of builders.

    The projects of NE are sure shot delayed by 1-2 years with a big question mark on the quality of the final delivered product.

    And why is the Noida Authority in a hurry to "buy peace" with the farmers of Noida villages by sellting their long pending abadi disputes and giving then 5% developed plots in lieu of acquired land.

    BECAUSE, they also sense that with the recent judgements of HC and SC in favor of the farmers and against use of URGENCY clause, it is in a tight corner and the land disputes in NOIDA can also go in favor of the farmers.

    NOIDA authority is one of the MOST corrupt authority which did not have any regard for the plight of farmers and now suddenly, they are bending their backs to pacify the farmers.

    Its only for saving their skin and A S S and nothing more.
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  • Originally Posted by ashokyadav
    On Aajtak news ticker today.. I saw HC cancelled land acqusition of 2 projects in Gaziabad and Mathura and put fine 1 crore on builder.


    Bad news for Crossings Republik - Allahbad HC orders dumping ground construction
    डूंडाहेड़ा में डंपिंग ग्राउंड बनने का रास्ता साफ
    31 Aug 2011, 0400 hrs IST

    डूंडाहेड़ा में डंपिंग ग्राउंड बनाने का रास्ता साफ हो गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस सुनील अंबावनी और जस्टिस के. एन. पांडे ने दो बिल्डरों की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने अपील की थी कि डूंडाहेड़ा में डंपिंग ग्राउंड नहीं बनाया जाए। कोर्ट ने इस दौरान प्रोजेक्ट के खर्च में हुई बढ़ोतरी की एवज में दोनों बिल्डरों को एक-एक करोड़ रुपये नगर निगम को देने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा दोनों पर दस-दस लाख रुपये का जुर्माना भी किया गया है। यह राशि एक महीने में देने के लिए कहा गया है।

    इन बिल्डरों के अलावा हाई कोर्ट ने एक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के कर्मचारी अनिल कुमार त्यागी की जनहित याचिका को रद्द कर दिया। त्यागी ने भी डंपिंग ग्राउंड नहीं बनाने की अपील की थी। त्यागी पर एक लाख रुपये का जुर्माना किया गया है।

    दूसरी तरफ, प्रोजेक्ट के लिए पिछले साल गालंद में एक्वायर की गई 34.20 हेक्टेयर जमीन के मालिकों की ओर से दायर एक याचिका कोर्ट ने स्वीकार कर ली है । जीडीए ने पिछले साल प्रोजेक्ट पूरा होने में हो रही देरी के चलते इसकी साइट बदलकर गालंद करने का प्रस्ताव किया था। कोर्ट ने कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट की जमीन अधिग्रहीत करते वक्त जमीन मालिकों को आपत्ति दर्ज करवाने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

    हाई कोर्ट ने कहा है कि बिल्डरों ने कोर्ट को गुमराह किया। उनकी वजह से डंपिंग ग्राउंड बनने का काम पांच साल डिले हो गया। इससे इसके खर्च में बढ़ोतरी हुई है। इसी की भरपाई के तौर पर बिल्डरों को एक-एक करोड़ रुपया देने को कहा गया है। गौरतलब है कि दोनों बिल्डरों ने कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उन्हें इस जगह रेजिडेंशल कॉम्पलेक्स बनाने थे और इसके लिए जीडीए को जानकारी दे दी गई थी।

    नगर निगम के पार्षद राजेंद्र त्यागी ने हाई कोर्ट में प्रार्थनापत्र देकर डूंडाहेड़ा की जमीन के बारे में तथ्य पेश किए थे। उन्होंने कहा था कि यह जमीन जीडीए की नहीं है , नगर निगम की है। इस पर डंपिंग ग्राउंड बनाने के लिए केंद्र सरकार से वर्ष 2004 में 13 करोड़ रुपये मिले थे। नगर निगम 6 करोड़ रुपये बाउंड्री और गेट बनाने पर खर्च कर चुका है।

    राजेंद्र त्यागी के वकील समीर शर्मा ने बताया कि यदि डंपिंग ग्राउंड की कॉस्ट और बढ़ जाएगी , तो बिल्डरों को और अधिक राशि नगर निगम को देनी होगी। गौरतलब है कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण डूंडाहेड़ा की बजाय गालंद गांव में डंपिंग ग्राउंड बनाने की तैयारी कर रहा था। अभी तक यह गांव नगर निगम क्षेत्र के बाहर है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने डूंडाहेड़ा की डंपिंग ग्राउंड वाली जमीन का भू - उपयोग बदल कर आवासीय कर दिया था।

    Navbharat Times - डूंडाहेड़ा में डंपिंग ग्राउंड बनने का रास्ता साफ
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  • देश की सबसे बड़ी कमर्शियल डील हुई रजिस्टर्ड


    सबहेड : 3.67 अरब रुपये में हुई सिटी सेंटर की रजिस्ट्री
    फोटो : 03 एनडीपी 25 व जीएनपी 04
    - नक्शा व डीड सहित कुल 23 पन्ने की हुई रजिस्ट्री
    - दस वर्ष में होना है निर्माण

    नोएडा: देश की सबसे बड़ी कमर्शियल डील शनिवार को रजिस्टर्ड हो गई। सिटी सेंटर के नाम से प्रस्तावित नोएडा-एनसीआर का यह सबसे बड़ा कमर्शियल हब नोएडा के सेक्टर 25ए व 32 में स्थित है। वेब मेगा सिटी सेंटर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने शनिवार को ग्रेटर नोएडा कलेक्ट्रेट स्थित एडीएम फाइनेंस कार्यालय में इसकी रजिस्ट्री करा ली है। इसके लिए कंपनी को कुल 3.67 अरब रुपये का स्टांप शुल्क चुकाना पड़ा है। रजिस्ट्री विभाग के इतिहास में किसी एक डील में मिलने वाला यह रिकार्ड राजस्व है। कंपनी पिछले डेढ़ माह से सिटी सेंटर की रजिस्ट्री की तैयारी कर रही थी।

    रजिस्ट्री के लिए शनिवार शाम करीब साढ़े तीन बजे वेब इंन्फ्रास्ट्रकचर कंपनी की तरफ से महाप्रबंधक रोहित शर्मा सभी दस्तावेज लेकर एडीएम वित्त सर्वजीत राम के कार्यालय पहुंचे। यहां नोएडा प्राधिकरण के वाणिज्यिक प्रबंधक एससी गुप्ता भी मौजूद थे। रजिस्ट्री के कागज नोएडा प्राधिकरण से शुक्रवार शाम ही तैयार करा लिए गए थे। नक्शा व लीज सहित ये दस्तावेज कुल 23 पेज के हैं। प्रक्रिया पहले से पूरी थी लिहाजा पांच मिनट में दोनों अधिकारियों के हस्ताक्षर से रजिस्ट्री कर ली गई। कंपनी अब अगले पांच साल में इसका निर्माण करेगी। जरूरत पड़ने पर प्राधिकरण निर्माण के लिए पांच वर्ष का समय और बढ़ा सकता है। ज्ञात हो कि नोएडा प्राधिकरण ने 11 मार्च 2011 को फाइनेंशियल बिड के तहत वेब इंफ्रास्ट्रकचर प्राइवेट लिमिटेड को सेक्टर 25ए व 32 में सिटी सेंटर के लिए प्रस्तावित 6,14,000 वर्ग मीटर जमीन 1,07,003 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से बेच दी थी। कंपनी ने इसके लिए सबसे ऊंची बिड की थी, जिसकी कुल कीमत 65 अरब 69 करोड़ 98 लाख 42 हजार रुपये थी। परियोजना की तकनीकी बिड 28 फरवरी को खोली गई थी। इसमें वेब इंस्फ्रास्ट्रक्चर सहित दो अन्य कंपनियां अल्ट्रा होम व थ्रीसी भी शामिल थी। फाइनेंशियल बिड में अल्ट्रा होम और थ्रीसी ने वेब इंन्फ्रास्ट्रक्चर से कम कीमत लगाई थी। इस महत्वाकांक्षी योजना में यूपीको कंसल्टेंट एजेंसी है। एनसीआर के इस सबसे बड़े कमर्शियल हब की योजना वर्ष 1986 में बनी थी। निर्माण कंपनी को कुल क्षेत्रफल के 24 फीसदी भाग पर हरित पट्टी विकसित करनी होगी।

    आधे से ज्यादा राजस्व लक्ष्य हुआ पूरा : एडीएम
    एडीएम (वित्त) सर्वजीत राम ने बताया कि इस वर्ष रजिस्ट्री विभाग को 1767 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया था। 367 करोड़ रुपये की इस रजिस्ट्री से अब तक 950 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य प्राप्त कर चुका है। शेष 817 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त करने के लिए विभाग के पास अभी सात माह का समय शेष है। उम्मीद है कि पिछले वित्तीय वर्ष की तरह इस बार भी लक्ष्य से ज्यादा राजस्व हासिल हो सकेगा।

    सिटी सेंटर में होगा एशिया का सबसे बड़ा मॉल : रोहित शर्मा
    वेब इन्फ्रास्ट्रक्चर के महाप्रबंधक रोहित शर्मा ने बताया कि इसी माह पितृ पक्ष से पहले सिटी सेंटर की बैरिकेडिंग कर दी जाएगी। दीपावली से पहले इसका भूमि पूजन होगा। सिटी सेंटर में एशिया का सबसे बड़ा मॉल और अत्याधुनिक मल्टीप्लेक्स बनेगा। इसके साथ ही यहां शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, दुकानें, क्लब, अस्पताल, इंटरटेनमेंट सिटी, बैंक, होटल व रेस्टोरेंट जैसी सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। परियोजना के निर्मित भाग में से 73 फीसदी कमर्शियल और 27 फीसदी रिहायशी होगा।

    100 रुपये के एक स्टांप पेपर पर हुई रजिस्ट्री
    सिटी सेंटर की रजिस्ट्री भले ही 367.57 करोड़ रुपये में हुई हो, लेकिन इसके लिए मात्र 100 रुपये का एक स्टांप पेपर लगाया गया है। शेष रुपये जिला कोषागार में कंपनी ने ड्राफ्ट के जरिए जमा कराए हैं। दरअसल सबसे ज्यादा कीमत का स्टांप पेपर 25000 रुपये का होता है। यदि इस कीमत के लिए भी स्टांप पेपर इस रजिस्ट्री के लिए लगाए जाते तो उनकी संख्या काफी ज्यादा हो जाती। ऐसे मामलों में जिलाधिकारी संबंधित पक्ष से ड्राफ्ट के जरिए कोषागार में सीधे स्टांप शुल्क जमा करा लेता है। इसके एवज में जिलाधिकारी संबंधित पक्ष को 10 (ए) का प्रमाण पत्र जारी करता है। इसे ही रजिस्ट्री के साथ बकाया शुल्क के तौर पर लगाया जाता है। इस मामले में भी यही किया गया है।

    2500 कारों की होगी पार्किंग
    सिटी सेंटर में 2500 कारों की न्यूनतम पार्किंग की व्यवस्था होगी। पार्किंग की व्यवस्था भूमिगत और ऑटोमैटिक होगी। इसमें निर्माणकर्ता कंपनी अपनी तरफ से और बढ़ोत्तरी भी कर सकती है।

    मोनो रेल की होगी सुविधा
    सिटी सेंटर का पूरा हिस्सा दो सेक्टर 32 व 25ए में है। इनके बीच में एक मुख्य मार्ग है, जिस पर एलिवेटेड रोड प्रस्तावित है। निर्माण के बाद इस पूरे क्षेत्र में पैदल घूम पाना संभव नहीं होगा। लिहाजा दोनों सेक्टर को जोड़ने और सिटी सेंटर की प्रमुख जगहों तक पहुंचाने के लिए अंडरपास व मोनो रेल की सुविधा होगी। इसे निर्माणकर्ता कंपनी ही विकसित करेगी।

    मुंबई के सिर था नंबर वन का ताज
    सिटी सेंटर से सबसे बड़ी कमर्शियल डील का ताज मुंबई के सिर पर था। पहले देश की सबसे बड़ी कमर्शियल डील 26 मई 2010 को मुंबई के लोधा समूह के नाम दर्ज थी। इसने बडाला में 25 हजार वर्ग मीटर जमीन के लिए 4053 करोड़ रुपये चुकाए थे। यह सौदा 100 मंजिला आइकॉनिक टावर के लिए किया गया था। 11 मार्च 2011 को उत्तर प्रदेश के जिला गौतमबुद्ध नगर स्थित नोएडा शहर ने नंबर वन की सीढ़ी पर कब्जा जमा लिया।

    नोएडा-ग्रेटर नोएडा की कुछ बड़ी डील
    1. सिटी सेंटर भले ही देश में सबसे बड़ी कमर्शियल डील हो, लेकिन शहर में इससे बड़ी बोलियां भी लग चुकी हैं। मार्च 2008 में भी नोएडा ने बीपीटीपी कंपनी के साथ 95 एकड़ भूमि के लिए तब तक की सबसे बड़ी कमर्शियल डील 5006 करोड़ रुपये में की थी। इसके लिए कंपनी ने 130207 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से बिड की थी, जो सिटी सेंटर की बिड से 23204 रुपये प्रति वर्ग ज्यादा थी। बाद में बीपीटीपी कंपनी ने 12 करोड़ रुपये की भूमि छोड़कर शेष जमीन प्राधिकरण को वापस कर दी थी।

    2. 18 फरवरी 2007 को नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे पर पांच बिल्डरों ने हाउसिंग सोसायटी के लिए 300 एकड़ जमीन खरीदी थी। इसकी कुल कीमत 2550 करोड़ रुपये थी।

    3. 28 मार्च 2011 को लॉजिक्स समूह ने सेक्टर 79 में और जेएस प्राइवेट ने सेक्टर 105 में स्पो‌र्ट्स सिटी का सौदा किया था। इसकी कुल कीमत 1833 करोड़ रुपये थी।

    4. 06 अगस्त 2006 को ग्रेटर नोएडा में बिल्डरों ने मिलकर एकमुश्त 290 एकड़ जमीन खरीदी थी। इसकी कीमत 1640 करोड़ रुपये थी।

    5. 23 मई 2006 को यूनिटेक ने आवासीय टाउनशिप बनाने के लिए नोएडा के सेक्टर 96, 97 व 98 में 340 एकड़ जमीन खरीदी थी। इसके लिए कंपनी ने कुल 1583 करोड़ रुपये चुकाए थे।

    सिटी सेंटर के क्षेत्रफल में हुई वृद्धि
    प्राधिकरण ने सिटी सेंटर के क्षेत्रफल में वृद्धि कर दी है। बिड के समय इसका कुल क्षेत्रफल 6,14,000 वर्ग मीटर था। इसके लिए वेब इंन्फ्रस्ट्रक्चर ने 1,07,003 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से कुल 65 अरब 69 करोड़ 98 लाख 42 हजार रुपये की बिड की थी। बाद में मौके पर सिटी सेंटर की नपाई में इसका कुल क्षेत्रफल 6,18,952.75 वर्ग मीटर निकला। मतलब सिटी सेंटर के आवंटित क्षेत्रफल में 4,952.75 वर्ग मीटर की बढ़ोत्तरी हो गई। बिड की शर्तों के मुताबिक यह जमीन भी प्राधिकरण ने संबंधित कंपनी को सिटी सेंटर के लिए ही दे दी है। इसे प्राधिकरण ने 174वीं बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रख मंजूरी भी दे दी है। कंपनी अब बढ़े क्षेत्रफल के अनुसार कुल 66 अरब 22 करोड़ 98 लाख 01 हजार 108 रुपये का भुगतान प्राधिकरण को करेगी। इसके लिए प्राधिकरण की तरफ से 12 अगस्त 2011 को ही कंपनी को पत्र भेज दिया गया था। लिहाजा शनिवार को कंपनी ने बढ़े क्षेत्रफल की कीमत के अनुसार ही रजिस्ट्री कराई है।

    -Dainik Jagran
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  • सिटी सेंटर की रजिस्ट्री पर उठी आपत्ति


    सिटी सेंटर की डील होने पर बीजेपी ने काफी हंगामा मचाया और रजिस्ट्री होने से पहले तीन गांव के लोग इसके विरोध में खड़े हो गए। निठारी, मोरना और चौड़ा-शादातपुर के बाबूराम, रविन्द्र शर्मा और लीले राम ने इस डील के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर रखी है। इस पर 12 सितंबर को सुनवाई होनी है। लिहाजा इनकी आपत्ति थी कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने की वजह से इसकी रजिस्ट्री अभी रोक दी जाए। इस संबंध में इन्होंने जिलाधिकारी, एडीएम वित्त और संबंधित सब-रजिस्ट्रार को पत्र लिख आपत्ति दर्ज कराई थी। हालांकि शनिवार को होने वाली सिटी सेंटर की रजिस्ट्री पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा

    -Dainik Jagran
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  • Landowners up ante against City Centre deal

    Farmers of several Noida villages — including Chaura Sadatpur, Nithari, Morna and Sudhiyana — who moved the Allahabad high court last month seeking their land back, have opposed the City Centre land deal.

    They have decided to move the court again on Monday against the deal.

    "The government acquired the land in 1976, using the urgency clause, but it has not used the land for any development. We were paid Rs 9 per sqm, but the land has been sold for Rs 1 lakh per sqm," said Ved Pal, a farmer. The writ petition will come up for hearing on September 12.

    The 162 hectares of land —carved out of Morna, Nithari and Chhalera villages — is today known as the City Centre plot in sectors 32 and 25A. "We have not been given developed land plots. Construction was done years ago on the land acquired from us. This is the only vacant land we can reclaim," said Kripa Singh, another farmer.

    Realty major Wave Infrastructure has paid Rs 375 crore as stamp duty for registration of the land known as City Centre plot in Noida. At Rs 6,570 crore, the City Centre deal is one of the biggest private commercial deals in the country.

    The deal was signed with the Noida authority in March.

    Meanwhile, former UP minister and BJP leader Nawab Singh Nagar has demanded a CBI inquiry into the allotment. He has written to the authority for cancellation of the allotment.

    -HT
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  • Originally Posted by StudRawk
    Landowners up ante against City Centre deal

    Farmers of several Noida villages — including Chaura Sadatpur, Nithari, Morna and Sudhiyana — who moved the Allahabad high court last month seeking their land back, have opposed the City Centre land deal.

    They have decided to move the court again on Monday against the deal.

    "The government acquired the land in 1976, using the urgency clause, but it has not used the land for any development. We were paid Rs 9 per sqm, but the land has been sold for Rs 1 lakh per sqm," said Ved Pal, a farmer. The writ petition will come up for hearing on September 12.

    The 162 hectares of land —carved out of Morna, Nithari and Chhalera villages — is today known as the City Centre plot in sectors 32 and 25A. "We have not been given developed land plots. Construction was done years ago on the land acquired from us. This is the only vacant land we can reclaim," said Kripa Singh, another farmer.

    Realty major Wave Infrastructure has paid Rs 375 crore as stamp duty for registration of the land known as City Centre plot in Noida. At Rs 6,570 crore, the City Centre deal is one of the biggest private commercial deals in the country.

    The deal was signed with the Noida authority in March.

    Meanwhile, former UP minister and BJP leader Nawab Singh Nagar has demanded a CBI inquiry into the allotment. He has written to the authority for cancellation of the allotment.

    -HT



    I see this as a 'filling the wallet' exercise by BMW and team

    - GNIA is broke and needs the 500 cr from Noida Authority
    - YEW authority is also doling out more money

    NA is the only one that is not talking of doling out more money and will act as the 'internal bank' for the other two till the time builders and allottees start paying the installments to GNIA and YEW again and they become bankable

    The number of new registrations in Noida region has hit rockbottom in last 2 months and any new source of funds will be chased by team BMW
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