रेजिडेंशल प्रॉपर्टी खरीदने के फैसले के चार प्रमुख पिलर -Economic Times Hindi
22 Nov 2011, 0755 hrs IST, इकनॉमिक टाइम्स
ओम आहूजा सीईओ, रेजिडेंशल सर्विसेस
जोंस लैंग लसाल इंडिया

एक बड़ा तबका मानता है कि जितनी जल्दी हो सके एक मकान खरीद लेना चाहिए। आप जैसे ही घर खरीदने लायक स्थिति में आएं या आपका होम लोन पास हो जाए, यह काम तुरंत कर लेना चाहिए। यहां तक कि घर खरीदते वक्त सिर्फ एक सवाल का जवाब ढूंढा जाता है कि क्या इस वक्त प्रॉपर्टी की कीमतें और ब्याज दरें माकूल स्तर पर हैं? कुछेक मामलों में तो यह नजरिया सही है, मगर घर खरीदने से पहले सिर्फ इतना ही जानना हमेशा भरोसेमंद नहीं कहा जा सकता है।

निवेश के नजरिए से घर खरीदना अक्सर सोना खरीदने और फिर इसे बैंक में रखने जैसा ही है। मगर यह कुछ हद तक ही सही है। रियल एस्टेट में लंबी अवधि के निवेश ने ऐतिहासिक रूप से बेहतरीन रिटर्न दिया है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो आज प्रॉपर्टी खरीदना वित्तीय विवेक को दर्शाना है।

घर खरीदने का मतलब है सुरक्षा। और सुरक्षा किसी भी परिवार और पीढ़ी के लिए अहमियत रखती है। आखिरकार यह लंबी अवधि के कुछ ऐसे निवेश में शामिल है जिसका सदुपयोग भी होता है। इसकी वैल्यू में इजाफे के लिए आप इसे किसी बैंक में नहीं रखते, आप इसमें रहते हैं। मगर, यह हकीकत है कि अच्छा रिटर्न देने के लिए प्रॉपर्टी में निवेश को लंबे वक्त की दरकार होती है और निवेशकों को इस बात को गांठ बांध लेना चाहिए। आज जहां आप प्रॉपर्टी खरीदने जा रहे हैं, भविष्य में उसे बेचने पर आपकी योजनाओं के मुताबिक रिटर्न मिलेगा या नहीं, इसे तौल लें। प्रॉपर्टी में बड़े निवेश से पहले कुछ अहम बातों को ध्यान में रखने की जरूरत है।

जॉब प्रोफाइल

होम लोन देने वाली कर्जदाता कंपनी अपने ग्राहक की नौकरी के बारे में गहराई से क्यों जानना चाहती है? यह पता लगाने के लिए जो कर्ज दिया जा रहा है, उसमें कितना जोखिम है। नौकरियों का कुछ ऐसा वर्ग है, जो ज्यादा स्थायी होने की वजह से कर्मचारियों में आत्मविश्वास पैदा करती हैं। नौकरी में स्थायित्व का स्तर टेक होम सैलरी से नहीं भांपा जा सकता, मगर उसके सेक्टर और उसमें संभावनाओं से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इसलिए, अगर आप होम लोन के लिए आवेदन करते हैं तो सबसे अच्छा यही होगा कि खुद अपना मूल्यांकन करें।

अगर आप जल्दी-जल्दी नौकरी बदलते हैं, अपनी बुरी सेहत से दो-चार होते रहते हैं या बहुत दिनों से नौकरी छोडे़ हुए हैं तो इन परिस्थितियों में बेहतर होगा कि कर्ज के लिए आवेदन देने से पहले अपने करियर प्रोफाइल को ठीक कर लें। यहां तक कि अगर आपका आवेदन स्वीकार कर लिया गया हो तो भी आपको इस बात पर जोर देने की जरूरत है कि कैसे आप आसानी से अपनी किस्तें चुका सकते हैं।

सौदे से जुड़े खर्चे

प्रॉपर्टी खरीदने से जुड़े अन्य खर्चों पर भी निगाह डाल लें। अगर आप रियल एस्टेट ब्रोकर की सेवा ले रहे हैं तो सौदा पक्का होने पर एक तय रकम आपको ब्रोकर को चुकानी होती है। प्रॉपर्टी और रजिस्ट्रेशन टैक्स से जुड़ी कई कानूनी औपचारिकताएं भी होती हैं। आप यह देख लें कि क्या आप इनसे जुड़े मुद्दे सामने आने पर इनसे निपटने में खुद सक्षम हैं?

परिवार

घर खरीदने से पहले अपनी वैवाहिक स्थिति को समझना या यूं कहें कि अपनी शादीशुदा जिंदगी पटरी पर चल रही है या नहीं, इसे तौलना व्यावहारिक रूप से जरूरी है। तनाव में गुजर रही शादीशुदा जिंदगी या जीवनसाथी से दूरियां पनपने की स्थिति में निश्चित रूप से घर खरीदने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार कर लेना चाहिए। आज भारत के समाज में यह सोच बन चुकी है कि जैसे ही आप घर खरीदने का निर्णायक कदम उठाते हैं, शादीशुदा जिंदगी की समस्याएं अपने आप पटरी पर लौटने लगेंगी। हकीकत बिल्कुल अलग होती है। हमें वित्तीय नजरिए से इस मामले को देखना चाहिए।

कई मामलों में पति-पत्नी ज्वाइंट होम लोन लेते हैं। जब शादीशुदा जिंदगी सही चल रही हो, यह विकल्प कई फायदे देता है। अगर ऐसा नहीं हो तो यह भारी गलती साबित हो सकती है। तलाक या अलग-अलग रहने की स्थिति में किस्तों का भुगतान एक बड़ा कानूनी मुद्दा बन सकता है। अगर कोई प्रॉपर्टी संयुक्त रूप से खरीदी जाती है और आगे चलकर पति-पत्नी अलग हो जाते हैं तो मालिकाना हक को लेकर विवाद खड़ा हो जाएगा।

जीवनशैली और जुड़ाव

घर खरीदने से पहले इस बारे में अच्छी तरह सोच लें कि वहां रहने का मतलब अचानक जगह बदलना होगा। स्वदेश लौटने वाले एनआरआई एक बड़ी गलती करते हैं कि पे मनमाने ढंग से घर खरीद लेते हैं, बिना इस बात को समझे कि जहां वे घर खरीद रहे हैं, रहने के लिहाज से वह कई मामलों में असुविधाजनक साबित हो सकता है। हालत यह होती है कि वे पांच साल विदेश में बिता चुके होते हैं और वहां की जीवनशैली और संस्कृति अपना चुके होते हैं। वैसी ही संस्कृति और जीवनशैली भारत में मिलना मुश्किल है।


.
Read more
Reply
6 Replies
Sort by :Filter by :
  • Sometime I feel the great experts here in IREF like Zohaib, MM, Saurabh, LChand, Stupid, Kumarbhai and many more has clear and indepth knowledge of RE than these so called experts.

    I truly feel so .. here is the reasons.

    1. Mixing up RE for own use purpose and investment purpose is a clear cut sign of sheer ignorance.

    2. When you look for your own home, the points to ponder are
    a. Where is your future JOB will be?
    b. Where will be your wife's future job will be?
    c. Where are your relatives stay and what kind of transport they use?
    d. How much you can afford comfortably, both cash and EMI?
    e. With the above 4 constraints, what best size and location that you can afford. Location includes convenience, safety, water, electricity and all.
    f. For many, near by school or hospital is a key deciding factor.

    For investors ... the above are important as ultimately, he has to sell to some end user. However, important factors for an investor are
    a. Future scope
    b. Safety of investment
    c. Finance options, payment terms, exit clause.

    Experts .. thought please
    CommentQuote
  • A buyer in RE should be very clear as to what he wants.....end user or pure investor

    The end user cum investors funda is not in my dictionary

    UNTILL UNLESS

    you are the type who shifts or can shift his residence a lot..buying..selling..buying..selling...etc etc

    End user: TOTALLY "Individuals choice"...."Specific needs"

    Investor: He can be sitting in Delhi and investing in Kanyakumari....no issues...its ONLY the return that counts

    RE is all about simple basics....its not rocket science...nor stock exchange market......Its plain and simple.

    People have made money from it for 1000s of years...and basics have remained the same.

    I gave a classic example sometime back.....and i dont mind repeating it:

    FLASHBACK 2003:

    A End user bought a Flat in ATS Village sector 93.
    Looking at his project today...who can even think that he made a blunder....NO ONE

    But if an Investor...INVESTED in ATS Village in sector 93 in 2003...made very average profits when you compare with returns in Delhi, Gurgoan, Noida plots..and even Ghaziabad Plots....Yes you heard it right....Even Ghaziabad Plots

    Now if a CONFUSED Person (confused between defining his buy as end user based or investor based) had bought in ATS Village in 2003....he will have a REGRET Factor when living in the society....he may always think...."shit...i could have made an extra 1 crore ..had i bought somewhere else"

    You decide who you want to be

    I have repeated a million times.....that in my experience in RE for more than 15 years...i have seen people comparing "profits" and "screwing" their lives....Even their top class property seems wrong to them.......And i can CLEARLY SEE a VERY HIGH % Of First time buyers on this forum going into that mode.

    Mark my words....if you dont change your thinking and attitude....you will not enjoy what you have...EVER !!!!
    CommentQuote
  • Dear AA,
    But u always say think as end user when u invest. That was precisely the reason i bought in Purvanchal Sector 137. Holding is no problem for me. i can hold even for 10 years.
    DPS







    Originally Posted by aam aadmi
    A buyer in RE should be very clear as to what he wants.....end user or pure investor

    The end user cum investors funda is not in my dictionary

    UNTILL UNLESS

    you are the type who shifts or can shift his residence a lot..buying..selling..buying..selling...etc etc

    End user: TOTALLY "Individuals choice"...."Specific needs"

    Investor: He can be sitting in Delhi and investing in Kanyakumari....no issues...its ONLY the return that counts

    RE is all about simple basics....its not rocket science...nor stock exchange market......Its plain and simple.

    People have made money from it for 1000s of years...and basics have remained the same.

    I gave a classic example sometime back.....and i dont mind repeating it:

    FLASHBACK 2003:

    A End user bought a Flat in ATS Village sector 93.
    Looking at his project today...who can even think that he made a blunder....NO ONE

    But if an Investor...INVESTED in ATS Village in sector 93 in 2003...made very average profits when you compare with returns in Delhi, Gurgoan, Noida plots..and even Ghaziabad Plots....Yes you heard it right....Even Ghaziabad Plots

    Now if a CONFUSED Person (confused between defining his buy as end user based or investor based) had bought in ATS Village in 2003....he will have a REGRET Factor when living in the society....he may always think...."shit...i could have made an extra 1 crore ..had i bought somewhere else"

    You decide who you want to be

    I have repeated a million times.....that in my experience in RE for more than 15 years...i have seen people comparing "profits" and "screwing" their lives....Even their top class property seems wrong to them.......And i can CLEARLY SEE a VERY HIGH % Of First time buyers on this forum going into that mode.

    Mark my words....if you dont change your thinking and attitude....you will not enjoy what you have...EVER !!!!
    CommentQuote
  • of course an investor should KEEP IN MIND HOW AN END USER will see the project....as eventually a property has to exchange hands with an end user.

    I was talking about people who get confused between end use and investing.
    CommentQuote
  • Originally Posted by dhirendra66
    Dear AA,
    But u always say think as end user when u invest. That was precisely the reason i bought in Purvanchal Sector 137. Holding is no problem for me. i can hold even for 10 years.
    DPS


    You must thank AA for this decision of yours. Purvanchal is going to be the best property in Sector 137. It will definitely command a premium of at least Rs. 500-Rs. 600 per sq. feet over others when it will be ready for possession.

    I am very keen to buy this property. But the problem is that I don't have themoney. May be later. :D
    CommentQuote
  • Golden words>>>>


    Originally Posted by aam aadmi
    ...... people comparing "profits" and "screwing" their lives....Even their top class property seems wrong to them.......

    Mark my words....if you dont change your thinking and attitude....you will not enjoy what you have...EVER !!!!
    CommentQuote